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View Full Version : बीवी और उसकी सहेली की चुदाई एक साथ


boobsvagon
06-07-2009, 08:15 PM
बीवी और उसकी सहेली की चुदाई एक साथ
बीवी और उसकी सहेली की चुदाई एक साथ
मेरा नाम स्वपनिल है। यह मेरी एक आज तक की सबसे अच्छी गुज़री रात है। मैंने उस एक रात अपनी बीवी (शालिनी) और उसकी शादीशुदा सहेली (मधु) जिसका पति मेरी दोस्त भी है, को एक ही रात चोदा।
शालिनी ५ फीट ४ इंच लम्बी है और उसका फ़िगर ३२-२८-३२ है। मधु भी उतनी ही लम्बी और कद-काठी की है पर उसकी चूचियाँ और भी बड़ी और आकर्षक हैं।
मैं और शालिनी अक्सर ही एक-दूसरे से अलग-अलग लड़कियों या लड़कियों के साथ चुदाई करने की बात किया करते थे। एक दिन मधु को मजबूरी में हमारे घर रूकना पड़ा, क्योंकि उसके पति को ऑफिस के काम से बाहर जाना था।
उस दिन खाना खाने के बाद हम तीनों मिलकर बेडरूम में फिल्म देख रहे थे जिसमें बहुत ही सेक्सी सीन अचानक ही आ गया। उसके बाद मुझे कुछ हो गया और मैं शालिनी को किस करने लगा। मधु फिल्म देखने में व्यस्त थी। फिर मैंने शालिनी को प्यार करते हुए उसके कान में धीरे से कहा कि मैं उसे और मधु को एक साथ चोदना चाहता हूँ। शालिनी ने मेरी तरफ देखा और फिर एकदम से मधु के पास जाकर उसके कान में कुछ कहा। उसके बाद मधु बाहर चली गई और शालिनी मेरे पास आकर मुझे चूमने लगी। मैंने उससे पूछा कि तुमने मधु से ऐसा क्या कहा है जो वह बाहर चली गई?
शालिनी ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया- सब्र कर लो थोड़ी देर !
उसके बाद मैं शालिनी को नंगा करके उसकी चूचियों को अपने मुँह में लेकर पीने लगा और उसकी चूत में ऊँगली करने लगा।
अचानक ही दरवाज़ा खुला और मधु एक काले रंग के गाऊन में अन्दर आई और आकर मेरे पास बैठ गई। उसके बाद मैंने शालिनी की तरफ देखा तो उसने मुस्कुराते हुए कहा कि आज हम दोनों तुम्हारे हैं।
इसके बाद तो मैं झपट कर मधु को चूमने लगा और उसका गाऊन खोल दिया। फिर मैं मधु की चूचियों को पीने लगा तो वह तड़पने लगी और मेरे सिर को अपने सीने में ज़ोर से दबा दिया।
इधर नीचे शालिनी मेरे लण्ड को बड़े मज़े से चूस कर मधु की चूत के लिए तैयार कर रही थी। उधर मैं मधु के पूरे बदन को चूम लेने के बाद उसकी चूत को चाटने लगा तो वह सिसकने लगी, शालिनी ने भी उसे और उत्तेजित करने के लिए उसकी चूचियाँ चूसनी शुरू कर दी।
फिर मैंने अपने गरमा-गरम लण्ड पर मधु को बैठा दिया और उसे कुदाने लगा, और शालिनी इधर मेरे मुँह पर बैठ कर अपनी चूत मुझसे चटवाने लगी।
इस तरह मैंने दोनों को बारी-बारी से चोदा और वह रात हमारे लिए यादगार बन गई। उसके बाद से हम लोगों को जब भी मौक़ा मिलता है हम लोग समूह में सेक्स करते हैं।

daga_ak
13-07-2009, 06:30 PM
too short to enjoy, learn to elaborate the story-line.

sonali
01-08-2009, 09:15 AM
raddi kahani hai

johaintr
13-09-2009, 02:44 AM
bhai asi sory badi honi chahiye

johaintr
16-09-2009, 01:55 AM
nice hoty

sam_shank007
16-09-2009, 06:53 PM
yaar kahani badi hoti toh acha hota...

boobsvagon
02-01-2010, 12:50 AM
मेरा नाम अभय है। मैं दिल्ली का रहने वाला हूँ। मेरी उम्र २० साल की है। मैं एक बड़ी कंपनी मैं जॉब करता हूँ। मेरा वेतन २५००० रुपए महीना है। मेरा दिल्ली में अपना फ्लैट भी है और मैं अकेला रहता हूँ। मुझे घर पर काम करने वाली एक नौकरानी चाहिये थी जो मेरे घर का सारा काम करे। इसके लिए मैंने अख़बार में विज्ञापन छपवा दिया। कुछ दिनों बाद मेरे यहाँ कई लड़कियाँ और औरतें आईं। मैंने कई से बात करने के बाद एक औरत पसंद किया जो ३५ साल की थी। लेकिन वो अभी जवान दिख रही थी। वो अकेली थी और उसका पति नहीं था। मैंने उसे काम पर रख लिया।

अगले दिन से वो काम पर आ गई और मैंने उसे एक कमरा दे दिया। उस कमरे में मैंने टीवी रखवा दिया। मैंने उसे बाज़ार से चिक्केन लाने को कह दिया। वो चिक्केन लेकर आई, तो मैंने उसे बट्टर-चिक्केन और रोटी बनाने को कहा। उसने खाना बनाने के बाद मेज़ पर खाना सजा दिया। इसके बाद हम दोनों मिल कर खाना खाने लगे। मैं उससे उसके बारे में पूछने लगा। वो अपने बारे में सब बातें बताने लगी। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा।

मेरी नौकरानी साड़ी पहनती थी, जो मुझे नहीं पसंद था। मैं बाज़ार से उसके लिए अच्छे कपड़े और नाइट-ड्रेस लेकर आया और उसको पहनने को दे दिया। उसको शुरु-२ में परेशानी हुई, लेकिन बाद में उसको ठीक लगने लगा। वो खाना अच्छा बनाती थी। इस बात से मुझे बहुत ख़ुशी मिलती थी।

अब वो मेरे से घुल-मिल गई। इतवार को मैंने उसे मार्केट घूमाने का प्लान बनाया। मैं उसके लिए बाज़ार से अच्छी साड़ी खरीद कर लाया। वो तैयार हो गई, इसके बाद हम दोनों मिल बाज़ार घूमने निकल गये। मैंने उसके लिए बाज़ार से जींस, टी-शर्ट, घड़ी, सैंडल, और भी चीजें ख़रीदी। इसके बाद हम दोनों ने पिज्जा हट में जाकर पिज्जा खाया।

हम दोनों थक गये थे। खास कर वो बहुत थक गई थी। मैंने उससे पूछा- भूख लगी है?

तो वो बोली- भूख लगी है लेकिन मेरे शरीर में बहुत दर्द हो रहा है।

मैंने बोला- कोई बात नहीं ! मैं होटल से खाने का आर्डर दे देता हूँ !

