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#1
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तीन चुम्बन
प्रेम गुरूकी कलम से प्रेम आश्रम वाले गुरूजी कहते हैं कि छोटी लड़कियों की पिक्की, बाल आने के बाद बुर या भोस, चुदने के बाद चूत और फटने (बच्चा होने) के बाद फुद्दी बन जाती है. अब मैं यह सोच रहा था कि मिक्की (मोनिका) की अभी पिक्की ही है या बुर बन गयी है. इतना तो पक्का है कि भले ही उसकी पिक्की पूरी तरह से बुर या भोस न बनी हो पर वो बनने के लिए जरूर आतुर होगी. पता नहीं इन कमसिन लड़कियोंकी पिक्की को बुर बनने कि इतनी जल्दी क्यों लगी रहती है. और जब बुर बन जाती है तो चूत बनने के लिए बेताब रहती है. आप सोच रहे होंगे कि ये मिक्की कौन है ? मिक्की मेरे साले की लड़की है. घर में सब उसे मिक्की और सभी सहेलियां मोना और स्कूल में वो मोनिका माथुर के नाम से जानी जाती है. 9th क्लास में पढ़ती है. गदराया बदन शोख, चंचल, चुलबुली, नटखट, नादान, कमसिन, क़यामत. कन्धों तक कटे बाल, सुतवांनाक, पतले पतले गुलाबी होंठ जैसे शहद से भरी दो पंखुडियां, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, छोटे छोटे नीबू जो अब अमरुद बन गए हैं पतली कमर, चिकनी चिकनी बाहें और केले के पेड़ कि तरह चिकनी जांघें. सबसे कमाल की चीज तो उसके छोटे छोटे खरबूजे जैसे नितम्ब हैं. या अल्लाह…. अगर कोई खुदकुशी करने जा रहा हो और उसके नितम्ब देख ले तो एक बार अपना इरादा ही बदलने पर मजबूर हो जाए. उसकी पिक्की या भोस का तो आप और मैं अभी केवल अंदाजा ही लगा सकते हैं. कुल मिला कर वो एक क़यामत है. ऐसी कन्याएं किसी भी अच्छे भले आदमी का घर बर्बाद कर सकती है. पर मुझे क्या पता था कि भगवान् ने इसे मेरे लिए ही बनाया है. पहले मैं अपने बारे में थोडा बता दूं. मेरा नाम प्रेम गुरु माथुर है. उम्र 32 साल, कद 5’ 8” रंग गेहुँवा . शक्ल-सूरत ठीक ठाक. वैसे आदमियों की शक्ल-ओ-सूरत पर जयादा ध्यान नहीं दिया जाता ख़ास बात उसका स्टेटस होता है और दूसरा उसकी सेक्स पॉवर. भगवान् ने मुझे इन दोनों चीजों में मालामाल रखा है. मेरे लिंग का साइज़ 7” है और मोटाई 1.5 इंच. मेरा सुपाडाआगे से कुछ पतला है. आप सोच रहे होंगे फिर पतले सुपाडे से चुदाई का मज़ा ज्यादा नहीं आता होगा तो आप गलत सोच रहे है. यह तो भगवान् का आशीर्वाद और नियामत समझिये. गांड मरवाने वाली औरतें ऐसे सुपाडे को बहुत पसंद करती है. आदमियों को भी अपना लुंड अन्दर डालने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती. जिन आदमियों के लिंग पर तिल होता है वो बड़े चुद्दकड़ होते है फिर मेरे तो सुपाडे पर तिल है आप अंदाजा लगा सकते है मैं कितना बड़ा चुद्दकड़ और गांड का दीवाना हूँ. मेरी पत्नी मधुर 36-28-36, उम्र 28 साल बहुत खूबसूरत है. उसे गांड मरवाने के लिए मनाने में मुझे बहुत मिन्नत करनी पड़ती है. लेकिन दोस्तों ये फिर कभी. क्यों कि ये कहानी तो मिक्की के बारे में है. वैसे तो ये कहानी नहीं बल्कि मेरे अपने जीवन कि सच्ची घटना है. दरअसल मैं अपने अनुभव एक डायरी में लिखता था. ये सब उसी में से लिया गया है. हाँ मुख्यपात्रों के नाम और स्थान जरूर बदल दिए हैं. मैं अपनी उसप्रेयशी (?) बदनाम कैसे कर सकता हूँ जो अब इस दुनिया में नहीं है जिसे मैं प्रेम करताथा, करता हूँ और जन्मजन्मान्तर तक करता रहूँगा. इसे पढ़कर आपको मेरी सच्चाई का अंदाजा हो जायेगा. मेरा दावा है कि ये मेरी ये आप बीती आपको गुदगुदाएगी, हँसाएगी, रोमांच से भर देगी और अंत में आपकी आँखे भी जरूर छलछला जायेंगी. Part-1 मेरी एक फंतासी थी. किसी नाज़ुक कमसिन कली को फूल बनाने की. पिछले 10-12 सालों में मैं लगभग 15-20 लड़कियों और औरतों को चोद चूका हूँ पर अब मैं इन मोटे मोटे नितम्बो और भारी भारी जाँघों वाली औरतों को चोदते चोदते बोर हो गया हूँ. मैंने अपने साथ पढ़ने वाली कई लड़कियों को चोदा है पर वो भी उस समय 20-21 की तो जरूर रही होंगी. हाँ अपने कामवाली बाई गुलाबो की लड़की अनारकली जरूर 18 के आस पास रही होगी पर वो भी मुझे तब मिली जब उसकी बुर चूत में बदल चुकी थी. सच मानो तो पिछले 3-4 सालों से तो मैं किसी कमसिन लड़की को चोदने के चक्कर में मरा ही जा रहा था. शायद आपको मेरी ये बातें अजीब सी लगे नाजुक नासमझ कच्ची कलियोंके प्रति मेरी दीवानगी.हमारे गुरूजी कहते है चुदी चुदाई लड़कियों/औरतों को चोदने में ज्यादा मुश्किल नहीं होती क्योंकि वे ज्यादा नखरे नहीं करती और चुदवाने में पूरा सहयोग करती है. इन छोटी छोटी नाज़ुक सी लड़कियों को पटाना और चुदाई के लिए तैयार करना सचमुच हिमालयपर्वतपर चढ़ने से भी ज्यादा खतरनाक और मुश्किल काम है. कहते है भगवान् के घर देर है पर अंधेर नहीं है. मेरा साला किसी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर है. वो अपने काम के चक्कर में हर जगह घूमता रहता है. इस बार वो यहाँ टूर पर आने वाला था. मधु ने उसे अपनी भाभी और मिक्की को भी साथ लाने को मना लिया. सुबह सुबह जब में उन्हें लेने स्टेशन पर गया तो मिक्की को देख कर मेरा दिल इतना जोर से धड़कने लगा जैसे रेल का इंजन. मुझे ऐसा लगा जैसे मेरा दिल हलक के रास्ते बाहर आ जायेगा. मैंने अपने आप पर बड़ी मुश्किल से काबू किया. सामने एक परी जैसी बिल्लोरी आँखों वाली नाज़ुक सी लड़की कन्धों पर बेबी डोल लटकाए मेरे सामने खड़ीथी- नीले रंग का टॉप और काले रंग की जीन पहने, सिर पर सफ़ेद कैप, स्पोर्ट्स शूज, कानों में छोटी छोटी सोने की बालियाँ, आँखों पर रंगीन चश्मा ? ऊउफ्फ्फ़ … मुझे कत्लकरने का पूरा इरादा लिए हुए. दोनों जाँघों के बीच जीन पैंट के अन्दर फसी हुई उसकी उभरी हुई बुर किसी फ़रिश्ते का भी ईमान खराब करदे. मुझे लगा कि मेरा पप्पू अपनी निद्रा से जाग कर अंगडाई लेने लगा है. मैं भी कितना उल्लू का पट्ठा हूँ मिक्की को पहचान ही नहीं पाया. मेरी शादी के समय तो ये बहुत छोटी थी. पिछली बार अपनी ससुराल के किसी फंक्शन में जब मैंने उसे देखा था तो उसकी उम्र कोई 8-9 साल के लगभग रही होगी. मैं भी कितना गधा था इतनी ख़ूबसूरत बला की ओर मेरा ध्यान पहले नहीं गया. मैं तो उसे एक अंगूठा चूसने वाली, इक्कड़ -दुक्कड़, छुपम-छुपाई खेलने वाली साधारण सी लड़की ही समझ रहा था. कितनी जल्दी ये लड़की जवानी की और बढ़ रही है अगर यही रफ़्तार रही तो 2-3 सालों में ये पूरी बोम्ब बन जायेगी. मैं उसे ऊपर से नीचे तक देखता ही रह गया. उसका बदन कितना निखर सा गया था. मैं अभी सोच ही रहा था की उसकी पिक्की की साइज़ कितनी बड़ी हो गयी होगी और उसकी केशर क्यारी बननी शुरू हुयी या नहीं मेरा मतलब है की वो अभी पिक्की ही है या बुर बन गयी है. पता नहीं उसने अभी तक अपनी पिक्की या बुर से मूतने का ही काम लिया है या कुछ और भी, अचानक मेरे साले कीआवाज मेरे कानो में पड़ी. अरे प्रेम कहाँ खो गए भई ? मैं अपने ख़्वाबों से जैसे जागा. आइये आइये भाई साहब रास्ते में कोई परेशानीतो नहीं हुई मैंने उनका अभिवादन करते हुए पूछा. उन्होंने क्या जवाब दिया मुझे कहाँ ध्यान था मेरी आँखें तो बस मिक्की पर से हटाने का नाम ही नहीं ले रही थी. ऐसे खूबसूरत मौके का फायदा कौनकम्बख्तनहीं उठाएगा. आप समझ ही गए होंगे मैंने आगे बढ़ते हुए मिक्की को अपनी बाहों में भरते हुए कहा अरे मिक्की माउस तू तो बहुत बड़ी हो गयी है. अपने सीने से लगाए मैंने उसकी गालों और सिरकेबालों पर हाथ फिराया. उसके छोटे छोटे अमरुद मेरे सीने से दब रहे थे. उसके नाज़ुक कमसिन बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे नथुनों में समां गयी. मुझे लगा की मेरे ख़्वाबों की मंजिल मेरे सामने खड़ी है. मेरा दिल तो कर रहा था किउसका प्यार से एक चुम्बन ले लूँ पर स्टेशन पर उसके माता-पिता के सामने ऐसा करना कहाँ संभव था. न चाहते हुए भी मुझे उस से अलग होना पड़ा लेकिन अलग होते होते मैंने उसके गालों पर एक प्यारी सी थप्पी तो लगा ही दी. फिर मैंने उसका हाथ पकडा और हम सभी स्टेशन से बाहर अपनी कार कीओर आ गए. घर पहुँचने पर मधु ने अपने भैय्या, भाभी और मिक्की का गरमजोशी से स्वागत किया और फिर मिक्की की और बढ़ते हुए कहा “अरे मोना तू ?” मधु मिक्की को मोना ही बुलाती है वो उसे अपनी बाहों में लेते हुए बोली “नमस्ते बुआजी” शायद कहीं सितार बजी हो, जलतरंग छिडी हो या किसी अमराई में कोयल कूकी हो इतनी मीठी और सुरीली आवाज मिक्की के सिवा किसकी हो सकती थी. “अरे ये तो मुझसे भी एक इंच बड़ी हो गयी है.” मधु ने कहा. “हाँ लम्बी तो बहुत हो गयी है पर पढाई लिखाई में अभी भी मन नहीं लगाती”सुधा ने बुरा सा मुंह बनाते हुए हुए कहा. “अरे अभी बच्ची है अपने आप पढ़ लेगी तुम क्यों चिंता करती हो”मधु बोली मैं सोच रहा था क्या वाकई ये अभी बची ही है. उसके बूब्स नितम्ब तो कहर बरपाने वाले बन चुके हैं. “फूफाजी बाथरूम किधर है ?”मिक्की ने पूछा “आ…न.. हाँ आओ इधर है” मैं उसका हाथ पकड़ कर अपने बेडरूम से लगे बाथरूम कीओर ले गया. मैं जानबूझकर उसे गेस्ट रूम के साथ भी एक बाथरूम में नहीं ले गया था. “मैं साथ आऊँ क्या ?” मैंने मुस्कुराते हुए पूछा “नहीं .. क्यों ?” “क्या पेंटी नीचे नहीं करवानी ?” “ओह.. हटो आप भी….” वो शर्माते हुए बाथरूम में घुस गयी और दरवाजा बंद कर लिया. और मैं बाहर खडा उसके सु सु की आवाज का इन्तजार करने लगा .... बाहर खडा मैं अपने सपनो में खोया हुआ था. आज से कोई 4-5 साल पहले जब मैं अपनी ससुराल किसी फंक्शन में गया था तब की एक घटना मेरी आँखों में फिर से घूम गयी. शायद उस दिन गणगोर उत्सव था. सभी ने मेहंदी लगा राखी थी. मैं संयोगवश बाथरूम से बाहर निकल कर आ रहा था कि मिक्की दोड़ती हुई मेरी तरफ आई और बोली “फूफाजी मेरी मेहंदी कैसी लग रही है ?” उसने अपने दोनों मेहंदी लगे हाथ मेरे सामने फैला दिए. “बहुत खूबसूरत बिलकुल तुम्हारी नाक की तरह” मैंने उसकी नाक पकड़ते हुए कहा. “अईई…” मिक्की थोडा सा चिहुंकी “क्या हुआ ?” मैंने पुछा “जोरों से सु सु आ रहा है” मिक्की ने आँखे बंद करते हुए कहा “तो बाथरूम चली जाओ न ?” “पर मेरे दोनों हाथों में तो मेहंदी लगी है. मैं अपनी कच्छी कैसे खोलूंगी” मिक्की नेअपनी परेशानी बताई. “चलो मैं खोल देता हूँ” “आप ?” “हाँ मैं “ “अ….आप मेरी शेम शेम तो नहीं करोगे न ?” “अरे नहीं बाबा छोटे बच्चों कि शेम शेम नहीं होती” “अच्छा तो फिर ठीक है” मैं तो ख़ुशी से झूम ही उठा. मैंने इधर उधर देखा आस पास कोई नहीं था. मेरा दिल धड़क रहा था. किसी ने देख लिया तो क्या समझेगा. कहीं मिक्की ने अगर बाद में किसी को बता दिया तो ? पर फिर मैंने सोचा अगर कोई देख भी लेगा या मिक्की ने कुछ बता भी दिया तो क्या हुआ मिक्की अभी 8-9 साल कि ही तो है कोई गलत नहीं सोचेगा. मैं उसके एक बाजु को पकड़ कर बाथरूम के अन्दर ले गया. लाईट ओन करके मैंने बाथरूम का दरवाजा जानबूझकर आधा ही बंद किया. “ओफोः फूफाजी दरवाजा छोडो जल्दी करो मेरा सु सु निकल जायेगा” “ओह हाँ” मेरे मुंह से केवल इतना ही निकला. आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते हैं. मैं अपने पंजो के बल बैठ गया और धड़कते दिल से उसकी स्कर्ट को ऊपर उठाया और उसकी गुलाबी कच्छी के इलास्टिक को दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे से नीचे सरकाया …. आईला….. मेरे जीवन का ये सबसे खूबसूरत नजारा था. उसकी नाभि के नीचे का भाग (पेडू) थोडा सा उभरा हुआ और उसके नीचे डबल रोटी के तिकोने टुकड़े कि तरह एक छोटी सी गुलाबी रंग की पिक्की रोम विहीन. चुकंदर सी रक्तिम पिक्की के बीच का चीरा 2.5 इंच से ज्यादा बड़ा नहीं था. पिक्की के ठीक बीच में दो पतली सी भूरे रंग की खड़ी लाइन आपस में चिपकी हुई. मदन-मणि अभी बनी ही नहीं होगी या बहुत छोटी होगी. पतली पतली जांघें और दाहिनी जांघ पर एक काला तिल. हे भगवान् मैं तो बस मंत्रमुग्ध सा देखता ही रह गया. केवल कुछ पलों की इस झलक में तो बस इतना ही देखा जा सकताथा पर ये हसींन नजारा तो मेरे जीवन का सबसे कीमती और अनमोल नजारा था. मिक्की एक झटके के साथ नीचे बैठ गयी. उसकी नाजुक गुलाबी फांके थोडी सी चौड़ीहुई और उसमेसे कलकल करती हुई सु सु की एक पतली सी धार….. फिच्च्च्च…... सीईई… पिस्स्स्स.. करती लगभग डेढ़ या दो फ़ुट तो जरूर लम्बी होगी. कम से कम दो मिनिट तक वो सु सु करती रही. पिस्स्स्स….. का मधुर संगीत मेरे कानों में गूंजता रहा. शायद पिक्की या बुर को पुस्सीइसीलिए कहा जाता है कि उसमे से पिस्स्स्स…का मधुर संगीत बजता है.