View Full Version : अभी ना जाओ चोद के …
premguru
20-06-2009, 04:29 PM
अभी ना जाओ चोद के …
मैं चाहती थी कि वो पहले मुझे चूमे चाटे और मेरे शरीर के सारे अंगों को सहलाए और उन्हें प्यार करे. उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है.
………. प्रेम गुरु की कलम से
पार्ट-i
ये गुलाबो भी एक नंबर की हरामजादी है. मैना और मिट्ठू के बारे में कुछ बताती ही नहीं. इस से अच्छी तो रज्जो ही थी जो पूरे मोहल्ले की खबर बता देती थी. किस लौंडिया का किस लौंडे के साथ चक्कर चल रहा है. फलां ने रात को अपनी औरत को कैसे चोदा कितनी बार चोदा और गांड मारी. मिसेज सक्सेना ने अपने मियां को कल रात कैसे चोदा ? और रीतू आंटी ने गुप्ता अंकल को पिछले 10 दिनों से अपनी छूट मारने तो क्या उस पर हाथ भी नहीं रखने दिया है. पर 2-3 महीने पहले वो अपने 3 बच्चों को छोड़ कर अपने प्रेमी के साथ भाग गयी तो इस कम्बख्त गुलाबो को मजबूरी में काम पर रखना पड़ा. पर ये गुलाबो की बच्ची तो कुछ बताती ही नहीं. इसे तो हर समय बस पैसे की ही लगी रहती है. अब कल की ही बात लो 1000 रुपये एडवांस मांग रही थी और साथ में 4 दिनों की छुट्टी. तो फिर 4 दिनों तक घर का काम और सफाई क्या उसकी अम्मा आकर करेगी ? आज आने दो खबर लेती हूँ.
आप चोंक गयी होंगी ये गुलाबो, मैना और मिट्ठू का क्या चक्कर है ? ओह … असल में ये मैना नयी नयी आई है ना. क्या कमाल का फिगर है साली का. मोटे नैन नक्श, सुराहीदार गर्दन, बिल्लोरी आँखें, कमान की तरह तनी भोंहें, कंधारी अनार की तरह गज़ब के बूब्स और पतली कमर. रेशमी बाहें और खूबसूरत चिकनी टांगें. नितम्बों का तो पूछो ही मत और उस पर लटकती काली चोटी तो ऐसे लगती है जैसे कि कोई नागिन लहराकर चल रही हो. एक दम क़यामत लगती है साली. कुल्हे मटका कर तो ऐसे चलती है जैसे इसके बाप की सड़क हो. पूरे मोहल्ले के लौंडो को दीवाना बना रखा है. मेरा तो जी करता है कि इसका टेंटुआ ही पकड़ कर दबा दूँ. साली ने मेरा तो जीना ही हराम कर दिया है. जो पहले मेरी एक झलक पाने को तरसते थे आज मेरी ओर देखते ही नहीं मैना जो आ गयी है. मुझे समझ नहीं आता इस मैना में ऐसा क्या है जो मेरे पास नहीं है ? अगर सच पूछो तो 36 साल कि उम्र में भी मेरी फिगर बहुत कातिलाना लगती है. बस कमर कोई 2-3 इंच जरूर फालतू होगी. मेरे नितम्ब और बूब्स तो उस से भी 21 ही होंगे. मेरे नितम्बों के कटाव तो जानलेवा हैं. जब मैं नाभि-दर्शना काली साडी पहनकर चलती हूँ तो कई मस्ताने मेरे नितम्बों कि लचक देखकर गस खाकर गिर ही पड़ते है. पीछे से बजती हुयी सीटियाँ सुन कर मैं तो निहाल ही हो जाती हूँ. पिछले 8-10 सालों में तो मैंने इस पूरे मोहल्ले पर एकछत्र राज ही किया है. पर जब से ये मैना आई है मेरा तो जैसे पत्ता ही कट गया.
और ये साला मिट्ठू तो किसी की ओर देखता ही नहीं. पहले तो इसकी मौसी इसे अपने पल्लू से बांधे फिरती थी और उसके जाने के बाद ये मैना आ गयी. ये प्रेम का बच्चा भी तो एक दम मिट्ठू बना हुआ है अपनी मैना का. आज सुबह जब ऑफिस जा रहा था तो कार तक आकर फिर वापस अन्दर चला गया जैसे कोई चीज भूल आया हो. जब बाहर आया तो मैना भी साडी के पल्लू से अपने होंठ पोंछते हुए गेट तक आई. हाईई … क्या किस्सा-ए-तोता मैना है. मेरी तो झांटें ही जल गई. बाथरूम में जाकर कोई 20 मिनिट तक चूत में अंगुली की तब जाकर सुकून (शांति) मिला. मैंने कितनी कोशिस की है इस मिट्ठू पर लाइन मारने की पर साला मेरी ओर तो अब आँख उठा कर भी नहीं देखता. पता नहीं अपने आप को अजय देवगन समझता है. ओह.. कल तो हद ही कर दी. जब मार्केट में मिला तो विश करते हुए आंटी बोल गया और वो भी उस हरामजादी मैना के सामने. क्या मैं इतनी बड़ी लगती हूँ कि आंटी कहा जाए ? मैं तो जल भुन ही गयी. जी में तो आया कि गोली ही मार दूं पर क्या करुँ. खैर मैंने भी सोच लिया है इस प्रेम के बच्चे को अगर अपना मिट्ठू बना कर गंगाराम नहीं बुलवाया तो मेरा नाम भी निर्मला बेन गणेश पटेल नहीं.
मैं अभी अपने खयालों में खोयी ही थी कि कॉल बेल बजी. गुलाबो आई थी. वो अपनी टांगें चौड़ी करके चल रही थी. उसके होंठ सूजे हुए थे और गालों पर नीले निशान से पड़े थे. जब मैंने उस से इस बाबत पूछा तो उसने कहा :
“ओह.. बीबीजी हमें शर्म आती है." कहकर अपनी साडी के पल्लू को मुंह में लगा कर हंसने लगी.
मुझे बड़ी हैरानी हुई. कहीं मार कुटाई तो नहीं कर दी उसके पति ने ? मैंने उस से फिर पूछा तो उसने बताया "कल रात नंदू ने हमारे साथ गधापचीसी खेली थी ना ?” उसने अपना सिर झुका लिया.
“गधापचीसी ? ये क्या होती है ?”
उसने मेरी ओर ऐसे देखा जैसे मैं किसी सर्कस की कोई जानवर हूँ. और फिर उसने शर्माते हुए बताता “वो … वो.. कभी कभी पीछे से करता है ना ?”
“ओह ” मेरी भी हंसी निकल गई. “तू तो एक नंबर की छिनाल है री ? तू मना नहीं करती क्या ?”
“अपने मरद को मना कैसे किया जा सकता है ? मरद की ख़ुशी के लिए वो जब और जैसे चाहे करवाना ही पड़ता है. क्या आप नहीं करवाती ?”
‘धत् .. बदमाश कहीं की …? अच्छा… तुझे दर्द नहीं होता ?”
“पहले पहले तो होता था पर अब तो बड़ा मज़ा आता है. गधापचीसी खेलने के बाद वो मुझे बहुत प्यार जो करता है ?”
मैं उस से पूछना तो चाहती थी कि उसके पति का कितना बड़ा है और कितनी देर तक करता है पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी. मैंने बातों का विषय बदला और उस से कहा “अच्छा पहले चाय पिला फिर झाडू पोंछा कर लेना” मैं आज मैना और मिट्ठू के बारे में तफसील से पूछना चाहती थी इसलिए उसे चाय का लालच देना जरूरी था.
मैं शोफे पर बैठी थी. गुलाबो चाय बना कर ले आई और मेरे पास ही फर्श पर नीचे बैठ गयी. चाय की चुस्कियां लेते हुए मैंने पूछा “अरी गुलाबो एक बात बता ?”
“क्या बीबीजी ?”
“ये मैना कैसी है ?”
“मैना कौन बीबीजी ?”
“अरी मैं उस सामने वाली छमकछल्लो की बात कर रही हूँ ”
“ओह.. वो मधु दीदी ? ओह वो तो बेचारी बहुत अच्छी हैं ”
“तुम उसे अच्छी कहती हो ?”
“क्यों क्या हुआ ? क्या किया है उसने … वो तो.. वो तो.. बड़ी..”
“अच्छा उसकी वकालत छोड़.. एक बात बता ?”
“क्या.. ?”
“ये मैना और मिट्ठू दिनभर अन्दर ही घुसे क्या करते रहते हैं ?”
“दिन में तो साहबजी दफ्तर चले जाते हैं ”
“ओह.. तुम भी निरी गैहली हो.. मैं ऑफिस के बाद के बाद की बात कर रही हूँ.”
गुलाबो हंस पड़ी “ओह.. वो.. बड़ा प्यार है जी उन दोनों में ”
“ये तो मैं भी जानती हूँ पर ये बता वो प्यार करते कैसे हैं ?”
“क्या ?? कहीं आप उस वाले प्यार की बात तो नहीं कर रही ?”
“हाँ हाँ चलो वो वाला प्यार ही बता दो ?”
“वो तो बस आपस में चिपके ही बैठे रहते हैं ”
“और क्या करते हैं ?” मेरी झुंझलाहट बढती जा रही थी ये गुलाबो की बच्ची तो बात को लम्बा खींच रही है असली बात तो बता ही नहीं रही.
गुलाबो हंसते हुए बोली “रात का तो मुझे पता नहीं पर कई बार मैंने छुट्टी वाले दिन उनको जरूर देखा है ” उसने आँखें नचाते हुए कहा.
अब आप मेरी चूत की हालत का अंदाजा लगा सकती है वो किस कदर पनिया गई थी और उसमें तो जैसे आग ही लग गयी थी. मैंने अपनी जांघें जोर से भींच लीं. “अरी बता ना ? क्या करते हैं ?”
“वो बाथरूम में घुस जाते है.. और … और …”
हे भगवान् इस हरामजादी गुलाबो को तो किसी खुफिया (जासूसी) उपन्यास की लेखिका होना चाहिए किस कदर रहस्य बना कर बता रही है.
“ओफो … अब आगे भी तो कुछ करते होंगे बताओ ना ?”
गुलाबो हंसते हुए बोली “और क्या फिर दोनों कपालभाती खेलते हैं ”
“कैसे ?”
“मधु दीदी पहले उनका वो चूसती हैं फिर साहबजी उनकी मुनिया को चूसते हैं …”
मेरे दिल की धड़कन बढ़ती जा रही थी और मेरी मुनिया तो अब बस पीहू पीहू करने लगी थी. उसमें तो कामरस की बाढ़ सी आ गई थी. और अब तो उसका रस मेरी गांड के सुराख तक पहुँच गया था. जी तो कर रहा था कि अभी उसमे अंगुली डालकर आगे पीछे करने लगूं पर गुलाबो के सामने ऐसा कैसे किया जा सकता था. मैंने अपनी जांघे जोर से कस लीं.
“फिर ?”
“फिर क्या मधु दीदी दिवाल की तरफ मुंह करके घोड़ी बन जाती हैं और वो पीछे से आकर उनसे चिपक जाते हैं ”
“फिर ?”
“फिर मैच चालु हो जाता है ”
“कितनी देर लगाते हैं ?”
“कोई आधा घंटा तो लगता ही होगा ”
“हाय राम आधा घंटा ?” मैंने हैरानी से पूछा
“हाँ और नहीं तो क्या ? आपको कितना लगता है ?”
“चुप … छिनाल कहीं की ?”
गुलाबो हंसाने लगी. मैंने उस से फिर पूछा “उसका कितना बड़ा है ?”
“अब हमने कोई नापा थोड़े ही है पर फिर भी बित्ते भर का तो जरूर है ”
“बित्ते बोले तो ?”
“हथेली (पंजे) को चौड़ा करके अंगूठे और छोटी अंगुली की दूरी जितना. बस ये समझ लो कि मोटा और लम्बा सा खीरा या बैंगन हो ”
“और रंग कैसा है ?”
“रंग तो गोरा ही लगता है ”
“लगता है मतलब ?”
“ओह.. बीबीजी अब मैंने कोई पकड़ कर या अन्दर जा कर तो देखा नहीं. उस चाबी के छेद में से तो ऐसा ही नजर आएगा ना ?”
“और उस मैना की चूत कैसी है ?”
“हाईई … क्या गोरी चिट्टी एक दम पाँव रोटी की तरह फूली हुई एक दम झकास. साहबजी तो उसे चूस चूस कर लाल ही कर देते हैं.”
“कभी गधापचीसी भी खेलते हैं ?”