इसके बाद मैंने खाने का आर्डर दे दिया और उसके पास जाकर बैठ गया और उससे पूछने लगा- तुम्हारे शरीर में बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है?

वो बोली- हाँ।

इसके बाद मैं उसका पैर हाथ में लेकर दबाने लगा। उसने घबरा कर पैर हटा लिया और कहने लगी- आप ये क्या कर रहे हैं?

मैंने बोला- मैं तुम्हारा शरीर दबा रहा हूँ क्यूंकि तुम्हारे शरीर में दर्द हो रहा हैं।
वो बोली- आप मेरे मालिक हैं और आप मेरा शरीर दबायेंगे !

मैंने कहा- कोई बात नहीं, तुम्हारे शरीर का दर्द मिटना जरूरी है और इसमें मालिक और नौकर की कोई बात नहीं।

इसके बाद मैंने उसका शरीर दबा कर ठीक कर दिया। फिर थोड़ी देर बाद खाना आ गया, और हम मिल कर खाना खाने लगे।

कुछ दिनों बाद मैं उसको ब्यूटी-पार्लर लेकर गया और ब्यूटी -पार्लर में उसका मेक-अप, बॉडी-मसाज़, हेयर-स्टाइल और बहुत कुछ करवा दिया। इसके बाद वो गज़ब की लग रही थी। फिर घर पर आये और मैंने उसे जींस और टी-शर्ट, सैंडल, घडी, चश्मा पहनने को बोला। वो मना करने लगी क्यूंकि वो उसे पहली बार पहन रही थी। मेरे बहुत जोर देने पर उसन पहना। इसके बाद वो बहुत अच्छी लग रही थी। मैंने उसे हमेशा पहनने के लिए बोल दिया। अब वो हमेशा जींस पहनती थी। फिर कुछ दिनों बाद वो बीमार पड़ गई। मैंने उसका इलाज़ हॉस्पिटल में करवाया। फिर कुछ दिनों बाद वो ठीक हो गई। अब वो मुझे पसंद करने लगी थी। मैं भी उसे पसंद करने लगा।

फिर कुछ दिनों बाद उसका जन्मदिन आया। मैं बर्थडे का सारा इंतजाम करने लगा। मैं उसे सरप्राइज़ देना चाहता था। मैंने घर को अच्छी तरह से सजवाया। केक और खाने का आर्डर दे दिया। शाम को मैंने उसे हैप्पी बर्थडे बोला। और मैंने उसे एक गले का सोने हार दिया। वो हार को देखकर खुश हो गई और मेरे गले से लिपट गई। मुझे अच्छा लगा। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों ने ड्रिंक लिया। पहले तो वो मना कर रही थी, फिर मेरे कहने पर उसने थोड़ी सी ले ली। इसके बाद मैंने उसे डांस करने के लिए बोला। तो फिर वो मना करने लगी। दुबारा मेरे कहने पर वो मेरे साथ डांस करने लगी। बहुत देर तक हम नाचते रहे। इसके बाद हम दोनों खाना खाया और सो गये।

कुछ दिनों बाद एक दिन वो नहा रही थी। उसका तौलिया बाहर छूट गया था। उसने मेरे से तौलिया मांगा तो मैंने उसे तौलिया देने के लिए दरवाज़ा ख़टखटाया तो उसने दरवाज़ा खोला। मैंने अंदर हाथ डाल कर तौलिया दिया तो उसने झटके से मेरा हाथ पकड़ कर अंदर खींच लिया। अंदर मैंने उसको देखा तो पागल हो गया, वो सिर्फ ब्रा और पैन्टी में थी। मैं तो सिर्फ उसे देखता रह गया। फिर अचानक होश आया कि यह गलत है।

मैंने उससे बोला- यह गलत है, मैं आपके साथ ऐसा कुछ नहीं कर सकता।

वो बोली- देखो अभय, मैं बहुत प्यासी हूँ, तुम मेरी प्यास बुझा दो। मैं तुम्हारा एहसानमंद रहूंगी। मैं तुमसे प्यार करती हूँ और तुम भी तो मुझसे प्यार करते हो।

मैंने बोला- यह गलत है, अगर आपको कुछ हो गया तो।

तो वो बोली- मुझे कुछ नहीं होगा। बस तुम मेरी प्यास बुझा दो।

मैं बोला- ठीक है।

इसके बाद मैं उसके शरीर पर साबुन मलने लगा। पहले मैंने साबुन को हाथ से शुरु किया, इसके बाद उसकी चूची पर लगाया। उसके शरीर में करंट दौड़ गया। फिर मैंने साबुन को उसको पेट पर लगाते हुए उसके पैर पर लगाया। फ़िर पीठ पर ! इसके बाद उसकी बुर में साबुन लगाया। फिर वो मेरे को साबुन लगाने लगी। जैसे-२ मैंने उसको साबुन लगाया था, वैसे-२ वो मेरे को साबुन लगाने लगी। फिर मैंने उसका शरीर अपने हाथ से मला। उसके बाद उसको नहलाया, उसने मेरे को नहलाया।

फिर मैंने उसका शरीर तौलिये से पौंछा, उसको ब्रा, पैन्टी, जींस टी-शर्ट पहनाई। इसके बाद मैंने उसको चूम लिया। फिर थोड़ी देर बाद वो खाना बनाने लगी, मैं भी उसका साथ देने लगा। अगले दिन रात को खाना खाने के बाद हम दोनों ऊपर छत पर बातें करने लगे। फिर थोड़ी देर बाद हम दोनों सोने के लिए जाने लगे। मैंने बोला- आज के बाद हम दोनों साथ में सोयेंगे।

वो खुश हो गई। इसके बाद हम दोनों साथ में सो गये। आधी रात बाद वो जगी और मेरा लंड सहलाने लगी। मेरी नींद खुल गई। वो डर गई।

फिर मैंने उसकी आँखों में देखते हुए उसे चूमने के लिए मैंने अपना ओंठ उसके ओंठ पर रख दिए। वो सिहर गई। बहुत देर तक हम दोनों अपने ओंठों को एक दूसरे से चिपकाते हुए किस करते रहे। मैंने अपनी जीभ उसकी जीभ से भिड़ा दी। इसके बाद में उसका नाईट-ड्रेस उतार दिया। मैं उसका शरीर देखता रह गया। उसकी बड़ी-२ चूची ! मज़ा आ गया।

मैं उसकी चूची अपने हाथ से दबाने लगा। वो सिसकारी भर रही थी। मैं अपने मुँह में उसकी चूची चूसने लगा। एक हाथ से मैं उसकी एक चूची दबा रहा था और मुँह से दूसरी चूची का रसपान कर रहा था। फिर मैंने उसके शरीर को जीभ से चाटा। जीभ से चाटते-२ मैंने अपनी जीभ उसकी बुर में डाल दी। वो सिहर गई और उसके मुँह से आवाज़ निकल गई। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर खूब हिला रहा था। वो आवाज़ निकाल रही थी। फिर थोड़ी देर में उसका रस निकल गया और मैं उसका सारा रस पी गया।