छुर्रर…. याफल्ल्ल्ल्ल…. की आवाज तो चूत या फिर फुद्दी से ही निकलती है. अब तक मिक्की ने कम से कम एक लीटर सु सु तो जरूर कर लिया होगा. पता नहीं कितनी देर से वो उसे रोके हुए थी. धीरे धीरे उसके धार पतली होती गयी और अंत में उसने एक जोर की धार मारी जो थोडी सी ऊपर उठी और फिर नीचे होती हुई बंद हो गई. ऐसे लगा जैसे उसने मुझे सलामी दी हो. दो चार बूंदें तो अभी भी उसकी पिक्की के गुलाबी होंठों पर लगी रह गयी थी. मेरा पप्पू तो अकड़ कर तूफ़ान मचाने लगा. मैंने इतना ज्यादा तनाव आज से पहले कभी नहीं महसूस किया था. मुझे लगा कि अगर मैंने जल्दी ही कुछ नहीं किया तो मेरा पप्पू पेंट फाड़ कर बाहर आ जायेगा या मैं पेंट में ही झड़ जाऊँगा. मिक्की अब उठ कर थोडा आगे आ गयी. मैंने उसकी पेंटी को फिर से पकडा और धीरे धीरे ऊपर सरकाने लगा. वो जरा सा मचली. मैंने देखा उसकी पेंटी का आगे का भाग पिक्की के छेद वाली जगह पर थोडा सा गीला हो गया है. मैंने उसकी कमर पकड़ कर उसकी पिक्की पर एक चुम्बन ले लिया. वाह क्या सुगंध थी बिलकुल कच्चे नारियल और पेशाब की मिलीजुली खुशबूको तोमैं आज तक याद करके रोमांचित हो उठता हूँ. “फूफाजी क्या करते हो ?” मिक्की कमर को थोडा सा पीछे करती हुई बोली “क्यों क्या हुआ ?” “छी… छी… कोई इतनी गन्दी जगह की भी पप्पी लेता है ?” “अरे… मेरी बिल्लो गन्दी कहाँ है. ये तो बहुत सुन्दर और प्यारी है.” उसने मेरी ओर आश्चर्य से देखा तो मैंने कहा “अच्छा तो कौन सी जगह पप्पी लेते हैं ?” ‘पप्पी तो गालों पर ली जाती है” वो मासूमियत से बोली “अच्छा तो लाओ फिर गालों पर भी ले लेते हैं” मैं आगे बढा और उसके नरम मुलायम गुलाबी होंटों पर अपने होंठ रख दिए. नीचे पिक्की की फांके और उसके गुलाबी होंठ लगभग एक जैसे ही तो थे. मैंने धीरे धीरे उसके होंठो को चूमा और फिर अपनी जीभ उन पर फिराने लगा जैसे सावन का प्यासा बारिश की हर बूँद को पी जाना चाहता है, मैं उसके होंठों को चूसने लगा.वह पूरा साथ दे रही थी उसके लिए तो मानो ये एक खेल ही था. मैंने अपनी जीभ उसके मुंह में डालने की कोशिश की तो वो हँसने लगी. मेरा दिल धड़क रहा था. मेरी भावनाओं का उसे इतनी छोटी उम्र में क्या भान होगा वो तो इसे केवल अपने अंकल का प्यार ही समझ रही थी पर मेरे लिए तो यह अमूल्य निधी की तरह था. हमारा यह चुम्बन कोई तीन चार मिनट तो जरूर चला होगा. फिर हम अपने होंठों पर जीभ फेरते हुए अलग हो गए. मिक्की भाग गयी. अब मेरे पास मुठ मारने के अलावा और क्या रास्ता बचा था. मैंने बाथरूम का दरवाजा बंद कर लिया......... और ???? दोस्तों मिक्की और मेरा यह पहला चुम्बन था. आप सोच रहे होंगे इस छोटी सी नासमझ बच्ची का चुम्बन लेने में क्या मजा आया होगा. क्या नैतिक और सामाजिक रूप से मुझ जैसे पढ़े लिखे और शरीफ समझे जाने वाले व्यक्ति के लिए ऐसा करना ठीक था ? मैंने क्या गलत किया है मैंने तो एक चतुर भंवरे की तरह एक कच्ची कलि का रस उसे बिना कोई नुक्सान पहुंचाए पी लिया था. मैंने उसकी कोमल भावनाओं से बिना खिलवाड़ किये एक चुम्बन ही तो लिया है ? इसमें इतना हो हल्ला मचाने की क्या जरूरत है. आप शायद अभी मेरी इन बातों को नहीं समझेगे. Last edited by premguru; 19-06-2009 at 07:33 PM.. |
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#2
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Part-2
बाथरूम के बाहर खडा मैं आज से कोई चार साल पहले घटी उस घटना के बारे में सोच ही रहा था किमिक्की की आवाज मेरे कानो के बिलकुल पास में गूंजी. “फूफाजी कहाँ खोये हुए हो ?” मिक्की शरारत भरी मुस्कान के साथ मुझे देख रही थी. मैंने उसके हाथ पकड़ने की कोशिश करते हुए कहा “क्यों आज पप्पी नहीं देनी ?” वो शर्म से लाल हो गयी और मैं रोमांच से लबालब भर गया. मैं उसके गालों पर एक चिकोटी काटी और उसे अपनी और खींचने लगा. वो कुनमुनाती हुई सी बोली “हटो अब मैं बड़ी हो गयी हूँ.” “अरे कहाँ से बड़ी हो गयी हो हम भी तो देखे ?” मैंने भी शरारत भरे लहजे में पुछा. “वो.. वो… ओह.. मुझे नहीं पता” अब तो उसके चहरे की लाली देखने लायक थी. शर्म से पुरखुमार आँखें नीची झुकी हुई थी. मुझे पूरा यकीन हो गया वो 4 साल पुरानी बात को भूली नहीं है. “तो किसे पता होगा ?” मैंने पूछा “मम्मी ऐसा कहती है.” “अरे मम्मी को क्या पता तुम तो मेरे लिए अभी भी वोही छोटी सी मुनिया हो.” मैंने उसकी ठुड्डी को ऊपर उठते हुए कहा. उसकी आँखेंबंद थी. मैंने धीरे से एक चुम्बन उसके गालों पर ले ही लिया. मेरी आँखें उसकी छोटी छोटी गोलाईयों पर थी जो अब नीबू से बढ़कर अमरुद बन रहे थे. आगे से तीखे नुकीले जैसे पेंसिल की टिप. जीन पेंट में कसे हुए उसके नितम्ब ऐसे लग रहे थे मानो दो छोटे छोटे खरबूजे हों उनके बीच की गहरी दरार साफ़ नजर आ रही थी. मिक्की के होंठ तो इतने गुलाबी और रशीले हैं जैसे कि कोई संतरे की फांकें हों. गुरूजी कहते है किसी जवान लड़की या औरत की बुर या चूत का अंदाजा उसके होंठो को देख कर लगाया जा सकता है. इस हिसाब से तो उसके निचले होंठ भी अब क़यामत बन गए होंगे. या अल्लाह….. क्या मैं कभी उनको देख पाऊंगा और… और… खैर येतो अन्दर की नहीं बाद की बात है. मिक्की हाल में चली गयी और मैं बाथरूम में उसकी वोही पुरानी खुशबू लेने अन्दर चला गया. मेरे नथुनों में उसके जवान होते जिस्म की खुशबू भर गयी. मैं कोई 4-5 मिनिट तक आँखें बंद किये पुरानी यादों और नए चुम्बन के ख्यालों में खोया रहा. मैं सोच रहा था इस कमसिन लड़की को कैसे पटाया जाए. मुझे कुछ कुछ अंदाजा तो हो ही गया था कि वो हमारे पहले चुम्बन को नहीं भूली है. मैं भी कितना गाउदी हूँ इतने दिनों तक मुझे ये ख़याल ही नहीं आया कि मोनिका डार्लिंग अब इतनी बड़ी और रस भरी हो गयी है. इतनी छोटी उम्र में ही वो इतनी गदरा जायेगी मुझे अंदाजा नहीं था. मैं शर्त लगा सकता हूँ कि अगर वो अपने होंठो पर लाल रंग की लिपस्टिक लगा ले तो ऐसा लगेगा जैसे वो किसी का खून पीकर आई हो. उसके सुन्दर अमृत कलश हालांकि अभी छोटे ही है पर बिजलियाँ गिराने के लिए काफी है. अब ये नीबू की जगह अमरूदों की साइज़ के तो हो ही गए है. उसकी बिल्लोरी आँखें तो ऐसी है जैसे नशे में पुरखुमार मस्त हिरनी हो. आप अंदाजा लगा सकते है उसकी पिक्की बुर बनने के लिए तड़प रही होगी. अब तो उसने रस बनाना भी शुरू कर दिया होगा. जिस तरह से मेरे चुम्बन लेने के बाद वो शरमाई थी मुझे पूरा यकीन है कि उसका किसी हम उम्र सहेली या मैडम के साथ जरूर कोई चक्कर होगा. और अगर ऐसा है तो मेरे लिए तो ये और भी ख़ुशी की बात होगी कि मेरा प्यार वो जल्दी ही स्वीकार कर लेगी. आप सोच रहे होंगे क्या बकवास लगा राखी है. क्या सिरफिरी बातें कर रहा हूँ. भला इतनी छोटी उम्र में सेक्स की इतनी समझ आ जाती है. तो दोस्तों सुनो हमारे गुरूजी कहते है कि लड़की जब रजस्वला होने लग जाती है और उसकी पिक्की बुर बन जाती है यानी कि उसकी भोस पर बाल आने शुरू हो जाते है तो वो सम्भोग के लिए तैयार हो जाती है. ये दोनों चीजे ही उसके सम्भोग के लिए तैयार होने की निशानी है. ये तथाकथित पढ़े लिखे लोग न जाने क्यों हंगामा खडा किये रखते है कि लड़की अभी नाबालिग़ है.मिक्की के बारे में मुझे बाद में पता चला कि वो अपने मम्मी पापा को कई बार सेक्स करते और चूसा चुसाई करते देख चुकी है और सेक्स के बारे में उसने अपनी सहेलियोंसे भी बहुत कुछ जानकारियां ले रखी है. अकेले में कई बार उसने हस्त मैथुन तो नहीं किया पर अपनी पिक्की से छेड़खानी और छोटी मोटी चुहलबाजी जरूर की है. पर ये सब बातें अभी नहीं. उस दिन सन्डे था मुझे ऑफिस नहीं जाना था. बस मैं तो कोई न कोई बहाना बना कर अपनी मिक्की के पास हीबना रहना चाहता था. सभी ने चाय पी और नहाने की तैयारी करने लगे. रमेश और सुधा गेस्टरूम से लगे बाथरूम में चले गए. मैंने जानबूझकर मिक्की को अपने बेडरूम से लगे बाथरूम में जाने को कहा. वो अदा से अपने कुल्हे मटकाती हुई बाथरूम चली गयी. मैं तो बस उसके ख्यालों में ही खोया रह गया. वो कैसे अपनी पेंटी उतारेगी, उसकी कच्छी गुलाबी रंग की होगी या फिर काले रंग की. उसने ब्रा पहन रखी होगी या अभी समीज से ही काम चला रही है. अरे यार छोडो इन फजूल बातों को. मैं तो बस यही सोच रहा था कि उसकी पिक्की (नहीं बुर नहीं भोस नहीं पुस्सी) कैसी होगी. काश मैं कोई भंवरा होता या कम से कम छिपकली ही होता तो बाथरूम में छुप कर बैठ जाता और अपनी इस नन्ही कली को जी भर कर नंगे नहाते और मूतते हुए देख सकता. बाथरूम के अन्दर से शावर चलने की आवाज और मिक्की के इंग्लिश गाने की मिलीजुली आवाज मुझे मदहोश कर रही थी. मेरा पप्पू तो छलांगे लगाने लगा था. कोई आधे घंटे के बाद मिक्की बाथरूम से निकली. उफ्फ्फ…... भीगे बाल और उनसे टपकती हुई शबनम जैसी पानी की बूँदें, लाल स्किन टाइट सलेक्स जैसी बेलबोटम और ऊपर ढीली सी शर्ट. पता नहीं उसने पेंटी और ब्रा जानबूझ कर नहीं डाली या कोई और बात थी. सलेक्स इतनी टाइट थी कि उसकी पुस्सी का भूगोल और इतिहास साफ़ नजर आ रहा था. पुस्सी का चीरा 3 इंच से कम तो क्या होगा. मेरा पप्पू तो मस्त हिरन की तरह कुलाचें भरने लगा. उसके बदन से आती मस्त खुश्बू से मैं तो मदहोश सा हो गया. इस से पहले कि कोई मेरी हालत देख कर कोई अंदाजा लगाए में बाथरूम में घुस गया. सबसे पहले मैंने उसकी पेंटी को ढूंढा. एक कोने में किसी मरी हुई चिडिया की तरह मुझे उसकी नीली पेंटी और ब्रा मिल गए. मैंने उसकी पेंटी को उठाया और गौर से देखा. पुस्सी के छेद वाली जगह कुछ गीली थी और उस पर सफ़ेद लार जैसा कुछ लगा हुआ था. शायद ये उसका पुस्सी रस था. मैंने उसे नाक के पास लगा कर सुंघा. ईईईइस्स्स्स्स….. इतनी मादक, तीखी, खट्टी, कोरी पुस्सी की महक मेरे तन मन को अन्दर तक भिगो गयी. मैंने उसपर अपनी जीभ लगा दी. आईला…. क्या खट्टा, मीठा, नमकीन, कच्चे नारियल जैसा स्वाद था. मैंने उसकी पेंटी और ब्रा को एक बार और सुंघा और फिर उसकी पेंटी को अपने रॉक -हार्ड 7” के पत्थर की तरह अकडे पप्पू के चारों और लिपटा कर शीशे में देखा. पप्पू तो अड़ियल टट्टू ही बन गया था जैसे मार खाए बिना आज नहीं मानेगा. जी तो कर रहा था कि एक बार मुठ मार लू. पर मैं तो अपना प्रेम रस आज रात के लिए बचा कर रखना चाहता था. मैंने उसकी पेंटी को अपनी पेंट की जेब में रख लिया अपने प्यार की निशानी मानकर. जब मैं फ्रेश होकर बाहर आया तो सभी मेरा खाने की टेबल पर इंतजार कर रहे थे. नास्ता करने के बाद रमेश मार्केट और मधु और सुधा हमारे बेडरूम में गप्प लगाने चली गयी. मैं और मिक्की अब दोनों अकेले रह गए. जैसे ही मधु और सुधा गई मिक्की झट से उठ कर मेरे पास सोफे पर बैठ गई और मेरी आँखों में झांकते हुए बोली : “जिज्जू क्या आप मुझे कंप्यूटर सीखा सकते हो ? “ जिज्जू…… ? आप चोंक गए न. ओह…. मैं बताना ही भूल गया. मिक्की जब मुझे फूफाजी बुलाती तो मुझे लगता कि मैं कुछ बूढा हो गया हूँ. मैं अपने आप को बूढा नहीं कहलवाना चाहता था तो हमारे बीच ये तय हुआ घरवालों के सामने वो मुझे फूफाजी कह सकती है पर अकेले में या घर के बाहर जीजाजी कहकर बुलाएगी. “ओह… येस…येस्…. हाँ हाँ क्यों नहीं” मैं हकलाता हुआ सा बोला क्यों कि मेरी निगाहें तो उसके बूब्स पर थी. पतले शर्ट में उसके बूब्स की छोटी छोटी घुन्डियाँ चने के दाने की तरह साफ़ नजर आ रही थी. “चलो स्टडी रूम में चलते है” मैं उसकी कमर में हाथ डालकर उसे स्टडी रूम की ओरले जाने लगा. उसकी लम्बाई मेरे कन्धों से थोडी ही ऊपर थी. उसके नाजुक बदन की कुंवारी खुश्बू और चिकना स्पर्श मुझे मदहोश किये जा रहा था. मैंने तो उसके साथ चूमने चिपटने का कोई न कोई बहाना ढूंढ़ ही रहा था. उसे भी कोई परवाह नहीं थी. इस कच्ची उम्र में इन बातों की परवाह वैसे भी नहीं की जाती. मैं तो बस किसी तरह उसे जल्दी से जल्दी चोदना चाहता था. पर ये इतना जल्दी कहाँ संभव था. खैर मुझे भी कोई जल्दी नहीं थी. मेरे मस्तिस्क में कई प्लान घूम रहे थे. एक प्लान तो मैं काफी देर से सोच रहा था. मिक्की को कोल्ड ड्रिंक्स और फ्रुटी पीने का बहुत शौक है उसमे नींद की गोलियाँडाल दी जाए और रात में ? पर घर में इतने सब मेहमानों के होते यह प्लान थोडा मुश्किल था. काश कुछ ऐसा हो कि मैं और सिर्फ मेरी प्यारी मिक्की डार्लिंग अकेले हो. हमें डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं हो. काश किसी टापू या महल में हम दोनों अकेले हों और नंगधडंग बिना रोकटोक घूमते रहें. काश इस शहर में कोई जलजला या तूफ़ान ही आ जाए सब कुछ उजड़ जाए और बस हम दोनों ही अकेले रह जाए… ओह्ह्ह्ह्छ… पर ये कहाँ संभव है … खैर कोई न कोई रास्ता तो भगवान् जरूर निकालेगा. मैं मिक्की को अपनी बाहों में लिए स्टडी रूम में आ गया जिसमे मैंने कंप्यूटर, प्रिंटर, UPS और अपनी बहुत सी फाइल्स और बुक्स रखी हुई है. स्टडी रूम में सामने की दीवार पर एक सीनरी लगी है जिसमे एक 13-14 साल की बिल्लोरी आँखों वाली लड़की तितली पकड़ रही है बिलकुल मिक्की जैसी. मिक्की ने गौर से पेंटिंग को देखा पर कोई कमेन्ट