|
|
|
|||||||
| Story Masala Collection of Most Erotic and Hot Stories to Get you Wild !! |
![]() |
|
|
Thread Tools | Display Modes |
|
#1
|
|||
|
|||
|
नन्दोइजी नहीं लन्दोइजी
“आपकी चूत पर उगी काली लम्बी घनी रेशमी झांटेंदेखी इन्हें काटीयेगा नहीं चूत बे-परदा हो जायेगी ” .... प्रेम गुरु की कलम से मैंने लोगों से सुना था कि किसी लड़की या औरत की खूबसूरती उसके उरोजों (बूब्स) और नितम्बों से जानी जा सकती है. पर गुरूजी तो कुछ और ही फरमाते है. वो कहते है “चूत की सुन्दरता उसकी चौडाई से, गांड की सुन्दरता उसकी गहराई से और लंड की सुन्दरता उसकी लम्बाई से जानी जाती है. एक बार मैंने विशेष प्रवचन में गुरूजी से पूछा था कि चूत तो दो अंगुल की सुन्दर मानी जाती है तो फिर चूत की चौडाई से क्या अभीप्राय है तो गुरूजी ने डांटते हुए कहा था “अरे भोले इसके लिए दोनों अंगुलिओं को आडी नहीं सीधी [portreat] यानी कि लम्बवत देखा जाता है और ये अंगुलियों जैसी जीतनी लम्बी होगी उतनी ही सुन्दर होगी इसी लिए चूत दो अंगुलकी सुन्दर मानी जाती है. मैं जिस चौडाई कि बात कर रहा हूँ वो चूत के नीचे दोनोंजाँघों कि चौडाई की बात है.” गुरूजी की बातें सब के समझ में इतनी जल्दी नहीं आती. खैर अगर ऐसी चूत और गांड की बात की जाए तो मधु से भी ज्यादा सुन्दर तो सुधा है. सुधा मेरी सलहज है. अरे भई मेरी पत्नी मधु के भैय्या की प्यारी पत्नी. वो पंजाब से है ना. उन्होंने रमेश से प्रेम विवाह किया है. उम्र 36 साल रंग गोरा 38-28-36. आप सोच रहे होंगे नितम्बों में 2” की कंजूसी क्यों पूरे 38’ क्यों नहीं ? इसका कारण साफ़ है वो बेचारी गांड मरवाने के लिए तरसती रही है. आप तो जानते हैं गांड मरवाने से नितम्बों का आकार और सुन्दरता बढ़ती है. रमेश का जब से एक्सीडेंट हुआ है और सेक्स की क्षमता (ताकत) कुछ कम हुई है वो बेचारी तो लंड के लिए तरस ही रही थी. वैसे भी रमेश को गांड मारना बिलकुल पसंद नहीं है. गुरूजी कहते है जिस आदमी ने अपनी खूबसूरत पत्नी की गांड नहीं मारी समझो वो जीया ही नहीं. उसका ये जन्म तो व्यर्थ ही गया. ऐसे ही आदमियों के लिए शायद ये गाली बनी हाई ‘साला चूतिया ’ सुधा मुझे नन्दोइजी कहकर बुलाती थी. लगता था जैसे उसके मुंह से लन्दोजी ही निकल रहा हो. पहले तो मैंने ध्यान नहीं दिया पर जब भी मैं अकेला होता तो पता नहीं वो जानबूझ कर ऐसा बोलती थी या उसकी बोली ही ऐसी थी मैंने गौर नहीं किया. एक बारजब मैं और मधु उनके यहाँ गए हुए थे मैंने बातों ही बातों में उसे मज़ाक में कह दिया “भाभी आप मुझे नन्दोइजी मत बुलाया करो ” “क्यों क्या आपको लन्दोइजी कहना अच्छा नहीं लगता ?” उसके चहरे पर कोई ऐसा भाव नहीं था जिस से मैं समझ सकता किकी उसके मन में क्या है. यही तो कुदरत ने इन औरतों को ख़ास अदा दी है. “नहीं ऐसी बात नहीं है. दरअसल मैं आप से छोटा हूँ और आप मुझे जी लगाकर बुलाती है तो मुझे लगता है कि मैं कोई 60साल का बूढा हूँ. ” मैंने हंसते हुए कहा कहा “तो फिर कैसे … किस नाम से बुलाऊं लन्दोइजी ?” “आप मुझे प्रेम ही बुला लिया करो ” “ठीक है प्रेम प्यारे जी ” सुधा ने हंसते हुए कहा. जिस अंदाज में उसने कहा था उस फिकरे का मतलब तो मैं पिछले चार पांच महीनो से सोचता ही रहा था. अब भी कभी कभी मजाक में वो लंदोइजी कह ही देती है पर सबके सामने नहीं अकेले में. बात कोई मेरी शादी के डेढ़ दो साल के बाद की है. इतने दिनों तक तो मैं मधु की चूत पर ही मोर (लट्टू) बना रहा पर जब उसकी चूत का छेद कुछ चौडा हो गया तो मेरा ध्यान उसकी नाजुक कोरी नरम मुकायम गांड पर गया. वो पट्ठी गांड के नाम से ही बिदक गई. उसने अपनी कॉलेज की किसी सहेली से सुना था कि गांड मरवाने में बहुत दर्द होता है और उसकी सहेली की तो पहली ही रात में उसके पति ने इतनी जोर से गांड मारी थी कि वो खून-ओ-खून हो गई थी और डॉक्टर बुलाने की नौबत आ गई थी. अब भला वो मुझसे इतनी जल्दी गांड कैसे मरवाती. मुझे उसे गांड मरवाने के लिए तैयार करने में पूरे 3साल लग गए. खैर ये किस्सा अभी नहीं, बाद में अभी तो सिर्फ सुधा की बात ही करेंगे.