“वो तो मैंने नहीं देखा.. क्यों ?”
अब आप मेरी हालत का अंदाजा लगा सकती हैं कि मेरी चूत में कितनी खलबली मची होगी उस समय. अब बर्दास्त करना बड़ा मुश्किल था. बाथरूम में जाकर मुट्ठ मारनी ही पड़ेगी. मैंने शोफे से उठते हुए उस से कहा. “अच्छा चल छोड़ तू एडवांस मांग रही थी ना ?”
“हाँ बीबीजी बहुत जरुरत है मेरी भतीजी की शादी है ना अगले हफ्ते ? अब 3-4 दिन मैं नहीं आ पाउंगी ”
“ठीक है तू सफाई कर जाते समय ले जाना ” मैंने कहा और भाग कर बाथरूम में घुस गई और … ???
आज तो गुलाबो ने मुझे ऐसी खुसखबरी सुनाई कि मैं तो बस झूम ही उठी. मुझे लगने लगा कि अब तो इस मिट्ठू को गंगाराम बुलाने का सुनहरा मौका हाथ आ ही जाएगा. मैना आज जयपुर जाने वाली थी ना 4-5 दिनों के लिए ? हे भगवान् कुछ ऐसा कर कि ये साली वहीं पड़ी रहे. हे लिंग महादेव कुछ ऐसा कर कि इसकी टांग ही टूट जाए और 2-4 महीने बिस्तर से ही ना उठ पाए और मैं और मेरा मिट्ठू यहाँ गुटरगूं करते रहें.
आप सोच रही होंगी मैं इस मिट्ठू की इस कदर दीवानी क्यों हो गयी हूँ ? दरअसल पिछले एक डेढ़ साल से गणेश मगन भाई (मेरे पति) को मधुमेह (सुगर) की प्रॉब्लम हो गयी है और वो मेरे साथ चाह कर भी कुछ नहीं कर पाते. खस्सी तोता बन गए हैं बिलकुल लप्पूझन्ना. वैसे भी उनका 3-4 इंच का ही तो है. हाथ के अंगूठे जितना मोटा. और बस एक दो मिनिट में ही टीं बोल जाते हैं. शादी के 1-2 साल तक तो मैंने कोई ज्यादा चिंता नहीं की. फिर पता नहीं मेरी किस्मत अच्छी थी कि किट्टू (कोमल) पैदा हो गयी. और उसके प्यार में मैं सब कुछ भूल सी गयी. मेरी खूबसूरती की तो पूरी दुनिया कायल थी फिर मोहल्ले के लौंडे लपाड़े तो मुझे देखकर आगे पीछे घुमते ही रहते थे जैसे मैं कोई हूर ही हूँ. मेरा दावा है कि अगर आज भी मैं काली जीन पेंट और खुला टॉप पहन कर निकलूँ तो मेरे मटकते नितम्ब देखकर अच्छे अच्छों का पेंट में ही निकल जाए.
अपने बारे में बता दूं. मेरी उम्र 36 साल है. लम्बाई 5' 4" साइज़ 36-30-36. मैं पंजाबी फॅमिली से हूँ. मेरे पिताजी का सूरत में ट्रांसपोर्ट का काम धंधा है. गणेश भाई भी सूरत से हैं. मेरे ससुराल में सोने चांदी और हीरों का का कारोबार है. एक बार मैं उनके शोरूम में कानों में पहनने वाली सोने की बालियाँ लेने गयी थी तो गणेश ने एक की जगह 2 जोड़ी बालियाँ दे दीं. और बोला बदल बदल कर पहन लेना आपको बहुत सुन्दर लगेंगी. पता नहीं क्या बात थी मुझे उसकी बातें बहुत अच्छी लगी और हमने प्रेम विवाह कर लिया. शादी के बाद गणेश ने भरतपुर में ज्वेलरी का शोरूम खोल लिया. घर में सब तरह का आराम है. मुझे गहनों से तो जैसे लाद ही रखा है. किसी चीज की कोई कमी नहीं है. बस कमी है तो एक अदद लंड की. शादी हुए 10-12 साल हो गए हैं. गणेश की उम्र 42-43 की है. कोमल पैदा होने के बाद मैंने अपनी चूत के नीचे टाँके लगवा लिए थे और अब तो उसका चीरा केवल 3 इंच का ही रह गया है. मैं तो चाहती हूँ कि कोई मोटा और लम्बा सा लंड एक ही झटके में मेरी इस फुदकती चूत में ठोक दे और आधे घंटे तक बिना रुके रगड़ता ही रहे भले ही उसके 2-3 टाँके ही टूट जाएँ. सारे कसबल निकाल दे. पर अब गणेश तो गोबर गणेश ही बन गया है. मैं तो चाहती हूँ कि एक मोटा सा लंड हो जिसे मुंह में लेकर सारी रात चूसती ही रहूँ और फिर उसकी 4-5 चम्मच मलाई गटागट पी जाऊं. पर क्या करुँ गणेश की तो मुश्किल से 2-4 बूँदें ही निकलती हैं और वो भी 10-15 दिनों के बाद. मैं तो इस चूत में अंगुली कर कर के थक गई हूँ और इतना आजिज़ (तंग) आ चुकी हूँ कि कभी कभी सोचती हूँ कि जबरदस्ती किसी को पकड़ कर उसका लंड ही काट खाऊं.
हे भगवान् तू कितना दयालु है. गणेश एक हफ्ते के लिए सूरत गए हुए हैं साथ में किट्टी भी अपने दादा दादी से मिलने चली गयी है. और खास बात तो ये है कि आज मैना भी चली जायेगी तो मिट्ठू भी मेरी तरह अकेला होगा. मैं तो यह सोच कर ही रोमांच से भर गई हूँ. जब गुलाबो ने बताया था कि मिट्ठू रोज़ रात को मैना को फ़ोन करेगा और फ़ोन पर आपस में बातें करते हुए दोनों मुट्ठ मारेंगे तो समझो मेरी तो जैसे लाटरी ही लग गयी थी. एक बड़ा राज़ कितनी आसानी से मेरे हाथ लग गया था. आज मुझे लगा कि इन नौकरानियों को 100-200 रुपये एक्स्ट्रा या एडवांस देकर कितना बड़ा फायदा उठाया जा सकता है. गुलाबो मेरी जान तेरा बहुत बहुत शुक्रिया.
और फिर मैंने रात के टिच्च 10 बजे अपने मोबाइल से मिट्ठू को फ़ोन लगाया. मैंने तो तुक्का ही मारा था. अब मुझे क्या पता था कि वो सचमुच ही मुट्ठ मार रहा था उस समय. बेचारे की हालत ही पतली हो गई थी. मैंने भी ऐसे ऐसे सवाल पूछे कि उसका तो सिर ही चकरा गया होगा. वो तो मेरा नाम ही पूछता रह गया. जब मैंने उस से पूछा कि उसने मैना कि कभी गांड मारी है तो उसने शर्माते हुए बताया कि वो तो बहुत चाहता है पर मधु (मैना) नहीं मानती. चूतिया है साला एक नंबर का. मैं तो कहती हूँ कि ऐसी मटकती गांड तो किसी भी कीमत पर मारे बिना नहीं छोड़नी चाहिए. फिर उसने मेरे साथ साथ ही मुट्ठ मारी और हम दोनों एक साथ ही झडे थे. उसने मेरा नाम जानने कि बहुत कोशिस कि पर मैंने फ़ोन काट दिया था. वो तो बस अंदाजा ही लगता रह गया होगा. मैं जानती हूँ वो दिन भर रात वाली बात को याद करके अपने लंड को सहलाता रहा होगा. (ये किस्सा आप ‘क्यों हो गया ना ?’ टाइटल से पढ़ सकते हैं)
premguru
20-06-2009, 04:30 PM
पार्ट ii
आज तो दिन भर मैं रात कि तैयारी में ही लगी रही. सबसे पहले अपनी मुनिया को चका चक बनाया और फिर पूरे शरीर पर गुलाबो से मालिश और उबटन लगवाकर, गुलाबजल मिले गर्म पानी से स्नान किया. आज मैंने अपनी शादी वाला जोड़ा पहना था. गले में मंगलसूत्र, हाथों में लाल रंग कि चूड़ियाँ, बालों में गज़रा और आँखों में कज़रा. पांवों में पायल और कानो में सोने की छोटी छोटी बालियाँ जैसी मैंने चूत की दोनों पंखुडियों पर भी पहनी हुई हैं. मैंने हाथों में मेंहंदी लगाई और पावों में महावर. मैं तो आज पूरी दुल्हन की तरह सजी थी जैसे कि मेरी सुहागरात हो. पूरे कमरे में गुलाब कि भीनी भीनी खुशबू और पलंग पर नयी चद्दर, गुलाब की पंखुडियां पूरे बेड पर बिछी हुई और 4-5 तकिये. साइड टेबल पर एक कटोरी में शहद और गुलाबजल, 5-6 तरह की क्रीम, तेल, वैसलीन, पाउडर आदि सब संभाल कर रख दिया था. एक थर्मोस में केशर, बादाम और शिलाजीत मिला गर्म दूध रख लिया था. आज तो पूरी रात हमें मस्ती करनी थी. और आज ही क्यों अब तो अगले 4 दिनों तक उस मिट्ठू को पूरा निचोड़ कर ही दम लूंगी. साले ने मुझे बहुत तडफाया है गिन गिन कर बदला लूंगी.
और फिर वोही रात के ठीक 10.00 बजे :
हेल्लो
हाय मैं बोल रही हूँ
हेल्लो मधु ?
बिल्ली को तो ख़्वाबों में भी बस छिछडे ही नज़र आते हैं ?
क … कौन ??
ओह लोल… भूल गए क्या ? मैं तुम्हारी नयी मैना बोल रही हूँ
ओह.. हाय … आप कैसी हैं ?
बस तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही हूँ ?
मैं आ जाता हूँ पर तुम अपना नाम और पता तो बताओ ना ?
निरे लोल हो तुम क्या अब भी नहीं पहचाना ?
ओह..न.. नी.. नीरू आंटी ?
तुम्हे शर्म नहीं आती ?
क्.. क.. क्यों ?
मुझे आंटी कहते हो ?
ओह.. सॉरी पर मैं क्या कह कर बुलाऊं ?
मुझे सिर्फ नीरू या मैना कहो ?
ठीक है नीरुजी … आई मीन मैनाजी ?
सिर्फ मैना ?
ठीक है मेरी मैना मेरी बुलबुल
मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँ
पर वो..गणेश भाई …?”
ओफो.. जल्दी करो ना उसकी चिंता छोडो वो यहाँ नहीं हैं.
ठीक है मैं आता हूँ.
और फिर वो लम्हा आ ही गया जिसके लिए मैं पिछले 2 महीनो से बेकरार थी. कॉल बेल बजी तो मैं बेतहासा दौड़ती हुयी मैन गेट तक आई. चूडीदार पायजामा और सिल्क का कुरता पहने मेरे सामने मेरा मिट्ठू, मेरा प्रेम, मेरा आशिक, मेरा महबूब, मेरे सपनों का शहजादा खडा था. मैं तो उस से इस कदर लिपट गयी जैसे कोई सदियों की प्यासी कोई विरहन अपने बिछुडे प्रेमी से मिलती है. मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और अपने जलते हुए होंठ उसके थरथराते हुए होंठों पर रख दिए. मैं तो उसे बेतहासा चूमते ही चली गयी. वो तो बस ऊँ…उन्नन.. आआं.. ही करता रह गया. अचानक मैंने उसके गालों पर अपने दांत गडा दिए तो उसकी चींख निकलते निकलते बची. उसने भी मुझे जोर से अपनी बाहों में कस लिया. यही तो मैं चाहती थी. आप शायद हैरान हो रही हैं. ओह.. आपको बता दूं की अगर औरत अपनी तरफ से किसी चीज की पहल करे तो आदमी का जोश दुगना हो जाता है. मैं भी तो यही चाहती थी कि वो आज की रात मेरे साथ किसी तरह की कोई नरमी ना बरते. मैं तो चाहती थी कि बस वो मेरे जलते बदन को पीस ही डाले और मेरा पोर पोर इस कदर रगडे कि मैं अगले दो दिन बिस्तर से उठ ही ना पाऊं.
3-4 मिनिट तक तो हम इसी तरह चिपके खड़े रहे. हमें तो बाद में ख़याल आया कि हमने कितनी बड़ी बेवकूफी की है ? जोश जोश में दरवाजा ही बंद करना भूल गए. हे भगवान् तेरा लाख लाख शुक्र है किसी ने देखा नहीं.
