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View Full Version : ###भाभी का शर्मिलापन ###.


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sexspl1965
11-06-2009, 08:27 PM
हमारा परिवार एक बहुत ही आदर्श परिवार है सभी बड़े उँचे विचारों वाले लोग हैं। केवल मुझे छोड़ कर, हमारी मताजी की सोच है कि लड़्की हमेंशा अपने से छोटे घर की लानी चाहिये ताकि वो घर में असानी से निभा सके और अपनी लड़्की को हमेशा अपने से बड़े घर में देनी चाहिये, ताकि वो सुखी रह सके। सो मेंरे परिवार ने अपने उच्च विचारों के अनुसार मेंरे बड़े भाई की शादी एक अत्यन्त ही गरीब घर की लड़्की से कर दी उनकी इतनी भी हैसियत नहीं थी कि वो लोग अपनी लड़्की को ढंग के दो जोड़ी कपड़े भी दे सके। लेकिन गरीब होने के बाद भी वे बड़े खुद्दार लोग थे कभी किसी को अपनी गरीबी क अह्सास नहीं होने देते थे। उन्होने अपनी लड़्की को जैसा कि आम मध्यम वर्गीय गरीब परिवारों में शिक्षा दी जाती है वो सभी शिक्षा दि थी जैसे हर परिस्थिति में रहना , सब के साथ तालमेल रखना परिवार में कभी किसी कि चुगली न करना आदि आदि। वैसे भी मेंरी भाभी के परिवार की आर्थिक स्थिती मध्यम ही रही है बचपन से उनके परिवार ने अनेंक आर्थिक विषमताएं देखी है सो परिवार के लोग वैसे ही बड़े शालीन एवं विनम्र हैं।

भाभी कालेज भी पैदल ही आना जान करती थी उनके कालेज में भी कोई ज्यादा दोस्त नहीं थे और जो थे वो भी कुछ खास नहीं थे, गरीबॊं के वैसे भी ज्यादा दोस्त नहीं होते है।धन की की कमी इंन्सान को जीवन मे बड़ा ही संकुचित एवं आत्मविश्वास विहिन बना देते है। मेंरी भाभी के साथ भी कुछ ऎसा ही था वो बहुत ही सकुचा कर रहती थी अन्यन्त अल्प बात करती थी । किसी भी बात का "जी" "अच्छा" "ठीक है" ऎसे ही जवाब देती थी बहुत ही संभल कर बोलती थी उसका पूरा प्रयास रहता था कि उसकि बातों से कोई भी सदस्य नारज ना होने पाये। कभी कुछ गलत हो जाये तो भी शिकायत नहीं करती थी।शायद उसे अभी अपनी तीन जवान बहनों कि शादी कि चिंता मन ही मन सता रही थी इसलिये उसका पूरा प्रयास रहता था कि उसकी वजह से उसके परिवार का नाम खराब ना हो और उसकी बहनॊं कि शादी में कोई अड़्चन ना आये। गरीब मध्यम वर्गीय परिवारों के लिये तो वैसे भी ईज्जत ही सबसे बड़ी दौलत होती है। मेंरी मां तो बड़ी खुश थी ऎसी शर्मिली बहू को पाकर।

मुझे अपनी भाभी कि जो बात सबसे ज्यादा पसंद थी वो था उसका शानदार जिस्म। गोरा बदन,सुंदर चेहरा,बेह्तरीन चिकनी एवं मोटी जांघे,बाहर की तरफ़निकलती हुई गोल गोल मोटी मोटी गांढ़ और मदहोश करने वाली रसीली शानदार उभारों वाली उसकी दोनों छातियां। मैं तो जब भी उसे देखता मेरा लंड़ खड़ा हो जाता और मुझे ऎसी ईच्छा होती कि मै इसे तुरंत नंगी कर ड़ालू और उसकी रसीली छातियों में भरे हुए जवानी के रस को जी भर कर पिऊ। लेकिन ये एक सच्चाई थी कि वो रसीली छातियां और मखमली चूत मेंरी नही थी। ये सोच कर मेंरा मन अपने भाई के प्रति थोड़ी देर के लिये घृणा से भर जाता।