(यह किस्सा “मेरी बीवी की दूसरी सुहागरात”में पढ़ सकते हैं) कहते है जहां चाह वहाँ राह. लंड और पानी अपना रास्ता खुद बना लेते है. मधु को पहली डिलिवरी होने वाली थी. कभी भी हॉस्पिटल ले जाना पड़ सकता था. डॉक्टर्स ने चुदाई के लिए मना कर दिया था और वो गांड तो वैसे भी नहीं मारने देती थी. घर पर देखभाल के लिए सुधा (मेरी सलहज) आई हुई थी. अक्टूबर का महीना चल रहा था. गुलाबी ठण्ड शुरू हो चुकी थी और मैं अपने लंड को हाथ में लिए मुठ मारने को मजबूर था. हमारे घर में गेस्ट रूम के साथ लगता एक कोमन बाथरूम है. एक दिन जब मैं उस बाथरूम में मुठ मार रहा था तो मैं जोर जोर से सीत्कार कर रहा था. ‘हाईई… शहद रानीई… तुम ही अपनी चूत दे दो क्या आचार डालोगी हाईई … चूत नहीं तो गांड ही दे दो …’ अचानक मुझे लगाकिकोई कि होल से देख रहा है. मैं झड़ तो गया पर मैंने सोचा कौन हो सकता है. मधु तो अपने कमरे में है फिर ….. नौकरानी है या कहीं मेरी शहद रानी (सुधा) तो नहीं थी. सुधा शहद की तरह मीठी है मैं उसे शहद रानी ही कह कर बुलाता हूँ. जब मैं बाहर निकला तो सुधा तो मधु के पास बैठी गप्प लगा रही थी. नौकरानी अभी नहीं आई थी. मैं समझ गया ये जरूर सुधा ही थी. जैसेकिआप तो जानते ही हैंकिमैं एक नंबर का चुद्दकड़ हूँ पर मेरी पत्नी और ससुराल वालो के सामने मेरी छवि एकदम पत्नी भक्त और शरीफ आदमी की है. मधु तो मुझे निरा मिट्ठू ही समझती है. हे भगवान् सुधा ने क्या समझा होगा. उसके बाद तो दिन भर मैं उससे नजरें ही नहीं मिला सका. संयोग से दो तीन दिनों बाद ही करवा-चोथ का व्रत था. मधु की हालत ऐसी नहीं थी कि वो व्रत रख सकती थी. मैंने उसकी जगह व्रत रख लिया. सुधा का भी व्रत था. इस व्रत में दिन भर भूखा रहना पड़ता है. चाँद को देखकर ही अपना व्रत तोड़ते हैं. आपकी जानकारी के लिए बता दूँ उत्तरीभारत में इस व्रत का बड़ा महत्व है. ख़ासकर राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में तो औरतें दिन में पानी तक नहीं पीती. मेरा दोस्त गोटी (गुरमीत सिंह) बताता है कि उसकी पत्नी तो बिना लंड चूसे और चूत चुसवाये अपना व्रत तोड़ती ही नहीं है. ऐसी मान्यता है कि करवा का व्रत रखने से और लंड का पानी पीने से पहला बच्चा लड़का ही पैदा होता है. पता नहीं कहाँ तक सच है पर जिस हिसाब से पंजाब औरहरियाणा में लडके ज्यादा पैदा होते है इस बात में दम जरूर नजर आता है. अगले प्रवचन में गुरूजी से ये बात जरूर पूछूँगा. एक खास बात तो बताना ही भूल गया. मधु भले ही उन दिनों गांड न मारने देती हो पर लंड चूसने में कोई कोताही नहीं कराती थी. और मेरा वीर्य तो जैसे उसके लिए अमृत है. वो कहती है कि पति का वीर्य पीने से उनकी उम्र बढती है और उसे शहद के साथ चाटने या पीने से आँखों की ज्योति बढाती है. वैसे तो ये गोली भी उसे मैंने ही पिलाई थी. पर इसी लिए तो मैं उसका मिट्ठू बना हुआ हूँ. करवाचोथ की रात चाँद देखने के बाद वो मेरा लंड चूसती है और पूरा पानी पीकर ही अपना व्रत तोड़ती है. मैं अपना व्रत उसका मधु रस (चूत रस) पीकर तोड़ता हूँ. पर मैं आज सोच रहा था कि आज तो मुझे सादा पानी पीकर और मधु को दवाई लेकर ही अपने व्रत तोड़ने पड़ेंगे. ये कार्तिक माह का चाँद भी साला (बच्चो का मामा मेरा साला ही तो हुआ ना) रात को देर से ही उगता है बेचारी औरतों को सताने में पता नहीं इसको क्या मजा आता है. यार कम से कम हम जैसों के लिए तो पहले उग जाया करो. खैर कोई रात के 9.30 या 10 बजे के आपपास मैं छत पर चाँद देखने गया. पूर्व दिशा में चाँद ने अपनी लाली कब कीबिखेरनी शुरू कर दी थी नीचे पेड़ पोधों और मकानों के कारण पता ही नहीं लगा. मैं जल्दी से सीढियों से नीचे आया. मधु तो ऊपर जा नहीं सकती थी सुधा ने एक थाली में कुछ फूल, रोली, करवा (मिटटी का बना छोटा सा लोटा), चावल, शहद,गुड़, मिठाई आदि रख कर मेरे साथ ऊपर आ गई. हमारे घरकी छत पर एक छोटा सा स्टोर बना है उसके पीछे जाकर चाँद देखा जा सकता था. हम दोनों उसके पीछे चले गए. अगर कोई सीढियों से आ भी जाए तो कुछ दिखाई नहीं पड़ता. सुधा ने छलनी के अन्दर से चाँद को देखकर उसे करवे से पानी अर्पित किया और फिर खड़ी खड़ी अपनी जगह पर दो बार घूम गई. इस दौरान उसका पैर थोडा सा डगमगाया और उसके नितम्ब मेरे पाजामे में खड़े 7” के लंड से टकरा गए. मैंने अन्दर चड्डी नहीं पहनी थी. उसने एक बार मेरी ओर देखा पर बोली कुछ नहीं. उसने चाँद के आगे अपनी मन्नत मांगनी शुरू की : “हे चाँद देवता मेरे पति की उम्र लम्बी हो उनका स्वास्थ्य ठीक रहे.... ” फिर थोडी धीमी आवाज में आगे बोली “और उनका वो सदा खडा और रस से भरा रहे ” ‘वो’ का नाम सुनकर मैं चोंका. मैंने जानता था ‘वो’ क्या होता है पर मैंने सुधा से पूछ ही लिया “भाभी ‘वो’ क्या हुआ ?” “धत् …” वो इतना जोर से शरमाई जैसे 16साल की नव विवाहिता हो. “प्लीज बताओ ना भाभी ‘वो’ क्या ?” “नहीं मुझे शर्म आती