मैंने झट से दरवाजा बंद कर लिया और फिर दौड़ कर मिट्ठू से लिपट गयी. उसने मुझे अपनी गोद में उठा लिया. मैंने उसके गले में अपनी दोनों बाहें डाल दीं और उसके सीने से अपना सिर लगा दिया. मेरे उरोज उसके सीने से लग गए थे. हाय राम उसके दिल की धड़कन तो किसी रेल के इंजन की तरह धक् धक् कर रही थी. उसके होंठ काँप रहे थे और उसकी तेज और गर्म साँसे तो मैं अपने सिर और चहरे पर आसानी से महसूस कर रही थी. पर उस समय इन साँसों की किसे परवाह थी. वो मुझे गोद में उठाये ही बेड रूम में ले आया. हलकी दूधिया रोशनी, गुलाब और इत्र की मादक और भीनी भीनी महक और मेरे गुदाज़ बदन की खुश्बू उसे मदहोश करने के लिए काफी थी.
जैसे ही हम लोग बेडरूम में पहुंचे उसने मुझे धीरे से नीचे खडा कर दिया पर मैंने अपनी गिरफ्त नहीं छोड़ी. उसने मेरा सिर अपने दोनों हाथों के बीच में पकड़ लिया और थोडा झुक कर मेरे दोनों होंठों को अपने मुंह में भर लिया. आह … उसके गर्म होंठो का रसीला अहसास तो मुझे जैसे अन्दर तक भिगो गया. मैंने धीरे से अपनी जीभ उसके मुंह में दाल दी. वो तो उसे किसी रसीली कुल्फी की तरह चूसने लगा. मेरी आँखें बंद थी. उसने फिर अपनी जीभ मेरे मुंह में डाल दी. मुझे तो जैसे मन मांगी मुराद ही मेल गयी. कोई 10 मिनिट तक तो मैं और वो आपस में गुंथे इसी तरह एक दूजे को चूसते चूमते रहे. मेरी मुनिया तो पानी छोड़ छोड़ कर बावली ही हुए जा रही थी. मैं जानती हूँ उसका पप्पू भी उसके पाजामे में अपना सिर धुन रहा होगा पर मैंने अभी उसे छुआ नहीं था. उसके हाथ जरूर मेरी पीठ और नितम्बों पर रेंग रहे थे. कभी कभी वो मेरे उरोजों को भी दबा देता था. मैं उस से इस तरह चिपकी थी कि वो चाह कर भी मेरी मुनिया को तो छू भी नहीं सकता था. ऐसा नहीं था कि हम केवल मुंह और होंठ ही चूस रहे थे वो तो मेरे गाल, माथा, नासिका, गला, पलकों और कानो की लोब भी चूमता जा रहा था. मुझे तो ऐसा लग रहा था कि जैसे मैं कोई सदियों की तड़फती विरहन हूँ और बस आज का ये लम्हा ही मुझे मिला है अपनी प्यास बुझाने को. मैं भी उसके होंठ गाल और नाक को चूमती जा रही थी. आप शायद सोच रही होंगी ये नाक भला कोई चूमने की चीज है ? ओह.. आप की जानकारी के लिए बता दूं जब कोई मर्द किसी लड़की या औरत को देखता है तो सबसे पहले उसकी नज़र उसके बूब्स पर पड़ती है और वो उन्हें चूसना और दबाना चाहता है. उसके बाद उसकी नज़र उसके होंठो पर पड़ती है. उसके होंठो को देखकर वो यही अंदाजा लगाता है कि उसके नीचे के होंठ भी ऐसे ही होंगे. इसी तरह जब भी कोई लड़की या औरत किसी लडके या आदमी को प्रेम की नज़र से देखती है तो सबसे पहले उसकी नाक पर ही नज़र पड़ती है. एक और बात बताऊँ आदमी की नाक उसके अंगूठे के बराबर होती है और शायद आप मुश्किल से यकीन करें लगभग हर आदमी के लंड की लम्बाई उसके अंगूठे की लम्बाई की 3 गुना होती है. नाक और अंगूठा चूसने और चूमने का यही मतलब है कि उसके अचतेन या अंतर्मन में कहीं ना कहीं ये इच्छा है कि वो उसके लंड को चूमना और चूसना चाहती है. नहीं तो भला लडकियां बचपन में अंगूठा इतने प्यार से क्यों चूसती हैं ? ओ ह … कहीं आप ये तो नहीं सोच रही कि फिर मेरे पति का लंड केवल 3 इंच का ही क्यों है तो मेरी प्यारी पाठिकाओं सुनो इस दुनिया में कई अपवाद और अजूबे भी तो होते हैं ना ? नहीं तो फिर इस कुदरत, किस्मत, परमात्मा और सितारों के खेल को कौन माने ?
ओह.. मैं भी क्या उलूल जुलूल बातें ले बैठी. कोई 10 मिनिट की चूमा चाटी के बाद हम अपने होंठ पोंछते हुए अलग हुए तो मैंने देखा कि उसका पप्पू तो ऐसे खड़ा था जैसे पाजामे को फाड़ कर बाहर निकल आएगा. मैं तो उसे देखने के लिए कब से तरस रही थी. और देखना ही क्या मैं तो सबसे पहले उसकी मलाई पीना चाहती थी. वो मेरे सामने खड़ा था. मैं झट से नीचे बैठ गयी और उसके पाजामे का नाडा एक ही झटके में खोल दिया. उसने अंडरवियर तो पहना ही नहीं था. हे भगवान् लगभग 7 इंच लम्बा और 1½ इंच मोटा गोरे रंग का पप्पू मेरी नीम आँखों के सामने था. मैंने आज तक इतना बड़ा और गोरा लंड नहीं देखा था. सुपाडा तो लाल टमाटर की तरह था बिलकुल सुर्ख आगे से थोडा पतला और उस पर एक छोटा सा काला तिल. मैं जानती हूँ ऐसे लंड और सुपाडे गांड मारने के लिए बहुत ही अच्छे होते हैं. पर गांडबाज़ी की बात अभी नहीं. मैं तो हैरान हुए उसे देखती ही रह गई. इतने में उसके लंड ने एक जोर का ठुमका लगाया तब मैं अपने खयालों से लौटी. मैंने झट से उसकी गर्दन पकड़ ली जैसे कोई बिल्ली किसी मुर्गे की गर्दन पकड़ लेती है. लोहे की सलाख की तरह एक दम सक़्त 120 डिग्री पर खड़ा लंड किसी भी औरत को अपना सब कुछ न्योछावर कर देने को मजबूर कर दे. मेरी मुट्ठी के बीच में फसे उसके लंड ने 2-3 ठुमके लगाए पर मैं उसे कहाँ छोड़ने वाली थी. मैंने तड़ से उसका एक चुम्मा ले लिया. उस पर आया प्री कम मेरे होंठों से लग गया. आह.. क्या खट्टा, नमकीन और लेसदार सा स्वाद था. मैं तो निहाल ही हो गयी. उसने मेरा सिर पकड़ लिया और अपनी ओर खींचने लगा. मैं उसकी मनसा अच्छी तरह जानती थी. मैंने साइड टेबल पर पड़ी कटोरी से शहद और गुलाबजल का मिश्रण अपनी अंगुली से लगाकर उसके सुपाडे पर लगा दिया और फिर उसे अपने होंठों में दबा लिया. उसने इतने जोर का ठुमका लगाया की एक बार तो वो मेरे मुंह से ही फिसल गया. मैंने झट से उसे फिर दबोचा और लगभग आधे लंड को एक ही झटके में अपने मुंह में ले लिया. जैसे ही मैंने उसकी पहली चुस्की ली मिट्ठू के मुंह से एक हलकी सी सीत्कार निकल गयी. ओईई…. नीरू…. आं…. मेरी मैना……… मेरी बुलबुल…. हाय………
मेरी मुंह की लार, शहद और उसके प्री कम का मिलाजुला स्वाद तो मैं जिंदगी भर नहीं भूल सकती. मुझे तो बरसों के बाद जैसे ये तोहफा मिला था. वैसे तो गणेश का लंड 3 इंच का है पर शुरू शुरू में उसकी भी खूब मलाई निकलती थी. पर अब तो उसके पल्ले कुछ नहीं रह गया है. पिछले 2-3 सालों से तो मैं इस मलाई के लिए तरस ही गई थी. ऐसा नहीं है कि मैं केवल लंड ही चूसे जा रही थी. मैंने उसकी दोनों गोलियों को एक हाथ से पकड़ रखा था. थी भी कितनी बड़ी जैसे कोई दो लिच्चियाँ हों. दूसरे हाथ से मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ रखा था. मिट्ठू ने मेरा सिर पकड़ कर एक धक्का मेरे मुंह में लगा दिया तो उसका लंड 5 इंच तक मेरे मुंह के अन्दर चला गया और मुझे खांसी आ गई. मैंने लंड बाहर निकाल दिया. मेरे थूक से लिपडा उसका लंड दूधिया रोशनी में ऐसे चमक रहा था जैसे कोई मोटा और लम्बा खीरा चाँद की रोशनी में चमक रहा हो. मैंने अपने हाथ उसके लंड पर ऊपर नीचे करने चालु रखे. कुछ दम लेने के बाद मैंने उस पर फिर अपनी जीभ फिराई तो उसके लंड ने ठुमके लगाते हुए प्री कम के कई तुपके फिर छोड़ दिए. मुझे लंड चूसते हुए कोई 10 मिनिट तो जरूर हो गए थे. मिट्ठू मेरा सिर पकडे था. वो धक्के लगाना चाहता था पर डर रहा था कि कहीं मुझे फिर खांसी ना आ जाए और मैं बुरा ना मान जाऊं. मेरी मुनिया का तो बुरा हाल था. कोई और समय होता तो मैं एक हाथ की अंगुली उसमें जरूर करती रहती पर इस समय तो लंड चूसने की लज्जत के सिवा मुझे किसी चीज का होश ही नहीं था. मैंने उसकी गोलियों को फिर पकड़ लिया और अपने मुंह में भर लिया. एक हाथ से मैंने उसका लंड पकडे हुए ऊपर नीचे करना जारी रखा. लंड इतनी जोर से अकडा की एक बार तो मुझे लगा कि मेरे हाथ से ही छूट जाएगा. उसका तो बुरा हाल था. उसकी साँसे तेज चल रही थी और और वो पता नहीं सित्कार के साथ साथ क्या क्या बडबडाता जा रहा था. मैं जानती थी वो अब झड़ने के करीब पहुँच गया है. मैंने उसकी गोलियों को छोड़ कर फिर लंड मुंह में ले लिया. अबकी बार मैंने उसे चूसा नहीं बस उस पर अपने जीभ ही फिराती रही. पूरी गोलाई में कभी अपने होंठों को सिकोड़ कर ऊपर से नीचे और कभी नीचे से ऊपर. उसने मेरा सिर जोर से दबा लिया और थोडा सा धक्का लगाने लगा. मैं जानती थी उसकी मंजिल आ गयी है. मैंने उसके लंड को जड़ से पकड़ लिया और कोई 3-4 इंच मुंह में लेकर दूसरे हाथ से उसकी गोलियों को कस कर पकड़ लिया और एक लम्बी चुस्की लगाईं तो उसकी एक जोर की चींख सी निकल गई. मैंने उसका सुपाडा अपने दांतों से हौले से दबाया तो वो थोडा सा पीछे हुआ और उसके साथ ही पिछले 15-20 मिनिट से कुबुलाते लावे की पहली पिचकारी मेरे मुंह और ब्लाउज पर गिर गयी. मैंने झट से उसका लंड अपने मुंह में भर लिया और फिर उसकी पता नहीं कितनी पिचकारियाँ मेरे मुंह में निकलती ही चली गयी. आह.. इस गाढ़ी मलाई के लिए तो मैं कब की तरस रही थी. मैं तो उसे गटागट पीती चली गई.
मिट्ठू बडबडा रहा था “आह.. मेरी नीरू मेरी रानी मेरी बुलबुल मेरी मैना …. आः तुमने तो मुझे … आह … निहाल ही कर दिया … ओईईई …..” और उसके साथ ही उसने बची हुयी 2-3 पिचकारियाँ और छोड़ दी. मैं तो उसकी अंतिम बूँद तक निचोड़ लेना चाहती थी. अब तो मैंने इस अमृत की एक भी बूँद इधर उधर नहीं जाने दी. कोई 4-5 चम्मच गाढ़ी मलाई पीकर मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. जब उसका पप्पू कुछ सिकुड़ने लगा तो मैंने उसे आजाद कर दिया और अपने होंठों पर जीभ फिरते हुए उठ खड़ी हुयी.