मेंरा भाई वैसे भी उस बेह्तरीन जवान पुदी का मजा नहीं ले पाता था क्योंकि उसकी नौकरी ही ऎसी थी महिने में बीस दिन तो बो बाहर ही रहता था। बचे हुए दस दिनों में सात दिन उसे शहर में अपनी टिम के साथ घूमना होता था।अब तीन दिन में नंगा नहायेगा क्या ? और निचोडे़गा क्या? सो किसी-किसी महिने तो भाभी बिन चुदी ही रह जाती थी। कभी कभी मुझे ऎसा विचार आता कि भाभी के लिये ऎसे विचार मन में लाना गलत है, लेकिन जैसे ही भाभी मेंरे साम्ने आती मेंरी कामवासना मेंरी अन्तरात्मा पर हावी हो जाती और मैं फ़िर से उत्तेजित हो जाता और उसको चोदने के खयाल में डूब जाता । मेंरे लिये तो भाभी को चोदना अब एक मिशन बन चुका था, मैं मन ही मन अपनी भाभी के उपर न्योछावर हो चुका था और उसके बेह्तरिन जिस्म का दिवाना बन गया था। अब तो रात दिन मेंरे मन में भाभी को चोदने का ही खयाल रहता था।

भाभी का शर्मिलापन मेंरे लिये काफ़ी सुखद और मेंरी योजना में काफ़ी सहायक था। मैने तय कर लिया कि ऎसे भाभी के जिस्म को चोदने का खयाल कर के मुठ्ठ मारने से कुछ हासिल नही होने वाला उसे पाने के लिये प्रयास करना पड़ेगा। वैसे भी जिस इंसान के लिये इस बेह्तरीन पुदी को घर में लाया गया था उसे तो इसे ठीक से देखने की भी फ़ुर्सत नहीं थी चोदने की बात तो बहुत दूर थी। दौलत और जवानी दोनों ही उपभोग करने पर हि सुख देते हैं अन्यथा दोनों बोझ बन कर रह जाते है। दौलत और औरत की जवानी दोनों को ही अपनी रक्षा के लिये मजबूत कंधो के सहारे की जरुरत होती है, अन्यथा उसे कोई भी लूट कर ले जा सकता है। मेंरे घर में भी जवानी की दौलत खुले आम घूम रही थी और उसका रखवाला गायब था। सो मैंने उसे लूटने का फ़ैसला कर लिया था। बस प्रयास करना था और अवसर हासिल करना था ।
(क्रमश:.....)

Hotest
12-06-2009, 02:20 PM
Very nice............
please continued it........................

Hotest
12-06-2009, 08:02 PM
abe yaar aage kaya huwa ye to bata???????????????????

sexspl1965
13-06-2009, 11:24 AM
Very nice............
please continued it........................


Yes dear i m going to post next part
Thanks for comments

sexspl1965
13-06-2009, 11:25 AM
abe yaar aage kaya huwa ye to bata???????????????????


To day read next part ,Thanks.............

naduman
13-06-2009, 05:37 PM
mast hai puri post to kar na yaar

Titpussy
13-06-2009, 08:31 PM
Yar kaya wet per chode doge aage nahi???????????

mypam.de
13-06-2009, 08:33 PM
baki kaha hai

Hotest
14-06-2009, 11:09 AM
aab to bahut ho chuka post kar na yaar.......

sexspl1965
14-06-2009, 11:15 AM
अब मैने भाभी के ज्यादा से ज्यादा करीब रहेने का विचार कर लिया। जब भी भाभी घर में अकेले मिलती मैं उससे काफ़ी सट कर या करीब खड़े रहने का ही प्रयास करता, और मौका मिलते ही मैं उसके गदराए बदन पर कहीं पर भी हाथ लगाने से नहीं चुकता और ऎसे जाहिर करता जैसे ये सब अन्जाने में हो गया है। भाभी के अकेले मेरे सामने से गुजरते ही मैं उसके रसीले बदन को निहरने लगता विशेषकर उसकी शानदार उभरों वाली रसीली छातीयों को । ऎसा नहीं है कि उसे ये सब पता नहीं था उसे अब मुझ पर कुछ कुछ शंका होने लगी थी, और मैं चाहता भी यही था कि तुझे कुछ समझ तो आए मेंरी जान । मै अकेले में जब भी उससे बात करता तो मेंरा ध्यान पूरी तरह से उसकी अनछुई कड़्क जवानी के रस से भरपूर छातीयों पर ही रहता । झिनी साड़ी के भीतर से दिखने वाले उसकी छाती के क्लिवेज का तो मैं दिवाना बन गया था। और मैं भी उसे बुरी तरह से घूर कर उसे पूरी तरह से समझा देता था कि मैं तेरे कौन से अंग को निहार रहा हूं। वो बुरी तरह से झेंप जाती थी,लेकिन हाय रे उसकी शरम वो चाह कर भी मेंरे सामने अपना पल्लु ठीक नहीं कर पाती थी, और मैं उसके शर्म का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए उसके जिस्म को घूरने का पूरा मजा लेने लगा।और इसी शर्म का लाभ उठाते हुए मैं उसकी जवान बुर का रस भी पीना चाह्ता था।