नहीं किया. मैंने उसे कन्धों से पकड़ते हुए अपने साथवाली चेयर पर इस तरीके से बैठाया कि मेरे हाथ उसके उरोजो को छू गए. वाह.. क्या मस्त चिकना अहसास था. स्टडी रूम में आने के बाद मैंने उसे कंप्यूटर के बारे में बताना शुरू किया. वो थोडा बहुत कंप्यूटर के बारे में पहले से जानती थी. सबसे पहले उसे कंप्यूटर चालूकरने ओपरेट करने और बंद करने के बारे में बताया. जब स्क्रीन ऑन हुई तो पासवर्ड डालना बताया. मैंने उसे ये पासवर्ड याद रखने के लिए बोला ताकि जब वो इस पर प्रेक्टिसकरे तो कोई परेशानी न हो. वो सारी बातें एक पेपर पर नोट करती जा रही थी. फिर मैंने उसे MS-Dos, इन्टरनेट और ई-मेलआदि के बारे में भी बता दिया. फाइल्स खोलना और देखना भी उसे समझाया. हमें कोई एक घंटे तो इस चक्कर में लग ही गए. ऐसा नहीं है कि मैं उसे सिर्फ कंप्यूटर ही समझा रहा था. मैंने तो उसके हाथ, गाल, कंधे, होंठ, सिर के बाल और बूब्स को छूने और दबाने का कोई मौका नहीं छोडा. कई बार तो मैंने उसकी जाँघों पर भी हाथ साफ़ किया. वो कुछ नहीं बोली. एक दो बार तो मैंने उसके गालों पर प्यार भरी चपत भी लगा दी. मेरे लतीफों से तो वो हंसते हंसते उछल ही पड़ती थी. एक बार जब उसने अपना एक हाथ ऊपर किया तो उसकी ढीलीशर्ट के अन्दर कांख में उगे छोटे छोटे सुनहरे रेशम से रोएँ नजर आ ही गए. या अल्लाह…. उसकी पिक्की पर भी ऐसी ही सुनहरी केशर क्यारी बननी शुरू हो चुकी होगी. उसकी थोडी खुली और ढीली शर्ट में कैद छोटे छोटे चिक्कू? अमरुद? संतरे ? मुझे नजर आ ही गए. उनके उपर मूंग के दाने जितने स्तनाग्र और अट्ठन्नी के आकार का गुलाबी रंग का एरोला. मेरी आँखें तो फटी की फटी ही रह गयी. मेरा पप्पू तो अब पेंट के अन्दर घमासान मचाने पर तुला हुआ था. मुझे लगा कि आज ये मार खाए बिना नहीं मानेगा. मैंने जल्दी से एक किताब अपनी गोद में रख ली. एक दो बार तो मैंने उसकी जांघो पर हाथ रखने के बहाने उसकी पुस्सी को भी टच कर दिया. पता नहीं वो मेरे अन्दर की बात जानती होगी या नहीं ? हाँ मैंने देखा कि उसकी पिक्की के सामने वाला हिस्सा कुछ फूल सा गया है और पिक्की के छेद वाली जगह एक रुपये के सिक्के जितनी जगह गीली हो गई है. हमें कंप्यूटर पर बैठे हुए डेढ़ दो घंटे तो हो ही गए थे. मैं भी निरा बेवकूफ हूँ इस डेढ़ दो घंटे में मतलब की बात तो भूल ही गया. अचानक मेरे दिमाग में एक प्लान घूम गया और मेरी आँखें तो नए प्लान के बारे में सोच कर चमक ही उठी. आप जानते होंगे अगर किसी चीज को देखने या जानने के लिए मना किया जाए तो उस चीज के प्रति उत्सुकता ज्यादा बढ़ जाती है ख़ास कर छोटे बच्चो में. और मिक्की भले ही मेरी नजरों में जवान मस्त प्रेमिका हो लेकिन थी तो अभी बच्ची ही. मैंने कुछ हिरोइनों की नंगी फोटो, पिक्चर, फिल्म्स और ISS कहानियां एक फोल्डर में सेव कर रखी है. इस से अच्छा मौका और क्या हो सकता था मैंने बातों-बातों में उस फोल्डर और फाइल्स का पासवर्ड हटा दिया. अब मैंने मिक्की से कहा कि तुम इस फोल्डर में सेव्ड फाइल्स मत देखना. “क्यों ऐसा क्या है इसमें ?” मिक्की ने हैरानी से पूछा “अरे इसमें डरावनी फोटो है तुम डर जाओगी” “क्या जंगली छिपकलियाँ है ?” मैं जानता था उसे छिपकलियों से बहुत डर लगता है. मैंने कहा “हाँ हाँ ऐसी ही है” मैं अपने मकसद में कामयाब हो चुका था. मैंने कंप्यूटर ऑफ करते समय कनखियों से देखा था कि मिक्की ने पेंसिल से फोल्डर और फाइल का नाम नोट कर लिया है. हे भगवान् तेरा लाख लाख शुक्र है. मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा अब मंजिल नजदीक आ गई है. शाम के चार बज चुके थे. मधु ने कहा मिक्की को बाजार घुमा लाओ. मैं और मिक्की बाजार जाने की तैयारी करने लगे. मुझे तो क्या तैयारी करनी थी मिक्की ने जरूर अपने कपडे चेंज कर लिए. हलके पिस्ता कलर की टी-शर्ट और सफ़ेद जीन मेरे कत्ल का पूरा इंतजाम किया था उसने. आप तो जानते है जीन पेंट पहने गोल गोल कुल्हे मटकाती लड़कियां मेरी सबसे बड़ी कमजोरी है. हम लोग मोटरसाइकल पर बाजार के लिए निकल पड़े. मैंने उसे यहाँ का किला, गणेशस्थान मंदिर और लोहागढ़ फोर्ट आदि दिखाया. हमने एक रेस्तरां में पिज्जा और मटके वाली कुल्फी भी खाई. कुल्फी खाते हुए मैंने उसे मजाक में कहा कि इसे पूरा मुंह में लेकर चूसो बहुत मजा आएगा. मैं तो बस ये देखना चाहता था कि उसे अंगूठे के अलावा भी कुछ चूसना आता है या नहीं. एक स्टाल पर हमने गोलगप्पे भी खाए. गोलगप्पों का साइज़ थोडा बड़ा था. जिस अंदाज में पूरा मुंह खोलकर वो गोलगप्पे खा रही थी मैं तो बस यही अंदाजा लगा रहा था कि अगर मेरा 1½-2 इंच मोटा लंड ये मुंह में लेले तो कोई परेशानी नहीं होगी. आते समय हमने चोकलेट के 4-5 पैकेट, चुइंगम के 2 पैकेट, विडियो गेम्स की CD, 2 कॉमिक्स की किताबे, एक रिस्ट वाच, नाइके की एक टोपी और न जाने क्या क्या अल्लम पल्लम चीजें खरीदी. मैं तो आज उसे तोहफों से लाद देना और हर तरीके से खुश कर देना चाहता था. हाँ एक खास बात- मिक्की के लिए मैंने 2 फोमवाली पेंटीज, पैडेड ब्रा और एक झीनी सी नाइटी भी खरीदी. मैंने उसे समझाया कि इसके बारे में अपनी बुआजी या मम्मी को ना बताये. उसने मेरी ओर प्रश्नवाचक निगाहों से देखा पर बोली कुछ नहीं और हाँ में सिर हिला दिया. मैंने जब उससे कहा कि ये पहनकर भी मुझे दिखानी होगी तो उसने मेरी ओर भोलेपन से देखा पर जब बात का मतलब उसके समझ में आया तो वो शर्मा गई. ईईस्स्स्स…. हाय … इस अदा पर कौन न मर जाये ए खुदा. मैंने उस से कहा “देखो मैंने तुम्हारे लिए कितने गिफ्ट खरीदे हैं तुम मुझे क्या गिफ्ट दोगी ?” तो वो बड़े ही भोले अंदाज में बोली “मेरे पास क्या है गिफ्ट देने के लिए ?” मैंने अपने मन में कहा “अरे तुम्हारे पास तो कैरूं का खजाना है मेरी बुलबुल” पर फिर मैंने कहा “अगर चाहो तो कोई ना कोई गिफ्ट तो दे ही सकती हो” वो सोच में पड़ गयी. फिर बोली “अच्छा एक गिफ्ट है मेरे पास पर पता नहीं आपको पसंद आएगा या नहीं ?” “क्या है ? प्लीज बताओ ना ?” उसने अपनी जेब से एक रेशमी रुमाल निकला और बोली “मेरे पास तो देने को बस यही है.” “पता है ये रुमाल मैंने पिछले साल आगरा से खरीदा था ?” “अरे कहीं इस से नाक तो नहीं साफ़ कि है ?” मैंने हंसते हुए कहा “नहीं तो पर…. हाँ जब मैं मटके वाली कुल्फी चूस रही थी मैंने अपने होंठ जरूर साफ़ किये थे” उसने बड़ी मासूमियत से कहा. मैं तो इस अदा पर दिलो जान से फ़िदा हो गया, मर ही मिटा. मैंने उसके हाथ से रुमाल लेकर उसे चूम लिया. मिक्की जोर से शर्मा गई पता नहीं क्यों ? घर आते समय रास्ते में मैंने उसे बताया कि कल हम सभी लिंग महादेव का मंदिर देखने चलेंगे. शहर से 15-16 की.मी. की दूरी पर एक छोटी सी पहाडीपर यह शिव मंदिर है जिसमे 5 फुट का शिवलिंग बना हुआ है. यहाँ मान्यता है कि कोई पैदल नंगे पाँव आकर शिवलिंग पर 16 सोमवार कच्चा दूध चढाये तो उसकी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है. मैंने कभी इसे आजमाया नहीं था पर अब मेरा मन कर रहा था कि एक बार यह टोटका भी आजमा कर देख ही लूँ पर 16 सोमवार यानी 4-5 महीने…. यार थोडा कम नहीं हो सकता ? इन बातों से दूर मिक्की तो मेरी बात सुनकर झूम ही उठी. उसकी आँखों की चमक तो देखने लायक थी. लेकिन फिर उसने थोडी मायूसी से पूछा “क्या आप कल ऑफिस नहीं जाओगे ?” “अरे मेरी बिल्लो रानी तुम्हारे लिए छुट्टी ले लेंगे तुम क्यों चिंता करती हो” मैंने उसके गालों को सहलाते हुए कहा. वो शर्मा गई. उसके गाल अचानक लाल हो गए और उसने रस भरी आवाज और कातिलाना अंदाज में कहा “थैंक यू मेरे प्यारे फु.. फा… अर्ररर जी. जा. जी..ईईस्स्स्स्स्स्स… आज अगर इसी क्षण मृत्यु भी आ जाये तो कोई गम नहीं. Last edited by premguru; 19-06-2009 at 07:35 PM.. |
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#3
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Part-3
जब हम घर पहुंचे तो वहाँ बोम्ब फूट चुका था. रमेश अपने मार्केटिंग के काम से वापस आ गया था. उसने बताया कि सुधा के चाचा का एक्सीडेंट हो गया है और उन्हें आज ही दिल्ली जाना होगा. खबर सुनकर मेरा तो दिल ही बैठ गया. हे भगवान्. मिक्की ने जब सुना तो वो भी उदास हो गई. उसके चहरे से लगता था कि वो अभी रो पड़ेगी. “प्रेम हमें आज रात ही निकलना होगा क्या दिल्ली के लिए अभी कोई ट्रेन है ? रमेश ने पूछा. “हाँ ट्रेन तो है रात 10 बजे पर… रिज़र्वेशन..?” “कोई बात नहीं मैनेज कर लेंगे. अरे सुधा जल्दी करो सामान जचा लो मिक्की कहाँ है ?” रमेश ने सुधा को आवाज दी. “भाई साहब क्या सुबह नहीं जा सकते ?” मैंने पूछा “अरे यार सुधा और मेरा जाना बहुत जरूरी है” मुझे थोडी सी आशा बंधी मैंने कहा “पर मिक्की तो यहाँ रह सकती है ?” “वो अकेली यहाँ क्या करेगी ?” “बच्ची है पहली बार आई है थोडा घूम फिर लेगी वापस लोटते समय आप उसे भी साथ ले जाना” मैंने कहा “चलो ठीक है” रमेश गेस्टरूम की और चला गया जहां सुधा और मधु बैठी थी. मैं भागता हुआ अपने बेडरूम में गया मैंने देखा मिक्की बेड पर ओंधे मुंह लेटी रो रही है. ओह… हे.. भगवान् क्या कमायत के गोल गोल नितम्ब थे. मैंने उसकी जाँघों और नितम्बों पर हाथ फेरा और उसे प्यार से आवाज दी “अरे मिक्की माउस क्या हुआ ?” “जिज्जू मैं इनके साथ नहीं जाना चाहती प्लीज मम्मी पापा को मना लो प्लीज जिज्जू” उसने लगभग रोते हुए कहा “अच्छा चलो पहले अपने आंसू पोंछो शाब्बास गुड गर्ल अच्छे बच्चे रोते नहीं हैं ” मैंने उसके गालों पर हाथ फेरते हुए कहा. इतना बढ़िया मौका मैं भला कैसे छोड़ सकता था. “क्या पापा मान जायेंगे ?” “तुम चिंता मत करो मैंने उन्हें मना लिया है” “ओह मेरे अच्छे जिज्जू” मिक्की यकायक मुझसे लिपट गई और उसने मेरे गालों पर चूम लिया। मैं तो अवसर की तलाश में था !मैंने झटसे मिक्की को अपनी बाहों मे जकड़ लिया और अपने लब उसके गुलाबी लबों से मिला दिए। मेरे दोनों हाथ उसकी पीठ पर थे और मेरी जीभ उसके होठों के बीच में अपना रास्ता तलाशते तलाशते उसकी जीभ से जा मिली।कुछ पलों के लिए तो मैं अपनी सुधबुध ही खो बैठा और शायद वो भी ! लेकिन मिक्की होश में आई और अपने आप को मुझसे छुड़ा कर मेरे गाल पर एक चुम्बन ले कर बाथरूम में भाग गई अपना मुंह धोने। ये सब बहुत जल्दी और अप्रत्याशित हुआ था। मैंने अपने गालों को दो तीन बार उसी जगह सहलाया और फिर अपनी अंगुलियों को चूम लिया। जब मैं रमेश और सुधा को स्टेशन छोड़ कर वापस आया तो लगभग 11.30 बज चुके थे. मिक्की गेस्टरूम में सो चुकी थी. मैंने उस रात मधु को दो बार कस कस कर चोदा और एक बार उसकी गांड भी मारी. आज जिस तरीके से मैंने मधु को रगडा था मुझे नहीं लगता वो अगले 2 दिनों तक ठीक से चल फिर पाएगी. आज मेरा उतावलापन और बेकरारी देखकर मधु आखिर बोल ही पड़ी “आज आपको क्या हो गया है ? मुझे मार ही डालोगे क्या ? कहीं आप नशा तो नहीं कर आये हो ?” अब मैं उसे क्या बताता कि मैं तो मिक्की के नशे में अन्दर तक डूबा हुआ हूँ. मैं तो बस इतना ही बोल पाया आज तुम बहुत खूबसूरत लग रही हो मेरी जान और तीन चार चुम्बन उसके गालों पर ले लिए तो वो बोली “उन्ह्ह्ह… हटो परे झूठे कहीं के…” हम लोगो को सोते सोते रात के 2 बज गए थे. रात के घमासान के बाद सुबह उठाने में देर तो होनी ही थी. मैं कोई 8.00 बजे उठा. मधु पहले ही उठ चुकी थी. मधु ने मुझे जगाया और उलाहना देते हुए बोली रात में तो तुमने मेरी कमर ही तोड़ डाली. मैंने उसे फिर बाहों में भरने कि कोशिस की तो अपना हाथ छुडाते हुए बोली “सुबह सुबह छेड़खानी नहीं जाओ मोना को जगा दो मैं चाय बनाती हूँ “ मैं बाथरूम से फ्रेश होकर गेस्ट रूम में गया जहां मिक्की सोई हुई थी. मिक्की अभी भी बेसुध पड़ी सो रही थी. उसने अपना अंगूठा मुंह में ले रखा था और दूसरे हाथ से बेबी डोल को सीने से चिपका रखा था. बालों की एक आवारा लट उसके गालों पर बिखरी पड़ी थी. जिस अंदाज में वो सोई थी मुझे लगा कि वो अभी निरी मासूम बच्ची ही है. मुझ जैसे पढ़े लिखे आदमी के लिए ऐसी भावनाए रखना कदापि उचित नहीं है. पर मेरा ये ख़याल अगले ही पल हवा में काफूर हो गया. उसने फूलोंवाली फ्रोक और गुलाबी रंगकीपेंटी पहन रखी थी. वो करवट लेकर लेटी हुई थी. एक टांग थोडी सी ऊपर की ओर मुडी हुई. उसकी पुष्ट जाँघों को देखकर तो लगा जैसे वो कोई हॉकी की खिलाडी हो. पेंटी के अन्दर कसी हुई उसकी पिक्की एकदम फूली हुई थी. रोम विहीन टाँगे घुटनों से ऊपर उठी उसकी फ्रोक से झांकती हुई उसकी जाँघों की रंगत तो शरीर के दूसरे हिस्सों से कहीं जयादा गोरी थी. मैं तो बेसाख्ता आँखें फाड़े उस रूप की देवी को देखता ही रह गया.