मिट्ठू ने मेरे होंठ चूम लिए. मैंने भी अपने होंठों से लगी उस मलाई की बूंदे उसके मुंह में दाल दी. उसे भी इस गाढ़ी मलाई का कुछ स्वाद तो मिल ही गया. फिर मैंने उसे परे कर दिया. मैंने उसकी आँखों में झाँका. अब वो इतना भी लोल नहीं रह गया था की मेरी चमकती आँखों की भाषा न पढ़ पाता. मैं तो उस से पूछना चाहती थी क्यों ? कैसा लगा ?
शायद उसे मेरी मनसा का अंदाजा हो गया था. उसने कहा “मेरी रानी मज़ा आ गया ”
“ओह.. मुझे मैना कहो ना ?”
“ओह.. मेरी मैना थैंक्यू ” और एक बार उसने मुझे फिर अपनी बाहों में भर कर चूम लिया.
“ओह.. ठहरो..”
“क्या हुआ ?”
मैंने उसकी ओर अपनी आँखें तरेरी “ओह.. देखो तुमने ये क्या किया ?”
“क क्... क्या ?”
“अपनी मलाई मेरे कपडो में भी डाल दी. तुम भी एक नंबर के लोल हो. कभी उस मैना को ऐसे नहीं चुसवाया ?”
“ओह … सॉरी ”
मैंने साइड टेबल पर पड़ा थर्मोस उठाया और उसमे रखा गर्म दूध एक गिलास में डाल कर मिट्ठू की ओर बढा दिया “चलो अब ये गरमा गरम दूध पी लो ”
“इससे क्या होगा ?” उसने मेरी ओर हैरत से देखा
“इससे तुम्हारा मिट्ठू फिर से गंगाराम बोलने लगेगा ”
“ओह..” उसकी हंसी निकल गयी “क्या तुम नहीं लोगी ?”
“मेरी मुनिया तो पहले से ही पीहू पीहू कर रही है मुझे इसकी जरुरत नहीं है ?” और मैंने उसकी नाक पकड़ कर दबाते हुए उसकी ओर आँख मार दी. वो तो बेचारा शर्मा ही गया.
“चलो तुम फटा फट दूध पीओ मैं अभी आती हूँ ” मैंने शहद वाली कटोरी और तौलिया उठाया और बाथरूम में घुस गयी. सबसे पहले मैंने शीशे में अपनी शक्ल देखी. मेरी आँखे कुछ लाल सी लग रही थी. होंठ कुछ सूजे हुए और गाल एक दम लाल. आज पहली बार मुझे अपनी सुहागरात याद आ गयी. मैं अपने आप को शीशे में देख कर शर्मा गयी. मैंने बड़ी अदा से अपना घाघरा और कुर्ती उतारी. अब मैं शीशे के सामने केवल काली पैंटी और ब्रा में खड़ी थी. काली ब्रा और पैंटी में मेरा बदन ऐसे लग रहा था जैसे खजुराहो की मूर्ती हो. शायद आप यकीन नहीं करंगी मेरी संगेमरमर सी मखमली जांघें और काली पैंटी में फसी पाँव रोटी की तरह फूली हुयी चूत के निकलते शैलाब से पूरी पैंटी ही गीली हो गयी थी. मैंने पैंटी उतार दी. आईइला ……… शीशे में अपनी चूत… अरे नहीं बुर … अरे ना बाबा मेरी मुनिया तो इस समय अपने पूरे शबाब पर थी. जैसे कोई छोटी सी चिडिया अपने पंख सिकोड़ गर्दन अन्दर दबाये चुप चाप बैठी हो. दोनों बाहरी होंठ तो किसी संतरे की फांकों की मानिंद लग रहे थे. और अन्दर के दोनों होंठों पर सोने की छोटी छोटी बालियाँ (मेरे पहले प्यार की निशानी) तो ऐसे लग रही थी जैसे कोई नथ पहन रखी हो. आज तो इस नथ को उतरना है ना ? मैंने दोनों हाथों से उन सोने बालियों को पकड़ कर चोडा किया. आईईला … एक दम गुलाब की सी पंखुडियां तितली के पंखों की मानिंद खुल गयी. मदन मणि तो किसमिस के दाने जीतनी बड़ी एक दम सुर्ख. मैंने अपनी तर्जनी अंगुली हौले से मुनिया के छेद में डाल दी जो कि कामरस से सराबोर उस छेद में बिना किसी रुकावट के जड़ तक अन्दर चली गयी. मैंने उसे बाहर निकाला और अपने मुंह में डाल लिया. हाईई.. क्या खट्टा, मीठा, नमकीन, नारियल पानी जैसा लेसदार स्वाद था. मैंने एक चटखारा लिया. या अल्लाह ……
मैंने अब अपनी ब्रा भी उतार दी. दोनों परिंदे जैसे कब से आज़ादी की राह देख रहे थे. 1½ इंच का गहरे कत्थई रंग का एरोला और उनके निप्पल्स तो एक दम गुलाबी थे बिलकुल तने हुए. मैंने एक निप्पल को थोडा सा ऊपर उठाया और उस पर अपनी जीभ लगा दी. इन मोटे मोटे और गोल उरोजों को देख कर तो कोई जन्नत में जाने का रास्ता ही भूल जाए.
अब मैंने अपनी मुनिया को पानी से धोया. मुझे थोडा पेशाब आ रहा था पर मैंने जानकर अभी नहीं किया. मेरी पाठिकाएं मेरी इस बात पर हंस रही होंगी और मेरे पाठक हैरान हो रहे होंगे. ओह्ह … आप भी बस... ? चलो मैं ही बता देती हूँ … सुबह सुबह जब पेशाब की तलब (हाजत) होती तो लंड और मुनिया में भारी तनाव आ जाता है ? और ऐसी अवस्था में अगर चुदाई की जाए तो हमारे मस्तिस्क में दो बातें एक साथ चलती है कि पहले पेशाब किया जाए या वीर्य और कामरस छोडा जाए. अब दोनों चीजें तो एक साथ निकलती नहीं हैं तो दिमाग की इसी उलझन (कन्फ्यूज़न) के कारण चुदाई को लम्बा खींचा जा सकता है. जिनको शीघ्रपतन की आदत होती है उनके लिए तो ये टोटका जैसे रामबाण है. मुझे ये बात तो डॉ. रस्तोगी ने बतायी थी जब गणेश को सेक्स थेरेपी दिलवाई थी.
premguru
20-06-2009, 04:31 PM
अब मैंने अपनी मुनिया की फांकों और पंखुडियों पर गुलाबजल और शहद लगाया. थोडा सा शहद अपने उरोजों के निप्पल्स पर और अपने होंठों पर भी लगाया. और फिर टॉवेल स्टैंड पर रखी रेशमी टी शेप वाली पैडेड पैंटी और डोरी वाली ब्रा पहन ली. आप तो शायद जानती होंगी ये जो ब्रा और पैंटी होती हैं इनमे हुक्स की जगह डोरी होती है. पैंटी को दोनों तरफ डोरी से बाँधा जाता है. बस आगे कोई 2 इंच की पट्टी सी होती है जिसमे चूत की फांके ही ढकी जा सकती है. अक्सर ऐसी ब्रा पैंटी फ़िल्मी हीरोइने पहनती हैं. एक ही झटके में डोरी खींचो और ब्रा पैंटी किसी मरी हुई चिडिया की तरह फर्श पर. कोई झंझट परशानी नहीं.
आप सोच रही होंगी ओफो … क्या फजूल बातें कर रही हूँ. बाहर मिट्ठू बेचारा मेरा इंतज़ार कर रहा होगा. हाँ आप ठीक सोच रही हैं पर मेरे देरी करने का एक कारण है ? आशिक़ को थोडा तरसाना भी चाहिए ना ? अरे मैं तो मज़ाक कर रही थी. असल में मैं उसे चुदाई के लिए तैयार होने के लिए कुछ समय देना चाहती थी.
पार्ट iii
कोई 10 मिनिट के बाद मैं जब बाथरूम से निकली तो वो बेड पर अपने पप्पू को हाथ में लिए बैठा था. वाह.. देखा केसर, बादाम और शिलाजीत मिले दूध का कमाल. मैं अपने कुल्हे मटकाते हुए बड़े नाज़-ओ-अंदाज़ से धीरे धीरे चलती हुई आ रही थी. वो तो बस मुंह बाए मेरी ओर देखता ही रह गया. फिर एक झटके में उसने मुझे बाहों में दबोच लिया और तडातड कई चुम्बन मेरे गालों और मुंह पर ले लिए. इस आपाधापी में मैं बेड पर गिर पड़ी और वो मेरे ऊपर आ गया. ओह … उसके बदन के भार से मेरी छाती और मेरे उरोज तो जैसे दब ही गए. मैं भी तो यही चाहती थी कि कोई मुझे कस कर दबोच ले. उसकी बेशब्री (अधीरता) तो देखने लायक थी. वो तो कपडो के ऊपर से ही धक्के लगाने लगा. कोई और होता तो मेरे इस गदराये बदन का स्पर्श पाते ही उसका पानी निकल जाता. पर मैंने तो पूरी तैयारी और योजना से सारा काम किया था ना ?
“ओह क्या करते हो पहले कपडे तो निकालो ?” मैंने उसे परे हटाते हुए कहा.
“ओह … हाँ ” और उसने अपना कुरता और पाजामा निकाल फैंका. अब वो मेरे सामने बिलकुल मादरजात नंगा खडा था. उसने मेरी भी नाइटी की डोरी खोल दी. अब मैं सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में ही रह गयी. मैंने शर्म के मारे अपनी पिक्की वाली जगह पर हाथ रख लिया. आप शायद हैरान हो रही होंगी. भला अब पिक्की पर हाथ रखने की क्या जरुरत रह गई थी ? अरे मेरी भोली पाठिकाओं इन मर्दों की कैफियत (आदत) आप नहीं जानती. किसी चीज के लिए जितना तरसाओ या मना करो उसे पाने के लिए उतनी ही ज्यादा उनकी बेकरारी बढ़ जाती है. मैं भी तो यही चाहती थी कि आज की रात ये मेरा गुलाम बन कर जैसा मैं चाहूँ वैसा ही करे. मेरी मिन्नतें करे और फिर जब मैं उसे मौका दूं तो वो बिना रहम किये मेरे सारे कस बल निकाल दे.
उसने फिर मुझे बाहों में भर लिया. मेरी आँखें रोमांच और उत्तेजना से अपने आप बंद हो गयी. पता नहीं कितनी देर वो मुझे चूमता ही रहा. कभी गालों पर कभी होंठों पर कभी ब्रा के ऊपर से उरोजों पर और कभी कानों की लोब को. मैं तो बस मस्त हुयी उसकी बाहों में समाई आँखें बंद किये सपनीली और रोमांच की जादुई दुनियां में डूबी हुयी पड़ी ही रह गयी. मुझे तो पता ही नहीं चला कब उसने मेरी ब्रा और पैंटी की डोरी खींच दी. मुझे तो होश तब आया जब उसने मेरे एक उरोज की घुंडी को अपने मुंह में लेकर जोर से चूसा और फिर थोडा सा दांतों से दबाया.
“ऊईई ….. माआ……” मेरी तो एक सित्कार ही निकल गयी. अब उसने दूसरे उरोज को मुंह में ले लिया और चूसने लगा. उसका एक हाथ अब मेरी मुनिया को टटोल रहा था. मैंने अपनी जांघें जोर से कस ली ताकि वो अपनी अंगुली मेरी पिक्की में न डाल पाए. आप सोच रही होंगी भला ये क्या बात हुयी. पिक्की में अपने प्रेमी की अंगुली का पहला स्पर्श और अहसास तो जन्नत का सुख देता है फिर उसके रास्ते में अड़चन क्यों ?
ओह अभी आप इस बात को नहीं समझेंगी. मैं चाहती थी कि वो पहले मुझे चूमे चाटे और मेरे शरीर के सारे अंगों को सहलाए और उन्हें प्यार करे. उसे भी तो पता चलना चाहिए कि औरत के पास लुटाने के लिए केवल चूत ही नहीं होती और भी बहुत कुछ होता है. उसने भी मेरी पिक्की को ऊपर ही ऊपर से सहलाया. वो मेरे उरोजों की घाटियों को चूमता हुआ मेरी गहरी नाभि चूमने लगा. उसके छेद में अपनी जुबान ही डाल दी. उईई … मा …. ये मिट्ठू तो मुझे पागल ही कर देगा. धीरे धीरे उसकी जीभ नीचे सरकने लगी. जब उसने मेरे पेडू (चूत और नाभि के बीच का थोडा सा उभरा हिस्सा) पर जीभ फिराई तो मेरे ना चाहते हुए भी मेरी दोनों जांघें अपने आप चौडी होती चली गयी. मेरी पिक्की पर जब उसकी गर्म साँसें और जीभ ने पहला स्पर्श किया तो रोमांच और उत्तेजना के कारण मेरी तो किलकारी ही निकल गयी. मैंने उसका सिर जोर से अपने हाथों में पकड़ कर अपनी पिक्की की ओर दबाना चाहा पर ये प्रेम का बच्चा तो पूरा गुरुघंटाल था जैसे. किसी औरत को कैसे कामातुर किया जाता है उसे अच्छी तरह पता है. उसने कोई जल्दी नहीं दिखाई.