इसके बाद वो मेरा लंड चाटने लगी। मुझे भी बड़ा मजा आ रहा था। बहुत देर तक उसने लण्ड चूसा। इसके बाद मैंने अपना वीर्य उसके मुँह में छोड़ दिया। उसने सारा वीर्य पी लिया। इसके बाद मैं उसकी गांड पर काटने लगा, जीभ से उसकी गांड चाट रहा था। फिर उन्गली डाल कर उसकी गांड के छेद को बड़ा करने लगा। इसके बाद मैं अपना लंड उसकी गांड में डालने लगा। वो चिल्ला उठी और बोली- बहुत दर्द हो रहा है।

फिर मैं उसके ओंठ अपने ओंठ से चाटने लगा। फिर मैंने धीरे से धक्का लगाया। वो फिर चिल्ला उठी। लेकिन इस बार मैंने रहम नहीं खाया और जोर से धक्का दिया। वो इतनी जोर से चिल्लाई कि रोने लगी। उसके आंख से आँसू आने लगे। मैं उसके ओंठ को किस करने लगा। फिर थोड़ी देर में वो शान्त हो गई। फिर मैं धीरे-२ अपना लंड अंदर बाहर करने लगा। उसको मज़ा आने लगा । मैं उसे किस करते हुए उसकी गांड मार रहा था। कुछ देर बाद मैं झड़ गया। वो मेरा लंड चूसने लगी। फिर थोड़ी देर बाद मेरा लंड टाइट हो गया। मैं अपनी जीभ उसकी बुर में डाल कर चूसने लगा। फिर मैंने जीभ निकला और अपना लंड उसकी बुर में डालने लगा। आधे घंटे तक उसकी बुर मारता रहा। फिर हम दोनों झड़ गये। फिर सारी रात हम दोनों अपना लंड और बूर एक दूसरे में डाल सो गये।

अब हम हर रोज़ नई स्टाइल में सेक्स करते हैं। मैं उसे अब अपनी पत्नी मानता हूँ और वो मेरे को पति।

boobsvagon
02-01-2010, 12:55 AM
बरसात का मज़ा ज़िंदगी भर


मैं फ़िलहाल २५ साल की लड़की हूँ, जब होस्टल में रह कर पढ़ती थी तब १८ साल की थी।

बात उस दिन की है जब एक दिन खूब बारिश हो रही थी और मुझे कोलेज से निकलने में देर हो गई थी। रात के ९ बज गये थे। घनघोर बारिश थी मैं पूरी तरह भीग गई थी। सलवार और कुरती मेरे बदन से चिपक गई थी। मुझे डर भी लग रहा था। बारिश से बचने के लिये एक घर के नीचे रुकी थी। ठंड से ठिठुर भी रही थी। घर में से एक औरत ने निकल कर मुझे ऊपर बुला लिया। मुझे राहत मिल गई थी। उसने मुझे कपड़े बदलने को दिये। एक कुरता दिया जिसे मैंने पहन लिया और उस औरत को धन्यवाद दिया। बारिश रुक नहीं रही थी। औरत अपने कमरे में चली गई। मैं अकेली हो गई थी। कुछ देर बाद तीन लड़के आये, मुझे देखा और अंदर चले गये। बाद में मुझे बुलाया तो मैंने देखा वो औरत उन तीनों के साथ नंगी लेटी थी। पहले मैं डर गई मगर उसने मुझे डरने से मना किया और कहा कि यदि वो इस बारिश का मज़ा लेना चाहती हो तो बोलो....

मैं कुछ बोल नहीं पाई, तभी एक लड़के ने मुझे कहा कि तुम्हारा बदन कोरा है। यदि एक बार तुम मज़ा लोगी तो बार बार यहाँ आओगी।

मैं क्या करती। मैंने हाँ कह दिया।

तब मेरे कपड़े उतार कर तीनों ने मुझे नंगा कर दिया और लेटा दिया। मुझे डर भी लग रहा था मगर एक नये अनुभव का सोच कर चुप थी, मेरे बूब्स देख कर तीनों ने कहा कि इतने बड़े आज तक नहीं देखे। तीनों लड़के मेरे बदन को सहलाने लगे थे। मुझे भी थोड़ा मज़ा आने लगा था। पहली बार ऐसा मिला मज़ा था।

औरत ने कहा कि तुम चुप चाप लेटी रहो तभी तीनों ने मेरे बदन पर शराब उड़ेल दी और चाटने लगे। मुझे पता नहीं क्यों बहुत अच्छा लगा। मुझे एक ने उठाया और मेरी चूत में उंगली डाल दी। मैं चिल्ला उठी मगर मज़ा आया।

एक ने मेरी गाँड में उंगली डाल दी।

तीसरे ने मेरे बूब्स को दबाना शुरु कर दिया। उस औरत ने मुझे एक पलंग से बांध देने को कहा। मुझे तीनों ने बांध दिया और एक मेरे ऊपर चढ़ कर अपने लंड को मेरी चूत में डालने लगा। मैं चिल्ला उठी बहुत दर्द हो रहा था। मगर चुप रही। मेरी चूत में उसने अपने लंड को डाल कर हिलाना शुरु कर दिया। मैं चिल्ला उठी थी। चूत से खून भी आ गया था। मगर मुझे अच्छा लग रहा था।

तभी एक ने मेरे मुँह मेँ लंड दे दिया और कहा कि इसे चूसो। मैं चूसने लगी। उसका वीर्य मेरे मुँह में आ गया। मेरे हाथ बंधे थे, तीनों ने बारी बारी से मुझे पागल कर दिया। मैं थक गई थी तब औरत ने मुझे कुछ पीने को दिया। वो शराब थी, मैं पी गई और उस रात कई बार तीनों ने मेरे साथ मज़ा लिया। सुबह ४ बजे बारिश बंद हो गई थी तब मुझे जाने को कहा और बाद में आने को कहा।

मैं फ़िर वहाँ जाने लगी और एक बार तो ५ लोगों ने मुझे संतुष्ट किया।

मुझे ये आदत लग गई। उस रात ने मुझे सेक्सी बना दिया। २५ साल की हूं मगर एक दो से मेरा मन नहीं भरता। मेरी शादी हो गई है मगर मैं आज भी कई लोगों के साथ एक साथ मज़ा लेती हूँ।

boobsvagon
02-01-2010, 01:02 AM
हाय, मेरा नाम सितांषु है। मैं अभी बंगलौर में रहता हूं और ये मेरा पहला
संदेश है आप लोगो के पास। इसका मतलब ये नहीं के ये मेरा पहला सेक्स अनुभव
है। इससे पहले मैने बहुत सेक्स किया है लड़कियों और आंटिओं से भी। मैं
हमेशा कुंवारी लड़कियां, matured girls and sexy aunties को sex encounter
करने के लिये बेताब हूं और जो भी मेरे साथ पूरी रात गुजारना भी चाहे तो
मैं बिल्कुल फ़्री हूं क्योंकि मैं यहां मेस में रहता हूं सो मुझे मना
करने वाला यहां कोई नहीं है। पहले मैं अपना परिचय देता हूं। रंग गोरा,
height 5.5", age 24, graduate। और एक बात जो आप लोगों को शायद बुरा भी
लगे कि मैं अपने आपकी तारिफ़ ज्यादा करता हूं मगर ये सच है कि मैं अपने
हाई स्कूल से लेकर स्नातक होने तक हैंडसम नाम से ज्यादा फ़ेमस था
भुवनेश्वर में। और जो लड़कियां मेरे साथ सेक्स एन्काउंटर में रात गुजारते
थे वो मेरे साथ टाउन में घूमने के लिये भी ख्वाहिश रखते थे। खैर मैं अपने
बारे में कुछ ज्यादा ही बोल रहा हूं ये तो आपको मुझसे मिलने के बाद ही
पता चलेगा कि मैं कितना अच्ची तरह से स्थिति सम्भाल लेता हूं।