इसी तरह से कुछ दिन बीत गये और मेंरे मन का ये ड़र निकल गया कि कहीं ये मेंरी हरकतों को घर में मेरी मां या बहन को न बता दे। इस बीच दो-तीन बार भाई का फ़ॊन आया लेकिन उसकी बातों से कहीं नही लगा कि मेंरी गदराई स्वप्न सुंदरी ने उसे इस बारे में कुछ भी बताया हो ।

उसने एक बार मुझ से फ़ॊन पर कहा कि अपनी भाभी से खाली काम ही करवाता है कि उसे घूमाने भी ले जाता है, देख वो बहुत चुप रहने वाली लड़्की है उसे कोई तकलीफ़ भी होगी तो वो अपने मुंह से नही बोलेगी शरम और झिझक तो जैसे वो दहेज में लाई है। मां को तो अपने पूजा पाठ और किटी पार्टी से ही फ़ुर्सत नहीं मिलती होगी, और दिया (मेंरी छोटी बहन) को अपने कालेज,ट्यूशन,पढाई और दोस्तों से। तू अक्सर घर के काम से बाहर बजार वगैरे जाता है तो कभी ले जाय कर उसे साथ में , इसी बहाने उसे शहर के बारे में कुछ तो जानकारी होगी और उसका भी मन लगा रहेगा। मैं तो मन ही मन बड़ा खुश हो गया, उसने तो जैसे मेंरे मुह की बात छीन ली मुझ से। मैने भी फ़ौरन हां कर दी और भाभी के
सामने ही झूठ बोल दिया कि भैया मैं तो कहता हूं लेकिन वो ही नहीं चलती तो मैं क्या करुं, आप ही बोल दो भाभी को ऎसा कह कर मैंने भी को फ़ोन पकड़ा दिया। लेकिन वाह री भाभी उसने एक बार भी भाई से ये नहीं कहा कि मैंने तो ऎसा कभी बोला ही नहीं। वो तो बस जी, हां, अच्छा ऎसे ही बोलती
रही। फ़िर उसने फ़ोन मां को दिया, भाई ने मां को भी वही बात बोली जो उसने मुझ से कही थी, मां ने हंसते हुए कहा तुझे वहां बैठ कर भी चैन नहीं है क्या ? सारा दिन क्या रश्मी (मेंरी भाभी) के बारे में ही सोचता है, काम में मन लगता है कि नहीं ? तू चिंता न कर बेटा मैं तुषार से कह दूंगी वो कभी घर के काम से बाहर जायगा तो कभी रश्मी को ले जाया करेगा। मां ने भाभी की तरफ़ देख कर व्यंग से कहा मुझे तो शक है कि इसके मुंह मे जुबान भी है या नहीं। खैर तू छोड़ बेटा इन सब बातों को हम सब सम्भाल लेंगे मैने तेरे लिये मिर्ची का अचार बना कर रखा है, अगली बार जब तू आयेगा तो ले जाना अपने साथ। खाने का ध्यान रखता है कि नहीं ? जवाब मे उसने कहा तू चिंता न कर मां लेकिन इस बार चेवड़ा और लड्डू ज्यादा देना मेरे कमीने दोस्तों को ये कुछ ज्यादा पसंद है और ये समय से पहले ही खतम हो जाते हैं। मां ने खिलखिलाते हुए कहा ठीक है बेटा इस बार मैं ज्यादा बना दुंगी।
और सुन इस बार तुझे इन चीजों में नया स्वाद मिलेगा क्योंकि इस बार ये सब तेरी गूंगी गुड़ीया से बनवाउंगी। इसी तरह मां बेटे में घरेलु बातें होती रही।