“ओह मेरे मिट्ठू जल्दी करो ना मेरी मुनिया को चूसो जल्दी ” मैंने अपने नितम्ब ऊँचे करके उसके सिर को जोर से अपनी मुनिया पर लगा ही दिया. उसने एक चुम्बन उस पर ले लिया. मैं जानती हूँ मेरी पिक्की से निकलती मादक महक ने उसको भी एक अनोखी ठंडक से सराबोर कर दिया होगा. उसने मेरी मुनिया की मोटी मोटी फांकों पर लगी सोने की बालियों को दोनों हाथों के अंगूठे और तर्जनी अँगुलियों से पकड़ कर चौडा कर दिया. मैं जानती हूँ वो जरूर मेरी मुनिया और उस हरामजादी मैना की चूत की तुलना कर रहा होगा. मेरी पिक्की के अंदरूनी गुलाबी और चट्ट लाल रंगत को देख कर तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी होंगी. उसके मुंह से एक एक निकला “वाह … क़यामत है …” और झट से उसने अपने होंठ मेरी बरसों की तरसती मुनिया पर रख दिए. उसके होंठों का गर्म अहसास मुझे अन्दर शीतल करता चला गया. अभी तो उसने मेरी मदनमणि के दाने को अपनी जीभ की नोक से छुआ ही था की मेरी पिक्की ने काम रस की 2-3 बूंदे छोड़ ही दी. इतनी जल्दी तो मैं आज से पहले कभी नहीं झडी थी. ये मिट्ठू तो पूरा कामदेव है.
अब उसने अपनी जीभ धीरे से मदनमणि के नीचे मुत्र छेद पर फिराई और फिर नीचे स्वर्ग गुफा के द्वार पर. ओह.. मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. उत्तेजना में मैंने अपने दोनों पैर ऊपर उठा लिए और उसकी गर्दन के गिर्द कस लिए. मैं तो चाहती थी कि मेरी मुनिया को पूरा का पूरा मुंह में लेकर एक जोर की चुस्की ले पर ये साला मिट्ठू तो मुझे पागल ही कर देगा. उसने फिर अपनी जीभ एक बार नीचे से ऊपर और फिर ऊपर से नीचे तक फिराई. मैं जानती हूँ मेरी पिक्की की फांकों पर लगे शहद और कामरस का मिलाजुला मिश्रण वो मजे से चाट रहा है पर मेरी पिक्की में तो जैसे आग ही लगी थी. मैं हैरान थी कि वो उसे पूरा मुंह में क्यों नहीं ले रहा है. ये तो मुझे उसने बाद में बताया था कि वो मुझे पूरी तरह उत्तेजित करके आगे बढ़ाना चाहता था.
मेरी कसमसाहट और बेकरारी बढ़ती जा रही थी. अब मेरे लिए बर्दास्त करना मुश्किल था. मैंने एक झटके से उसका सिर पकडा और एक तरफ धकेलते हुए उसे चित लेटा दिया. उसे बड़ी हैरानी हुई होगी. अब मैं झट से उसके ऊपर आ गयी और उसके मुंह पर उकडू होकर बैठ गयी. अब मेरी मुनिया ठीक उसके मुंह के ऊपर थी. मैं कोई मौका नहीं गवाना चाहती थी. मैंने अपनी पिक्की को जोर से उसके मुंह पर रगड़ना चालु कर दिया. उसकी नाक मेरे मदनमणि के दाने से लगी हुई थी और पिक्की के होंठ उसके होंठों पर. अब भला उसके पास सिवाय उसे पूरा मुंह में लेने के क्या रास्ता बचा था. उसने मेरी मुनिया को पूरा अपने मुंह में भर लिया और एक जोर कि चुस्की ली. “आईईइ ….” मेरी तो हलकी सी चींख ही निकल गयी और इसके साथ ही मैं दूसरी बार झड़ गयी.
अब वो कहाँ रुकने वाला था. उसे तो जैसे रसभरी कुल्फी ही मिल गयी थी. मेरी मुनिया को पूरा मुंह में लेकर चूसता ही चला गया. मैं भला कंजूसी क्यों दिखाती. मेरी मुनिया तो बरसों के बाद अपना रस बहा रही थी. वो चटखारे लेता उस कामरस को पीता चला गया. कोई 8-10 मिनट तक तो उसने मेरी मुनिया को जरूर चूसा होगा. इस दौरान मैं 2 बार झड़ गई. अब जाकर उसे मेरे गोल मटोल नितम्बों का ख़याल आया तो उसने अपने हाथ उनपर फिराने चालू कर दिए. ये मिट्ठू तो पूरा गुरु निकला. वो तो नितम्बों को सहलाते सहलाते मेरी मुनिया की सहेली के पास भी पहुँच गया. जैसे ही उसने एक अंगुली मेरी गांड के छेद में डालने की कोशिस की मैं झट से उछल कर एक ओर लुढ़क गई. मैं इतनी जल्दी इस दूसरे छेद का उदघाटन करवाने के मूड में कतई नहीं थी.
अब वो मेरे ऊपर आ गया और अब तो बस भरतपुर लुटने ही वाला था. उसने एक चुम्बन मेरे होंठों पर लिया. मेरी तो आँखें बंद सी हुयी जा रही थी. फिर उसने दोनों उरोजों को चूमा और नाभि को चुमते हुए पिक्की का एक चुम्मा ले लिया. उसने एक हाथ बढा कर क्रीम की डब्बी उठाई और ढेर साड़ी क्रीम मेरी मुनिया पर लगा दी बड़े प्यार से. मैंने आपको बताया था ना कि ये जानबूझ कर लोल बना है वैसे है पूरा गुरुघंटाल. मैं भी कतई उल्लू थी उसकी इस चाल को नहीं समझ पायी. हौले हौले क्रीम लगाते हुए उसने एक अंगुली मेरी पिक्की के छेद में घुसा ही दी. “उईई... माँ….. मा … ” मेरी तो हलकी सी सित्कार ही निक़ल गई. हालंकि मेरी पिक्की पूरी तरह गीली थी फिर भी कई दिनों से सिवा मेरी अँगुलियों के कोई चीज अन्दर नहीं गयी थी. मने उसका हाथ पकड़ने की कोशिस कि लेकिन इस बीच उसने अपनी अंगुली दो तीन बार जल्दी जल्दी अन्दर बाहर कर ही दी. फिर उसने अपनी अंगुली को अपने मुंह में डाल कर एक जोर का चटखारा लिया. “वाऊ …”
अब उसने अपने पप्पू पर थूक लगाया और मेरी मुनिया के होंठों पर रख दिया. मेरा दिल धड़कता जा रहा था. हे भगवान् 7 इंच लम्बा और 1 ½ इंच मोटा ये लंड तो आज मेरी मुनिया की दुर्गति ही कर डालेगा. आज तो 2-3 टाँके तो जरूर टूट ही जायेंगे. पर इस तरसते तन मन और आत्मा के हाथों मैं मजबूर हूँ क्या करुँ. मैंने उस से कहा “प्लीज जरा धीरे धीरे करना ?”
“क्यों डर रही हो क्या ?”
ये तो मेरे लिए चुनौती थी जैसे. मैंने कहा “ओह.. नहीं मैं तो वो.. वो … ओह … तुम भी..” मैंने 2-3 मुक्के उसकी छाती पर लगा दिए.
मेरी हालत पर वो हंसने लगा. “ओ.के. ठीक है मेरी मैना रानी..”
फिर उसने मेरे नितम्बों के नीचे 2 तकिये लगाये और अपना लंड मेरी मुनिया के होंठों के ऊपर दुबारा रख दिया. लोहे की सलाख की तरह अकडे उसके पप्पू का दबाव तो मैं अच्छी तरह महसूस कर रही थी. मेरे दिल की धड़कन तेज हो गयी. उसने एक हाथ से अपना लंड पकडा और दूसरे हाथ से मेरी मुनिया की फांकों को चोडा किया और फिर दो तीन बार अपने लंड को ऊपर से नीचे तक घिसने के बाद छेद पर टिका दिया. उसके बाद उसने एक हाथ मेरी गर्दन के नीचे ले जाकर मेरे सिर को थोडा सा ऊपर उठा दिया और दूसरे हाथ से मेरी कमर पकड़ ली. उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगा. मुझे बड़ी हैरत हो रही थी ये लंड अन्दर डालने में इतनी देर क्यों कर रहा है. होंठों को पूरा अपने मुंह में लेकर चूसने के कारण मैं तो रोमांच से भर गयी. मेरा जी कर रहा था कि मैं ही नीचे से धक्का लगा दूं. इतने में उसने एक जोर का धक्का लगाया और फनफनाता हुआ आधा लंड मेरी मुनिया के टाँके तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया और मेरी एक घुटी घुटी चींख निकल गई. मुझे लगा जैसे किसी ने जलती हुई सलाख मेरी मुनिया के छेद में दाल दी है. कुछ गरम गरम सी तरल चीज मेरी मुनिया के मुंह से निकलती हुयी मेरी जाँघों और गांड के छेद पर महसूस होने लगी. मुझे तो बाद में पता चला कि मेरी मुनिया के 3 टाँके टूट गए हैं और ये उसी का निकला खून है. मैं दर्द के मारे छटपटाने लगी और उसकी गिरफ्त से निकलने की कोशिस करने लगी. मेरी आँखों में आंसू थे. उसने मुझे जोरों से अपनी बाहों में जकड रखा था जैसे किसी बाज़ के पंजों में कोई कबूतरी फंसी हो. उसका 5 इंच लंड मेरी चूत में फंसा था. आज पहली बार इतना बड़ा और मोटा लंड मेरी चूत में गया था. उसने मेरे होंठ छोड़ दिए और आँखों में आये आंसू चाटने लगा.
मैंने कहा “तुम तो पूरे कसाई हो ?”
“कैसे ?”
“भला ऐसे भी कोई चोदता है ?”
“ओह.. मेरी मैना तुम भी तो यही चाहती थी ना ?”
“वो कहने की और बात होती है. भला ऐसे भी कोई करता है ? तुमने तो मुझे मार ही डाला था ?”
“ओह.. सॉरी … पर अब तो अन्दर चला ही गया है. जो होना था हो गया है अब चिंता की कोई बात नहीं. अब मैं बाकी का बचा लंड धीरे धीरे अन्दर डालूँगा ?”
“क्या ? अभी पूरा अन्दर नहीं गया ?” मैंने हैरानी से पुछा
“नहीं अभी 2-3 इंच बाकी है ?”
“हे भगवान् तुम मुझे मार ही डालोगे क्या आज ?”
“अरे नहीं मेरी बुलबुल ऐसा कुछ नहीं होगा तुम देखती जाओ ”
अब उसने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया. उसने पूरा अन्दर डालने की कोशिस नहीं की. मैंने उसके आने से पहले ही दो पैन किलर ले ली थी जिनकी वजह से मुझे इतना दर्द मससूस नहीं हो रहा था वरना तो मैं तो बेहोश ही हो जाती. पर इस मीठे दर्द का अहसास भला मुझसे बेहतर कौन जान सकता है. मैंने उसे कस कर अपनी बाहों में भर लिया. उसने भी अब धक्के लगाने शुरू कर दिए थे. और ये तो कमाल ही हो गया. मेरी चूत ने इतना रस बहाया की अब तो उसका लंड आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था लेकिन कुछ फसा हुआ सा तो अब भी लग रहा था. हर धक्के के साथ मेरे पैरों की पायल और हाथों की चूड़ियाँ बज उठती तो उसका रोमांच तो और भी बढ़ता चला गया. मैंने जब उसके गालों को फिर चूमा तो उसके धक्के और तेज हो गए. उसने थोडा सा नीचे झुक कर मेरे एक उरोज की घुंडी को अपने मुंह में भर लिया. दूसरे हाथ से मेरे दूसरे उरोज को मसलने लगा. मेरे हाथ उसकी पीठ पर रेंग रहे थे. मैं तो सित्कार पर सित्कार किये जा रही थी. काश ये लम्हे ये रात कभी ख़तम ही ना हों और मैं मेरा मिट्ठू क़यामत तक इसी तरह एक दूसरे की बाहों में लिपटे चुदाई करते रहें.