ये स्टोरी 3 साल पुरानी है तब मेरे परिवार के साथ में medical colony में
रहता था और मैं engg. की पढ़ाई कर रहा था। तभी मेरे पड़ोस में एक परिवार का
आगमन हुआ। फ़ैमिली में पति, पतनी और एक 3 साल का बच्चा। वैसे भी कालोनी
में और भी कई भाभियां थी पर नयी भाभी के सामने सब फ़ीका पड़ने जैसा लगता
क्योंकि वो नये थे तो मैं कभी कभी उनका marketing भी कर लेता। मुझे घूमने
का मौका मिल जाता और आंटी को देखने का और कभी कभी थोड़ा थोड़ा छूने का भी।
इसी बीच एक महीना बीत गया और भाभी हमारे घर के साथ भी घुल मिल गये। उनके
पति और पापा में भी गहरी दोस्ती हो गयी। एक दिन एक शादी में हमे और भाभी
को भी न्यौता मिला था पर मम्मी को कुछ काम था सो भाभी भी जाने के लिये
मना कर दिया। सो पापा और भैया (भाभी के पति)चले गये। पार्टी कालोनी से 30
km के दूरी पर था और आते वक्त जोर की बारिश के वजह से पापा ने रात के
करीब 9 बजे ममा को फोन में कहा के मुझे आंटी के घर जा के सोने के लिये।

फ़िर क्या मैं खाना खाकर 10 बजे भाभी के घर चला गया। घंटी बजाई और भाभी ने
झट से दरवाज़ा खोल दिया। तभी मैं भाभी को देख कर दंग रह गया। अरे बातों
बातों में मैं तो भाभी का फ़ीगर आउट भी नहीं कर पाया। गोरी चिट्टा, लम्बे
घने बाल, ब्रेस्ट आगे जितना, गांड उतना पीछे, शोर्ट कट बोले तो 36-30-36,
5'2", इतने सारे फ़ीगर के साथ साथ काली नाइटी, जैसे लगा कि आसमान की कोई
परी नीचे घूमने आयी हो। फ़िर हम दोनो अंदर आ गये भाभी ने कहा तुम बैठो मैं
दूध लाती हूं, मैं वहीं सोफ़े पर बैठ गया। थोड़ी देर में भाभी दूध लेकर आ
गयी एक गिलास मुझे दिया और एक गिलास खुद लेकर मेरे पास सोफ़े पर बैठ गयी।
और एक अंग्रेजी फ़िल्म देखने लगे जिसमे सिर्फ़ 2-3 किसिंग सींस ही थे,
उन्होने मुझसे पूछा कि क्या संदीप तुमहारी कोई गर्लफ़्रेंड है या नहीं।
मैं घबरा गया कि भाभी क्या पूछ रही हैं क्योंकि इससे पहले कभी ऐसी बात
हमारे उनके बीच में नहीं हुई थी। मैने इंकार में सर हिला दिया तो कहने
लगी कि तुम तो लड़कियों कि तरह शरमा रहे हो, मैने कहा नहीं भाभी ऐसी कोई
बात नही है। तो उन्होने कहा कि एक बात बताओ तुमने आज तक कभी किसी लड़की या
औरत को नंगा देखा है तो मैने जान बूझकर कहा नहीं भाभी आज तक नहीं देखा
है, वो मेरे बगल में बैथी थी और जब बातें कर रही थी तो मैं बार बार उनके
मम्मो की तरफ़ देख रहा था, भाभी ने मुझे देखते हुए देख लिया था, वो बोली
अगर देखना है तो मुझसे कहो मैं तुम्हे ऐसे ही दिखा दूंगी। मैं घबरा गया
कि भाभी क्या बोल रही है, उसके बाद भाभी ने मेरे चेहरे पर हाथ रखते हुए
बोला कभी किसी के साथ कुछ किया है या नहीं।

तभी मेरे अंदर का जानवर जाग गया तो मैने भाभी से कहा कि मैं आपको किस
करना चाहता हूं और कहते हुए उनके चेहरे को अपने तरफ़ खींच कर उनके होंठों
पर किस करने लगा, उनके होंठों बहुत ही नशीले थे, मैं उनके होंठों को
चूसने लगा और भाभी मेरे होंठों को चूसने लगी, दोनो करीब 15 मिनट तक ऐसे
ही किस करते रहे उसके बाद भाभी बोली कि तुम तो कह रहे थे कि तुमने कभी
कुछ नहीं किया है लेकिन तुम्हे देखकर लगता नहीं है कि तुमने कभी कुछ नहीं
किया है। मैं कुछ नहीं बोला और भाभी की ब्रा एक बटन को खोलकर उनके मम्मे
को हल्का हल्का दबाने लगा, उनको भी अच्छा लग रहा था इसलिये कुछ नहीं बोली
फिर मैने उनके ब्रा को पूरा खोल दिया तो भाभी कहने लगी तुम तो बहुत तेज
हो, पहले तो तुमने किस करने को कहा और अब मेरे मम्मे दबाने लगे, मैने कहा
भाभी आप बहुत खूबसूरत हो और मैं आपको चोदना चाहता हूं, कहके भाभी कि एक
मम्मो पर अपना मुंह लगाकर चूसने लगा और दूसरे मम्मे को अपने हाथ से दबाने
लगा, भाभी भी मस्ती में आकर ऊऊउह्हहाआआ और जोर से चूसो संदीप बहुत अच्छा
लग रहा है चूसते रहो ऊऊऊह्हाआआआ मजा आ रहा है संदीप जोर से चूसो और
जोरसे। मैं अपने पूरे स्पीड से भाभी के मम्मे को चूसने लगा, तभी वो सिर्फ़
पैंटी में ही थी, मम्मे चूसते हुए मैने अपने हाथ भाभी के पैंटी के अंदर
डाल कर उनके जांघों को सहलाने लगा तब तक भाभी मस्त हो चुकी थी, भाभी की
जांघों को सहलाते हुए मैने उनकी चूत को भी हल्के हल्के सहलाने लगा, भाभी
मस्ती में आअह्हह्हह्हह ह्हह्हह्हह्ह ऊऊऊउफ़्फ़फ़्फ़फ़्फ़फ़ आवाज़ निकाल रही थी।