है ” “प्लीज भाभी बताओ ना ” “क्या मधु ने नहीं बताया ?” “नहीं तो” मैं साफ़ झूठ बोल गया. “इतने भोले तो आप और मधु नहीं लगते ?” “सच भाभी वो.. तो वो तो … मेरा मतलब है …” मेरा तो गला ही सुखने लगा और मेरा लंड तो पहले से ही 120 डिग्री पर खडा था पत्थर की तरह कड़ा हो गया. “मैं सब जानती हूँ मेरे लन्दोइजी … मुझे इतनी भोली भी मत समझो” और उसने मेरे खड़े लंड पर एक प्यारी सी चपत लगा दी. “हाय राम ये तो बड़ा दुष्ट है ” वो हंसते हुए बोली अब बाकी क्या बचा रह गया था. मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया. वो भी मुझ से लिपट गई. मैंने अपने जलते हुए होंठ उसके होंठों पर रख दिए. उफ्फ्फ …. गुलाब की पंखुडियों जैसे नरम मुलायम होंठ. पता नहीं में कितनी देर उनका रस चूसता रहा. सुधा ने पजामे के ऊपर से ही मेरा लंड पकड़ रखा था और धीरे धीरे सहला रही थी. मैंने भी एक हाथ से उसकी साडी के ऊपर से ही उसकी चूत सहलानी शुरू कर दी शायद उसने भी पेंटी नहीं पहनी थी. उसकी झांटों को मैं अच्छी तरह महसूस कर रहा था. कोई 5 मिनट के बाद एक झटके के साथ वो अपने घुटनों के बल बैठ गई और मेरे पजामे का नाडा खोल कर मेरे पुप्पू को बाहर निकाल लिया. मेरा लंड तो पिछले 2 महीनो से प्यासा था. उसने बिना कोई देरी किये मेरा लंड एक ही झटके में अपने मुंह में ऐसे ले लिया जैसे कोई बिल्ली किसी मुर्गे की गर्दन पकड़ लेती है. मैं उसका सिर सहला रहा था. पता नहीं वो दिन भर की प्यासी थी या कई बरसों की. उसकी चूसने की लज्जत से मैं तो निहाल ही हो गया. क्या कमाल का लंड चूसती है. हालांकि मधु को मैंने लंड चूसने की पूरी ट्रेनिंग दी है पर सुधा जिस तरीके से मेरा लंड चूस रही थी मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि अगर लंड चुसाई का कोई मुकाबला करवा लिया जाए तो सुधा अब्बल नंबर आएगी. वो कभी मेरे लंड को पूरा मुंह में ले लेती कभी बाहर निकाल कर चाटती कभी सुपाडे को ही मुंह में लेकर चूसती कभी उसपर अपने दांत से हौले से काट लेती. एक दो बार उसने मेरे दोनों चीकुओं (अण्डों) को भी मुंह में लेकर चूसा. मैं तो बस आह्ह … ओईई …. ओह्ह … या …. ही करता जा रहा था. कोई 7-8 मिनट हो गए थे. मैंने उसका सिर पकड़ रखा था और उसका मुंह ऐसे चोद रहा था जैसे वो कोई चूत ही हो. वो तो मस्त हुई जोर जोर से चूसे जा रही थी. अब मुझे लगाने लगा कि मैं झड़ने के करीब हूँ तो मैंने उसे इशारा किया मैं जाने वाला हूँ तोउसनेभी इशारे से कहा “कोई बात नहीं ” मैंने उसका सिर जोर से पकड़ लिया और अपने लंड को उसके मुंह में आगे पीछे करने लगा जैसे उसका मुंह न होकर चूत या गांड हो. और फिर एक दो तीन चार पांच ….. कितनी हीपिचकारियाँ मेरे लंड ने दनादन छोड़ दी. सुधा तो जैसे निहाल ही हो गयी उस अमृत को पी कर. उसका व्रत टूट गया था. उसने एक चटखारा लेकर कहा “वह मजा आ गया मेरे लन्दोइजी” “आपका व्रत तो टूट गया पर मेरा कैसे टूटेगा ?” “नहीं... अभी नहीं … बाद में…” पर मैं कहाँ मानने वाला था. मैंने एक झटके में उसकी साडी और पेटीकोट ऊपर कर दिया. वाह …. चाँद की दुधिया रोशनी में उसकी काले काले घुंघराले झांटों के झुरमुट से ढकी मखमली चूत देखने लायक थी. हालांकि उसकी चूत पर बहुत सारे झांट थे लम्बे लम्बे पर उसमे छुपी हुई मोटे मोटे होंठों वाली चूत साफ़ देखी जा सकती थी. जैसे किसी गुलदस्ते में सजा हुआ एक खिला गुलाब का फूल हो एकदम सुर्ख लाल. उसकी चूत पर उगे लम्बे लम्बे झांट देख कर मुझे पाकीज़ा फिल्म का वो डाईलोग याद आ गया : “आपकी चूत पर उगी काली लम्बी घनी रेशमी झांटें देखी इन्हें काटीयेगा नहीं चूत बे-परदा हो जायेगी ” मैंने तड से एक चुम्बन उसपर ले लिया और उसके होंठ अपने मुंह में लेकर चूमने लगा. अन्दर वाले होंठ तितली के पंखों की तरह कोई दो ढाई इंच लम्बे तो जरूर होंगे. तोते की चोंच की तरह बने बीच के होंठ बहुत बड़ी चुद्दकड़ औरतों के होते है. मुझे लगा सुधा भी एक नंबर की चुद्दकड़ है. साले रमेश (मेरा साला) ने उसे ढंग से चोदा हो या नहीं पर चूत की फांकों को कमाल का चूसा होगा तभी तो इतनी बड़ी हो गई हैं. “बस अब चलो बाकी बाद में नहीं तो मधु तुम्हारी जान निकाल देगी मेरे प्यारे नन्दोइजी अ…अरे नहीं लन्दोइजी …” उसने हंसते हुए कहा. मैं मन मार कर प्यासा ही बिना व्रत तोडे नीचे आ गया. नीचे मधु मेरा इंतजार ही कर रही थी. सुधा रसोई में खाना लेनेचली गई थी. जानबूझकर हमें अकेला छोड़ कर. मैं किसी प्यासे भंवरे की तरह मधु से लिपट गया. मुझे