मां जब फ़ोन पर बात कर रही थी तो उसकी पीठ हमारी तरफ़ थी। इसलिये मैं बेखौफ़ भाभी से लगभग सट कर खड़ा था और मेंरा हाथ भाभी के पंजो से टकरा रहे थे। और वो किंकर्तव्यमूढ़ अपना सर जमीन की तरफ़ कर के खड़ी थी। उसके इस निर्विरोध रवैये से मेंरा हौसला बढा और मैने और थोड़ा जोर से उसके हाथों अपना हाथ टकराने लगा। अब मैं पूरी तरह से भाभी से सट कर खड़ा हो गया और मेंरा पूरा हाथ भाभी से चिपक गया । उसके नाजुक बदन की गर्मी से मेंरा लण्ड़ खड़ा हो गया। अब मैने अपना हाथ भाभी की जांघो से धीरे धीरे टकराना शुरु कर दिया। वो पूर्ववत खड़ी रही। अब मैने थोड़ी और हिम्मत करते हुए हाथ हल्का सा पिछे करते हुए उसकी गांड़ पर अपना हाथ मारने लगा। कुछ सेकण्ड़ तक उसकी गांड़ में हाथ टकराने के बाद मैंने अपना हाथ उसकी गांड़ पर ही रख दिया और धीरे से अपना हाथ घूमाते हुए अपना पंजा उसकी गांड़ पर रख दिया। पंजा उसकी गांड़ पर रख्ते ही वो थोड़ी चिंहुकी और हौले से मेंरी तरफ़ देखा। लेकिन मैं पूरी तरह अन्जान बन कर खड़ा रहा और मां बेटे के फ़ोन पर बात को सुनने का और जबरन मुस्कुराने का नाटक करता रहा। मेंरे लिये ये लिका छिपी अब बर्दाश्त के बाहर होते जा रही थी मैं जल्द ही नतीजा हासिल करना चाह्ता था लेकिन अपने जोश पर होश का कंट्रोल जरुरी था। खैर मैने थोड़ा और प्रयास करते हुए उसकी दांई गांड़ से अपना हाथ घुमाते
हुए उसकी बाई गांड़ पर घुमाते हुए उसके कमर और पीठ पर घुमाते हुए उसके कंधो पर रख दिया जैसे दोस्तों के कंधो पर रख्ते है।
(Continue......)

sexspl1965
14-06-2009, 11:17 AM
मेंरे हाथ उसके कंधो पर ठीक उसकी ब्रा की पट्टी पर थे,अब मैंने अपनी ऊंगलियों को ढीला छोड़ दिया और अब वो ठीक उस जगह के उपर थी जहां से उसके स्तन काउभार शुरु हो रहा था। बेचारी, अब समझ कर भी अनजान बनने की उसकी बारी थी। घर में मेंरे रुतबे और मान को देखते हुए और अपने घर की हालत तथा एक शादी लायक बहन सहित तीन बहनॊं के घर में बैठे रहने की परिस्थिती तथा पति के लगातार घर से दूर रहने के हालात और अपनी स्वयं की शारीरिक जरुरत इन तमाम बातों ने उसके सामने ऎसे हालत पैदा कर दिये थे कि शायद अभी चुप्पी साधे रखने में ही उसकी भलाई थी। उसकी बेबसी का अब मैं भरपूर मजा ले रहा था, मुझे इस बात का पूरा यकीन हो गया था कि अकेले में शायद भले ही वो मुझे कुछ कहने का साह्स करे लेकिन सब के सामने मुझे कहने या मेंरे बारे में कुछ भी बुरा बोलने का साहस उसमें नही था।

इन बातों का अहसास होते ही और तमाम परिस्थिती अपने पक्ष में होते देख मैंने अपने मन में अपार शांति का अनुभव किया।