मेरा पप्पू तो बेकाबू होने लगा. मैं सोच रहा था कि उसे जगाने के लिए उसकी संगमरमरी जाँघों पर हाथ फेरूँ या नितम्बों पर जोर की थप्पी लगाऊं या उसके गालों पर एक पप्पी लेकर उसे जगाऊं ? धड़कते दिल से मैंने अपना एक हाथ और मुंह उसकी जाँघों की और बढाया ही था कि पीछे से मधु की आवाज आई “अरे मोना अभी उठी नहीं ? ऑफ.. ये लड़की भी कितना सोती है ?” मैं तो इस अप्रत्याशित आवाज से हडबडा ही गया. मुझे तो ऐसा लगा जैसे मेरा सारा खून रगों में जम ही गया है. आज तो मेरी चोरी पकडी गई है. पता नहीं मेरे मुंह से कैसे निकल गया. “हाँ हाँ उठा ही रही है” मुझे लगा अगर मैंने मधु की ओर देखा तो जरूर वो जान जायेगी और मुझे जिन्दा नहीं छोडेगी मैं तो कहीं का नहीं रहूँगा. पर भगवान् का लाख लाख शुक्र है वो रसोई में चली गई थी. अगर एक दो सेकंड की भी देरी हो जाती तो ?? सोच कर मैं तो सूखे पत्ते की तरह काँप गया. मैं तो तब चोंका जब मिक्की ने आँखे मलते हुए कहा “गुड-मोर्निंग फूफाजी” मैं भला क्या कहता. मिक्की बाथरूम में चली गई. मेरी हालत तो उस निराश शिकारी की तरह हो रही थी जिसके हाथ में आया हुआ शिकार छूट गया हो. मैं बाहर लॉन में पड़ी चेयर पर बैठ कर न्यूज़ पेपर पढ़ने लगा. गर्मियों की छुटियाँ चल रही थी इसलिए मधु को तो वैसे ही स्कूल नहीं जाना था (मधु बच्चों के एक स्कूल में डांस टीचर है) और मैंने आज बंक मरने का इरादा पहले ही कर लिया था वैसे भी आज बुद्ध पूर्णिमा की छुट्टी थी. मैं चाहता था कि मिक्की और मधु पहले नहा धो ले में तो आराम से नहाना चाहता था. मुझे आज अपने पप्पू का मुंडन भी करना था. आप तो जानते ही है मधु को लंड और चूत पर झांटे बिलकुल अच्छी नहीं लगती. उसने कल रात भी उलाहना दिया था. पर मैं तो कुछ इस से आगे भी सोच रहा था. क्या पता कब किस्मत मेरे ऊपर निहाल हो जाये और मेरी मोनिका डार्लिंग मेरी बाहों में आये तो मैं एक हैंडसमचिकने चुपड़े आशिक की तरह लगूं. वैसे एक कारण और भी था.गुरूजी कहते है झांटों की सफाई करने के बाद लंड और चूत दोनों की सुन्दरता बढ़ जाती है और लंड का आकार बड़ा और चूत का छोटा नजर आने लगता है. वैसे तो ये नज़र का धोखा ही है पर चलो इस खुशफहमी में बुरा भी क्या है. खैर कोई 12-12.30 बजे मैं नहा धोकर फारिग हुआ. मिक्की स्टडी रूम से बाहर आ रही थी. उसकी नज़रें झुकी हुई थी और साँसे उखड़ी हुई माथे पर पसीना. वो मुझसे नज़रें नहीं मिला रही थी. वो मेरी और देखे बिना मधु के पास रसोई में चली गई. पहले तो मैं कुछ समझा नहीं पर बाद में मेरी तो बांछें ही खिल गई. ओह मिक्की डार्लिंग ने जरूर वो ही ‘जंगली छिपकलियों’ वाला फोल्डर और फाइल्स देखी होंगी. थैंक गोड. आईला…. मेरा दिल किया जोर से पुकारूं – ‘मोनिका… ओ... माई.. डार्लिंग’. कोई आधे घंटे बाद मिक्की नास्ता लेकर आई. उसकी नज़रें अभीभी झुकी हुई थी. ऊपर से वो नोर्मल बनाने की कोशिस कर रही थी. मैंने उसे पूछा “क्या बात है ?” तो वो बोली “कुछ नहीं आआन्न… वो…. वो हम मंदिर कब चलेंगे ?” मैंने उसके चहरे की और गौर से देखते हुए कहा “शाम को चलेंगे अभी तो बहुत गरमी है” आज कामवाली बाई गुलाबो नहीं उसकी लड़की अनारकली आई थी. मैं सोफे पर बैठा TV देख रहा था. जब मिक्की रसोई में जा रही थी तो अनारकली उधर देखते हुए मेरे पास आकर फुसफुसाने वाले अंदाज में आँखें मटकते हुए बोली “ये चिकनी लोंडिया कौन है ?” मैंने उसके दोनों संतोरों को जोर से दबाते हुए कहा “क्यों लाल मिर्च से जल गई क्या ?” “जले मेरी जूती” पैर पटकते हुए वो अपना मुंह फुलाते हुए वो अन्दर चली गई. आप चोंक गए न ? मैं आपको बताना भूल गया कि अनु हमारे यहाँ काम करनेवाली बाई गुलाबो की लड़की है जिसे मैं कई बार चोद चूका हूँ और उसकी गांड भी मार चूका हूँ. वो तो समझती है कि सारी खुदाई छोड़ कर मैं तो बस उसपर ही मोर हूँ. उसे हम भंवरों की कैफियत का क्या गुमान. वैसे भी भगवान् ने औरतों को दूसरी किसी भी सुन्दर औरत के लिए ईर्ष्यालू बनाया ही है तो इसमें बेचारी अनारकली का क्या दोष है. पर इस “मेरी अनारकली”की कहानी अभी नहीं. शाम को कोई चार बजे मैं और मिक्की लिंग महादेव मंदिर पर जाने के लिए तैयार हो गए. मधु ने वोही कमर दर्द का बहाना बनाया और साथ नहीं गई. मैं इस कमर दर्द का मतलब अच्छी तरह जानता था. मिक्की को जब ये पता चला कि बुआजी साथ नहीं जा रही तो वो बहुत खुश हुई पता नहीं क्यों. दो जनो के लिए तो कार की जगह बाइक ही ठीक थी. मिक्की ने सफ़ेद पेंट और गहरे बादामी रंग और फूलों वाला एकओर से झूलता हुआ कुर्ता पहन रखा था. सिर पर वोही नाइके वाली टोपी, कलाई में रिस्ट वॉच . मैं तो अभी ये सोच ही रहा था कि मिक्की ने जरूर वोही पेंटी और पैडेड ब्रा भी पहनी होगी जो कल शाम हमने खरीदी थी. पैडेड ब्रा के कारण उसके बूब्स की साइज़ 34 तो जरूर लग रही थी. होंठोंपर हलकी सी लाल लिपस्टिक. आज मैंने भी अपनी काली जीन और पसंदीदा टी-शर्टपहनी थी. इम्पोर्टेड परफ्यूम स्पोर्ट्स शूजऔर नाइके की टोपी. “बिल्लो रानी कहो तो अभी जान दे दूँ…” मैं मस्ती से गुनगुनाता जब बाहर आया तो मिक्की ने मुझे घूर कर ऊपर से नीचे तक देखा. फिर एक आँख मारते हुए बोली “ओये होए क्या बात है आज तो बड़े जच रहे हो किसी को कत्ल करना है क्या ?” मैं क्या बोलता. “अच्छा बताओ मैं कैसी लग रही हूँ ?” मिक्की ने आँखे नचाते हुए कहा “बिलकुल बंदरिया लग रही हो” मैंने उसे चिढाने के अंदाज में कहा तो उसने अपना मुंह फुला लिया. मेरा इरादा उसे नाराज़ करने का कतई नहीं था. मैं तो उसे सपने में भी नाराज करने की नहीं सोच सकता. मैंने उसके गालो पर थप्पी लगाते हुए कहा “बिलकुल हंसिका मोटवानी और करीना कपूर लग रही हो सच में” “परे हटो.. हुंह झूठे कही के ?” जिस अदा से उसने ये कहा था मुझे मधु का रात वाला डाइलोग याद आ गया. इसी लिए तो कहते है वंशानुगत भी कई चीजे होती है. मिक्की मोटर साइकल पर मेरे पीछे चिपक कर बैठी हुई थी उसका एक हाथ मेरी कमर को नाभि के थोडा नीचे कस कर पकडे हुए था. उसने अपना सिर मेरे कंधे पर रखा था और एक हाथ गले में डाल रखा था. जिस तरीके से वो मेरे साथ चिपक कर बैठी थी मुझे नहीं लगता मिक्की अब छोटी बच्ची रह गई है. उसकी गोलाइयां मेरी पीठ पर आसानी से महसूस हो रही थी. आज उसने भी शायद अपनी बुआजी की ड्रेसिंग टेबिल का पूरा फायदा उठाया था. पिछले जन्मदिन पर जो इम्पोर्टेड परफ्यूम मैंने मधु को गिफ्ट दिया था उसकी महक भला मैं कैसे नहीं पहचानता. मैं तो इतना मदहोश हो रहा था कि मुझे लगने लगा कही मैं कोई एक्सीडेंट ही कर बैठुगा. जहां से पहाडी पर मंदिर के लिए रास्ता शुरू होता है श्रद्धालु नंगे पैर ही ऊपर पैदल जाते है. मोटरसाइकल स्टैंड पर खड़ी करने और जूते उतारने के बाद मैंने मिक्की को बताया ऊपर पीने का साफ़ पानी नहीं मिलेगा अगर पीना है तो यहीं पी लो. मिक्की पानी की पूरी एक बोतल डकार गई और मैंने जानबूझ कर उसे बाद मैं फ्रुइटी के 2-3 पाउच और पिला दिए. आप इतने भी कमअक्लनहीं है कि मेरी इस चाल को न समझ रहे हो. पर मिक्की इन सब बातों से परे कुछ और खाने पीने की फिराक में थी. हमने प्रसाद के साथ कुछ स्नेक्स, मिठाइयां और बंदरों के लिए भुने हुए चने लेने के बाद मंदिर के लिए चढाई शुरू कर दी. मंदिर की दूरी यहाँ से कोई 2 km है. आज सोमवार का दिन था पर भीड़ कोई ज्यादा नहीं थी कोई इक्के दुक्के ही श्रद्धालु थे क्यों कि लोग सुबह सुबह दर्शन करके चले जाते है. हमारे जैसे प्यार के परवाने अपनी शमा के साथ शाम को ही आते हैं. दर्शन करने और कच्चा दूध-जल चढाने के बाद जब हम मुख्य मंदिर से बाहर आये तो मैंने मिक्की से पुछा तुमने क्या मन्नत माँगी तो वो कुछ सोचने लगी और फिर बोली “नहीं पहले आप बताओ” मेरे जी में आया साफ़ कह दूं मैंने तो बस तुझे ही माँगा है पर ये कहना इतना आसान भी नहीं था मेरे दोस्तों और दोस्तानियो. मैंने घुमा फिरा कर कहा “जो तुमने माँगा वो ही मैंने मांग लिया” “क्या…. ? आपने भी.. मतलब… याने …. ओह.. ?” वो आश्चर्यसे मेरा मुंह देख रही थी जैसे मैंने उसकी कोई शरारत या चोरी पकड़ ली हो. जब उसे अपनी बात समझ आई तो शर्म से दोहरी गई. मैं तो निहाल ही हो गया. मंदिर के पीछे थोडा खुला आँगन सा है जहां पर तीन तरफ 2-2 फ़ुट की दीवार बनी है नीचे गहरी खाई और झाड़ झंखाड़ है. यहाँ काले मुंह वाले लंगूर बहुत है जो पेडोंपर उछल कूद मचाते रहते है. आने वाले श्रद्धालू उन्हें भुने हुए चने, केले आदि डाल देते है. बच्चो का तो ये मनपसंद खेल होता है. फिर मिक्की भी तो अभी बच्ची ही थी ऐसा मौका वो भला क्यों छोड़ती. उसने भी बंदरों को चने डालने शुरू कर दिए. हम लोग एक कोने में खड़े थे. थोडी दूर दूसरे कोने में एक नवविवाहित जोड़ा अपनी गुटरगूं में व्यस्त था. लड़का शायद उसका चुम्बन लेना चाहता था पर लड़की शर्म के मारे उसे मना कर रही थी. मैंने देखा मिक्की बड़े गौर से उनको देख रही है. मैं चुप रहा. थोडी देर बाद वो दोनों उठकर चले गए तब मिक्की को शायद मेरी याद आई. “जिज्जू थोडी देर बैठें ?” “हाँ यहीं दीवार के पास बैठ जाते हैं” हम दोनों पास पास बैठ गए. एक हलका सा हवा का झोंका आया तो मिक्की के बदन की कुंवारी खुश्बू मेरे तन मन को अन्दर तक सराबोर करती चली गई. मिक्की बंदरों को दाने डाल रही थी. कभी ऊपर उछालतीकभी दूर फेंक देती बंदरों की इस उछल कूद से उसे बहुत मज़ा आ रहा था. मैंने उसे समझाया कि इनको ज्यादा मत सताओ नहीं तो ये काट खाएँगे पर मिक्की तो अपनी ही धुन में थी. पेड़ की एक डाली पर एक बन्दर अपनी लुल्ली निकाले उसे छेड़ रहा था. मिक्की उसे बड़े ध्यान से देख रही थी. इतने में एक बंदरिया आई और बन्दर उसके ऊपर चढ़ कर आगे पीछे धक्का लगाने लगा. मिक्की ने बिना अपनी नज़रें हटाये मुझ से बोली “देखो जिज्जू ये बन्दर क्या कर रहे है ?” उसे क्या पता वो बेखयाली में क्या बोल गई है. मेरे लिए भी ये अप्रत्यासित था. अब आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकते हैं मैंने अपने पप्पू को किस तरह से रोक रखा था. अगर ये घर या कोई सूनी जगह होती तो निश्चित ही मैं कुछ कर बैठता. पर मैंने उसे कहा “ये आपस में प्यार कर रहे हैं इनका भी शुक्र पर्वत तुम्हारी तरह बहुत ऊंचा है.” अचानक वो बोली “वो कैसे क्या आपको …? क्या आपको हाथ देखना आता है ?” आपको बता दूँ मैं थोडा बहुत हस्त रेखाएं देख लेता हूँ. पूरा तो नहीं जानता पर जीवन रेखा, हृदय रेखा आदि तो थोडा बहुत बता ही देता हूँ. बाकी तो गप्प लगाने वाली बात है. किसी को भी प्रभावित कर लेना मेरे बाए हाथ का खेल है. मैं जानता हूँ ये सब उसे उसकी मम्मी ने बताया होगा. क्यों कि मैं सुधा को भी एक दो बार पपलू बना चूका हूँ. उसे भविष्य और हाथ की रेखाओं को जानने की बड़ी इच्छा रहती है. “हाँ.. हाँ.. आओ” मैंने उसे अपने पास खेंचते हुए कहा. मैंने उसका बायाँ हाथ अपने हाथ में ले लिया. हाथ के नाखून थोड़े बढे हुए थे. उनपर नेल पोलिश लगी हुई थी. बाएँ हाथ का अंगूठा थोडा सा पतला लग रहा था और उस पर नेल पोलिश भी नहीं लगी थी. मैंने उससे पुछा “मिक्की क्या तुम अभी भी अंगूठा चूसती हो ?” “हाँ कभी कभी” उसने नज़र जुखाते हुए कहा. “तुम्हारी मम्मी तुम्हें मना नहीं करती क्या ?” “वो तो बहुत गुस्सा होती है” “तो फिर तुम ऐसा क्यों करती हो ?” “एक्चुअली मुझ से अनजाने में ऐसा हो जाता है” “अनजाने में हो जाता है या तुम्हे इसमें मज़ा भी आता है ?” “हाँ सच कहूँ तो जब मैं अकेली होती हूँ तो मुझे अंगूठा चूसने में बहुत मज़ा आता है” उसने मेरी आँखों में देखते हुए जवाब दिया. “अब तुम्हारी अंगूठा चूसने की उम्र नहीं रही है कुछ और भी चूसना सीखो ?” “और क्या चूसने की चीज होती है जीजाजी ?” उसने आँखें मटकाते हुए कहा “जैसे कि….. जैसे कि …” मैं गडबडा गया लेकिन फिर बात संभालते हुए कहा “जैसे कि आइस कैंडी लोलीपोप और… और…. कुल्फी…बहुत सी चीजे हैं जिन्हें तुम प्यार से चूस सकती हो” मेरे जी में तो आया कि कह दूँ अब तो तुम्हे लंड चूसना सीखना चाहिए पर मैं अभी कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था. शुरू शुरू में थोडा संयम बरतना होगा नहीं तो ये चिडिया मेरे हाथों से फुर्र हो जायेगी.वैसे तो मैं भी यही चाहता था कि वो अंगूठा चूसना जारी रखे. इसका एक कारण है?