पता था वो मुझे चूत तो हरगिज नहीं चूसने देगी. और इस हालत में मेरा लंड वो कैसे चूसती. उसने एक चुम्बन पजामे के ऊपर से जरूर ले लिया. मुझे तो डर लगने लगा कि ऐसी हालत में तो मेरा लंड कुतुबमीनार बन जाता है आज खडा नहीं हुआ कहीं मधु को कोई शक तो नहीं हो जाएगा. पर वो कुछ नहीं बोली केवल मन ही मन चाँद देवता से मन्नत मांग रही थी “मेरे पति की उम्र लम्बी हो. उनका स्वास्थ्यठीक रहे और उनका ‘वो ’ सदा खडा और रस से भरा रहे” मैं मुस्कुराए बिना नहीं रह सका मैंने उसके गालों पर एक चुम्बन ले लिया और उसने भी हौले से मुझे चूम लिया. फिर मैंने कर्वे के पानी में शहद मिलाया और एक घूँट पानी उसे पिलाया और बाकी का मैं पी गया. उसका व्रत टूट गया मेरा तो पहले ही टूट चूका था. दुसरे दिन मधु को हॉस्पिटल भरती करवाना पड़ ही गया. हॉस्पिटल में पहले से ही सारी बात कर रखी थी. डॉक्टर ने बताया कि आज रात में डिलिवरी हो सकती है. जब मैंने रात में उसके पास रहने की बात कही तो डॉक्टर ने बताया कि रात में किसी के यहाँ रुकने और सोने की कोई जरुरत नहीं है आप चिंता नहीं करें. रात में इनके पास दो नर्सें सारी रात रहेंगी. कोई जरुरत हुई तो हम देख लेंगे. अन्दर से मैं भी तो यही चाहता था. मैं और सुधा दोनों कार से घर वापस आ गए. जब हम घर पहुंचे तो रात के कोई 11.00 बज चुके थे. रास्ते में सिवा एक चुम्बन के उसने कुछ नहीं करने दिया. इन औरतों को पता नहीं मर्दों को सताने में क्या मजा आता है. बेड रूम के बाहर तो साली पुट्ठे पर हाथ ही नहीं धरने देती. खाना हमने एक होटल में ही खा लिया था वैसे भी इस खाने में हमें कोई ज्यादा दिलचस्पी नहीं थी. हम तो असली खाना खाने के लिए बेकरार थे. आग दोनों तरफ लगी थी ना. घर पहुंचाते ही सुधा बाथरूम में घुस गई और मैं बेडरूम में बैठा उसका इंतजार कर रहा था. मैंने अपना पजामा खोल कर नीचे सरका दिया था अपना 7” का लंड हाथ में पकडे बैठा उसे समझा रहा था.कोई आधे पोन घंटे के बाद एक झीनी सी नाइटी पहने सुधा बाथरूम से निकली. जैसे कोई मोडल रैंप पर कैट वाक करती है. कुल्हे मटकती हुए वो मेरे सामने कड़ी हो गई.उफ़ … क्या क़यामत का बदन था गूरा रंग गीले बाल थरथराते हुए होंठ. मोटे मोटे बूब्स पतली सी कमर और मोटे मोटे गोल नितम्ब. बिलकुल तनुश्री दत्ता जैसे. काली झीनी सी नाइटी में झांकती मखमली जाँघों के बीच फसी उसकी चूतदेख कर मैं तो मंत्रमुग्ध सा उसे देखता ही रह गया. मेरे तो होश-ओ-हवास ही जैसे गुम हो गए. “कहाँ खो गए मेरे लन्दोइजी” मैंने एक ही झटके में उसे बाहों में भरकर बेड पर पटक दिया और तडा तड एक साथ कई चुम्बन उसके होंठों और गालों पर ले लिए. वो नीचे पड़ी मेरे होंठों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी. मैंने नाइटी के ऊपर से ही उसकी चूत के ऊपर हाथ फिराने लगा. “ओह.. प्रेम थोडा ठहरो अपने कपडे तो उतार लो ” सुधा बोली “आँ हाँ ” मैंने अपनी टांगो में फसे पजामे को दूर फेंक कर कुरता और बनियान भी उतार दी. और सुधा की नाइटी भी एक ही झटके में निकाल बाहर की. अब बेड पर हम दोनों मादरजात नंगे थे. उसका गोरा बदन ट्यूब लाइट की रोशनी में चमक रहा था. मैंने देखा उसकी चूत पर झांटों का नाम-ओ-निशाँ भी नहीं था. अब मैं समझा उसको बाथरूम में इतनी देर क्यों लगी थी. साली झांट काट कर पूरी तैयारी के साथ आई है. झांट काटने के बाद उसकी चूत तो एक दम गोरी चट्ट लग रही थी. हाँ उसकी दरार जरूर काली थी. ज्यादा चूत मरवाने या फिर ज्यादा चुसवाने से ऐसा होता है. और सुधा तो इन दोनों ही बातों में माहिर लगती थी. ऐसी औरतों की चुदाई से पहले चूत या लंड चुसवाने की कोई जरुरत नहीं होती सीधी किल्ली ठोक देनी चाहिए. मेरा भी पिछले दो महीने से लंड किसी चूत या गांड के लिए तरस रहा था. और जैसा कि मुझे बाद में सुधा ने ही बताया था कि जयपुर से यहाँ आते समय रात को सिर्फएक बार ही रमेश ने उसे चोदा था और वो भी बस कोई 4-5 मिनट.