हमें कोई २० मिनिट तो जरूर हो गए होंगे. आप हैरान हो रहे हैं ना भला पहली चुदाई में इतना समय तो नहीं लगता ? ओह … आप तो कुछ जानते ही नहीं ? अरे भई जब आदमी एक बार झड़ चुका होता है तो दूसरी बार उसका बहुत देर से निकलता है. और मैंने तो इसकी तैयारी पहले ही कर ली थी ना ? ओहो आप भी कहाँ मिनिटों सेकिंडों के चक्कर में पड़ गए. उस समय हमें इन बातों से क्या लेना देना था. अब तो फिच्च … खच्च … के मधुर संगीत से पूरा कमरा ही गूँज रहा था. मेरी चूत से निकलते कामरस से तकिया पूरा भीग गया था. मैं तो अपनी जाँघों और गांड पर उस पानी को महसूस कर रही थी. अब आसान बदलने की जरुरत थी.
अब मिट्ठू बेड के पास फर्श पर खडा हो गया और उसने मुझे बेड के एक किनारे पर सुला दिया. नितम्बों के नीचे दो नए तकिये लगा दिए और मेरे दोनों पैर हाथों में पकड़ कर ऊपर हवा में उठा दिए. हे भगवान् खून और मेरे कामरस और क्रीम से सना उसका लंड तो अब पूरा खूंखार लग रहा था. पर अब डरने की कोई बात नहीं थी. उसने मेरी ओर देखा. मैं जानती थी वो क्या चाहता था. ये तो मेरा पसंदीदा आसन था. मैंने उसके लंड को अपने एक हाथ में पकडा और अपनी चूत के मुहाने पर लगा दिया. उसके साथ ही उसने एक धक्का लगाया और पूरा का पूरा लंड गच्च से अन्दर बिना किसी रुकावट के बच्चेदानी से जा टकराया. आह.. मैं तो जैसे निहाल ही हो गयी. मुझे आज लम्बे और मोटे लंड के स्वाद का मज़ा आया था वरना तो बस किस्से कहानियों या ब्लू फिल्मो में ही देखा था. उसका लंड कभी बाहर निकलता और कभी पिस्टन की तरह अन्दर चला जाता. वो आँखें बंद किये धक्के लगा रहा था. इस बार उसने कोई जल्दी नहीं की और ना ही तेज धक्के लगाए. जब भी उसका लंड अन्दर जाता तो मेरी दोनों फांके भी उसके साथ चिपकी अन्दर चली जाती और मेरी पायल झनक उठती. मैं तो जैसे किसी आनंद की नयी दुनिया में ही पहुँच गयी थी.
कोई 7-8 मिनिट तो ये सिलसिला जरूर चला होगा पर समय का किसे ध्यान और परवाह थी. पैर ऊपर किये मैं भी थोडी थक गयी थी और मुझे लगाने लगा कि अब मिट्ठू भी सीता राम बोलने वाला ही होगा मैंने अपने पैर नीचे कर लिए. मेरे पैर अब जमीन की ओर हो गए और मिट्ठू मेरी जाँघों बे बीच में था. मुझे लगा जैसे उसका लंड मेरी चूत में फंस ही गया है. अब वो मेरे ऊपर झुक गया और अपने पैर मेरे कुल्हों के पास लगाकर उकडू सा बैठ गया. आह.. इस नए आसन में तो और भी ज्यादा मजा था. वो जैसे चौपाया सा बना था. उसके धक्के तो कमाल के थे. 15-20 धक्कों के बाद उसकी रफ़्तार अचानक बढ़ गयी और उसके मुंह से गूं … गूं … आआह्ह.. की आवाजें आने लगी तब मुझे लगा कि अब तो पिछले आधे घंटे से उबलता लावा फूटने ही वाला है तो मैंने अपने पैर और जांघें चौडी करके ऊपर उठा ली ताकि उसे धक्के लगाने में किसी तरह की कोई परेशानी ना हो. मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया. वैसे भी अब मेरी हिम्मत जवाब देने लगी थी. मैंने अपनी बाहों से उसकी कमर पकड़ ली और नीचे से मैं भी धक्के लगाने लगी. “बस मेरी रानी अब तो …. आआईईईइ ………………..”
“ओह … मेरे प्रेम, मेरे मिट्ठू और जोर से और जोर से उईई … मैं भी गयीईईई ………”
और फिर गरम गाढे वीर्य की पहली पिचकारी उसने मेरी चूत में छोड़ दी और मेरी चूत तो कब की इस अमृत की राह देख रही थी वो भला पीछे क्यों रहती उसने भी कामरस छोड़ दिया और झड़ गयी. मिट्ठू ने भी कोई 8-10 पिचकारियाँ अन्दर ही छोड़ दी. मेरी मुनिया तो उस गाढ़ी और गरम मलाई से लबालब भर गई. मैंने उसे अपनी बाहों में ही जकडे रखा. उसका और मेरा शरीर हलके हलके झटके खाते हुए शांत पड़ने लगा. कितनी ही देर हम एक दूसरे की बाहों में लिपटे इसी तरह पड़े रहे.
“ओह.. थैंक्यू मैनाजी ?”
“थैंक्यू मित्ठुजी मेरे प्रेम देव ” मैंने उसकी ओर आँख मार दी. वो तो शर्मा ही गया और फिर उसने मेरे होंठ अपने मुंह में लेकर इस कदर दांतों से काटे की उनसे हल्का सा खून ही निकल आया पर उस खून और दर्द का जो मीठा अहसास था वो मेरे अलावा भला कोई और कैसे जान सकता था. उसका लंड फिसल कर बाहर आ गया और उसके साथ गरम गाढ़ी मलाई भी बहार आने लगी. अब मैं उठकर बैठ गयी. पूरा तकिया फिर गीला हो गया था. चूत से बहता जूस मेरी जाँघों तक फ़ैल गया. मुझे गुदगुदी सी होने लगी तो मरे मुंह से “आ... ई इ इ ” निकल गया.
“क्या हुआ ?”
“ओहो.. देखो तुमने मेरी क्या हालात कर दी है अब मुझे उठा कर बाथरूम तक तो ले चलो ”
“ओह हाँ..”
और उसने मुझे गोद में उठा लिया और गोद में उठाये हुए ही बाथरूम में ले आया. मुझे नीचे खडा कर दिया. मुझे जोरों की पेशाब आ रही थी. पर इससे पहले कि मैं सीट पर बैठती वो खडा होकर पेशाब करने लगा. मैं शावर के नीचे चली गयी और अपनी मुनिया को धोने लगी. उसे धोते हुए मैंने देखा की वो बुरी तरह सूज गयी और लाल हो गयी है. मैंने मिट्ठू को उलाहना देते हुए कहा “देखो मेरी मुनिया की क्या हालत कर दी है तुमने ?”
“कितनी प्यारी लग रही है मोटी मोटी और बिलकुल लाल ?” और वो मेरी आ गया. अब वो घुटनों के बल मेरे पास ही बैठ गया और मेरे नितम्बों को पकड़ कर मुझे अपनी ओर खींच लिया. मेरी मुनिया के दोनों होंठ उसने गप्प से अपने मुंह में भर लिए.
“ओह … छोडो … ओह.. क्या कर रहे हो. ओह … आ ई इ ” मैं तो मना करती ही रह गयी पर वो नहीं रुका और जोर जोर से मेरी मुनिया को चूसने लगा. मेरी तो हालत पहले से ही खराब थी और जोरों से पेशाब लगी थी. मैं अपने आप को कैसे रोक पाती और फिर मेरी मुनिया ने पेशाब की एक तेज धार कल कल करते ही उसके मुंह में ही छोड़नी चालू कर दी. वो तो जैसे इसी का इन्तजार कर रहा था. वो तो चपड़ चपड़ करता दो तीन घूँट पी ही गया. मूत की धार उसके मुंह, नाक, होंठो और गले पर पड़ती चली गयी. छुर्रर.. चुर्र… पिस्स्स्स्स… का सिस्कारा तो उसे जैसे निहाल ही करता जा रहा था. वो तो जैसे नहा ही गया उस गरम पानी से. जब धार कुछ बंद होने लगी तो फिर उसने एक बार मेरी मुनिया को मुंह में भर लिया और अंतिम बूंदे भी चूस ली. जब वो खडा हो गया तो मैंने नीचे झुक कर उसके होंठो को चूम लिया.
आह … उसके होंठों से लगा मेरे मुत्र का नमकीन सा स्वाद मुझे भी मिल ही गया.
premguru
20-06-2009, 04:33 PM
पार्ट IV
हल्का सा शावर लेने के बाद मैंने उसे बाहर भेज दिया. वो मुझे साथ ही ले जाना चाहता था पर मैंने कहा तुम चल कर दूध पीओ मैं आती हूँ. मिट्ठू जब बाथरूमसे बाहर चला गया तो मैंने दरवाजे की चिटकनी लगा ली. आप सोच रही होंगी अब भला दरवाजा बंदकरने की क्या जरुरत रह गयी है अब तो मिट्ठू को कहना चाहिए था कि वो गोद में उठा कर बेडरूम में ले जाए. ओह … आप भी कितनी गैहली हैं ? मिट्ठू की तरह. अरे भई मुझे जन्नत के दूसरे दरवाजे का भी तो उदघाटन करवाना था ना? मैंने वार्डरोब से बोरोलिनक्रीम की ट्यूब निकली और उसका ढक्कन खोल कर उसकी टिप अपनी गांड के छेद पर लगायी और लगभग आधी ट्यूब अन्दर ही खाली कर दी. फिर मैंने उसपर अंगुली फिरा कर उसकी चिकनाई साफ़ कर ली. अब ठीक है.
और फिर मैं कैटवाक् करती हुई बेडकी ओरआई. मेरी पायल की रुनझुन और दोनों उरोजों की घाटियों के बीच लटकता मंगलसूत्र उसे मदहोश बना देने के लिए काफी था. मैंने बड़ी अदा से नीचे पड़ी नाइटी उठायी और उसे पहनने की कोशिस करने लगी. पर मिट्ठू कहाँ मानने वाला था. उसने दौड़ कर मुझे नंगा ही गोद में उठा लिया और बेड पर ले आया और मेरी गोद में सर रख कर सो गया जैसे कोई बच्चा सो जाता है. उसकी आँखें बंद थी. मुझे उसका मासूम सा चेहरा बहुत प्यारा लग रहा था. काश ये लम्हे कभी ख़तम ही न हों और मेरा ये मिट्ठू इसी तरह मेरे आगोश में पड़ा रहे. मेरे उरोज ठीक उसके मुंह के ऊपर थे. अब भला वो कैसे रुकता. मैं भी तो यही चाहती थी. उसने अपना सिर थोडा सा ऊपर उठाया और एक निप्पल मुंह में ले कर चूसने लगा. बारी बारी से वो दोनों उरोजों को चूसता रहा. आह … इन उरोजों को चुसवानेमें भी कितना मज़ा है मैं ही जानती हूँ. गणेश भी इतनी अच्छी तरह से नहीं चूसता है. ये तो कमाल ही करता है. वो साली मैना तो निहाल ही हो जाती होगी. मैना का ख़याल आते ही मेरी चूत में फिर से चींटियाँ रेंगने लगी. वो फिर से गीली होने लगी थी. तभी मेरा ध्यान उसके लंड की ओर गया. वो निद्रा से जाग चुका था और फिर से अंगडाई लेने लगा था. मैंने हाथ बढा कर उसे पकड़ लिया. वो तो फुफ्कारे ही मारने लगा. आह … यही तो कमाल है जवान लौंडों का. अगर झड़तेजल्दी हैं तो तैयार भी कितनी जल्दी हो जाते हैं. मैं उसे हाथ में लेकर मसलने लगी तो मिट्ठू ने मेरी निप्पल को दांतों से काट लिया. “आईई …..” मेरे मुंह से हलकी सी किलकारी निकल गयी.