हमारे गुरूजी कहते है जो लड़की बचपन में अंगूठा चूसती है वो अपने प्रेमी या पति की अच्छी प्रेमिका और पत्नी साबित होती है और उनका दाम्पत्य जीवन बहुत ही अच्छा और सुखी बीतता है. मतलब आप बिलकुल अच्छी तरह समझ गए होंगे. मैं बातो का सिलसिला रोमांटिक करना चाहता था मैंने पूछा “अच्छा मिक्की एक बात बताओ” “क्या ?” “तुम फिल्म देखती हो ?” “उम्म्म… हाँ ?” “अच्छा बताओ तुम्हारा मनपसंद हीरो कौन है ?” “मेरा उम्म्म…. हाँ.. मुझे तो अनिल कपूर अच्छा लगता है” मैं तो सोच रहा था कि वो शाहिद कपूर, रणबीर कपूर, ऋतिक रोशन जैसे किसी चिकने चौकलेटी हीरो का नाम लेगी. मैंने उस से कहा “अनिल कपूर..? अरे वो मुच्छड़ ?” “पता है उसने मिस्टर इंडिया में कितना अच्छा काम किया है ? उसके पास एक जादू का रिस्ट बैंड होता है जिसको कलाई में पहन कर वो गायब हो जाता है” मिक्की ने ऑंखें नचाते हुए कहा फिर ठंडी सांस लेते हुए बोली “काश ऐसा ही बैंड मेरे पास भी होता ?” “अच्छा आप बताओ आप को कौन पसंद है ?” मिक्की बोली “आन.. मुझे ? मुझे तो अजय देवगन अच्छा लगता है” “अरे.. वो अकडू… ओह नो.. आप झूठ बोल रहे है ?” “इसमें झूठ बोलने वाली क्या बात है ?” मैंने कहा “पर लड़को और आदमियों को तो फ़िल्मी हेरोइन पसंद होती है न ? और अजय देवगन कोई लड़की थोड़े ही है ?” मिक्की मेरा मखौल उडाते हुए हँसने लगी. “ओह…..” मेरी भी हंसी निकल गयी. मैंने बात संवारते हुए कहा “भई मुझे तो सबसे ज्यादा मिक्की ही अच्छी लगती है और कोई नहीं” मैंने उसकी नाक पकड़ते हुए कहा. मुझे तो बस उसके गाल, होंठ, नाक या नितम्ब कुछ भी छूने का बस बहाना ही चाहिए होता था. इस मौके पर मैं चाहता तो मिक्की को जोर से अपनी बाहों में भर कर चुम्बन भी ले सकता था पर थोडी दूर पर 2-3 लौंडे लपाड़े खड़े हमारी ओर ही देख रहे थे, मैंने अपने आप को बड़ी मुश्किल से रोका. “हूँ… ह…” मिक्की ने मुंह सा बनाया “अरे भई सच … बाय गोड मैं तुमसे बहुत प्यार… अररर… मेरा मतलब है प्रेम… वो.. वो.. बहुत चाहता हूँ मैं तुम्हें….” मेरी जबान साथ नहीं दे रही थी. मिक्की खिलखिला कर हंस रही थी “वो तो मुझे पता है आप मेरे पीछे पागल है और मेरे ऊपर लट्टू है पर मैं तो फ़िल्मी हिरोइन की बात कर रही थी” मिक्की ने अपने हाथों से अपनी हंसी रोकने की कोशिश करते हुए कहा मैं इस फिकरे का मतलब अगले दो दिनों तक सोचता ही रहा था. मैंने फिर बात संवारते हुए कहा “उम्म्म…. हाँ… चलो मुझे जिया खान सबसे सुन्दर लगती है” “जि….इ… अ… जिया खान अरे वो.. एक नंबर की चीट … धोखेबाज” “क्यों उस बेचारी ने तुम्हारा क्या बिगाडा है ?” “अरे आप उसे बेचारी कहते है आप नहीं जानते उसने निशब्दमें अमित अन्कल से पहले तो प्यार का नाटक किया और बाद में छोड़ कर चली गयी.. च... च…. बेचारे अमित अंकल उसकी याद में कितना रोये थे. मैं होती तो कभी छोड़ कर न जाती” मिक्की ने जिस अंदाज में कहा था मैं तो उसकी इस अदा पर दिलो-जान से कुर्बान ही हो गया. साला रामगोपाल वर्मा भी एक नंबर का गधा है अगर निशब्द बनानी ही थी तो मिक्की और मुझे लेकर बनाता तो बात ही कुछ और होती मेरा दावा है गोल्डन जुबली तो जरूर हो जाती. खैर मैंने बातों का रुख बदलते हुए पूछा “अच्छा बताओ तुम्हारी एज क्या हुई है” “आने वाले 11 सितम्बर को में मैं पूरी 14 साल की हो जाउंगी.. क्यों ?” “यानी अभी तुम 13 साल और 8 महीने की हुई हो” “उन्.. हाँ..” “तुम जानती हो 11 सितम्बर को और क्या हुआ था ?” मेरा मतलब अमेरिका के ऊपर बिन लादेन वाले हमले की ओर था. “ओफ्फो… जिज्जू .. आप भी… छोडो इन बातों को मेरा हाथ देखो ना” मिक्की थोडा सा झुंझलाते हुए बोली मैंने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया. नाज़ुक मुलायम चिकनी हथेली और पतली पतली अंगुलियाँ. इन नाजुक हाथों से अगर ये मेरा पप्पू पकड़ ले तो मैं सारी कायनात न्योछावर कर दूँ. उसके हाथ को थोडा सीधा करते हुए और धीरे धीरे मसलते हुए मैंने कहा : “देखो ये तुम्हारी जीवन रेखा है” मैंने ध्यान से देखा 14 साल की उम्र में उसे बहुत बड़ा शारीरिक कष्ट आने वाला है. मैं इस कष्ट को अच्छी तरह जानता था पर मैंने उसे नहीं बताया. “हाँ आगे बताइये” “अच्छा ये तुम्हारी विद्या रेखा है” मैंने अपने अंगुली को विद्या रेखा वाली जगह रखा तो मेरी ओर देखने लगी. मैंने पूछा “तुम जीवन में आगे क्या बनाना चाहती हो ?” “पापा तो कहते है तुम MBA या CA कर लो. आप क्या कहते हो ?” “मैं तो MBBS करके डॉक्टर बनना चाहता था पर नहीं बन पाया क्या तुमने कभी डॉक्टर बनाने के बारे में नहीं सोचा ?” “अरे बापरे उसमे तो बहुत पढाई करनी पड़ती है ? आँखों पर मोटा सा चस्मा लग जाता है “ “तो क्या हुआ कुछ बनाने के लिए कुछ मेहनत तो करनी ही पड़ती है. और फिर दूसरो को इंजेक्शन लगाने में तुम्हे मजा भी तो आएगा” वो हैरानी से मुझे देखने लगी और मैं हँसनेलगा. मिक्की ने कहा “चलो वो बाद में सोचेंगे हाँ आगे बताइये” “और ये तुम्हारी हार्ट लाइन है” “हुम्म्म्म्म” “और ये शुक्र पर्वत है” मैंने एक रेखा की और इशारा करते हुए कहा “हाँ हाँ शुक्र पर्वत के बारे में बताइये” “क्यों तुम शुक्र पर्वत के बारे में ही क्यों जानना चाहती हो तुम्हें जीवन रेखा या हृदय रेखा के बारे में नहीं जानना ?” मैंने पूछा “नहीं पहले शुक्र रेखा आई मीन पर्वत के बारे में बताइये” वो फिर जिद्द करने लगी. उसने बाद में बताया था कि एक दिन कोई पंडितजी उनके घर आये थे और वो मम्मी का हाथ देख रहे थे. पर जब शुक्र पर्वत की बात आई तो पंडितजी और मम्मी ने उसे बाहर भेज दिया था. पता नहीं ऐसी क्या बात थी जो उसके सामने नहीं बताना चाहते थे. अगर आपको थोडा बहुत हस्त रेखाओं का ज्ञान हो तो आप जानते होंगे कि शुक्र ग्रह को सेक्स का ग्रह माना जाता है. जिसका शुक्र पर्वत जितना ऊँचा उठा होता है सेक्स के मामले में वो उतना ही ज्यादा स्ट्रोंग होता है.मैं जानता हूँ सुधा एक नंबर की चुद्दकड़ है. जब से रमेश एक एक्सीडेंट के बाद सेक्स के मामले में कुछ ढीला हुआ है सुधा के सेक्स कि भूख और ज्यादा बढ़ गई है. मैं भी उसे चोद चूका हूँ उसकी गांड भी मार चुकाहूँ. ऐसी औरतें एक मर्द से कभी संतुष्ट नहीं होती. (खैर मेरा ये अनुभव ‘नन्दोइजी नहीं लंन्दोइजी’नाम से बाद में पढ़ लेना) हे भगवान् तू कितना दयालु है. मेरे जैसे भक्त के ऊपर कितना मेहरबान है. मिक्की का शुक्र पर्वत उसकी मम्मी से भी ज्यादा ऊंचा है. आप समझ गए होंगे मेरी तो लाटरी ही लग जायेगी. इतनी हसीं नाज़ुक कमसिन कच्ची कली मेरे सामने अपना हुश्न लुटाने बेताब बैठी है. या अल्लाह…. सॉरी.... लिंग महादेव… “ओफ्फो… जीजू बताइयेना ?” “हाँ हाँ… देखो ये जो शुक्र पर्वत होता है ये काम गुरु होता है और उसे कण्ट्रोल करता है” मैंने उसे समझाते हुए कहा “ये काम गुरु क्या होता है ?” मिक्की ने पूछा अब मेरे लिए उलझन का वक़्त था. क्या सब कुछ स्पस्ट शब्दों में बोल दूँ या फिर थोडा घुमा फिरा कर उसे समझाऊं. मेरा पप्पू और दिल तो कह रहे थे गुरु लोहा गरम है और खुदा महरवान है (क्या पता इतनी जल्दी लिंग महादेव प्रसन्न हो गए हों) मार दो हथोडा क्यों इधर उधर भटक रहे हो. इस कच्ची कली को प्यार से लंड और चूत की परिभाषा साफ़ साफ़ बता दो. लेकिन फिर मस्तिस्क ने कहा कुछ पर्दा तो रखो अगर उसने अपनी मम्मी या बुआजी से कुछ उलटा सीधा कह दिया तो हाथ में आई मछली फिसल जायेगी और तुम जिंदगी भर इस कमसिन कली की याद में अपना लंड हाथ में लिए मुठ मारते रह जाओगे. इस अनछुई नाज़ुक चूत (सॉरी बुर) को चोदने के सारे सपने एक मिनट में स्वाहा हो जायेंगे. मैंने एक जोर का सांस लिया और एक मिनिट में सब कुछ सोच लिया. मैं इतना पागल नहीं था कि ऐसा सुन्दर मौका हाथ से निकल जाने देता. “देखो मैं तुम्हे साफ़ साफ़ समझा तो दूंगा पर मेरी एक शर्त है ?” मैंने कहा “वो क्या ?” मिक्की ने हैरत भरी नज़रों से मुझे देखा “देखो तुम्हारी मम्मी भी कुछ बाते तुमसे छुपाती हैं ? है ना ?” “हां..न..न ?” “तो तुम भी वादा करो कि हमारे बीच जो बाते हो रही है या भविष्य में होंगी उनके बारे में अपनी मम्मी या बुआजी किसी को कभी नहीं बताओगी” “ठीक है” “प्रोमिस” “हाँ प्रोमिस.. पक्का” मिक्की ने हामी भरी. दोस्तों अब तो बस मेरी मंजिल का फासला कोई दो कदम का ही रह गया था. लेकिन दिल्ली अभी दूर थी. अचानक एक बन्दर उछलताहुआपता नहीं कब हमारे बीच आया और मिक्की के हाथों से मिठाई और चने का पैकेट छीन कर भाग गया. मिक्की की घिघ्घी बंध गई और डर के मारे मुझ से लिपट गई. हे भगवान् …. उसके नाजुक कबूतर (उरोज) मेरे दोनों हाथों में आ गए मैंने उसे अपनी बाहों में समेट लिया वो मम्मी मम्मी चिल्ला रही थी. मैं उसको चुप कराने की कोशिश कर रहा था और कोशिश क्या मैं तो इस सुखद घटना का पूरा फायदा उठा रहा था. कभी उसके नरम गालों पर हाथ फेरता कभी उसके नितम्बों पर कभी उसके उरोजों पर. मिक्की किसी अबोध डरे हुए बच्चे की तरह मुझसे लिपटी थी जैसे कोई लता किसी पेड़ से. उसका दिल बहुत जोर से धड़क रहा था. वो मेरे सीने से चिपटी रोये जा रही थी. इतने में दो तीन आदमी और औरतें भागते हुए आये और पूछने लगे क्या हुआ. मैंने उन्हें कहा कुछ नहीं थोडा सा डर गई है एक बन्दर मिठाई का लिफाफा छीन कर भाग गया और ये डर गई. अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था. हमने जल्दी जल्दी वहाँ से उतरना चालू कर दिया. शाम होने वाली थी. मिक्की डर के मारे एक बच्चे कीतरह मेरा बाजू पकडे मुझसे चिपकी हुई थी. मेरे लिए तो ये स्वर्णिम अवसर था. मैं भला ऐसा सुन्दर मौका कैसे छोड़ सकता था मैंने भी उसे अपने से चिपटा लिया. हे महादेव तुमने तो मेरी एक ही सोमवार में सुन ली. कोई 7 बजे का समय रहा होगा. अब एक और खूबसूरत हादसा होने वाला था. मिक्की ने चढाई शुरू करने से पहले पूरी एक बोतल पानी और 2-3 फ्रूटी भी पी थी. अब भला पेट का क्या कसूर सु सु तो आना ही था ? “फूफाजी मुझे सु सु आ रहा है” वो संकुचाते हुए बोली. अब वहाँ बाथरूम तो था नहीं तो मैंने कहा “जाओ उस बड़े पत्थर के पीछे कर आओ.” वो डर के मारे अकेली नहीं जाना चाहती थी. “नहीं आप मेरे साथ चलो आप मुंह दूसरी तरफ कर लेना ?” आप सोच सकते है मेरी जिन्दगी का सबसे खूबसूरत पल आने वाला था. मेरी तो मनमांगी मुराद ही पूरी होने वाली थी. हम पत्थर के पीछे चले गए. मैंने थोडा सा मुंह घुमा लिया. मन में आया कि मिक्की से फिर कह दूं क्या अपनी पेंटी नीचे नहीं करवानी ? पर अभी ये मज़ाक का वक़्त नहीं था. वो पेंटी खोल कर जल्दी से नीचे बैठ गयी. बुर से निकलती हुई पतली पेशाब की पीइस्स्स्स .. सीई…… का सिस्कारा और उससे आती मदहोश करने वाली महक मेरे लिए नयी नहीं थी. काली पेंटी में फंसी उसकी खूबसूरत हलके हलके सुनहरी रोएँ जैसे बालोंसे सजी नाज़ुक सी बुर अब केवल 2-3 फीट की दूरी पर ही तो थी. जिसके लिए आदमी तो क्या देवदूत भी स्वर्ग जाने से मना कर दें. मैंने अपने आप को बहुत रोका पर उसकी बुर को देख लेने का लोभ संवरण नहीं कर पाया. उफ़ .. भूरे भूरे छोटे छोटे सुनहरे बालो (रोएँ) से लकदक उसकी पिक्की का चीरा कोई 3 इंच का तो जरूर होगा. गुलाबी पंखुडियां. ऊपर चने के दाने जीतनी रक्तिम मदन मणि गुलाबी रंगत लिए भूमिका चावला और करीना कपूर के होंठों जैसी लाल सुर्ख फांके. फूली हुई तिकोने आकार की उसकी छोटी सी बुर जैसे गुलाब की कोई कली अभी अभी खिल कर फूल बनी है. मैं उसे छू तो नहीं सकता था पर उसकी कोमलता का अंदाजा तो लगा ही सकता था. अगर चीकू को बीच में से काट कर उसके बीज निकाल दिए जाएँ और उसे थोडा सा दबाया जाए तो पुट की आवाज के साथ उसका छेद थोडा सा खुल जायेगा अब आप आँखें बंद करके उसे प्यार से स्पर्श कर के देखिये उस लज्जत और नाज़ुकी को आप महसूस कर लेंगे. बुर के चीरे से कोई एक इंच नीचे गांड का गुलाबी भूरा छेद खुल और बंद होता ऐसे लग रहा था जैसे मर्लिन मुनरो अपने होंठों को सीटी बजाने के अंदाज में सिकोड़ रही हो. उसके गोल गोल भरे नितम्ब जैसे कोई खरबूजे गुलाबी रंगत लिए हुए किसी को भी अपना ईमान तोड़ने पर मजबूर कर दे. केले के पेड़ जैसी पुष्ट चिकनी जंघाएँ. इस जन्नत भरे नजारे को देखने के बाद अब अगर क़यामत भी आ जाए तो कोई डर नहीं. बरसों के सूखे के बाद सावन जैसी पहली बारिश की फुहार से ओतप्रोत मेरा तन मन सब शीतल होता चला गया. उस स्वर्ग के द्वार (रति-द्वार) को देख लेने के बाद अब और क्या बचा था. मुझे लगा कि मैं तो बेहोश ही हो जाऊँगा. मेरे शेर ने तो पेंट में ही अपना दम तोड़ दिया. पर इस दृश्य के बाद मेरे शेर के शहीद होने का मुझे कोई गम नहीं था. मिक्की आँखें बंद किये धाराप्रवाह पेशाब करते जा रही थी. मैं यही सोच रहा था कि स्वर्ग के द्वार से अभी तक मिक्की ने केवल मूतने का ही काम क्यों लिया है. जब वो उठी तो किसी पेड़ से एक पक्षी पंख फडफडाता कर्कश आवाज करता हुआ उडा तो मिक्की फिर डर गयी और इस बार फिर मेरी और दौड़ने के चक्कर में उसका पैर फिसला और पैर में थोडी सी मोच आ गयी. इतने खूबसूरत हादसे के बाद फिर ये तकलीफदेह दुर्घटना हे भगवान् क्या सब कुछ आज ही होने वाला है ?? Last edited by premguru; 19-06-2009 at 07:36 PM.. |
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#4
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जब हम घर पहुंचे तो मिक्की को लंगडाते हुए देख कर मधु ने घबरा कर पूछा “अरे कहीं एक्सीडेंट तो नहीं हो गया ? क्या हुआ मोना को ?”