वो तो जैसे लंड के लिए तरस ही रही थी. ऐसी हालत में कौन चूमा चाटी में टाइम बर्बाद करना चाहेगा. मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर रख कर एक जोर का झटका मारा. गच्च की आवाज के साथ मेरा अध लंड उसकी नरम मक्खन सी चूत में घुस गया. दो तीन धक्कों में ही मेरा पूरा लंड जड़ तक उसकी चूत में समां गया. पूरा लंड अन्दर जाते ही उसने भी नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए जैसे वो भी सदियों की प्यासी हो. चूत कोई ज्यादा टाइट नहीं लग रही थी पर जिस अंदाज में वो अपनी चूत को अन्दर से भींच कर संकोचन कर रही थी मेरा लंड तो निहाल होता जा रहा था , सुधा (शहद ) के नाम की तरह उसकी चूत भी बिलकुल शहद की कटोरी ही तो थी. सुधा ने अब मेरी कमर के दोनों ओर अपनी टाँगे कस कर लपेट ली. मैं जोर जोर से धक्के लगाने लगा. कोई 10 मिनिट की धमाकेदार चुदाई के बाद मैंने महसूस किया कि उसकी चूत तो बहुत गीली हो गई है और लंड बहुत ही आराम से अन्दर बाहर हो रहा था. फच फच की आवाज आने लगी थी. उसे भी शायद इस बात का अंदाजा था. मैंने कहा भाभी क्या आपने कभी डॉग-कैट (कुत्ता-बिल्ली) आसन में चुदवाया है. तो उसने हैरानी से मेरी ओर देखा. मैंने कहा चलो इसका मजा लेते है. आप भी सोच रहे होंगे ये भला कौन सा आसन है. इस आसन में प्रेमिका को पलंग के एक छोर पर घुटनों के बल बैठाया जाता है एडियों के ऊपर नितम्ब रखकर. पंजे बेड के किनारे के थोड़े बाहर होते हैं. फिर एक तकिया उसकी गोद में रख कर उसका मुंह घुटनों की ओर नीचे किया जाता है. इस से उसका पेट दब जाता है जिस के कारण पीछे से चूत का मुंह तो खुल जाता है पर अन्दर से टाइट हो जाती है. प्रेमी पीछे फर्श पर खडा होकर कर अपना लंड चूत में दाल कर कमर पकड़ कर धक्का लगता है. यह आसन उन औरतों के लिए बहुत ही अच्छा होता है है जिनकी चूत फुद्दी बन चुकी हो. इस आसन की एक ही कमी है कि आदमी का पानी जल्दी निकल जाता है. मोटी गांड वाली औरतों के लिए ये आसन बहुत बढ़िया है. इस आसन में गांड मरवा कर तो वे मस्त ही हो जाती हैं. गांड मरवाते समय वो हिल नहीं सकती. वो मेरे बताये अनुसार हो गई और मैंने अपने लंड पट थूक लगाया और पीछे आकर उसकी चूत में अपना लंड डालने लगा. अब तो चूत कमाल की टाइट हो गई थी. मैंने उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए. सुधा के लिए तो नया तजुर्बा था. वो तो मस्त होकर अपने नितम्ब जोर जोर से ऊपर नीचे करने लगी. उसके फूटबाल जैसे नितम्ब मेरे धक्को से जोर जोर से हिलाने लगे. उसकी गांड का छेड़ अब साफ़ दिख रहा था. कभी बंद होता कभी खुलता. मैंने अपनी अंगूठे पर थूक लगाया और गच्च से उसकी गांड में ठोक दिया. वो जोर से चिल्लाई “उईई माँ आ … ऑफ प्रेम क्या कर रहे हो. ओह … अभी नहीं अभी तो मुझे चूत में ही मजा आ रहा है. ” मैंने अपना अंगूठा बाहर निकाल लिया और उसके नितम्ब पर एक जोर की थपकी लगाई. उसके मुंह से अईई निकल गया और उसने भी अपने नितम्बों से पीछे धक्का लगाया. फिर मैंने उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगाने शुरू कर दिए. 5मिनट में ही वो झड़ गई. अब मैंने उसे फिर चित लिटा दिया और उसके नितम्बों के नीचे 2तकिये लगा दिए. उसने भी अपनी टाँगे उठा कर घुटनों को छाती से लगा लिया. अब उसकी चूत तो ऐसे लग रही थी जैसे उसकी दो अंगुलियाँ आपस में जुडी हों. अब मुझे गुरूजी की बात समझ लगी कि चूत दो अंगुल की क्यों कही जाती है. बीच की दरार तो एकदम बंद सी हो गई थी. चूत अब टाइट हो गई थी. मैंने अपना लंड फिर उसकी चूत में ठोकदिया और उसकी मोटी मोटी जांघें पकड़ कर धक्के लगाने चालु कर दिए. 5-7 मिनट की चुदाई के बाद उसने जब अपने पैर नीचे किये तो मेरा ध्यान उसके होंठों पर गया. उसके ऊपर वाले होंठ पर दायीं तरफ एक तिल बना हुआ था. ऐसी औरतें बहुत ही कामुक होती है और उन्हें गांड मरवाने का भी बड़ा शौक होता है. मैंने उसके होंठ अपने मुंह में ले लिए और चुसना शुरू कर दिया. वो ओह … आह्ह.. उईई कर रही थी. मैं एक हाथ से उसके गोल गोल संतारून को मसल रहा था और दूसरे हाथ की एक अंगुली से उसकी मस्त गांड का छेड़ टटोल रहा था. अचानक मेरी अंगुली से उसका छोटा सा नरम गीले छेड़ टकराया तो मैंने अपनी अंगुली की पोर उसकी गांड में डाल दी. उसने एक जोर की सीत्कार ली और मुझे अपनी बाहों में जकड लिया. शायद उसका पानी फिर निकल गया था. अब उसकी चूत से फ़च्छ फ़च्छ की आवाज आनी शुरू हो गई थी. “ओईई माँ … मैं तो गई ….” कह कर वो निढाल सी पड़ गई और आँखें बंद कर के सुस्त पड़ गई. |
|
#2
|
|||
|
|||
|
अब मेरा ध्यान उसके मोटे मोटे उरोजों पर गया. कंधारी अनारजैसे मोटे मोटे दो रसकूप मेरे सामने तनेखड़े थे. उसका एरोला कोई 2इंच तो जरूर होगा. चमन के अंगूरों जैसे छोटे छोटे निप्पल्स तो सिंदूरी रंग के गज़ब ही ढ़ा रहे थे. मैंने एक अंगूर मुंह में ले लिया और चूसने लगा. वो फिर सीत्कार करने लगी. उसकी चूत ने एक बार फिर संकोचन किया तो मैंने भी एक जोरदार धक्का लगा दिया. ओईई माँ आ ….. उसके मुंह से निकल पड़ा.