मैने एक बार अपनी मां की तरफ़ देखा वो अभी भी पूरी तल्लीनता से भाई से बात कर रही थी, उसकी तरफ़ से आश्*वस्त हो कर मैंने अब पूरी निर्भिकता से अपनी भाभी की तरफ़ देखा उसकी नजरें पूरी तरह से जमीन पर गड़ी हुई थी, अब मैने उसके स्तनों पर नजर ड़ाली, किसी अनहोनी की आशंका में उसकी सांसे कुछ तेज हो गई थी और वो जरा जोर से गहरी सांस ले रही थी। गहरी सांसे लेने के कारण उसके स्तन उपर नीचे हो रहे थे, जब उसके दोनों स्तन उपर की तरफ़ उठते तो मेंरी उंगलियां उसके स्तनों के उभार शुरु होने वाले स्थान से काफ़ी नीचे तक अपने आप चली जाती और उसके स्तन का काफ़ी हिस्सा उससे छुआ जाता।मैं अपनी भाभी के शरीर से उसी तरह चिपका हुआ था जैसे लोहा चुंबक से। लेकिन इस तरह स्तन के छुआने से मेंरे लिये खुद पर कबू रखना मुश्किल हो रहा था। कहीं मां के सामने कुछ गड़्बड़ न हो जाय इसलिये मैंने अपना हाथ वहां से हटा लिया और फ़िर से उसे रश्मी भाभी की बड़ी बड़ी नरम गांड़ के पास स्थापित कर दिया, चार पांच बार हल्के से अपने हाथ को उसकी गांड़ से टकराने के बाद मैंने अपना हाथ हिलाना बंद कर दिया और मेंरा हाथ अब उसकी गांड़ से चिपक गया।
३०-४० सेकण्ड़ तक उसी तरह से अपना हाथ का उपरी भाग उसकी गांड़ पर रखने के बाद मैंने फ़िर से अपने हाथ को घुमा लिया और अपनी हथेली को उसकी गांड़ से लगा दिया, अब उसकी गांड़ मेंरी हथेली में थी। अब तक उसे पूरी तरह से यकीन हो चुका था कि मैं उसके शरीर से खेल रहा हूं। और यही मैं चाहता भी था।

इस बीच मेंरी मां और भाई के बीच फ़ोन पर संवाद जारी था

मां - बेटा राज क्या तुम इस बार छुट्टी में थोड़े ज्यादा समय के लिये घर आ सकते हो?
राज - क्यों मां ?
मां - दरअसल मैं तुम से तुषार के विवाह के बारे में बात करना चाहती हूं?
राज - लेकिन मां अभी तो वो पढ़ रहा है न?
मां - हां, लेकिन समय जाते कहां पता चलता है? और फ़िर ये उसका अखीरी साल ही तो है न कालेज का? और फ़िर तुम्हारे पापा ने कह दिया है कि कालेज खत्म करने के बाद तुषार
उनका बीमा का काम ही संभालेगा सो नौकरी की चिंता जैसी कोई बात उसके साथ नहीं है।
राज - तो तुमने कोई लड़की देखी है उसके लिये?
मां - हां और मुझे तो बेहद पसंद भी है और तुषार को भी।
राज - अच्छा!! कौन है मां वो खुशनसीब लड़की?
मां - सुधा। अगर तुन्हें कोई आपत्ति न हो तो।
राज ने लग्भग चिखते हुए कहा - क्या!!!!! सुधा!!!!! , भला ममममुझे क्या आपत्ति हो सकती है। रश्मी से पूछो।
मां - अरे हमारी तरफ़ से बात तो बही चलाएगी न। लेकिन तू साफ़ साफ़ बता कि तुझे अपनी साली सुधा से तुषार की शादी में कोई ऎतराज तो नहीं है न?
राज - क्या मां , भला मुझे क्या आपत्ति हो सकती है, बल्कि ये तो रश्मी के लिये भी बहुत अच्छा होगा उसे यहां अपनी बहन की कंपनी मिल जायेगी। और वो काफ़ी भले लोग है, और मैं सुधा को अच्छी तरह से जानता हूं काफ़ी सरल और शांत लड़की है वो। मां मुझे कोई आपत्ति नहीं है।

इधर मां के मुंह से अपनी बहन और मेंरी शादी की बात सुन कर मेंरी गुलबदन रश्मी जान बुरी तरह चौंक गई और आश्*चर्य से कभी मां की तरफ़ तो कभी कभी मेंरी तरफ़ देख रही थी। और मैंने भी मौके का भरपूर फ़ायदा उठाते हुए अपनी हसीना की गांड़ को जरा जोर से दबा दिया। और उसकी गांड़ में हल्के से हाथ घुमाते हुए उसकी अंडरवियर को तलाशते हुए अपना हाथ उसकी अंडरवियर के उभार पर रख दिया। अब वो अपने प्रति मेंरी हवस को समझ चुकी थी लेकिन अब तो वो चाह कर भी न तो मेंरे घर में और ना ही अपने घर में कुछ बता सकती थी। मेंरे एक ही दांव ने उसको चारों खाने चित्*त कर दिया था और वो लाजवाब हो गई थी।
Continue....

sexspl1965
14-06-2009, 11:18 AM
अचानक उसने मां से कहा कि उसे भाई से कुछ बात करनी है, मां ने भी तत्काल अपनी बात खतम करते हुए फ़ोन उसे दे दिया जैसे ही फ़ोन उसने लिया मेरा दिल धड़कनेलगा और मेंरी गांड़ फ़टने लगी कि ये क्या बोलेगी। उसने फ़ोन हाथ में लेकर भाई से कहा-