“अरे कुछ ख़ास नहीं थोडा सा फिसल गई थी लगता है मोच आ गयी है” “हे भगवान् ध्यान से नहीं चल सकते थे क्या ? ऑफ… इधर आओ जल्दी करो लाओ आयोडेक्स मल देती हूँ” मधु घबरा सी गयी. “नहीं बुआजी कोई ज्यादा चोट नहीं लगी है” मिक्की ने बताया “चुप… तुझे क्या पता कहीं फ्रेक्चर तो नहीं हो गया ? किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाया उसी समय ?” मधु बिना किसी की बात सुने बोलती जा रही थी. आयोडेक्स लगाने, नमक वाले पानी से सिकाई करने, हल्दी वाला दूध पिलाने और इतनी गर्मी में भी चद्दर उढा कर सुलाने के बाद ही मधु ने उसका पीछा छोडा. मैं बाथरूम में जाकर अपना अंडरवियर चेंज करके जब ड्राइंग रूम में आया तो वहाँ पर मिठाई का एक डिब्बा पड़ा हुआ नज़र आया. मैंने मधु से जब इसके बारे में पुछा तो उसने बताया “अरे वो निशा है ना ?” “कौन निशा ?” “तुम्हे तो कुछ याद ही नहीं रहता अरे वो मेरी झाँसी वालीकजिन की रिश्तेदार है ना स्कूल में” ये औरतें भी अजीब होती है कोई भी बात सीधे नहीं करेगी घुमा फिर कर बताने और बात को लम्बा खीचने में पता नहीं इनको क्या मज़ा आता है. “हाँ हाँ तो ?” “अरे भई उसके देवर की शादी है. वो तो मुझे कल रात को उनके यहाँ होने वाले फंक्शन में आने का कह कर गई है. रिसेप्सन में तो जाना पड़ेगा ही सोच रही हूँ रात वाले फंक्शन में जाऊं या नहीं ?” मैं जानता था मैं मना करू या हाँ भरूं मधु नाचने गाने का ये चांस बिलकुल नहीं छोड़ने वाली. मधु बहुत अच्छी डांसर है. शादी के बाद तो उसे किसी कॉम्पिटिशन में नाचने का अवसर तो नहीं मिला पर शादी विवाह या पार्टीज में तो मधु का डांस देख कर लोग तोबा ही कर उठते है. इस होली पर भांग पीकर उसने जो ठुमके लगाए थे और कुल्हे मटकाए थे कालोनी के बड़े बुजुर्गों का भी ‘ढीलू प्रसाद’ धोती में उछलने लगा था. क्या कमाल का नाचती है. आप की जानकारी के लिए बता दूँ राजस्थान में शादी वाली रात जब लड़की के घर फेरे होतें है तो लड़के वालों के घर पर रात को नाच गाना होता है. उसमे सिर्फ मोहल्ले वाली और नजदीकी रिश्तेदार औरतें ही शामिल होती है. मैं तो सपने में भी नहीं सोच सकता था इतना सुनहरा मौका इतनी जल्दी मुझे मिल जायेगा. सच कहते है सच्चे मन से भगवान् को याद किया जाए तो वो जरूर सुनता है. अब तक आपने अंदाजा लग ही लिया होगा कि मेरे जैसे चुद्दकड़ आदमी की भगवान् में कितनी आस्था होगी ? वैसे देखा जाये तो मैं भगवान्, स्वर्ग-नर्क, पाप-पुण्य, पूजा-पाठ आदि में ज्यादा विस्वास नहीं रखता पर इन खूबसूरत हादसों के बाद तो उसे मान लेने को जी चाहता है. मैंने आज पहली बार पूजा घर में जाकर भगवान का धन्यवाद किया. Part-4 दोस्तों आज दिन भर मैं ऑफिस में सिर्फ मिक्की के बारे में ही सोचता रहा. कल जिस तरह से खूबसूरत हादसे हुए थे मेरे रोमांच का पारावार ही नहीं था. इतना खुश तो मैं सुहागरात मना कर भी नहीं हुआ था. मैं दिन भर इसी उधेड़बुन में लगा रहा कि कैसे मिक्की और मैं एक साथ अकेले सारी रात भर मस्ती करेंगे. न कोई डर न कोई डिस्टर्ब करनेवाला. सिर्फ मैं और मिक्की बस. मैं सोच रहा था कि मिक्की को कैसे तैयार करुँ. कभी तो लगता मिक्की सब कुछ जानती है. पर दूसरे ही पल ऐसा लगता कि अरे यार मिक्की तो अभी 14 साल की निरीह बच्ची है उसे भला मेरी भावनाओं का क्या पता होगा. अगर जल्दबाजी में कुछ गड़बड़ हो गई और मिक्की ने शोर मचा दिया तो ??? मैं ये सब सोच सोच कर ही परेशान हो गया. क्या करूँ कुछ समझ नहीं आ रहा. गुरूजी सच कहते है चुदी चुदाई औरतों को चोदना बहुत आसान होता है पर इन कमसिन बे-तजुर्बेकार लड़कियों को चोदना वाकई दुस्कर काम है. मैंने अपने प्लान्स पर एक बार फिर गौर किया. हल्दी मिले दूध में अगर नींद की 2-3 टेबलेट्स मिला दी जाएँ तो पता ही नहीं चलेगा. गहरी नींद में मैं उसके कोरे बदन कि खुश्बू लूट लूँगा. मैंने एक दो दिन पहले ही नींद की गोलियों का इंतजाम भी कर लिया था. लेकिन फिर ख़याल आया मिक्की की बुर अगर मेरा इतना मोटा और लम्बा लंड सहन नहीं कर पायी और कुछ खून खराबा ज्यादा हो गया और कहीं डॉक्टर की नौबत आ पड़ी तो तो ? मैं तो सोच कर ही काँप उठा ?. आपको बता दूं मैं किसी भी तरह की जोर जबरदस्ती या बलात्कार पर आमादा नहीं था. मैं तो मिक्की से प्यार करता था मैं उसे कोई नुक्सान या कष्ट कैसे पहुंचा सकता था. काश मिक्की अपनी बाँहें फैलाए मेरे आगोश में आ जाए और अपना सब कुछ मेरे हवाले कर दे जैसे एक दुल्हन सुहागरात में अपने दुल्हे को समर्पित कर देती है. इस समय मुझे रियाज़ खैराबादी का एक शेर याद आ गया : हम आँखें बंद किये तस्सवुर में बैठे है ऐसेमें कहीं छम्म से वो आ जाए तो क्या हो जब कुछ समझ नहीं आया तो मैंने सब कुछ भगवान् के भरोसे छोड़ दिया. हालत के हिसाब से जो होगा देखा जायेगा. शाम को मैं जानबूझकर देरी से घर पहुंचा. कोई 8-8½ का समय रहा होगा. खाना तैयार था. मधु पार्टी में जाने की तैयारी कर रही थी. इन औरतों को भी तैयार होने में कितना वक़्त लगता है. उसने शिफोन की काली साड़ी पहनी थी और लो कट ब्लाउज. मधु साडी इस तरह से बांधती है कि उसके नितम्ब भरे पूरे नज़र आते हैं. सच पूछो तो उसकी सबसे बड़ी दौलत ही उसके नितम्ब है. और मैं तो ऐसे नितम्बों का मुरीद हूँ. जब वो कोई 9.30 बजे तक मुश्किल से तैयार हुई तो मैंने मज़ाक में उससे कहा “आज किस किस पर बिजलियाँ गिराओगी ?” वो अदा से आईने मेंअपने नितम्बों को देखते हुए बोली “अरे वहाँ तो आज सिर्फ औरतें ही होंगी मनचले भंवरे और परवाने नहीं” “कहो तो मैं साथ चलूँ” मैंने उसे बांहों में लेना चाहा “ऑफ.. छोडो न तुम्हे तो बस इस एक चीज के अलावा कुछ सूझता ही नहीं.. पता है मैं दो दिनों से ठीक से चल ही नहीं पा रही हूँ” उसने मुझे परे धकेलते हुए कहा. “अच्छा ये बताओ मैं कैसी लग रही हूँ” औरतों को अपनी तारीफ़ सुनाने का बड़ा शौक होता है. सच पूछो तो उसके कसे हुए नितम्बों को देख कर एक बार तो मेरा मन किया कि उसे अभी उलटा पटक कर उसकी गांड मार लूँ पर अभी उसका वक़्त नहीं था. मैंने कहा “एक काजल का टीका गालों पर लगा लो कहीं नज़र न लग जाये” मधु किसी नव विवाहिताकी तरह शर्मा गयी. ईईईस्स्स्स्स्स्स….. कोई 10 बजे वो कार से अपनी सहेली के घर चली गई. (मधु कार चला लेती है) जब मैंमैन गेट बंद करके ड्राइंग रूम में वापस आया तो मिक्की बाथरूम में थी शायद नहा रही थी. मैं स्टडी रूम में चला गया. मैंने दो दिनों से अपने मेल चेक नहीं किये थे. मैंने जब कंप्यूटर ओन किया तो सबसे पहले स्टार्ट मेनू में जाकर रिसेंट डाकुमेंट्स देखे तो मेरी बांछे ही खिल गयी. जैसा मैंने सोचा था वो ही हुआ. AVSEQ01, AVSEQ02, लिटिल सुगर, माय पिक्चर फाइल्स 27 मई को खोली गयी थी. आप इतना तो जानते ही है विडियो पिक्चर की फाइल्स होती है और ये फाइल्स तो मेरी चुनिन्दा ब्लू फिल्मो की फाइल्स थी. आईला….. मेरा दिल बेतहासा धड़कने लगा. अब मेरे समझ में आया कि कल दोपहर में मिक्की स्टडी रूम से घबराई सी सीधे रसोई में क्यों चली गई थी. मोनिका डार्लिंग तूने तो कमाल ही कर दिया. मेरे रास्ते की सारी बाधाएं कितनी आसानी से एक ही झटके में इस कदर साफ़ कर दी जैसे किसी ने कांटेदार झाडियाँ जड़ समेत काट दी हो और कालीन बिछा कर ऊपर फूल सजा दिए हो. अब मैं किसे धन्यवाद दूँ, अपने आप को, कंप्यूटर को, मिक्की को या फिर लिंग महादेव को ? मैंने इन फाइल्स को फिर से पासवर्ड लगा कर लोक कर दिया और अपनी आँखें बंद कर के सोचने लगा. मिक्की ने इन फाइल्स और पिक्चर्स को देख कर कैसा अनुभव किया होगा ? कल पूरे दिन में उसने कंप्यूटर की कोई बात नहीं की वरना वो तो मेरा सिर ही खा जाती है. मैं भी कतई उल्लू हूँ मिक्की की आँखों की चमक, उसका सजना संवारना, मेरे से चिपक कर बाइक पर बैठना, शुक्र पर्वत कि बात करना, बंदरों की ठोका ठुकाई की बात इस से ज्यादा बेचारी और क्या इशारा कर सकती थी. क्या वो नंगी होकर अपनी बुर हाथों में लिए आती और कहती लो आओ चोदो मुझे ? मुझे आज महसूस हुआ कि आदमी अपने आप को कितना भी चालाक, समझदार और प्रेम गुरु माने नारी जातिको कहाँ पूरी तरह समझ पाता है फिर मेरी क्या बिसात थी. कंप्यूटर बंद करके मैं आँखें बंद किये अभी अपने ख्यालों में खोया था कि अचानक मेरी आँखों पर दो नरम मुलायम हाथ और कानो के पास रेंगते हुए साँसों की मादक महक मेरे तन मन को सराबोर कर गई. इस जानी पहचानी खुशबू को तो मैं मरने के बाद भी नहीं भूल सकता, कैसे नहीं पहचानता. मेरे जीवन का यह ‘बेशकीमती लम्हा’ (अनमोल क्षण) काश कभी ख़तम ही ना हो और मैं क़यामत तक इसी तरह मेरी मिक्की, मेरी मोना,मेरी मोनिका के कोमल हाथों का मखमली स्पर्श महसूस करता रहू. मैंने धीरे से अपने हाथ कुर्सी के पीछे किये. उफ्फ्फ… मिक्की की संगमरमरी जांघे उस पतली सी नाइटी के अन्दर बिलकुल नंगी थी. मैं इस लम्हे को इतना जल्दी ख़तम नहीं होने देना चाहता था. पता नहीं कितनी देर मैं और मिक्की इसी अवस्था में रहे. फिर मैंने होले से उसकी नरम नाज़ुक हथेलियों को अपने हाथों में ले लिया और प्यार से उन्हें चूमने लगा. मिक्की ने अपना हाथ छुडा लिया और मेरी गर्दन के दोनों और अपनी बाहें फैला कर मेरी गोद में बैठते हुए अपने जलते होंठ मेरे होंठों पर रख दिए. बरसों कि तड़फती मेरी आत्मा उस रसीले अहसास से सराबोर हो गई. जैसे अंधे को आँखें मिल गई हो, भूले को रास्ता और बरसों से प्यासी धरती को सावन की पहली फुहार. जैसे किसी ने मेरे जलते होंटों पर होले से बर्फ की नाज़ुक सी फुहार छोड़ दी हो. मिक्की मुझे इस तरह चूम रही थी जैसे वो सदियों से कैद एक‘अभिशप्त राजकुमारी’ है, जैसे उसे केवल यही एक पल मिला है जीने के लिए और अपने बिछुडे प्रेमी से मिलने का. मैं अपनी सुधबुध खोये कभी मिक्की की पीठ सहलाता कभी उसके नितम्बो को कभी उसके उरोजों को और कभी होले से उसकी नरम नाज़ुक गुलाब की पंखुडियों जैसे होंठो को डरते डरते इस कदर चूम रहा था कि कहीं भूल से मेरे होंठो और अंगुलियोंके खुरदरे अहसास से उसे थोडा सा भी कष्ट न हो. मेरे लिए ये चुम्बन उस ‘अनमोल रत्न’ की तरह था जिसके बदले में अगर पूरे जहां की खुदाई भी मिले तो कम है. आप जानते होंगे मैं स्वर्ग नर्क जैसी बातों में विश्वासनहीं रखता पर मुझे आज लग रहा था कि अगर कहीं स्वर्ग या जन्नत है तो बस यही है यही है यही है….. अचानक ड्राइंग रूम में रखे फ़ोन की कर्कश घंटी की आवाज से हम दोनों चोंक गए. हे भगवान् इस समय कौन हो सकता है ? किसी अनहोनी और नयी आफत की आशंका से मैं काँप उठा. मैंने डरते डरते फ़ोन का रिसीवर इस तरह उठाया जैसे कि ये कोई जहरीला बिच्छू हो. मेरा चेहरा ऐसे लग रहा था जैसे किसी ने मेरा सारा खून ही निचोड़ लिया हो. मैं धीमी आवाज में हेल्लो बोला तो उधर से मधु की आवाज आई “आपका मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा है ?” “ओह.. क्या बात है ?” मैंने एक जोर की सांस ली “वो वो मैं कह रही थी कि.. कि हाँ.. मैं ठीक ठाक पहुँच गई हूँ और हाँ ?” पता नहीं ये औरतें मतलब की बात करना कब सीखेंगी “हाँ मैं सुन रहा हूँ” “हाँ… वो मिक्की को दवाई दे दी क्या ? उसे हल्दी वाला दूध पिलाया या नहीं ?” “हाँ भई हाँ दूध और दवाई दोनों ही पिलाने कि कोशिश ही कर रहा था” मैंने मिक्की की ओर देखते हुए कहा “हाँ एक बात और थी कल सुबह भैय्या और भाभी दोनों वापस आ रहे है उन्होंने मोबाइल पर बताया है कि अंकल अब ठीक है” मधु बस बोले जा रही थी “सुबह मैं आते समय उन्हें स्टेशन से लेती आउंगी तुम परेशान मत होना. O.K. लव गुड नाईटएंड स्वीट ड्रीम्स” मधु जब बहुत खुश होती है तो मुझे लव कहकर बुलाती है (मेरा नाम प्रेम है ना). लेकिन आज जिस अंदाज़ में मुझे उसने लव के साथ गुड नाईट और स्वीट ड्रीम्स कहा था मैं उसके इस चिढाने वाले अंदाज़ को अच्छी तरह समझ रहा था. सारी रात उससे दूर ? पर उसे क्या पता था कि आज तो सारी रात ही स्वीट ड्रीम्स होने वाली है ? मिक्की मेरे चहरे की और देख रही थी. मैंने उसे जल्दी से सारी बात बता दी. वो पहले तो थोडा हंसी और फिर दौड़ कर मेरी बाहों में समा गई. मैंने उसे अपनी गोद में उठा कर उसके गालों पर एक करार सा चुम्बन ले लिया. जवाब में उसने मेरे होंठ कट खाए जिस से उनपर थोडा सा खून भी निकल आया. इस छोटे से दर्द का मीठा अहसास मेरे से ज्यादा भला और कौन जान सकता है. मैं उसे गोद में उठाये अपने बेडरूम में आ गया. मिक्की की आँखें बंद थी. वो तो बस हसींन ख़्वाबों की दुनिया में इस कदर खोयी थी कि कब मैंने उसकी नाइटी उतार दी उसे कोई भान ही नहीं रहा. और अब ‘बेजोड़ हुस्न की मल्लिका” (अद्वितीय सौन्दर्य की देवी) मेरे आगोश में आँखें बंद किये बैठी थी. अगर ठेठ उज्जड भाषा में कहा जाए तो मेरी हालत उस भूखे शेर की तरह थी जिसके सामने बेबस शिकार पड़ा हो और वो ये सोच रहा हो कि कहाँ से शुरू करे. लेकिन मैं कोई शिकारी या जंगली हिंसक पशु नहीं था. मैं तो प्रेम का पुजारी था. अगर रोमांटिक भाषा में कहा जाए तो मेरे सामने 36 प्रकार के व्यंजन पड़े थे और मैं फैसला नहीं कर पा रहा था कि कौन सा पकवान पहले खाऊं. मैंने अभी कपडे नहीं उतारे थे. मैंने कुर्ता-पायजामा पहने हुआ था. मेरा लंड मेरे काबू में नहीं था वो किसी नाग की तरह फुफकार मार रहा था. 