“हटो परे..” मैंने उसे परे धकेलते हुए कहा तो वो हंसने लगा. जैसे ही मैं उठने लगी तो वो मेरे पीछे आ गया और मुझे पीछे से अपनी बाहों में जकड लिया. अब मैं बेड पर लगभग ओंधी सी हो गयी थी. वो झट से मेरे ऊपर आ गया. मैं उसकी नीयत अच्छी तरह जानती थी. ये सब मर्द एक जैसे होते हैं. हालांकि गणेश का लंड छोटा और पतला था पर वो भी जब मौका मिलाता मेरे पिछले छेद का मज़ा लूटने से बाज नहीं आता था. फिर भला ये मिट्ठू तो एक नंबर का शैतान है. उसके खड़े लंड को मैं अपने नितम्बों के बीच अच्छी तरह महसूस कर रही थी. मैंने अपने नितम्ब थोड़े से ऊपर कर दिए. वो तो इसी ताक में था. मुझे तो पता ही नहीं चला कि कब उसने अपने लंड पर ढेर सारी क्रीम लगा ली है. और गच्च से अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया. और मेरी कमर पकड़ कर जोर जोर से धक्के लगाने लगा. कोई 8-10 धक्कों के बाद वो बोला
“मैना रानी ?”
“क्या है ?”
“वो कुत्ते बिल्ली वाला आसन करें ?”
“तुम बड़े बदमाश हो ?”
“प्लीज … एक बार …मान जाओ ना ?” उसने मेरी ओर जिस तरीके से ललचाई नज़रों से देखा था मुझे हंसी आ गयी. मैंने उसका नाक पकड़ते हुए कहा “ठीक है पर कोई शैतानी नहीं ?”
“ओ.के. मैम ”
अब मैं बेडके किनारे पर अपने घुटनों के बल बैठगयी. मैंने अपने पैरों के पंजे बेडसे थोडा बाहर निकाल लिए थे और अपनी कोहनियों के बल मुंह नीचा करके ओंधी सी हो गयी. मेरे नितम्ब ऊपर उठ गए. मिट्ठूबेड से नीचे उतर कर फर्श पर खडा होकर ठीक मेरे पीछे आ गया. उसका लंड मेरे नितम्बों के बीच में था. मुझे तो लगाकि वो अगले ही पल मेरी गांड केछेद में अपना लंड डाल देगा. पर मेरा अंदाजा गलत निकला. उसने मेरी मुनिया की फांकों पर हाथ फिराया. खिले हुए गुलाब के फूल जैसी मेरी मुनिया को देख कर वो भला अपने आप को कैसे रोक पाता. उसने एक हाथ से मेरी मुनिया की फांकों को चौडा किया और उसे चूम लिया. और फिर गच्च से अपना लंड मेरी चूत में ठोक दिया. एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर समा गया. अब वो कमर पकड़ कर धक्के लगाने लगा. उसने मेरे नितम्बों पर हलकी सी चपत लगानी चालू कर दी. आह … मैं तो मस्त ही हो गयी. जैसे ही वो मेरे नितम्बों पर चपत (स्लेपिंग) लगता तो मेरी गांड का छेद खुलने और बंद होने लगता. मैं आह उन्ह्ह … करने लगी और अपना एक हाथ पीछे ले जाकर अपनी गांड के छेद पर फेरने लगी. मेरा मकसद तो उसका ध्यान उस छेद की ओर ले जाने का था. मैं जानती थी अगर एक बार उसने मेरे इस छेद को खुलता बंद होता देख लिया तो फिर उस से कहाँ रुका जाएगा. आपको तो पता ही होगा मेरा ये छेद बाहर से थोडा सा कालाजरूर दिखता है पर अन्दर से तो गुलाबी है. भले ही गणेश ने कई बार इस का मज़ा लूटा है पर उस पतले लंड से भला इसका क्या बिगड़ता. मैंने अपनी चूत और गांड दोनों को जोर से अन्दर सिकोड़ लिया और फिर बाहर की ओर जोर लगा दिया. अब तो मिट्ठू की नज़र उस पर पड़नी ही थी. आह उसकी अँगुलियों का पहला स्पर्श मुझे अन्दर तक रोमांचित कर गया. उसने अपना अंगूठा मुंह में लिया और ढेर सा थूक उसपर लगा कर मेरी गांड के छेद पर रगड़ने लगा. मैं यही तो चाहती थी. मैंने एक बार फिर संकोचन किया तो मिट्ठू की हलकि सी सीत्कार निकल गयी और उसने अपने अंगूठे का एक पोर अन्दर घुसा दिया. उसने एक हाथसे मेरे नितम्बों पर फिर थप्पड़ लगाया. आह.. मैं तो इस हलकी चपत से जैसे निहाल ही हो गयी. आप को बता दूं कई औरतों को सेक्स के दौरान जब हलकी चपत लगाई जाए या दांतों से काटा जाए तो उन्हें सचमुच बड़ा मज़ा आता है. गुलाबो ठीक ही कह रही थी. ये साला गणेश तो निरा माटीका माधो ही है. जैसे खाने की हर चीज में मीठा वैसे ही इस चुदाई में भी इतनी मिठास और नरमाई ? वो तो इतनी सावधानी बरतता है कि जैसे मैं कोई कांच का बर्तन हूँ और उसके थोड़े से दबाव से टूट जाउंगी. मैं तो चाहती हूँ कि कोई जोर जोर से मेरे नितम्बों पर थप्पड़ लगाए और मेरे बूब्स, मेरी मुनिया, मेरे गाल, मेरे होंठ काट ले. एक थप्पी उसने और लगाई और फिर एक झटके से उसने अपना लंड बाहर निकाल लिया.
मैंने हैरानी से अपनी गर्दन घुमा कर उसकी ओर देखा. तो वो बोला “मैना रानी बुरा न मानो तो एक बात पूछू ?”
“ओह अबक्या हुआ ?”
“प्लीज एक बार गधापचीसी खेलें ?” उसकी आँखों में गज़ब की चमक थी और चहरे पर मासूमियत. वो तो ऐसे लग रहा था जैसे कोई बच्चा टाफ़ी की मांग कर रहा हो. अन्दर से तो मैं भी यही चाहती थी पर मैं उसके सामने कमजोर नहीं बनाना चाहती थी. मैंने कहा “बड़े बदमाशहो तुम ?”
“ओह प्लीज मैना एक बार … तुम ही तो कहती थी की जिन औरतों के नितम्ब खूबसूरत होते हैं उन्हें पीछे से भी ठोकना चाहिए ?”
“ओह वो तो मैंने तुम्हारी उस मैना के लिए कहा था ?”
“प्लीज एक बार ….?” वो मेरे सामने गिडगिडा रहा था. यही तो मैं चाहती थी कि वो मेरी मिन्नतें करे और हाथ जोड़े.
“ठीक है पर धीरे धीरे कोई जल्दबाजी और शैतानी नहीं ? समझे ?”
“ओह.. हाँ … हाँ.. मैं धीरे धीरे ही करूँगा ”
ओह … तुम लोल ही रहोगे.. मैंने अपने मन में कहा. मैं तो कब से चाह रही थी कि कोई मेरे इस छेद का भी बाजा बजाये. अब उसने अपने लंड पर ढेर सारी क्रीम लगाई और थोडी सी क्रीम मेरी गांड के छेद पर भी लगाई और अपना लंड मेरी गांड के छेद पर टिका दिया. ये तो निरा बुद्धू ही है भला ऐसे कोई गांड मारी जाती है. गांड मारने से पहले अंगुली पर क्रीम लगाकर 4-5बार अन्दर बाहर करके उसे रवां बनाकर गांड मारी जाती है.चलो कोई बात नहीं ये तो मैंने पहले से ही तैयारी कर ली थी नहीं तो ये ऊपर नीचे ही फिसलता रह जाता और एक दो मिनिट में ही घीया हो जाता. उसका सुपाडा आगे से थोडा सा पतला था. मैंने अपनी गांड का छेद थोडा सा ढीला छोड़ कर खोल सा दिया. अब उसने मेरी कमर पकड़ ली और धीरे से जोर लगाने लगा. इतना तो वो भी जानता था कि गांड मारते समय धक्का नहीं मारा जाता केवल जोर लगाया जाता है. अगर औरत अपनी गांड को थोडा सा ढीला छोड़ दे तो सुपाडा अन्दर चला जाता है. और अगर एक बार सुपाडा अन्दर चला गया तो समझो लंका फतह हो गयी. अब तक बोरोलीन पिंघल कर मेरी गांड को अन्दर से नरम कर चुकी थी और उसके पूरे लंड पर क्रीम लगी होने से सुपाडा धीरे धीरे अन्दर सरकने लगा. ओईई मा … मुझे तो अब अहसास हुआ कि मैं जिस को इतना हलके में ले रही थी हकीकत में इतना आसान नहीं है. मेरी गांड का छेद खुलता गया और सुपाडा अन्दर जाता चला गया. मुझे तो ऐसे लगा कि मेरी गांड फट ही जायेगी. डेढ़ इंच मोटा सुपाडा कोई कम नहीं होता. मेरे मुंह से चींख ही निकल जाती पर मैंने पास रखे तौलिए को अपने मुंह में ठूंस लिया. अब मिट्ठू ने एक हल्का सा धक्का लगाया और लंड एक ही बार में मेरी गांड के छेदको चौडा करता हुआ अन्दर चला गया. मेरे ना चाहते हुए भी मेरी एक चींख निकल गई. “ओ ईई …माँ मा मर गयी ……”
आज पहली बार मुझे लगा कि गांड मरवाना इतना आसान नहीं है. अगर कोईअनाड़ीहो तो समझो उसकी गांड फटने से कोई नहीं बचा सकता. मैंने हाथ पीछे ले जाकर देखा था उसका 5इंच तक लंड अन्दर चला गया था. कोई 1-2इंच ही बाहर रहा होगा. मेरी तो जैसे जान ही निकल गयी थी. दर्द के मारे मेरी आँखों से आंसू निकलने लगे थे. मैंने तकिये में अपना मुंह छुपा लिया. मैंने जानबूझकर मिट्ठू से कोई शिकायत नहीं की. मैं तो उसे खुश कर देना चाहती थी ताकि वो मेरा गुलाम बन कर रहे और मैं जब चाहूँ जैसे चाहूँ उसका इस्तेमाल करुँ. सच पूछो तो मैं तो उस हरामजादी मैना को नीचा दिखानाचाहती थी. मैं तो चाहती थी कि ये मिट्ठू उसके सामने ही मुझे चोदे और मेरी गांड भी मारे और वो साली मैना देखती ही रह जाए.
मिट्ठू ने धीरे धीरे अपना लंड अन्दर बाहर करना चालू कर दिया था. ओह … मैं तो खयालों में खोयी अपने दर्द को भूल ही गयी थी. आह … अब तो मेरी गांड भी रवां हो चुकी थी. मिट्ठू तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रहा था. “हाई..मेरी मैना,मेरी नीरू रानी,मेरी बुलबुल आज तुमनेमुझे स्वर्ग का मज़ा दे दिया है. हाई ….. मेरी जान मैं तो जिंदगी भर तुम्हारा गुलाम ही बन जाऊँगा. हाई .. मेरी रानी ” और पता नहीं क्या क्या बडबडाताजा रहा था. मैं उसके लंड को अन्दर बाहर होते देख तो नहीं सकती थी पर उसकी लज्जत को महसूस तो कर ही रही थी. वो बिना रुके धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर किये जा रहा था. जब लंड अन्दर जाता तो उसके टट्टे मेरी चूत की फांकों से टकराते तो मुझे तो स्वर्ग का सा आनंद मिलाता. मैंने अपनी गांड का एक बार फिर संकोचन किया तो उसके मुंह से एक जोर कीसीत्कार ही निकल गयी. मैं जानती हूँ वो मेरी गांड में अन्दर बाहर होते अपने लंड को देख कर निहाल ही हुआ जा रहा होगा. आखिर उसने एक जोर का धक्का लगा दिया. उसके लंड के साथ मेरी गांड की कोमल और लाल रंग की त्वचा को देख कर वो भला अपने आप को कैसे रोक पाता. अब मुझे दर्द की क्या परवाह थी. मैंने भी अपने नितम्बों को उसके धक्कों के साथ आगेपीछे करना चालू कर दिया. अब वो सुपाडे तक अपना लंड बाहर निकालता और फिर जड़ तक अन्दर ठोकदेता. कोई 15मिनिट तो हमें जरूर हो ही गए होंगे. मेरी आह ओईई … याआ … की मीठी सीत्कार सुनकर वो औरभी जोश में आ जाता था. मैं तो यही चाहती थी कि ये सिलसिला इसी तरह चलता रहे पर आखिर उसके लंड को तो हार माननी ही थी ना?
“मेरी .. रानी …मेरी प्यारी मैनाअब बस मैं तो जाने वाला हूँ ”
“ओह … एक मिनिटठहरो ?”
“क्यों क्या हुआ ?”
“ओह ऐसे नहीं तुम मेरे ऊपर आ जाओ मैं अपने पैर एकतरफ करके सीधे करती हूँ ”
“ठीक है ”
“बाहर मत निकालना ?”