रश्मी भाभी- आप कब आ रहे हैं यहां?
राज - अभी तो नहीं, और इस बार आने में थोडा़ देर हो सकती है क्योंकि यहां काम कुछ ज्यादा है। इस बार केवल एक दिन के लिये ही आ पाउंगा क्योंकि उसके तुरंत बाद मुझे छ: महिने की ट्रेनिंग के लिये बंगलौर जाना है और उस दौरान हम अपना परिवार साथ नही रख सकते। ट्रेनिंग के खतम होने के बाद मुझे २ वर्ष के लिये किसी भी शहर मे काम करना होगा। वहां तुम साथ रह सकती हो लेकिन तुम तो देखती हो न कि मै कैसे महीने भर तक घर बाहर ही रहता हूं। सो, पराए शहर में मैं तुम्हें कई दिनों तक अकेले रखना ठीक नहीं समझता कम से कम अपने परिवार में तुम सुरक्षित तो हो। रश्मी मेंरे नौकरी में अच्छी जगह बनाने के लिये तुम्हें इतना सहयोग तो देना पडे़गा।
रश्मी भाभी - ठीक है जैसा उचित समझें किजीये। आने के पहले फ़ोन करना मत भूलना, अच्छा रखती हूं। ऎसा कह कर उसने फ़ोन रख दिया।

उसके फ़ोन रखते ही मेंरी जान में जान आई, उसके फ़ोन लेते समय मुझे ये भय सता रहा था कि कहीं वो रिश्ते के लिये मना न कर दे और मेंरे बारे में भाई को न बता दे। अब उसकी तरफ़ से मेंरा मन सदा के लिये निर्भय हो चुका था।

मां तो भाभी को फ़ोन देते ही यह कह कर चली गई कि उसे बहुत नींद आ रही है। इधर भाभी ने फ़ोन रखते ही मेंरी तरफ़ मुस्कुरा कर देखा और कहा सुधा इनती पसंद थी तो मुझे क्यों नहीं बताया, मैने मन में सोचा अगर तुझे बताता तो शायद बात बिगड़ भी सकती थी। लेकिन मैं मुस्कुराते रहा और कहा वो मेंरी मां है और मेंरे बात कतने से ही मेंरे इशारों को समझ गई आप शायद नहीं समझ पाती, उसने कहा कर के तो देखते एक बार। मैंने तपाक से जवाब दिया आप कहां समझती है मेंरे इशारे। वो बुरी तरह से झेंप गई और अपना सर निचे कर दिया और कहा ऎसा नहीं है इतनी मूर्ख और नादान भी नहीं हूं मैं समझने वाले सारे ईशारे समझ ही समझ जाती हूं, अब जिन्हें समझना ही नहीं है ऎसे ईशारों को समझने से क्या मतलब। मैने भी तत्काल कहा मुझे क्या पता आप कौन से इशारे समझती हैं? और कौन से नहीं इसीलिये मैने मां से कहा । उसने जवाब में कुछ नहीं कहा केवल एक व्यंग भरी नजर से मुझे देखा और हौले से मुस्कुरा दिया। फ़िर उसने धीरे से कहा चलिये अब आपके साथ ड़बल रिश्ता होने जा रहा है बहुत बधाई आपको। मैने मन में कहा ड़बल नहीं मेंरी जान ट्रिपल रिश्ता कायम होने जा रहा है। लेकिन प्रत्यक्षत: केवल थैंक्स भाभी कहा। उसने कहा मुझे बहुत नींद आ रही है मैं सोने जा रही हूं गुड़ नाईट, और ऎसा कह कर वो धीरे धीरे सीढीयों की तरफ़ बढने लगी, चलते वक्*त उसकी बड़ी बड़ी गांड़ हौले हौले हील रही थी और उसकी टाइट साड़ी से उसकी अंड़रवियर का उभार साफ़ दिख रहा था जिसे देख कर मेंरा लण्ड़ बुरी तरह से खड़ा हो गया। मेंरी किस्मत में अभी कुछ दिन और तड़फ़ना लिखा था, उसने उपर जाते हुए एक तिरछी नजर मुझ पर ड़ाली और हमारी नजर मिलते ही अपनी नजर निचे कर दिया लेकिन वो अपनी हल्की मुस्कान को मुझ से नहीं छिपा सकी और वो तेजी से सीढीयां चढते हुए अपने कमरे की तरफ़ जाने लगी।