एक तरफ़ उनके निप्पल से दूध निकल रहा था और दूसरी तरफ़ उनके निप्पल को मसल
रहा था। 1 घंटे तक मैने उनका निप्पल और चूत में उंगली डालता रहा उनकी चूत
गीली हो गयी थी, बाद में मैने उसके पेट पेर किस किया और उनके चूत के अंदर
अपनि जीभ को डालने लगा और उनकी चूत को मैं ने अच्छी तरह चाटा 25 मिनट तक।
और भाभी मुझे किस कर के कहने लगीं के तुमने तो अपना काम कर दिया अब देखो
मैं क्या करती हूं। फिर भाभी ने मेरे लंड की टोपी पर ज़ुबान फेरनी शुरू
की, फिर धीरे धीरे पूरा लंड अपने मुंह में ले लिया और लोलयपोप की तरह
चूसने लगीं। भाभी बहुत अच्छा लंड चूस रही थीं। मैं तो उस वक्त मज़े और
आनन्द की ऊंचाई पर था। भाभी ने पहले आहिस्ता और फिर तेज़ी से लंड चूसना
शुरू कर दिया। भाभी ने मेरा लंड अपनी चूत पर रखा मैने एक slow push के
साथ अपना लंड उनकी चूत में डाल दिया। उनकी चूत पहले ही गीली हो रही थी
इसलिये पूरा लंड बड़ी आसानी से उनकी चूत में चला गया। पहले तो मैं भाभी को
आहिस्ता आहिस्ता चोदता रहा फिर मैने अपनी स्पीड तेज़ कर दी और भाभी को
शक्ति से चोदने लगा। भाभी चुदाई का पूरा मज़ा ले रही थीं और आआअह्ह
ऊओह्हह्ह ऊउफ़्फ़फ़्फ़ ह्हहयययययीए और तेज़ प्लीज़ तेज़ उफ़्फ़फ़्फ़ ऊऊह्हह्ह की
आवाज़ें निकाल रही थीं। उनके ब्रेस्ट्स हर झटके के साथ हिल रहे थे। जो एक
हसीन और दिलकश नज़ारा था।

मैं चोदने के बाद मैने भाभी को घोड़ी बनाया तो उनकी खूबसूरत और चौड़ी गांड
ऊपर को उठ आई और उनके ब्रेस्ट्स किसी आम की तरह लटकने लगे। मैने भाभी की
गांड पर हाथ फेरते हुये लंड उनकी चूत में डाल दिया और उनके ब्रेस्ट्स पकड़
कर ज़ोर ज़ोर से झटके लगाने लगा मैं भाभी को जी जान से चोद रहा था और भाभी
भी चुदाई में भरपूर साथ दे रही थी। काफ़ी देर चुदने के बाद भाभी ठंडी पड़
गयीं, मैं भी अपने क्लाइमेक्स पर था। मैने भाभी को कहा कि मैं छूटने वाला
हूं तो उन्होने कहा कि कोई बात नहीं तुम मेरे अंदर ही निकालो। मेरे लंड
से वीर्य का फ़ौव्वारा निकला और भाभी की चूत वीर्य से भर गयी मैं भी थक कर
भाभी के ऊपर लेट गया। थोड़ी देर बाद मैने लंड भाभी की चूत से निकाला जो
वीर्य और भाभी के जूस से भरा हुआ था, भाभी ने फिर मेरे लंड को चाटना शुरु
कर दिया और इसे बिल्कुल साफ़ कर दिया।

अब भाभी ने कहा संदीप तुम तो बहुत expert लगते हो, मुझसे पहले कितनो के
साथ चुदाई कर चुके हो, मैने कहा भाभी चुदाई तो 14-15 के साथ किया है
लेकिन जैसे मम्मे आपके हैं वैसे मम्मे मैने आजतक नहीं चुसे हैं, आपके
मम्मे बहुत टेस्टी हैं। ये कहते हुए मैने अपनी उंगली फ़िर से उनकी चूत में
डाल दी और भाभी ने स्ससस्सस्ससाआआआ करती रही, बहुत अच्छा लग रहा है। और
फिर मैने झटके से भाभी की तरीफ़ की कि सच में आप बहुत खूबसूरत हो तो भाभी
ने मुझसे कहा कि ये क्या भाभी भाभी लगा रखा है, पहले ये बताओ तुम मुझे
रात भर चोदोगे या नहीं। ये सुनकर तो मुझे और भी खुशी महसूस हुई। इसका
मतलब ये नहीं कि मैं और किसी के साथ रात नहीं गुजारी है। मैने तो पिछले 4
सालों से कितनी अपनी classmate के साथ रात गुजारी है पर भाभी के जैसा
patience और किसी में मैने नहीं देखा था इसलिये मुझे बहुत खुशी महसूस हो
रही थी।

तब मैने उनसे कहा कि मैने आपको दूसरे एंगल से चोदना चाहता हूं तो बोली
कौन से एंगल से चोदोगे अब मुझे, मैने कहा कि आप ज़मीन पर लेट जाइए और अपने
पैर को उठा कर बेड पर रख दीजिये और उन्होने ऐसे ही किया मैं उनके पैरों
के बीच में गया और उसको फ़ैला कर अपने दोनो कंधों पर रख कर उनकी फ़ुद्दी के
छेद पर अपना लंड रखकर धक्के मारने लगा, इस तरीके से उन्हे भी अच्छा लगने
लगा और बोली बहुत मजा आ रहा है मेरे राजा, जैसे चोदना हो चोदो मुझे, मैं
करीब उस एंगल से 10 मिनट तक चोदने के बाद चूत से लंड को निकाल कर वापस
गांड में डाल दिया और चोदने लगा। मैने इसी तरह हर 5 मिनट के बाद चूत और
गांड की चुदाई करता रहा। लगभग 25-30 मिनट तक इसी तरह चोदने के बाद मैं
बोला, "मैं अब झड़ने वाला हूं। तुम बताओ कि मेरे लंड का पानी कहां लेना
चाहती हो, अपनी चूत में या गांड में।" उन्होने कहा, "तुम मेरी गांड में
ही पानी निकाल दो, चूत में तो तुम पहले भी निकाल चुके हो।" फ़िर मैने अपना
सारा अनमोल रतन उनकी गांड में डाल दिया और मैं बेड पर आकर लेट गया, तभी
उनकी नज़र घड़ी पर गयी तो देखा कि 5 बजने वाले हैं तभी उन्होने मेरे होंठों
पर जोर से किस किया और कहने लगी जो मजा तुम्हारे साथ आता है वो मुझे उनके
साथ नहीं आता है।