“आह्ह ….. और जोर से चोदो मुझे मैं बरसों की प्यासी हूँ. वो रमेश का बच्चा तो एक दम ढिल्लु प्रसाद है. आह … ऊईई … साबास और जोर से प्रेम आह … याया आ....ईई…. मै तो मर गई …. ओईई …” लगता था वो एक बार फिर झड़ गई. मैं भी कब तक ठहरता. मुझे भी लगाने लगा कि अब रुकना मुश्किल होगा. मैंने कहा शहद रानी मैं भी झड़ने वाला हूँ तो वो बोली एक मिनट रुको. उसने मुझे परे धकेला और झट से डॉगी स्टाइल में हो गई और बोली “पीछे से डालो न प्लीज जल्दी करो ” मैंने उसकी कमर पकडी और अपना फनफनाता लंड उसकी चूत में एक ही धक्के में पूरा ठोक दिया. धक्का इतना जोर का था कि उसकी घुटी घुटी सी एक चींख ही निकल गई. उसके गोल गोल उरोज नीचे पके आम की तरह झूलने लगे वो सीत्कार किये जा रहे थी. उसने अपना मुंह तकिये पर रख लिया और मेरे झटकों के साथ ताल मिलाने लगी. उसकी गोरी गोरी गांड का काला छेद खुल और बंद हो रहा था. वो प्यार से मेरे अण्डों को मसलती जा रही थी. मैंने एक अंतिम धक्का और लगाया और उसके साथ ही पिछले 25-30 मिनट से उबलता लावा फूट पड़ा. कोई अध कटोरी वीर्य तो जरूर निकला होगा. मेरे वीर्य से उसकी चूत लबालब भर गई. अब वो धीरे धीरे पेट के बल लेट गई और मैं भी उसके ऊपर ही पसर गया. उसकी चूत का रस और मेरा वीर्य टपटप निकालता हुआ चद्दर को भिगोता चला गया. कोई 10मिनट तक हम ऐसे ही पड़े रहे. फिर वो उठाकर बात रूम में चली गई. मुझे साथ नहीं आने दिया. पता नहीं क्यों. साफ़ सफाई करके वो वापस बेड पर आ गयी और मेरी गोद में सिर रखकर लेट गई. मैंने उसके बूब्स को मसलने चालु कर दिया. मैंने पूछा “क्यों शहद रानी कैसी लगी चुदाई ” “आह … बहुत दिनों के बाद ऐसा मज़ा आया है. मधु सच कहती है तुम एक नंबर के चुद्दकद हो. सारे कास बल निकाल देते हो. अगर कोई कुँवारी चूत तुम्हे मिल जाए तो तुम तो एक रात में ही उसका कचूमर निकाल दोगे ” और उसने मेरे सोये शेर को चूम लिया. “क्यों रमेश भैय्या ऐसी चुदाई नहीं करते क्या ?” “अरे छोडो उनकी बात वो तो महीने में एक दो बार भी कर लें तो ही गनीमत समझो ” “पर आपकी चूत देख कर तो ऐसा लगता है जैसे उन्होंने आप की खूब रगडाई की है ” “आरे बाबा वो शुरू शुरू में था. जब से उनका एक्सीडेंट हुआ है वो तो किसी काम के ही नहीं रहे. मैं तो तड़फती ही रह जाती हूँ. ” “अब तडफने की क्या जरुरत है ?” “हाँ हाँ 15-20 दिन तो मजे ही मजे है. फिर ….” वो उदास सी हो गई “आप चिंता मत करें मैं 15-20दिनों में ही आपकी सारी कमी दूर कर दूंगा और आपकी साइज़ भी 38-28-36से 38-28-38या 40कर दूंगा ” मैंने उसके नितम्बों पर हाथ फेरते हुए कहा तो उसने मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसना चालु कर दिया. मैंने कहा “ऐसे नहीं मैं चित लेट जाता हूँ आप मेरे पैरों की ओर मुंह करके अपनी टाँगे मेरे बगल में कर लो ” अब मैं चित लेट गया और सुधा ने अपने पैर मेरे सिर के दोनों ओर करके अपनी चूत ठीक मेरे मुंह से सता दी. उसकी फूली हुई चूत की दरार कोई 4 इंच से कम तो नहीं थी. उसकी चूत तो किसी बड़े से आम की रस में दुबे हुई गुठली सी लग रही थी. और टींट तो किसमिस के दाने जितना बड़ा बिलकुल सुर्ख लाल अनार के दाने की तरह. बाहरी होंठ संतरे की फांकों की तरह मोटे मोटे. अन्दर के होंठ देसी मुर्गे की लटकती हुई कलगी की तरह कोई 2 इंच लम्बे तो जरूर होंगे. साले रमेश ने इनको चूस चूस कर इस चूत का भोसड़ा ही बना कर रख दिया था. और अब किसी लायक नहीं रहा तो मुझे चोदने को मिली है. हाय जब ये कुंवारी थी तो कैसी मस्त होगी साला रमेश तो निहाल ही हो गया होगा. सच पूछो तो उसकी चूड़ी हुई चूत चोद कर मुझे कोई ज्यादा मजा नहीं आया था बस पानी निकालने वाली बात थी. पर उसके नितम्बों और गांड के छेद को देखकर तो मैं अपने होश ही खो बैठा. एक चवन्नी के सिक्के से थोडा सा बड़ा काला छेद.एक दम टाइट. बाहर कोई काला घेरा नहीं. आप को पता होगा गांड मरवाने वाली औरतों की गांड के छेड़ के चारों ओर एक गोल काला घेरा सा बन जाता है पर शहद रानी की कोरी गांड देखकर मुझे हैरानी हुई. क्या वाकई ये अभी तक कोरी ही है. मैं तो यह सोच कर ही रोमांच से भर गया. वो मेरा लंड चूसे जा रही थी. अचानक उसकी आवाज मेरे कानों में पड़ी “अरे लंदोइजी क्या हुआ तुम भी तो अपना कल का व्रत तोड़ो ना ?” उसका मतलब चूत की चुसाई से था “आन … हाँ “ मैं तो उसकी गांड का कुंवारा छेद देखकर सब कुछ भूल सा गया था. मैंने उसकी चूत पर अपनी जीभ फिराई तो वो सीत्कार करने लगी और मेरा लंड फिर चूसने लगी. मैंने भी उसकी चूत को पहले चाटा फिर अपनी जीभ की नोक उसकी चूत के छेदमें डाल दी. वाओ … अन्दर से पके तरबूज की गिरी जैसी सुर्ख लाल