120 डिग्री के एंगल में पायजामे को फाड़ कर बाहर आने की जी तोड़ कोशिश कर रहा था. मिक्की मेरी गोद में बैठी थी. हमारे होंठ आपस में चिपके हुए थे. मिक्की ने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी और मैं उसे रसभरी कुल्फी की तरह चूसने लगा. मेरा लंड उसकी नाज़ुक नितम्बों की खाई के बीच अपना सिर फोड़ता हुआ बेबस नज़र आ रहा था. मैं कभी मिक्की के गालों को चूमता कभी होंठो को कभी नाक को कभी उसके कानोंको और कभी पलकों को. मिक्की मेरे सीने से चिपटे हुए मुझे बाहों में जकडे गोद में ऐसे बैठी थी जैसे अगर थोडा भी उसका बंधन ढीला हुआ तो उसके आगोश से उसका ख्वाब कोई छीन कर ले जायेगा. कमोबेश मेरी भी यही हालत थी. कोई 10-15 मिनट के बाद जब हमारी पकड़ कुछ ढीली हुई तो मिक्की को अपने बदन पर नाइटी न होने का भान हुआ. उसने हैरानी से इधर उधर देखा और फिर मेरी गोद से थोडा सा छिटक कर मारे शर्म के अपने हाथ अपनी आँखों पर रख लिए. नाइटी तो कब की शहीद होकर एक कोने में दुबकी पड़ी थी जैसे मरी हुई चिडिया. “मेरी प्रियतमा आँखें खोलो” “नहीं पहले मेरी नाइटी दो मुझे शर्म आ रही है” “अरे मेरी बिल्लो रानी अब शर्म छोडो तुम इस ब्रा पेंटी में कितनी खूबसूरत लग रही हो जरा मेरी आँखों से देखो तो सही अपने आप को” “नहीं पहले लाईट बंद करो” मैंने ना चाहते हुए भी उठ कर लाईट बंद कर दी पर बाथरूम का दरवाजा खोल दिया जिसमे से हलकी रोशनी आ रही थी. “अब तो आँखे खोल दो मेरी प्रियतमा” “नहीं पहले खिड़की का पर्दा करो” “क्यों वह कौन है ?” “अरे वह मेरेमामाजी खड़े है जो हमारी रासलीला देख रहे है” “मामाजी ? कौन मामाजी ?” मैंने हैरानी से पूछा “ओफ्फो.. आप भी निरे घोंचू है अरे बाबा चन्दा मामा” बेतहासा मेरी हंसी निकल गई. बाहर एकम का चाँद खिड़की के बाहर हमारे प्यार का साक्षी बना अपनी दुधिया रोशनी बिखेर रहा था. अचानक उसे ध्यान आया किमैं तो पूरे कपडे पहने हुए हूँ. उसने मुझे उलाहना देते हुए कहा “अच्छा जी आप ने तो अपने कपडे उतारे ही नहीं” मैं तो इसी ताक में था. दरअसल मैंने अपने कपडे पहले इस लिए नहीं उतारे थे कि कहीं मिक्की मेरा 7इंच का फनफनाता हुआ लंड देखकर डर न जाए और ये न सोचे की मैं जबरन कुछ कर देने पर तुला हुआ हूँ या कहीं उसका बलात्कार ही तो नहीं करना चाहता. कपडे उतार कर मैं डबल बेड पर सिरहाने की ओर कमर टिका कर बैठ गया. मेरी एक टांग सीधी थी और दूसरी कुछ मुडी हुई जिसकी जांघ पर मिक्की अपना सिर रखे आँखें बंद किये लेटी थी. मैंने नीचे झुक कर उसका चुम्बन लेने की कोशिशकी तो वो थोडा सा नीचे की और घूम गई. मेरा आधा लंड चड्डी के बाहर निकला हुआ था वो उसके होंठों से लग गया. उसे तो जैसेमन मांगी मुराद मिल गई. मैंने उसे कहा- मिक्की देखो इसे कैसे मुंह उठाए तुम्हें देख रहा है ! हाथ में लोना इसे ! मिक्की ने हिचकिचाते हुए पहले तो उसने अपनी नाज़ुक अंगुलियों से उसे प्यार से छुआऔर फिर अन्डरवीयर नीचे खिसकाते हुए मेरे लण्ड को पूरा अपने हाथों में भर लिया औरसहलाने लगी। मेरे लण्ड ने एक ठुमका लगते हुए उसे सलामी दी और पत्थर की तरह कठोर होगया। अब मिक्की लगभग ओंधी लेटे मेरे लंड के साथ खेल रही थी और मेरे सामने उसके गोल मटोल नितम्ब. मैंने उन पर प्यार से हाथ फिराना शुरू कर दिया. वाह क्या घाटियाँ थी.गुलाबी रंग की कसी हुई दो गोलाकार पहाडियां और उनके बीच एक बहती नदी की मानिंद गहरी होती खाई. मैं तो किसी अनजाने जादू से बंधा बस उसे देखता ही रह गया. फिर धीरे से मैंने पेंटी के ऊपर से ही उन गोलाइयों पर हाथ फेरना शुरू कर दिया. मिक्की इससे बेखबर मेरा लंड चूसे जा रही थी किसी आइसकैंडी की तरह जैसे मैंने उसे परसों मज़ाक में कुल्फी चूसने को कहा था. ये लड़की तो लंड चूसने में अपनी मम्मी (सुधा) को भी पीछे छोड़ देगी. आह उसकी नरम मुलायम थूक से गीली जीभ का गुनगुना अहसास अच्छे अच्छों का पानी निचोड़ ले. कोई 5-6मिनट उसने मेरा लंड चूसा होगा. फिर वो अपने होंठो पर जीभ फेरती हुई उठ खड़ीहुई.उसकी रसीली आँखों में एक नई चमक सी थी. जैसे मुझे पूछ रही हो कैसा लगा ? मैंने मिक्की को फिर बाहों में भर लिया और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिए. उसके मुंह और होंठों से मेरे लंड के प्री-कम की खुश्बू और स्वाद थोडा सा मुझे भी मिल गया. मैंने उसकी ब्रा को पकड़ते हुए कहा “मेरी जान अब हमारे बीच इन दुश्मनों का क्या काम है इन खूबसूरत नन्हे परिंदों को क्यों कैद कर रखा है. ख़ुशी की इस महफिल में इनको भी आजादी की सांस लेने दो ना प्लीज” “आप ही खोल दो ” मिक्की ने कहा मैंने झट से उसकी ब्रा कीडोरी खोल दी. काले रंग की ब्रा जैसे ही नीचे गिरी दोनों कबूतर ऐसे तन कर खड़े हो गए जैसे बरसों के बाद उन्हें आजादी मिली हो. छोटे नागपुरी संतरों की साइज़ के दो गोल गोल रसकूप मेरे सामने थे. बादामी और थोडी गुलाबी रंगत लिए उसके एरोला कोई एक रुपये के सिक्के से बड़े तो नहीं थे. अनार के दाने जीतनी सुर्ख लाल रंग की छोटी सी घुंडी. आह्ह्ह….. मैंने तड से एक चुम्बन उस पर ले ही लिया. मिक्की सिहर उठी. पहले मैंने उनपर होले से जीभ फिराई और बाद में मैंने एक संतरा पूरे का पूरा अपने मुंह में ले लिया और चूसने लगा. मिक्की की सिस्कारियां गूंजने लगी. मेरा एक हाथ उसकी पीठ और गोल गोल नितम्बों पर घूम रहा था. और दूसरे हाथ से उसका दूसरा स्तन दबा रहा था. मैंने जानबूझकर उसकी बुर पर हाथ नहीं फेरा था इसका कारण मैं आपको बाद में बताऊंगा. मेरे 10 मिनट तक चूसने के कारण उसके उरोज साइज़ में कोई 2 इंच तो जरूर बढ़ गए थे और निप्पल्स तो पेंसिल की नोक की तरह एकदम तीखे हो गए. मैंने उसे बेड पर लिटा दिया. उसका एक हाथ थोडा सा ऊपर उठा हुआ था. उसकी कांख में उगे सुनहरे रंग के रोएँ देख कर मैं अपने आप को रोक नहीं पाया और अपना मुंह वहाँ पर टिका दिया. हालांकि वो नहा कर आई थी पर उसके उभरते यौवन की उस खट्टी, मीठी, नमकीन सी खुश्बू से मेरा स्नायु तंत्र एक मादक महक से भर उठा. मैंने जब जीभ से चाटा तो मिक्की उतेजना और गुदगुदी से रोमांचित हो उठी. अब मैंने पहले उसके गालों पर आई बालों की आवारा लट को हटा कर उसका चेहरा अपनी हथेलियों में ले लिया. थरथराते होंठो से उसके माथे को, फिर आँखों की पलकों को, कपोलों को, उसकी नासिका, उसके कानो की लोबऔर अधरों को चूमता चला गया. मिक्की पलकें बंद किये सपनो की दुनिया में खोई हुई थी. उसकी साँसे तेज चल रही थी होंठ कंपकपा रहे थे. मैंने उसके गले और फिर उसके उरोजों को चूमा. दोनों उरोजों की घाटी में अपनी जीभ लगा कर चाटा तो मिक्की के होंठो से बस एक हलकी सी कामरस में भीगी सित्कार निकल गई. हलकीरौशनी में चमकता उसका चिकना सफ्फाक बदन मेरे सामने सब कुछ लुटाने के लिए बिखरा पड़ा था. मैं थोडी देर ऐसे ही बारी बारी उसके सभी अंगों को चूमता रहा लेकिन उसकीबुरको हाथ नहीं लगाया. मैं जानता था कि मिक्की की बुर ने अब तक बेतहासा कम रस छोड़ दिया होगा पर मैं तो उसे पूरी तरह तैयार और उत्तेजित करके ही आगे बढ़ाना चाहता था ताकि उसे अपनी बुर में मेरा लंड लेते समय कम से कम परेशानी हो. मेरा लंड प्री-कम के तुपके छोड़ छोड़ कर पागल हुआ जा रहा था. ऐसा लग रहा था कि अगर अब थोडी देर की तो यह बगावत पर उतर आएगा या खुदकुशी कर लेने पर मजबूर हो जायेगा. आप मेरी हालत समझ रहेहोंगे. मिक्की की आँखें अब भी बंद थी. मैंने धीरे से उससे कहा “आँखें खोलो मेरी प्रियतमा” तो वो उनींदी आँखों से बोली “बस कुछ मत कहो ऐसे ही मुझे प्यार किये जाओ मेरे प्रियतम” मैं अपने आप को कैसे रोक पाता. मैंने उसे एक बार फिर बाहों में भर लिया. मैंने उसकी पलकों पर एक चुम्बन ले लिया. उसके होंठ काँप रहे थे. ये काम वासना की उत्तेजना के कारण नहीं बल्कि उस प्रेम के आनद के कारण था जिसे ब्रह्मानाद कहा जाता है. और उस प्रेम में ये सारी कायनात डूबी हुयी है. मैंने उसके कपोलों को चुमते हुए उसके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए. वो तो कब की तरस रही थी जैसे. उसने भी मुझे चूम लिया और अपनी बाहों को जोर से कस लिया. उसका शरीर कांप रहा था. इस नए अनूठे रोमांच ने तो उसे जैसे पागल ही कर दिया था. मैंने धीरे धीरे उसके गले को चूमा और फिर उसके छोटे छोटे रसकूपों को चूमता हुआ उसकी नाभि के छेद को चूमता चला गया. वो तो मीठी सीत्कार ही किये जा रही थी. “ओह.. जिज्जू मुझे ये क्या हो रहा है. प्लीज कुछ करो मैं मर जाउंगी.” मैं कुछ बोलने की हालत में कहाँ था. मेरा पप्पू तो अंडरवियरमें अपना सिर ही धुन रहा था. मैंने उसकी नाभि के छोटे से छेद में अपनी जीभ की नोक लगा दी. मिक्की ने कस कर अपनी जांघें भींच ली और मेरे सिर के बाल पकड़ लिए. आह.. उसके थोड़े से उभरे हुए पेडू (नाभि के थोडा सा नीचे) पर जैसे ही मेरी जीभ लगी उसने एक जोर की किलकारी मारी. मैं जानता थाये रोमांच की पराकाष्ठा थी. उसकी पिक्की की मदहोश कर देनेवाली खुसबू से मेरा तन मन और आत्मा जैसे सराबोर ही हो गयी. मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसकी पिक्की पर एक चुम्बन ले लिया. उसकी पेंटी तो कामरस से पूरी ही भीग गयी थी. जैसे ही मैंने उसकी जाँघों पर अपने होंठ रखे उसकी एक किलकारी निकल गयी और उसकी जांघें चौडी होती चली गयी. मिक्की अब तडफने लगी थी. मैं जानता हूँ ये अब पूरी प्रेम दीवानी बन चुकी है. मैंने उसकी दायीं जांघ पर उसी छोटे से तिल वाली जगह पर जैसे ही एक चुम्बन लिया तो मिक्की के पैर हवा में ऊपर उठ गए और उसने मेरी गर्दन को कस कर लपेट लिया. उसकी कोरी कच्ची अनछुई पिक्की से निकलती खुसबू से मैं तो निहाल ही हुआ जा रहा था. उसकी पिक्की ठीक मेरे मुंह के पास थी. मैंने पेंटी के ऊपर से ही उसे मुंह में भर लिया. मिक्की का शरीर एक बार और अकडा और वो सीत्कार करते हुए ढीली पद गयी. लगता था उसका एक बार फिर स्खलन हो गया. प्यारे पाठको और पाठिकाओं अब पेंटी की दीवार हटाने का समय आ गया था. मैंने मिक्की से जब पेंटी उतारने को कहा तो उसने कहा कि पहले आप अपना अंडरवियर तो उतारो. मेरा अंडरवियर तो पहले ही घायल हो चुका था याने फटचुका था बस नाम मात्र का अटका हुआ था. मैंने एक झटके में उसे निकाल फेंका. और फिर मिक्की की पेंटी को अपने दोनों हाथों से पकड़ कर धीरे धीरे नीचे करना शुरू किया “अब तो क़यामत सिर्फ 1 या 2 इंच ही दूर थी” जिसके लिए विश्वामित्र और नारद जैसे महा ऋषियों का मन डोल गया वो पल अब मेरे सामने आने वाला था. पहले सुनहरे रोएँ नज़र आये और फिर दो भागो में बटा बुर का पहला नजरा - रक्तिम चीरा बाहरी होंठ मोटे और सुर्ख लाल गुलाबी रंगत लिए छोटे होंठ कुछ श्यामलता लिए दोनों आपस में प्रगाढ़ सहेलियों की तरह चिपके हुए और उसके नीचे सुनहरी रंग का गोल गोल गांड का छेद. आह… मैं तो बस इस दिलकश नजारे को देख कर अपनी सुध बुध ही खो बैठा. पेंटी निकाल कर दूर फेंक दी. उसकी संगमरमरी जांघे केले के पत्ते की तरह चिकनी और सुडोल जाँघोंकोमैंने कांपते हाथों से उन्हें सहलाया तो मिक्की की एक सित्कार निकल गयी और उसके पैर अपने आप चौड़ेहोते चले गए. फिर मैंने होले से उसके सुनहरी बालो पर हाथ लगाया. उफ़… मक्का के भुट्टे को अगर छील कर उसपर उगे सुनहरी बालो का स्पर्श करें तो आपको मिक्की की बुर पर उगे उन छोटे छोटे रेशम से मुलायम बालों (रोएँ) का अहसास हो जायेगा. बाल ज्यादा नहीं थे सिर्फ थोड़े से उपरी भाग पर और दोनों होंठो के बाहर केवल आधी दूर तक जहां चीरा ख़तम होता है उससे कोई 2 इंच ऊपर तक. बुर जहां ख़तम होती है उसके ठीक 1 इंच नीचे जन्नत का दूसरा दरवाजा. उफ़ एक चवन्नी के आकर का बादामी रंग का गोल घेरा जैसे हंसिका मोटवानी या प्रियंका चोपडा ने सीटी बजाने के अंदाज में अपने होंठ सिकोड़ लिए हों. मैने अपनी दोनों हाथों से उसकी पंखुडियों को थोड़ा सा चौड़ाकिया. एक हलकी सी ‘पुट’ की आवाज के साथ उसकी बुर थोडी सी खुल गई केवल 2 इंच. रतनार सुर्ख लाल अनार के दाने जितनी बड़ी मदन मणि और बीच में मूत्र छेद माचिस की तिल्ली जितना बड़ा और उसके एक इंच नीचे स्वर्ग गुफा का छोटा सा छेद कम रस से भरा जैसे शहद की कुप्पी हो.मिर्जा गालिब ने कश्मीर के बारे में कहा था कि धरती पर अगर कहीं जन्नत है तो बस यहीं है. अगर वो भी इस समय मिक्की के इस खजाने को देख लेता तो कह उठता कि असली स्वर्ग है तो बस यहीं है बस यहीं है. मैं अब कैसे रुक सकता था. मैने बरसों के प्यासे अपने जलते होंठ उन पर रख ही दिए. एक मादक सुगंध से मेरा सारा तन मन भर उठा. मिक्की तो बस मेरा सिर पकडे अपनी आँखें बंद किये पता नहीं कहाँ खोई हुई थी उसका पूरा शरीर काँप रहा था. और मुंह से बस होले होले सित्कार ही निक़ल रही थी. मैने अपनी जीभ की नोक जैसी ही उसकी मदनमणि पर लगाईं मिक्की का शरीर थोडा सा अकडा और उसकी बुर ने शहद की दो तीन बुँदे मुझे अर्पित कर दी. ओह मेरे प्यार का पहला स्पर्श पाते ही उसका छोटा ओर्ग्जाम हो गया. उसके हाथ और पैर दोनों अकड़े हुए थे शरीर काँप रहा था. मेरा एक हाथ उसके उरोजो को मसल रहा था और दूसरा हाथ उसके गोल गोल नितम्बों को सहला रहा था. मैने उसकी बुर को चूसना शुरू कर दिया. मिक्की तो सातवे आसमान पर थी. लगभग 10 मिनिट तक मैने उसकी बुर चूसी होगी. फिर मैने उसकी बुर चूसते चूसते पास पड़ी डब्बी से थोडी सी वैसलीनअपने दायें हाथ की तर्जनी अंगुली पर लगाई और होले से उसकी बुर की सहेली पर फिरा दी. मिक्की ने रोमांच से एक बार और झटका खाया. अब मैने दो चीजें एक साथ की उसकी शहद की कुप्पी को जोर से चूसने के बाद उसके अनार दाने को दांतों से होले से दबाया और अपने दायें हाथ की वैसलीन से भरी अंगुली कापोर उसके प्रेम द्वार की प्यारी पडोसिन के सुनहरी छेद में डाल दिया. “ऊईई…. मम्म्मीईइ…जी..