फ़िर भाभी के मना करने के बाद भी मैने घोड़ी बना कर फिर से उनकी चुदाई शुरु
कर दी। इस बार मैने केवल चूत की ही चुदाई की। इस बार लगभग 1/2 घंटे तक
चोदा तब कहीं जा कर मेरे लंड से पानी निकला। अब तक सुबह हो चुकी थी। भाभी
ने कहा के उनकी चूत और गांड में दर्द बहुत हो रहा है लेकिन इस चुदाई से
जो मज़ा मिला उसके आगे ये दर्द कुछ भी नहीं। फ़िर मैं अपने घर आ गया और जब
भी मुझे ये मौका मिलता मैं उन्हे छोदता रहा।

boobsvagon
02-01-2010, 01:10 AM
मैंने अभी अभी 18वें वर्ष में कदम रखा है। इतने सालों से मैं घर में माँ को ही देखते आ रही हूँ। मेर एक छोटा भाई भी है तो अभी सिर्फ़ 10 वर्ष का ही है। मेरी माँ की उमर लगभग 40 वर्ष की है। यूँ तो दिखने में वो आकर्षक लगती हैं, पर शायद अधिक काम की वजह से वो थकी हुई रहती है। मेरे पापा का देहान्त हुए 6 साल हो चुके थे। तब से मम्मी ही घर को सम्भालती आ रही है। मुझे पता था कि माँ एक काल गर्ल के रूप में काम करती थी। अधिकतर वो जीन्स और शर्ट में रहती थी। और अपने आप को एक कम उम्र की लड़की बताया करती थी। पर अब लोगों की नजर मुझ पर भी पड़ने लग गई थी। उभरती जवानी की खुशबू फ़ैलने लगी थी। मैं भी अपनी माँ की तरह सुन्दर थी और मेरे नाक नक्शे और कट्स भी अच्छे थे। मैं अब कॉलेज जाने लगी थी। मुझे सेक्स का ज्ञान तो पहले से ही था। अब मुझे सहेलियों के द्वारा चुदाने और गाण्ड मरवाने की कहानियाँ भी सुनने को मिल जाती थी। चुदाने के बाद लड़कियाँ आई-पिल्स को भी बहुत काम में लाती थी। मेरे दिल में भी कभी कभी सेक्स की भावना जागृत हो उठती थी। पर मुझे इससे डर भी लगता था कि लड़के ना जाने क्या करते होंगे।

एक बार माँ रात को घर नहीं आई तो मैं घबरा उठी। मैंने बहुत बार मोबाईल पर सम्पर्क करने की कोशिश की पर फोन का स्विच ऑफ़ था। माँ के कॉल गर्ल होने के कारण, मैंने डर के मारे आस पास किसी की मदद भी नहीं ली। मैं आस पास धीरे धीरे सभी से पूछती रही, पर निराशा ही हाथ लगी। फिर एक दिन एक पुलिस वाला घर आया और मुझे थाने में एक लाश की पहचान करनी थी। होस्पिटल में शव-गृह में एक बर्फ़ में रखी लाश को मैं पहचान गई। वो मम्मी ही थी, उनकी हत्या हुई थी। मुझे ये तो पता नहीं था कि क्या करना चहिये था पर डर के मारे मैंने मना कर दिया कि इसे मैं नहीं पहचानती हूँ। पर घर आ कर मैं बहुत रोई। दिन ऐसे ही गुजरते गये, इस घटना को एक साल बीत गया। मेरा छोटा भाई भी बीमार रहने लगा था। अब मुझे पैसो से परेशानी आने लगी थी। हमे कभी खाना नसीब होता था कभी तो भूखे ही रहना पड़ता था। माँ के मरने का प्रमाण पत्र मेरे पास नहीं था, सो उनका पैसा भी मेरे काम नहीं आ सका। गरीबी मेरे सिर पर आ चुकी थी। मैंने एक घर में बर्तन और झाड़ू पोंछा का काम शुरु कर दिया था।

इस दिनों कॉलेज में मेरी एक लड़के सन्दीप से पह्चान हो गई थी। बातों बातों में मेरे मुख से निकल गया कि इस बार पढ़ाई जैसे तैसे करके परीक्षा दे दूंगी पर आगे से तो ईशवर ही मालिक है। वो लड़का एक बिजनेस मेन का लड़का था। शायद वो मुझे चाहता था। उसने अपने पापा से कह कर मुझे अपनी फ़ैक्टरी में लगवा दिया था। अब मेरी मुश्किलें थोड़ी कम हो गई थी। उसके पापा सुरेश चन्द की बुरी नजरें मुझ पर पड़ चुकी थी।

एक दिन उन्होने मुझे अपने दफ़्तर में बुला कर कहा कि यदि तुम अधिक पैसा कमाना चाहती हो तो तुम अपनी माँ का धन्धा अपना लो, मालामाल हो जाओगी। मैं घबरा उठी कि ये सब कैसे जानते हैं। पर जल्दी ही पता चल गया कि वो कॉल-गर्ल के शौकीन थे। शायद मेरी माँ उनके पास जाया करती थी। उनके पास दूसरी लड़कियाँ भी आती थी जिनके साथ वो मौज मस्ती करते थे।
एक बार उसने मुझे एक रात के लिये 1000 रु ऑफ़र किये। मैं चुप ही रही। पर पैसों की तंगी और पढ़ाई को देखते हुए एक बार मैंने यह निश्चय कर लिया कि जब मेरी माँ यह काम कर सकती थी तो मैं क्यों नहीं कर सकती हूँ। एक दिन मैंने उन्हें हिम्मत करके हां कर दी।

उन्होंने मुझे नई जीन्स और टॉप दिलाया। कई तरह की खुशबू और तरह तरह के कॉस्मेटिक्स दिलाये और रात को बुला लिया। यह वो घर नहीं था जहाँ वो रहते थे, इसे वो फ़ार्म हाऊस कहते थे। पूरा खाली था सिर्फ़ एक बड़ी उमर की औरत वहां काम करती थी। मैंने जिंदगी में पहली बार इतना मंहगा और स्वादिष्ट खाना खाया था। बहुत देर तक तो वो मेरे से बाते करते रहे, फिर अपना फ़ार्म हाऊस घुमाया और अन्त में मुझे अपना बेड रूम दिखाया जहा मुझे उसके साथ खेल खेलना था। खूबसूरत सा बेड रूम, नरम गद्दे, एयर कन्डीशन, कमरे में शानदार खुशबू, मन को खुश करने को काफ़ी था। उसे देख कर मैं अपने आप को बहुत छोटा समझने लगी। उन्होने मुझे कहा कि मैं अब आराम करू उन्हे कुछ काम करना है। मैं बिस्तर पर लेटी तो जैसे स्वर्ग में आ गई। बदन को सहलाता नर्म गद्दा, और भीनी भीनी खुशबू ने मुझे कब सुला दिया मुझे पता ही नहीं चला।