चूत का अन्दर का हिस्सा बहुत ही मुलायम और मक्खन सा था. फिर मैंने उसके किसमिस के दाने को चूसा और फिर उसके अन्दर की फांकों को चूसना चालु कर दिया. अभी मुझे कोई 2मिनट भी नहीं हुए थे कि सुधा एक बार और झड़ गई और कोई 2-3चमच शहद से मेरा मुंह भर गया जिसे मैं गटक गया. उसकी गांड का चींख अब खुल और बंद होने लगा था. उसमे से खुशबुदार क्रीम जैसी महक से मेरा स्नायु तंत्र भर उठा. मैंने अपनी जीभ की नोक उसपर जैसे ही टिकाई उसने एक जोर की किलकारी मारी और धडाम से साइड में गिर पडी. उसकी आँखें बंद थी. उसकी साँसे तेज चल रही थी. “क्या हुआ मेरी शहद रानी ?” वो बिना कुछ बोले उछल कर मेरे ऊपर बैठ गई और अपने होंठ मेरे होंठों पर लगा दिए. उसकी चूत ठीक मेरे लंड के ऊपर थी. मैं अभी अपना लंड उसकी चूत में डालने की सोच ही रहा था कि वो कुछ ऊपर उठी और मेरे लंड को पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर लगा दिया और नीचे की और सरकने लगी. मुझे लगा किमेरा लंड थोडा सा टेढा हो रहा है. एक बार तो लगा कि वो फिसल ही जाएगा. पर सुधा ने एक हाथ से इसे कस लार पकड़ लिया और नीचे की ओर जोर लगाया. वह जोर लगाते हुए नीचे बैठ गई. मेरा आधा लंड उसकी नरम नाजुक कोरी गांड में धस गया. उसके मुंह से एक हलाकि सी चींख निकल गई. वो थरथर कांपने सी लगी उसकी आँखों से आंसू निकल आये. मेरा आधा लंडउसकी गांड में फसा था. 2-3 मिनिट के बाद जब उसका दर्द कुछ कम हुआ तो उसने अपनी गांड को कुछ सिकोडा. मुझे लगा जैसे किसी में मेरे लंडको ऐसे दबोच लिया है जैसे कोई बिल्ली किसी कबूतर की गर्दन पकड़ कर भींच देती है. मुझे लगा जैसे मेरे लंड का सुपाडा और लंड के आगे का भाग फूल गया है. मैंने उसे थोडा सा बाहर निकलना चाहा पर वो तो जैसे फस ही गया था. गांड रानी की यही तो महिमा है. चूत में लंड आसानी से अन्दर बाहर आ जा सकता है पर अगर गांड में लंड एक बार जाने के बाद उसे गांड द्बारा कुतिया की तरह कस लिया जाए तो फिर सुपाडा फूल जाता है और फिर जब तक लंड पानी नहीं छोड़ देता वो बाहर नहीं निकल सकता. अब हालत यह थी कि मैं धक्के तो लगा सकता था पर पूरा लंड बाहर नहीं निकाल सकता था. आधे लंड को ही बाहर निकाला जा सकता था. सुधा ने नीचे की ओर एक धक्का और लगाया और मेरा बाकी का लंड भी उसकी गांड में समां गया. वो धीरे धीरे धक्का लगा रही थी और मोन भी कर रही थी. “ओह … उई … अहह. या … ओईईई … माँ ….” उसकी कोरी नाजुक मखमली गांड का अहसास मुझे मस्त किये जा रहा था. कई दिनों के बाद ऐसी गांड मिली थी. ऐसी गांड तो मुझे कालेज में पढ़ने वाली सिमरन की भी नहीं लगी थी और न ही निशा (मधु की कजिन) की. इतनी मस्त गांड साला रमेश चूतिया कैसे नहीं मारता मुझे ताज्जुब है. मुझे धक्के लगाने में कुछ परेशानी हो रही थी. मैंने सुधा से कहा “शहद रानी ऐसे मजा नहीं आएगा. तुम डागी स्टाइल में हो जाओ तो कुछ बात बने. ” पर बिना लंड बाहर निकाले यह संभव नहीं था. और लंड तो ऐसे फस हुआ था जैसे किसी कुतिया ने लंड अन्दर दबोच रखा था. अगर मैं जोर लगा कर अपने लंड को बाहर निकालने की कोसिस करता तो उसकी गांड की नरम झिल्ली और छल्ला दोनों बाहर आ जाते और हो सकता है वो फट ही जाती. उसने धीरे से अपनी एक टांग उठाई और मेरे पैरों की ओर घूम गई. अब वो मेरे पैरों के बीच में उकडू होकर बैठी थी. मेरा पूरा लंड उसकी गांड में फस था. अब मैंने उसे अपने ऊपर लेटासा लिया और फिर एक कलाबाजी खाई और वो नीचे और मैं ऊपर आ गया. फिर उसने अपने घुटने मोड़ने शुरू किये और मैं बड़ी मुश्किल से खडा हो पाया. अब हम डागी स्टाइल में हो गए थे. अब तो हम दोनों ही सातवें आसमान पर थे. मैंने धीरे धीरे उसकी गांड मारनी चालु कर दी. आह …. असली मजा तो अब आ रहा था. मेरा आधा लंड बाहर निकालता और फिर गच्च से उसकी गांड में चला जाता. मुझे लगा जैसे अन्दर कोई रसदार चिकनाई भरी पड़ी है. जब मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि वो थोडी देर पहले जब अपनी चूत साफ़ कर रही थी तभी उसने गांड मरवाने का भी सोच लिया था. और क्रीम की आधी ट्यूब उसने अपनी गांड में निचोड़ ली थी. अब मेरी समझ में आया किइतनी आसानी से मेरा लंड कैसे उसकी कोरी गांड में घुस गया था. पता नहीं साली ने कहाँ से ट्रेनिंग ली है. “भाभी यह बाते आप मधु को क्यों नहीं समझाती ” “मुझे पता है वो तुम्हें गांड नहीं मारने देती और तुम उससे नाराज रहते हो ” “आपको कैसे पता ?” “मधु ने मुझे सब बता दिया है. पर तुम फिक्र मत करो. बच्चा होने के बाद जब चूत फुद्दी बन जाती है तब पति को चूत में ज्यादा मजा नहीं आता तब उसकी पडोसन ही काम आती है नहीं तो मर्द कहीं और दूसरी जगह मुंह मारना