Continue....

sexspl1965
14-06-2009, 11:26 AM
Thank Dear all readers your support and comments encourage me to post more for you. I only want to know from all of this story reader that " do yo feel excitment/fun" when you read this story. If possible please take your time to reply me to understand your mood so i will be able to post story according to your desires..................

spicysk83
14-06-2009, 03:53 PM
post the full story here its not a tv channel yar ke roj 1 serial dikhao

hard
14-06-2009, 05:38 PM
Post full story fucker

sexspl1965
14-06-2009, 08:01 PM
post the full story here its not a tv channel yar ke roj 1 serial dikhao


Thanks dear "spicysk83" for suggestion and reply.

sexspl1965
14-06-2009, 08:03 PM
Post full story fucker


Vrey.very Thanks dear hard for suggestion and reply

sexspl1965
14-06-2009, 09:03 PM
मैं भाभी को अपने कमरे में घुसते तक देखता रहा जैसे ही वो कमरे में गई मेंरे दिमाग में तुरंत ये विचार आया कि अब ये नंगी हो कर अपने कपड़े बदलेगी। ये विचार आते ही मैं तत्काल हरकत में आया और दौड़ते हुए उपर की तरफ़ भागा। कमरे के हाल की सीढीयां तीसरी मंजिल मे मेरे कमरे के पास जा कर खतम होती थी, सीढीयों के खतम होते ही सीधे हाथ की तरफ़ मुड़ने पर २-३ कदमों के बाद मेंरे कमरे का दरवाजा था, और उसके बाद थोड़ा आगे जा कर फ़िर सीधे मुड़ने पर ४-५ कदमों के फ़ासले से मेंरी गुलबदन हसीना रश्मी जान के कमरे का दरवाजा, और उसके २-३ कदमों के बाद एक छोटी सी २ टप्पे वाली सीढी थी जिसे लांघ कर छत पर जाया जा सकता था। उसी छत पर भाभी के कमरे की एक मध्यम आकार की खिड़की थी जिस पर गर्मी से बचाव के लिये कूलर लगा कर रखा था।

चूंकि अभी गर्मी के दिन नहीं थे इसलिये कूलर का उपयोग नहीं होता था और बंद ही रहता था। मैने अपने खाली समय में छत में जा कर उस कूलर के पिछले हिस्से से उसमें लगी खस को काफ़ी कुछ निकाल दिया था और एक जगह से छेद जैसा बना दिया था, कूलर के उसी छेद से मैं भाभी के कमरे की हर चीज को असानी से देख सकता था। मैं दौड़ते हुए अपने कमरे की तरफ़ गया और फ़िर वहां से तेज चाल चलते हुए रश्मी के कमरे दरवाजे के पास जा कर खड़ा हुआ और दरवाजे पर कान लगा कर सुनने की कोशीश करने लगा कि अंदर मेंरी जानेमन क्या कर रही है? मुझे अंदर उसके चहल कदमी की अवाज आई और फ़िर कुछ ही क्षणों में मुझे उसके कपड़ों की अलमारी के खुलने की अवाज आई। मैं तत्काल वहां से हट कर छत में चला गया। वहां घुप्प अंधकार छाया हुआ था बादलों की वजह अकाश में तारे भी नहीं दिख रहे थे।
मैं सीधे कूलर के पास गया और उसके खस को हटा कर बनाए हुए छेद में आंख गड़ाकर देखने लगा। मुझे अंदर का दृष्य उसके कमरे की ट्यूब लाईट की रोशनी के कारण साफ़ दिखई दे रहा था, उसने अलमारी से अपना नाइट गाउन बाहर निकाल कर आल्मारी को बंद किया और वो पलंग की तरफ़ गई वहां उसने अपना गाउन रखा और और उसने अपने पल्लु को हटा कर नीचे गिरा दिया अब उसका ब्लाउस साफ़ दिखाइ दे रहा था अब उसने अपने लहंगे में फ़ंसी साड़ी को भी निकाल कर अलग कर दिया । वो अब केवल लहंगे और ब्लाउस में खड़ी थी । तभी अचानक वो चलते हुए कूलर की तरफ़ बढी मैने देखा चलते वक्त उसके वक्ष बेहतरीन अंदाज में हिल रहे थे। कूलर के ठीक नीचे टी.वी. था वो उसके पास आइ और टी.वी. चालू कर दिया। अब वो t.v. देखते हुए ही अपना हाथ अपने ब्लाउस की तरफ़ ले गई और उसने उसका पहला बटन खोल दिया