पता नहीं कब, रात को मेरे बदन के अन्दर उनका हाथ रेंगने लगा। नींद में मुझे सपना जैसा लगा। मेरे बोबे में मिठास सी भरने लगी। इतना प्यारा सा अह्सास हुआ कि मैंने आंखे बन्द ही रहने दी और आनन्द लेने लगी। मेरा टॉप ऊंचा हो गया, मेरी छातिया नंगी हो गई थी। मेरे निपल को होंठो से दबा कर चूसने लगा। मेरे मुख से हाय निकल पड़ी। मैंने धीरे से अपनी आंखे खोली तो वो सुरेश ही था। उसका नंगा बदन मेरे सामने था। सुरेश सेक्स के मामले में एक अनुभवी इन्सान था। उसने मुझे आहिस्ता से उत्तेजित किया और जब मैं वासना से भर गई तो उन्होने मेरे कपड़े एक एक करके उतार दिये। मुझे उनका लण्ड बहुत प्यारा सा लगने लगा। मैं बार बार उसे पकड़ लेती थी, और अपनी तरफ़ खींचती थी। वो मेरे निपल को अपनी अंगुलियों से धीरे धीरे मसलने लगे। एक तीखा सा मजा आने लगा। मेरे उरोज को भी वो सहलाने और मसलने लगा। मेरे मुख से सिसकारियाँ निकल पड़ी। चूत गीली हो उठी, धीरे धीरे चिकना रस छोड़ने लगी। उसका बलिष्ठ शरीर मेरे जिस्म से रगड़ खा कर गुलाबी सा मीठा सा मजा दे रहा था। मेरे अंग अंग को मसल कर वो मस्त किये दे रहा था।

मैं चुदने के लिये बिलकुल तैयार थी। अब महसूस हो रहा था कि वो मेरी चूत में अपना लण्ड घुसा दे और बस अब चोद दे। बिना इस बात को जाने कि ये मेरी पहली चुदाई होगी और मेरी झिल्ली फ़ट जायेगी। चूत में एक अन्दर वासना युक्त मिठास भरने लगी थी। मुझे पहली बार ऐसे अनोखे आनन्द का मजा आ रहा था। सोचा कि लोग इसे बुरा क्यो कहते हैं? जिस काम से इन्सान मस्त हो जाये, असीम सुख मिले, उससे परहेज़ क्यूँ ? तभी उसने अपना लण्ड मेरे मुख के पास ला कर होंठो से सटा दिया। ये मेरा नया अनुभव था।

“ये क्या कर रहे हो?” एकाएक मुझे घिन सी आई।

“इसे किस कर लो” सुरेश ने कहा। मैंने मजबूरी में उसे किस कर लिया।

“ऐसे नहीं, मुँह में ले कर चूसो !” उसने फिर से अपना मोटा सा लण्ड मेरे होंठो से छुला दिया।

“हटो, ये नहीं करूंगी।” मैंने घिन से अपना चेहरा घुमा दिया। वो थोड़ा सा निराश हो गया। मैंने ऐसा कभी नहीं किया था सो मुझे इस काम से और भी घिन आने लगी थी। मेरा सोचना था कि भला पेशाब करने की जगह को कौन मुँह मे ले सकता है ? उसने कुछ नहीं कहा पर उसका चेहरा अब मेरी चूत पर झुक गया था और मेरी टांगें चौड़ी करके मेरी चूत पर अपना मुँह लगा दिया।

“अरे ये क्या कर रहे हो, …. ये तो पेशाब की जगह है छी:, हटो, जाने क्या कर रहे हो?” मुझे उसकी ये हरकत बड़ी अजीब सी और घिनोनी लग रही थी कि ये पेशाब करने की जगह को ही क्यो मुख से लगा रहा है। बस लण्ड घुसेड़ना हो तो घुसेड़ दो, दोनों ही पेशाब करने जगह ही तो है …. ।

“अब तुम मुझे कुछ करने दोगी या नहीं …. !!” वो कुछ नाराज़ से लगे।

“तो करो ना, चालू करो ना वो, यहां वहां गन्दी जगह मुँह मत लगाओ।” मैंने थोड़ा झिझकते हुए कहा।

सुरेश मुस्करा उठा, और मेरे ऊपर चढ़ गया।

“क्या पहला मौका है …. ?” सुरेश मेरी दोनों टांगों के बीच में बैठ गया। उसका लण्ड तन्ना रहा था, मुझे भी चुदाई का आनन्द पहली बार मिलने वाला था। मेरी चूत की दरारों में उसने अपना लण्ड ऊपर नीचे घिसा। मेरा दाना फ़ड़क उठा, एक मीठी सी टीस उठी।

“हाँ, यह पहला मौका है, पर जल्दी करो ना, घुसा डालो ना …. !”

“मजा आ रहा है ना?”

“जी हां, बहुत मजा आ रहा है !” मैंने हां में सर हिला दिया। मुझे चुदाने के लिये उन्होंने एक हज़ार रुपये भी दिये थे, और स्वर्ग सा आनन्द भी मिल रहा था, सो मैंने अपनी टांगें ऊपर कर ली और अपनी चूत खोल दी।

“तुम्हें डर नहीं लगता है ऐसे?” मेरे होंठो को चूमते हुए बोले।

“डर कैसा, आप तो मेरे दोस्त के पापा हो ना, आपके पास तो मैं बहुत सुरक्षित हूँ।” मैंने भोलेपन से कहा।

“तुम्हारा कुंवारापन चला जायेगा, फिर मैं जो करने वाला हूँ उससे सुरक्षित कैसे रहोगी?”

“मैं पैसे के लिये यहां वहां भीख मांगती हूँ, मुझे कॉलेज छोड़ना पड़ेगा, अब मैं फ़ीस दे सकूंगी और परीक्षा दे सकूंगी, मेरी माँ नहीं है ना अब …. घर में छोटा भाई भी है, भूख से बीमार रहता है। मुझे तो ये सब करना ही पड़ेगा ना। मेरी माँ भी यही करती थी ना।”

सुरेश ने मुझे एक गहरी नजर से देखा। उनके चेहरे पर शर्मिन्दगी सी दिखी। उनका फूला हुआ लण्ड सिकुड़ता सा लगा। मैंने अपनी चूत का जोर उनके लण्ड पर लगाया, पर शायद वो मुरझा कर लटक गया था। मुझे लगा शायद ये कर नहीं पाते होंगे। पर ऐसा नहीं था।

“तुम मेरे पास कैसे सुरक्षित हो, मुझे समझ में नहीं आया …. !” सुरेश कुछ असमंजस में दिखा।
“संदीप कहता है, आप बहुत अच्छे है, मुझे पता है आप ये सब करने के बाद मुझे पैसा देंगे।” मैंने अपनी जरूरतें उसे बताई।

“हाँ वो तो दूंगा ही !” वो हैरान होता जा रहा था।

“बस , तो मेरी कॉलेज की फ़ीस हो जायेगी, मेरे भाई को भी आगे पढ़ाऊंगी” मैंने सहजता से कहा।
वो बिस्तर छोड़ कर उठ खड़े हुए, कपड़े पहनते हुए बोले “उठो, और कपड़े पहन लो …. ! बस बहुत मजा कर लिया !”