ज्जू…ऊ.... आह्ह्ह.. मुझे कुछ हो रह है मैं मर गयी… आह्ह्ह… ऊओईईइ…. ह्हीईइ…... य्याआया….” मिक्की का शरीर अकड़ गया, उसने मेरे सिर के बालों कोनोच लिया, और अपनी जाँघों को जोर से भींच लिया और जोर की किलकारी के साथ वो ढीली पड़ती चली गयी. और उसके साथ ही उसकी बुर ने कोई 3-4चम्मच शहद (कामरस) उंडेलदिया जिसे मैं भला कैसे व्यर्थ जाने देता, गटागट पी गया. ये उसके जीवन का पहला ओर्ग्जाम था. कुछ पलों के बाद जब मिक्की कुछ नोर्मल हुई तो मैने होले से उसे पुकारा “मेरी मोनिका मेरे प्रेम की देवी कैसा लग रहा है” “उन.. कुछ मत पूछो मेरे प्रेम देव आज की रात बस मुझे अपनी बाहों में लेकर बसप्यार बस प्यार ही करते रहो मेरे प्रथम पुरुष.” मैने एक बार फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया. अब बस उन पलों की प्रतीक्षा थी जिसे मधुर मिलन कहते है. मैं अच्छी तरह जानता था भले ही मिक्की अब अपना सर्वस्व लुटाने को तैयार है पर है तो अभी कमसिन कच्ची मासूम कली ही ? वो भले ही इस समय सपनो के रहस्यमई संसार में गोते लगा रही है पर मधुर मिलन के उस प्रथम कठिन चरण से अभी अपरिचित है. मैं मिक्की से प्यार करता था और भला उसे कोई कष्ट हो मैं कैसे सहन कर सकता था. शायद आप सोचरहेहोंगे कि मैंने अपना इरादा बदल लिया होगा और उसे चोदने का विचार छोड़ दिया होगा तो आप गलत सोच रहे है. मैं तो कब से उसे चोदना चाहता था. पर उसकी कमउम्र और किसी गड़बड़ कि आशंका से डर रहा था. हाँ उसकी बाते सुनकर एक बदलाव जरूर आ गया. मुझे लगा कि मैं सचमुच उसे प्यार करने लगा हूँ. जैसे वो मेरी कोई सदियों की बिछुडी प्रेमिका है जिसे मैं जन्म जन्मानंतर तक प्यार करता रहूँगा. फिर सब कुछ सोच विचार करने के बाद मैंने एक जोर कीसांस छोड़ते हुए उसे समझाना शुरू किया : “देखो मेरी प्रियतमा अब हमारे मधुर मिलन का अंतिम पड़ाव आने वाला है. ये वो परम आनंद है जिसके रस में ये सारी कायनात डूबी है.” “मैं जानती हूँ मेरे कामदेव” “तुम अभी नासमझ हो प्रथम मिलन में तुम्हे बहुत कष्टहो सकता है ?” “तुम चिंता मत करो मेरे प्रियतम मैं सब सह लूंगी मैं सब जानती हूँ” अब मेरे चोंकने की बारी थी मैंने पुछा “तुम ये सब ??” “मैंने मम्मी और पापा को कई बार रति-क्रीडा और सम्भोग करते देखा है और अपनी सहेलियों से भी बहुत कुछ सुना है” “अरेक.. क.. क्या बात करती हो…तुमने ?” मेरे आश्चर्य कि सीमा नहीं रही “क्या देखा है तुमने और क्या जानती हो तुम ?” “वोही जो एक पुरुष एक स्त्री के साथ करता एक प्रेमी अपनी प्रेमिका के साथ करता एक भंवरा किसी कली के साथ करता है, सदियों से चले आ रहे इस नैसर्गिक कर्म और जीवन चक्र में नया क्या है जो आप मेरे मुंह से सुनना चाहते है ?… मैं… मैं…. रसकूप, रति द्वार, काम दंड, रति क्रीडा और मधुर मिलन जैसे शब्दों का नाम लेकर तुम्हे कैसे बताऊँ ?… मुझे क्षमा कर दो मेरे प्रियतम मुझे लाज आती है ???” मैं हक्का बक्का उसे देखता ही रह गया. आज तो ये मासूम सी दिखनेवाली लड़की न होकर अचानक एक प्रेम रस में डूबी नवयोवनाऔर कामातुर प्रेयशी नज़र आ रही है. बस अब बाकी क्या बचा था ??? मैंने एक बार फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया…और…. हमारे इस मधुर (प्रेम) मिलन (इसे चुदाई का नाम देकर लज्जित न करे) के बारे में मैं विस्तार से नहीं लिख पाऊंगा. सदियों से चले आ रहे इस नैसर्गिक सुख का वर्णन जितना भी किया जाए कम है. रोमांटिक भाषा में तो पूरे ग्रन्थ भरे पड़े है. वात्स्यायन का कामसूत्र या फिर देशी भाषा में मस्तराम की कोई किताब पढ़ लें. मैंने मिक्की से उसके रजोदर्शन (मासिक) के बारे में पूछा था (मैं उसे गलती से भी प्रेग्नेंट नहीं करना चाहता था) तो उसने बताया था कि उसकी अगली डेट 1 जून के आस पास है और आज तो 28 मई है.. और फिर.. दिल्ली लुट गई…………………….. हमें कोई 10-15 मिनिट लगे होंगे. ऐसा नहीं है कि सब कुछ किसी कुशल खिलाडियों के खेल कीभाँती हो गया हो. मिक्की जिसे खेल समझ रही थी वास्तव में थोडा सा कष्ट कारक भी था. वो थोडा रोई चिल्लाई भी पर प्रथम मिलन के उन पलों में उसने पूरा साथ दिया. आज वो कली से फूल बनकर तृप्त हो गयी थी. हम दोनों साथ साथ स्खलित हुए. उसे थोडा खून भी निकला था. मैंने अपने कुर्ते की जेब से वोही रेशमी रुमाल निकाला जो मिक्की ने मुझे बाज़ार में गिफ्ट दिया था और उसके प्रेम द्वार से चूते मेरे प्रेम-रस, मिक्की के काम-राज और रक्त का मिलाजुला मिश्रण उस अनमोल भेंट में डुबो कर साफ़ कर दिया और उसे अमूल्य निधि की तरह संभाल कर अपने पास रख लिया. फिर हम दोनों ने बाथरूम में जाकर सफाई की. मिक्की की मुनिया पाव रोटी की तरह सूज गयी थी उसके निचले होंठ बहुत मोटे हो गए थे जैसे ऊपर वाले होंठों का डबल रोल हो. मैंने उसकी पिक्की ? बुर ? चूत ? (अरे नहीं यार मैं तो उसे मुनिया कहूँगा) पर एक चुम्बन ले लिया और मिक्की ने भी मेरे सोये पप्पू को निराश नहीं किया उसने भी एक चुम्बन उसपर ले लिया. मैंने खिड़की का पर्दा हटा दिया. चाँद की दुधिया रोशनी से कमरा जगमगा उठा. दूर आसमान में एकमका चाँद अपनी चांदनी बरसाता हुआ हमारे इस मधुर मिलन का साक्षी बना मुस्कुरा रहा था. मिक्की मेरी गोद में सिर रखे अपनी पलकें बंद किये सो रही थी. मैंने उदास स्वर में कहा “मिक्की मेरी जान, मेरे प्राण, मेरी आत्मा, मेरी प्रेयसी कैसी हो ?” उस से बिछुड़ने की वेदना मेरे चहरे पर साफ़ झलक रहीथी. कल मिक्की वापस चली जायेगी. “अब मैं कली से फूल, किशोरी से युवती, मिक्की और मोना से मोनिका बन गई हूँ और मेरी पिक्की अब भोस नहीं… प्रेम रस भरा स्वर्ग द्वार बन गई है कहने को और क्या शेष रह गया है मेरे प्रेम दीवाने, मेरे प्रेम देव, मेरे प्रथम पुरुष ?” मिक्की ने रस घोलती आवाज में कहा आप जरूर सोच रहे होंगे अजीब बात है ये बित्ते भर की नादान,अंगूठा चूसने वाली नासमझ सी लोंडिया इतनी रोमांटिकऔर साहित्यिक भाषा में कैसे बात कर रही है ? मैंने (लेखक ने)जरूर कहींसे ये संवाद व्ही. शांता राम की किसी पौराणिक फिल्म या किसी रोमांटिक उपन्यास से उठाया होगा ? आप सरासर गलत हैं. मैंने भी मिक्की (सॉरी अब मोनिका) से उस समय पूछा था तो उसने जो जवाब दिया था आप भी सुन लिजीये : “क्यों मेरे पागल प्रेम दीवाने जब आप अपने आप को बहुत बड़ा ‘प्रेम गुरु’ समझते है, अपने कंप्यूटर पर ‘जंगली छिपकलियों ’ के फोल्डर और फाइल्सको लोक और अन्लोक कर सकते है तो क्या मैं आपकी उस काले जिल्द वाली डायरी, जिसे आपने परसों स्टडी रूम में भूल से या जानबूझ कर छोड़ दिया था, नहीं पढ़ सकती ?” हेभगवान् ? मैं हक्का बक्का आँखें फाड़े उसे देखता ही रह गया. मुझे ऐसा लगा जैसे हजारों वाट की बिजलियाँ एक साथ टूट पड़ी हैं. मैंने कथा के शुरू में आपको बताया था कि मैं उन दिनों डायरी लिखता था और ये वोही डायरी थी जिसके शुरू में मैंने अपनी सुहागरात और मधुरमिलनके अन्तरंग क्षणों को बड़े प्यार से संजोया था और उसके प्रथम पृष्ठ पर ‘मधुर प्रेम मिलन’ लिखा था. मैंने इसे बहुत ही संभाल कर रखा था और मधु को तो अब तक इसकी हवा भी नहीं लगने दी थी, न जाने कैसे उस दिन आजकल के अनुभवों के नोट्स लिखते हुए स्टडी रूम में रह गई थी. ओह.. अब तो सब कुछ शीशे की तरह साफ़ था. “आपको तो मेरा धन्यवाद करना चाहिए कि वो डायरी मैंने बुआजी के हाथ नहीं पड़ने दी और अपने पास रख ली नहीं तो इतना बड़ा हंगामा खडा होता कि आपका सारा का सारा साहित्यिक ज्ञान और प्रेम गुरुता धरी की धरी रह जाती ?” मिक्की ने जैसे मेरे ताबूत में एक कील और ठोक दी. “ओह थैंक यू … मिक्की.. ओह.. बा.. मोनिका कहाँ है वो डायरी ?? लाओ प्लीज मुझे वापस देदो” “ना.. कभी नहीं… वो तो मैं जन्म जन्मान्तर तक भी किसी को नहीं दूँगी मेरे पास भी तो हमारे प्रथम मधुर मिलन के इन अनमोल क्षणों की कुछ निशानी रहनी चाहिए ना ?” मैं क्या बोलता ? मिक्की फिर बोली “मधुर मिलन की इस रात्रि में उदासी का क्या काम है आओ सपनो के इस संसार में इन पलों को ऐसे व्यर्थ न गवावो मेरे प्रियतम ये पल फिर मुड कर नहीं आयेंगे” और मिक्की ने एक बार फिर मेरे गले में अपनी नाज़ुक बाहें दाल दी. इस से पहले की मैं कुछ बोलता मिक्की के जलते होंठ मेरे होंठों पर टिक गए और मैंने भी कस कर उन्हें चूमना शुरू कर दिया. बाहर मिक्की के मामाजी (अरे यार चन्दा मामा) खिड़की और रोशनदान से झांकते हुए मुस्कुरा रहे थे. Last edited by premguru; 19-06-2009 at 07:38 PM.. |
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#5
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Part-5
सुबह मिक्की के पास तो लंगडाकर चलने का बहाना था (टांगों के बीच में दर्द का नहीं एडी में दर्द का) पर मेरे पास तो सिवाए सिर दर्द के और क्या बहाना हो सकता था. मैंने इसी बहाने ऑफिस से बंक मार लिया. आज मेरी मिक्की मुझ से बिछुड़ कर वापस जा रही थी. शाम की ट्रेन थी. मेरा मन किसी चीज में नहीं लग रहा था. एक बार तो जी में आया की मैं रो ही पडूं ताकि मन कुछ हलका हो जाए पर मैंने अपने आप को रोके रखा. दिन भर अनमना सा रहा. मैं ही जानता हूँ मैंने वो पूरा दिन कैसे बिताया. ट्रेन कोई शाम को सात बजे की थी. सीट आराम से मिल गयी थी. जब गाडी ने सीटी बजाई तो मैं उठकर चलने लगा. मिक्की के प्यार में भीगी मेरी आत्मा, मेरा हृदय, मेरा मन तो वहीं रह गया था. मैं अभी डिब्बे से नीचे उतरने वाला ही था की पीछे से मिक्की की आवाज आई - “फूफाजी…. आप अपना मोबाइल तो सीट पर ही भूल आये” मिक्की भागती हुई आई और मुझ से लिपट गई. उसने अपने भीगे होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और किसी की परवाह किये बिना एकचुम्बन मेरे होंठों पर ले लिया. मैंने अपने आंसुओं को बड़ी मुश्किल से रोक पाया. मिक्की ने थरथरती हुई आवाज में कहा : “मेरे प्रथम पुरुष मेरे कामदेव मेरी याद में रोना नहीं. अच्छे बच्चे रोते नहीं. मैं फिर आउंगी मेरी प्रतीक्षा करना” मिक्की बिना मेरी और देखे वापस अपनी सीट की और चली गई. मेरी अंगुलियाँ मेरे होंठों पर आ गई. मैं मिक्की के इस तीसरे चुम्बन का स्पर्श अभी भी अपने होंठो पर महसूस कर रहा था. मैं डिब्बे से नीचे उतर आया. गाडी चल पड़ी थी. खिड़की से मिक्की का एक हाथ हिलाता हुआ नज़र आ रहा था. मुझे लगा कि उसका हाथ कुछ धुंधला सा होता जा रहा है.शायद मेरी छलछलाती आँखों के कारणऐसा हुआ था. इस से पहले कि वो कतरे नीचे गिरते मैंने अपनी जेब से वोही रेशमी रुमाल निकाला जो मिक्की ने मुझे गिफ्ट किया था और हमारे मधुर मिलन के प्रेम रस से भीगा था, मैंने अपने आंसू पोंछ लिए. मेरे आंसू और मिक्की के होंठो का रस, हमारे मधुर मिलन के प्रेम रस से सराबोर उस रस में मिल कर एक हो गए.मैं बोझिल कदमो और भारी मन से प्लेटफार्म से बाहर आ गया. मेरा सब कुछ तो मिक्की के साथ ही चला गया था. दोस्तों सच बताना क्या अब भी आपको यही लगता है की ये महज़ एक कहानी है ? मुझे मेल करेंगें ना ? premguru2u@yahoo.com ; premguru2u@gmail.com आपका प्रेम गुरु Last edited by premguru; 19-06-2009 at 07:40 PM.. |
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#6
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exremely erotic fantasy
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#7
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nice post
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#8
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very nice plese send me more story
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#9
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Pyaare Pathako aur Pathikaao
Aap sabhi ke mails aur kahani ki taareef ke liye shukriya. Miane Teen Chumban ke alawa neeche dee gayi kahaaniyaan bhi likhi hain : Meri anaarkali Do number ka Badmash Nandoiji nahi Landoiji Kyon ho gaya na ? Abhi na Jaao chod kar... Sawaan jo aag lagaye Ek khade Lund ki kartoot Us raat ki baat (Ek rahshya Katha) Umeed hai aap ko ye kahaaniyaan bhi pasand aayengi. Agar aap ko inhen dhundhane men koi pareshani ho to mujhe mail karen. Ye kahaaniyaan antarvasana.com par bhi uplabdh hain. premguru2u@yahoo.com premguru2u@gmail.com In kahaaniyon ke baare men apani raay jaroor likehn. Aapka Prem Guru Last edited by premguru; 05-07-2009 at 01:46 PM.. |
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#10
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excellent webbed story
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