“क्यों ?”
“ओह बुद्धू कहीं के फिर तुम न घर के रहोगे न घाट के ?”
पता नहीं उसे समझ आया या नहीं. गांड बाज़ी के इस अंतिम पड़ाव पर अगर लंड को एक बार बाहर निकाल लिया जाए तो फिर अन्दर डालने से पहले ही वो दम तोड़ देता है और मैं ये नहीं चाहती थी. मैंने अपने घुटने थोड़े से टेढ़े किये और बेड के ऊपर ही सीधे कर दिए. वो भी सावधानी से मेरे ऊपर आ गया बिना लंड को बाहर निकाले. बड़े लंड का यही तो मज़ा है. अगर इसकी जगह गणेश का या किसी और का छोटा लंड होता तो शर्तिया बाहर निकल ही जाता.
अब मैंने अपनी जांघें चौडी कर दीं और नितम्ब ऊपर उठा दिए. मिट्ठू ने अपने घुटने मोड़कर मेरे कूल्हों के दोनों तरफ कर लिए और मेरे दोनों बूब्स पकड़ कर मसलने लगा. आह.. उसके अंतिम धक्कों से तो मैं निहाल ही हो गयी. मैंने अपनी चूत में भी अंगुली करनी चालु कर दी. अब तो मज़ा दुगना हो गया था. और दुगना ही नहीं अब तो मज़ा तिगुना था. मैंने अपने दूसरे हाथ का अंगूठा जो चूसने लगी थी जैसे कि ये अंगूठा नहीं लंड ही हो. उसके धक्के तेज होने लगे और वो तो हांफने ही लगा था. मैं जानती हूँ उसकी मंजिल आ गयी है. मैं जानती थी कि अब किसी भी वक़्त उसकी पिचकारी निकल सकती है. मैंने चूत में अंगुली की रफ़्तार बढा दी. जब उसे पता चला तो उसने मेरे कानकीलोब अपने मुंह में ले ली और एक जोर का धक्का लगाया. मेरे नितम्ब कुछ ऊपर उठे थे धडाम से नीचे गिर गए और उसके साथ ही उसकी न जाने कितनी पिचकारियाँ छूटनेलगी. मेरी मुनिया ने भी पानी छोड़ दिया.
पता नहीं कितनी देर हम एक दूसरे से इसी तरह गुंथे पड़े रहे. मैं तो यही चाहती थी हम इसी तरह पड़े रहें पर उसका लंड अब सिकुड़ने लगा था और ये क्या एक फिच्च..कीआवाज़ के साथ वो तो फिसल कर बाहर आ गया. मेरी गांड के छेद से सफ़ेद मलाई निकालने लगी जिसे उसने अपनी अँगुलियों से लगा कर मेरे नितम्बों पर चुपड़दिया. ओह … गरम और गाढ़ीमलाई से मेरे नितम्ब लिपडही गए.
मैं उठ कर बैठ गयी और फिर उसके गले से लिपट गयी. मैंने उसके गालों पर एक चुम्मा लिया. उसने भी मुझे बाहों में कस लिया और मुझे चूम लिया. “थैंक्यू मेरी जान … आज तो मुझे स्वर्गका ही आनंद मिल गया जिससे मैं वंचित और अनजान था. ओह थैंक्यू निरुजी …”
मैंने उसकी ओर आँखें तरेरी तो उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और बोला “ओह सॉरी.. मेरी मैना रानी ” और उसने मेरी ओर आँख मार दी. मैं भला अपनी हंसी कैसे रोक पाती “ओह.. तुम पक्के लोल हो ”
मैंने जल्दी से नाइटी उठायी और बाथरूम में घुस गयी. मैंने अन्दर सीट पर बैठ गयी. हे भगवान् कितनी मलाई अन्दर अभी भी बची थी. फिर पेशाबकरने के बाद अपनी चूत और गांड को साबुन और डेटोल लगा कर धोया और क्रीम लगायी. नाइटी पहन कर जब मैं बाहर आई तो मिट्ठू कपडे पहनने की तैयारी कर रहा था. मैंने भाग कर उसके हाथों से कुरता और पाजामा छीन लिया. “अरे नहीं मेरे भोले राजा अब सारी रात तुम्हे कपडे पहनने की कोई जरुरत नहीं है तुम ऐसे ही बहुत सुन्दर लग रहे हो ?”
“आप ने भी तो नाइटी पहन ली है ?”
“मेरी और बात है ?”
“वो क्या ?”
“तुम अभी नहीं समझोगे ?” मैंने बेड पर बैठते हुए आँखें बंद कर ली. अरे ये क्या.. उसने मुझे फिर बाहों में भर लिया और मेरे ऊपर आ गया. मुझे हैरानी थी कि वो तो फिर तैयार हो गया था. “ओह.. रुको …”
“क्या हुआ.. ?”
“नो..”
“प्लीज एक बार और ?”
“ठीक हैपर इस बार मैं ऊपर आउंगी ?” और मैंने उसकी ओर आँख मार दी. पहले तो वो कुछ समझा ही नहीं बाद में जब उसे मेरी बात समझ आई तो उसने मुझे इतनी जोर से अपनी बाहों में जकडा कि मेरी तो हड्डियां ही चरमरा उठी …….
और फिर चुदाई का ये सिलसिला सारी रात चला और आज की रात ही क्यों अगली तीन रातों में उसने मुझे कम से कम 18बार चोदा और कोई 10बार मेरी गांड मारी. उसने मेरी मुनिया को कितनी बार चूसा और मैंने कितनी बार उसका लंड चूसते हुए उसकी मलाई खायी मुझे गिनती ही याद नहीं. हमने बाथरूम में, किचनमें, शोफे पर, बेडपर, फर्शपरऔर घर के हर कोने में हर आसन में मज़े किये. मेरी तो पिछले 8-10सालों की कसर पूरी हो गयी. ये चार दिन तो मेरे जीवन के अनमोल दिन थे जिसकी मीठी यादों की कसक मैं ताउम्र अपने सीने में दबाये रखूंगी. आप शायद हैरान हो रही है ना ?
और आज शाम को वो हरामजादी मैना आने वाली थी. मिट्ठू ने तो उसके आने की ख़ुशी में छुट्टी ही मार ली थी. अल सुबह जब मिट्ठू अपने फ्लैट में वापस जा रहा था तो मैंने उसे आज दोपहर में मेरे पास आने के लिए मना लिया था. आज मैं दिन में एक बार उस से जमकर चुदवाना चाहती थी. इसका एक कारण था. मैं तो उसे आज दिन में पूरी तरह निचोड़ लेना चाहती थी ताकि जब शाम को वो मधु की बच्ची आये तो मिट्ठू में उसे चोदने की ताक़तऔरहिम्मत ही बाकी ना बचे.
मिट्ठू कोई डेढ़ बजे चुपके से आ गया. मैंने देखा उसका चेहरा उदास था. मैंने उससे इसके बारे में पूछा तो उसने रुकते रुकते बताया …
“वो.. वो.. दरअसल …”
“क्या हुआ..? कुछ बताओ तो सही ?
“वो.. वो … मधु..”
“क्या हुआ उसको वो तो आज आने वाली है ना ?”
“नहीं अब वो नहीं आ रही है..”
“ओह तो तुम उसके लिए उदास हो रहे हो ?”
“नहीं ऐसी बात नहीं है ?”
“अरे तुम चिंता क्यों करते हो मैं हूँ ना ? उसकी सारी कमी दूर कर दूँगी ”
“ओह वो बात नहीं है दरअसल मुझे नयी नौकरी मिल गयी है और मुझे परसों ही यहाँ से उदयपुर जाना पड़ेगा ”
मुझे तो ऐसे लगा जैसे हजारों वाट की बिजली मेरे ऊपर आ गिरी है. मेरी तो जैसे जान ही किसी ने निकाल दी है नशों से सारा खून ही निचोड़ लिया है. जैसे हजारों बिच्छुओंऔर जहरीले साँपों ने एक साथ मुझे डसलिया है. मेरी हालत तो उस पंखहीन मैना जैसी हो गयी थी जिसका मिट्ठू कहीं दूर पहाड़ी पर बैठा है और वो नीचे गहरी खाई में पड़ी है. मेरा तोजैसे सब कुछ लूट कर ले गया है कोई. मुझे तो कितनी ही देर कुछ सूझा ही नहीं.
“ओह.. कहीं तुम मज़ाक तो नहीं कर रहे ?” बड़ी मुश्किलसे मेरे मुंह से आवाज निकली. मेरा गला तो जैसे सूख ही गया था.
“नहीं मैं सच बोल रहा हूँ ”
“ओह.. प्लीज कह दो ये झूठ है. ओह … ये मैना तो मर ही जायेगी तुम्हारे बिना” मुझे लगा जैसे मैं रो ही पडूँगी.
“मैं जानता हूँ आपने मुझे वो सुख दिया है जो मधु ने भी नहीं दिया पर मेरी विवसता है ?
“ऐसी क्या मजबूरी है ? ओह.. वहाँ ना जाने से तुम्हे जितना नुक्सान होगा मैं तुम्हे हर महीने उस से दुगना दे दूँगी … प्लीज मुझे मजधार में छोड़ कर मत जाओ. ये मैना तुम्हारे बिना नहीं जी पाएगी. पहले तो मैं उस मधु से बदला लेना चाहती थी पर अब सचमुच मैं तुमसे प्यार करने लगी हूँ. ओह.. तुम बोलते क्यों नहीं.. ?” मैंने उसे जोर से झिंझोडा.
“नहीं मुझे जाना ही होगा … पर आप चिंता ना करें मैं आपसे मिलता रहूँगा ”
“ओह.. मेरे प्रेमदीवाने,मेरे मिट्ठू मुझे अकेला मत छोडो मुझे भी अपने साथ ले चलो मैं तुम्हारी गुलाम बनभी रह लूंगी . प्लीज ………”
वो तो बस मेरी ओर देखता ही रह गया बोला कुछ नहीं. मैं उसकी हालत जानती थी. मैंभीइस 4दिन के प्रेम प्रसंग को सचमुच का प्यार समझ बैठी. ये मर्द होते ही बेवफा हैं. इन्हें नारी जाति के प्यार का अहसास कहाँ हो पाता है. वो तो बस उसे कोई सेक्स ऑब्जेक्ट या गुदाज बदन ही समझते हैं. इसके अन्दर मन में छिपे उन अहसासों और प्रेम की अनंत परतों को भला वो कैसे जान सकते हैं .मेरी रुलाई आखिर फूट ही पड़ी और मैं भाग कर बेड रूम में आ गयी और ओंधे मुंह बिस्तर पर गिर कर ना जाने कितनी देर रोती रही. मिट्ठू अपने फ्लैट में लौट गया वो भला मेरे पीछे क्यों आता. उसे मेरी इस विरहाग्नि से क्या सरोकार था भला ?.
मोहल्ले के लोग और साथ काम करने वाले सभी कहते हैं किये सक्सेना (हमारा पडोसी बाँके बिहारी सक्सेना) एक नंबर का लोल है साला रात में 11बजे भजन सुनेगा और सुबह सुबह ग़ज़ल. पर उसके मन की पीड़ाऔर दुःख मुझे आज समझ लगा है. आज उसने दोपहर में एक विरह गीत लगा रखा है
जे मैं ऐसा जाणती प्रेम किये दुःख होय
नगर ढिंढोरा पीटती प्रेम ना कीजे कोय
मेरे प्यारे पाठको और पाठिकाओं अब आप ही बताओ मैं प्रेमविरह की अग्नि में जलती एक बेबस अबला क्या करुँ,कहाँ जाऊं,किसका सहारा लूं ? अब आप ही इस मिट्ठू को समझाओ या कम से कम उसे मेल ही कर दोना कि मुझे चोदकर (ओह बाबा छोड़कर) ना जाए ? … premguru2u@yahoo.com (premguru2u@yahoo.com)
प्रेमकी यादमें सोने के पिंजरे में बंद एक मैना-निर्मला बेन पटेल neeruben2u@gmail.com (neeruben2u@gmail.com)
sonali
01-08-2009, 08:21 AM
very good
aapko mera shukriya premguru ji
Bond2009
02-08-2009, 12:52 AM
maan gaye Guruji aapki mahima....!
Bond2009
02-08-2009, 12:53 AM
nice.................!
Bond2009
02-08-2009, 12:54 AM
lage raho guruji..!
suneel_kumar8877
07-08-2009, 02:38 PM
where's d 2nd part
johaintr
13-09-2009, 01:41 AM
give me more
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