चालू कर देता है. इसी लिए वो गांड नहीं मारने दे रही थी. अब तुम्हारा रास्ता साफ़ हो गया है. बस एक महीने के बाद उसकी कुंवारी गांड के साथ सुहागरात मनालेना ” सुधा हंसते हुए बोली “साली मधु की बच्ची ” मेरे मुंह से धीरे से निकला पता नहीं सुधा ने सुना या नहीं वो तो मेरे धक्कों के साथ ताल मिलाने में ही मस्त थी. उसकी गांड का छेद अब छोटी बच्ची की हाथ की चूड़ी जितना तो हो ही गया था. बिलकुल लाल पतला सा रिंग. जब लंड अन्दर जाता तो वो रिंग भी अन्दर चला जाता और जब मेरा लंड बाहर की ओर आता तो लाल लाल घेरा बाहर साफ़ नजर आता. मैं तो मस्ती के सागर में गोते ही लगा रहा था. सुधा भी मस्त हिरानी की तरह आह … उछ … उईई …. मा …. किये जा रही थी. उसकी बरसों की प्यास आज बुझी थी. उसने बताया था कि रमेश ने कभी उसकी गांड नहीं मारी अब तक अन छुई और कुंवारी थी. बस कभी कभार अंगुल बाजी वो जरूर कराती रही है. मेरे मुंह से सहसा निकल गया “चूतिया है साला.. इतनी ख़ूबसूरत गांड मेरे लिए छोड़ दी ” मैंने अपनी एक अंगुली उसकी चूत के छेड़ में डाल दी. वो तो इस समय रस की कुप्पी बनी हुई थी. मैंने अपनी अंगुली अन्दर बहार करनी शुरू कर दी. फ़च्छ … फ़च्छ.. की आवाज गूंजने लगी. एक हाथ से मैं उसके बूब्स भी मसल रहा था. उसको तो तिहरा मज़ा मिल रहा था वो कितनी देर ठहर पाती. ऊईई … माँ आ.. . करती हुई एक बार झड़ गई और मेरी अंगुली मीठे गरम शहद से भर गई मैंने उसे चाट लिया. सुधा ने एक बार जोर से अपनी गांड सिकोडी तो मुझे लगा मेरा भी निकलने वाला है. मैंने सुधा से कहा मैं भी जाने वाला हूँ तो वो बोली “मैं तो पानी चूत में ही लेना चाहती थी पर अब ये बाहर तो निकलेगा नहीं तो अन्दर ही निकाल दो पर 4-5 धक्के जोर से लगाओ ” मुझे भला क्या ऐतराज हो सकता था. मैंने उसकी कमर कस कर पकडी और जोर जोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए “ले मेरी सुधा रानी ले.. और ले … और ले …” मुझे लगा कि मेरी पिचकारी छूटने ही वाली है. वो तो मस्त हुई बस ओह.. आह्ह. उईई. या ….हईई … ओईई … कर रही थी. मेरे चीकू उसकी चूत की फांकों से टकरा रहे थे. उसने एक हाथ से मेरे चीकू (अण्डों ) कास कर पकड़ लिए. ये तो कमालही हो गया. मुझे लगता था कि मेरा निकलने वाला है पर अब तो मुझे लगा कि जैसे किसी ने उस शैलाब (बाढ़) को थोडी देर के लिए जैसे रोक सा दिया है. मैंने फिर धक्के लगाने शुरू कर दिए. 10-15 धक्को के बाद उसने जैसे ही मेरे अण्डों को छोडा मेरे लंड ने तो जैसे फुहारे ही छोड़ दी. उसकी गांड लबालब मेरे गर्म गाढे वीर्य से भर गई. वो धीरे धीरे नीचे होने लगी तो मैं भी उसके ऊपर ही पड गया. हम इसी अवस्था में कोई 10 मिनट तक लेते रहे. उसका गुदाज़ बदन तो कमाल का था. फिर मेरा पप्पू धीरे धीरे बाहर निकालने लगा. एक पुच की हलकी सी आवाज के साथ पप्पू पास हो गया. सुधा की गांड का छेद अब भी 5 रुपये के सिक्के जितना खुला रह गया था उसमे से मेरा वीर्य बह कर बाहर आ रहा था. मैंने एक अंगुली उसमे डाली और उस रस में डुबो कर सुधा के मुंह में डाल दी. उसने चाथ्कारा लेकर उसे चाट लिया. वो जब उठकर बैठी तो मैंने पूछा “भाभी एक बात समझनहीं आई आप गांड के बजाये चूत में पानी क्यों लेना चाहती थी ?” “अरे मेरे भोले राजा क्या मुझे एक सुन्दर सा बेटा नहीं चाहिए ? मैं रमेश के भरोसेकब तक बैठी रहूंगी” सुधा ने मेरी ओर आँख मारते हुए कहा और जोर से फिर मुझे अपनी बाहों में जकड लिया. इतने में मोबाइल पर मेसेज का सिग्नल आया. बधाई हो बेटा हुआ है. मैंने एक बार फिर से सुधा की चुदाई कर दी. मैं तो गांड मारना चाहता था पर सुधा ने कहा नहीं पहले चूत में अपनी डालो तो मुझे चूत मार कर ही संतोष करना पड़ा. सुबह हॉस्पिटल जाने से पहले एक बार गांड भी मार ही ली भले ही पानी गांड में नहीं चूत में निकाला था. यह सिलसिला तो अब रोज ही चलने वाला था जब तक उसकी गांड के सुनहरेछेदके चारो ओर गोल कला घेरा नहीं बन जाएगा तब तक. बस आज इतना ही..... मुझे मेल करेंगे ना ? premguru2u@yahoo.com ; premguru2u@gmail.com |
|
#3
|
|||
|
|||
|
formatting ka kuch karo dear premguru ji
__________________
if u like bdsm fun then contact me at sonalibansalmodel1 on yahoo messanger , for live always young 36/24/36 this is mantra |
|
#4
|
|||
|
|||
|
very good story
|
|
#5
|
||||
|
||||
|
great story..keep posting.
|
|
#6
|
||||
|
||||
|
great story......
|
|
#7
|
||||
|
||||
|
Good...juicy story..but short..want more...
|
|
#8
|
|||
|
|||
|
Shandar likhte ho ap premguru
|
![]() |
| Thread Tools | |
| Display Modes | |
|
|