मैं घबरा गई, और उनके पांव पकड़ लिये,”नहीं नहीं जी, ये क्या …. लाओ मैं चूस लेती हूँ, आप चाहे जो करो …. पर प्लीज जाओ मत!”

“दुनिया में यही सब कुछ नहीं है, बस अब नहीं …. तुम इस काम के लिये फ़िट नहीं हो !”

मुझे अपने 1000 रुपए जाते हुए लगे। मेरी नजरों के सामने वही भूख और मजबूरियाँ नजर आने लगी। मुझे फिर वही अन्धेरे डराने लगे। मन में सोचा अरे मैंने यह क्या कर दिया ….. अब क्या होगा। इतना क्यूँ बोला मैंने …. मैं रूआंसी हो उठी।

सुरेश ने अपने पास बुलाया और मेरा टॉप मुझे पहना दिया। मेरी जीन्स उठा कर कहा,”चलो पहनो इसे”

चेहरा उदास हो गया, जैसे मेरी जान निकल गई हो, मैंने जीन्स पहन ली और फ़फ़क के रो पड़ी।

“अब मैं परीक्षा नहीं दे पाऊंगी …. ” रोते हुये हिचकी बंध गई। सुरेश ने मुझे गले से लगा लिया।

उसे अपनी गलती का अहसास हो रहा था। शायद वो खुद पर शर्मिन्दा हो रहे थे।

“मुझे माफ़ कर दो …. इस उमर में भी मैं जाने क्या करता रहा हूँ, तुमने तो मेरी आंखें खोल दी …. क्या मैं तुम्हें कॉल गर्ल बनाने जा रहा था।” सुरेश के चेहरे पर से वासना गायब हो चुकी थी। हां, मुख पर एक उजाला सा जरूर नजर आ रहा था। मैं उन्हें देखती रह गई। उनकी छाती पर सर रखे मैंने विनती की।

“मुझे आप फ़ीस जमा कराने लायक पैसे दे दें तो मेरी तन्ख्वाह में से काट लेना, प्लीज ….. नहीं तो हमें परीक्षा में नहीं बैठने दिया जायेगा।”

“मुझे माफ़ कर दो, अपने सीने में ये राज दबा लो कि मैंने तुम्हारे साथ ऐसा कुछ किया था, और मुझे नहीं पता कि मेरा तुम से क्या रिश्ता रहेगा, पर तुम मेरी दोस्त बन कर रहो, चाहे बेटी बन कर, चाहे जो रिश्ता बना लो, पर अब से तुम मेरे साथ ही रहोगी, मेरी फ़ैक्टरी में ऑफ़िस का सारा काम तुम ही सम्हालना …. फिर से ध्यान रखना ये बात अपने दिल में ही रखना !”

“जी …. पर आप तो …. । आप अब मेरे साथ कुछ भी नहीं करेंगे …. पर मुझे तो कुछ करने की लग रही है !”

“अब चुप भी हो जाओ, ये उमर ही ऐसी होती है, शादी के बाद तो रोज ही करना …. मुझे अब ये नहीं करना है बस !”

“अंकल जी …. मुझे नहीं पता है ये सब …. पर मैं क्या कहूँ …. ”

“कुछ नहीं कहो बस, मुझे मजबूरी, मासूमियत का फ़ायदा नहीं उठाना …. !” कहते हुए वो दूसरे कमरे में चले गये। मेरा दिमाग काम नहीं कर रहा था। ये सब कैसे हो गया, ये मेरे पर अचानक इतने मेहरबान कैसे हो गये। मेरी मजबूरी और सच्चाई जान कर क्या उनका दिल पिघल गया था। क्या सच में मेरे अच्छे दिन आने वाले थे। मैं धीरे धीरे उसके कमरे में आ गई, वो खिड़की पर खड़े हुए थे, मैंने उनकी पीठ पर हाथ लगाया, जैसे उन्हें झटका लगा। तुरन्त उन्होंने मुड़ कर मुझे देखा। उनकी आंखों के आंसू छिप नहीं सके। मैंने धीरे से अपना सिर उनकी छाती पर रख दिया।
“अंकल मुझे माफ़ कर देना, पैसो के लालच में मैं बहक गई थी, आप नहीं होते तो जाने क्या हो जाता, मेरी तो इज़्ज़त ही लुट जाती …. ! फिर मेरी शादी भी नहीं होती ना !”

सुरेश ने मेरे सर में चूम लिया और अपनी बाहों में भर लिया। मुझे भी शायद इसी प्यार की तलाश थी जिसे मैं वासना में खोज रही थी। मेरे दिल में ठण्डक आने लगी। सुकून सा आ गया। ऐसा प्यार मेरी आत्मा तक को छू रहा था।

सुरेश ने मुझे देखा फिर अपनी पत्नी की तस्वीर को देखा और सर झुका कर मुझसे मुस्करा कर कहा,”गुड नाईट, अब सो जाओ …. मुझे अब इनसे भी माफ़ी मांगनी है।” कह कर उन्होंने अपनी पत्नी की तस्वीर की ओर देखा। फिर अपने बिस्तर की शरण ली और मुँह तक चादर ओढ़ ली। मैंने कमरे की बत्ती बुझा दी और बाहर जाने लगी। फिर जाने क्या ख्याल आया, मेरे मन में उनके लिये प्यार उमड़ पड़ा। मैं भाग कर गई और उनकी चादर के अन्दर घुस गई और उनसे लिपट गई। मैं भावना में बह गई थी। उनके मुख पर चुम्बनों की बौछार कर दी और रो पड़ी। मुझे प्यार से उन्होंने एक तरफ़ लेटाया और मैं उनसे लिपट कर सो गई। मेरे प्यासे दिल को माँ-बाप जैसा प्यार मिल गया था। शायद बहुत दिनों बाद इतनी गहरी नींद, सुकून भरी नींद, प्यार भरी नींद आई थी। सुबह उठी तो सुरेश अंकल ने फ़ार्म हाउस की चाबी मुझे दे दी और अपने घर चले गये। मुझे वो सुबह एक नई सुबह लगी, शायद एक नई जिन्दगी की शुरुआत थी …. …. तभी मुझे अपना भाई याद आया कि वो मेरी राह ताक रहा होगा और मैं अपने घर की ओर जल्दी जल्दी चल पड़ी ….

boobsvagon
02-01-2010, 01:48 AM
इनके एक दोस्त हमारे घर आते जाते थे। एक दिन मैंने उनसे इनके बारे में पूछा तो वो कुछ नहीं बोले, पर मेरे बहुत जोर देने पर वो मान गए कि मेरे पति का बहुत सी महिलाओं के साथ सम्बन्ध है।

मेरे आँसू बहने लगे। वो मुझे सांत्वना देने लगे और कहा- अब बहुत देर हो चुकी है, इनका ठीक होना मुश्किल है, आप ही अपना मन कहीं और लगा लें !

तो मैंने कहा- अ़ब मुझे कौन मिलेगा !

वो बोले- देखे तो सही !

techhawk
11-02-2010, 11:58 PM
thanx
nice one