अगर छत में कूलर न होता तो मेंरे और उसके बीच केवल एक हाथ का ही अंतर था। इतने पास से उसका बदन देखने से मेंरा मुंह सूखने लगा और लंड़ ने अंदर बगावत कर दी अब मुझे उसको संभालना मुश्किल हो रहा था। जैसे ही उसने अपने ब्लाउस का पहला बटन खोला मुझे उसकी क्लीवेज साफ़ दिखाई देने लगी अब लंड़ बुरी तरह से कड़क हो गया था और उसे संभालने में मुझे दिक्कत होने लगी मैने उसे सीधा करने के लिये जैसे ही खड़ा होने की कोशीश की उत्तेजना के कारण मै हल्का सा कूलर से टकरा गया और थोड़ी सी टकराने की अवाज हुइ मैं घबड़ा गया और कूलर के पास से हट गया और अपने लंड़ को सीधा किया। मुझे ऎसा लगा कि मैं वहां से भाग जाऊं लेकिन रश्मी का गदराया बदन देखने की चाहत में फ़िर जोखिम उठाते हुए कूलर में आंख गड़ाकर अंदर देखने लगा। t.v. चलने की वजह से उसने उस अवाज को नहीं सुना था , मैने देखा वो उसी जगह खडी थी टी.वी. देखते हुए अब तक उसने अपने ब्लाउस के सभी बटन खोल लिये थे और उसकी ब्लाउस के अंदर से मुझे उसकी गुलाबी ब्रा साफ़ दिखाई दे रही थी। उसकी छातीयां पूरी गोलाईयां लिये थी और वो पूरी तरह से कड़क थी लग्भग ३८ की साईज और पूरी तरह से कड़क स्तन मेंरा लंड़ अपने आप हरकत करने लगा और झटके देने लगा।

अब उसने अपना ब्लाउस भी नीचे गीरा दिया और वो केवल लहंगे और ब्रा में मेरे ठीक सामने खड़ी थी। मेंरा ऎसा मन हुआ की अभी उसके कमरे में जा कर उसको चोद डालूं। ब्लाउस नीचे गीरा देने के बाद उसने t.v. देखते हुए अपना
हाथ अपने लहंगे के नाडे पर रखा और धीरे से नाड़ा खोल कर उसे छोड़ दिया उसका लहंगा अपने आप नीचे गीर गया । अब एक अनिद्द सुंदरी मेरे सामने केवल पेन्टी और ब्रा में खड़ी थी और मैं उसे देखने के अलावा कुछ भी कर
पाने की स्थीति में नही था। मैंने अपने लंड़ को जोर से दबा लिया । केले के पत्तों की तरह चिकनी जांघ और कमर में फ़ंसी गुलाबी पेन्टी उसकी खुबसूरती को और बढा रहे थे।चूंकी वो खिड़की के काफ़ी करीब खड़ी इसलिये मुझे सब साफ़ साफ़ दिखई दे रहा था। उसकी गुलाबी पेन्टी से उसकी चूत का उभार साफ़ साफ़ दिखई दे रहा था। अब क्लाईमेक्स शुरु होने वाला था, उसने अपने हाथों से अपनी ब्रा की पट्टी को कंधो से नीचे गीरा दिया और इधर मेंरे दिल की धड़्कन तेज होने लगी। अब उसने अपनी ब्रा को हाथों से घुमाते हुए उसके पिछले हिस्से आगे कर लिया याने ब्रा के हुक सामने आ गये इस्के कारण अब वो लगभग नंगी हो चुकी थी उसके विशाल तने हुए स्तन मेंरी नजरों के सामने झूल रहे थे और मेंरी जवानी को ललकार रहे थे। अब उसने अपने ब्रा के हुक को खोला और अपनी छातीयों ब्रा के बंधन से अजाद कर दिया। अब वो मेंरे सामने जवानी के रस से भरपूर अपनी गदराइ हुई छातीयों को खोले हुए नंगी खड़ी थी।
contd............

sexspl1965
14-06-2009, 09:05 PM
मैं बदहवास हो अपनी इस नग्न सुंदरी को देख रहा था, अब मैं खुद को रोक पाने में असमर्थ था,
मेंरे लण्ड़ के लिये अब पेन्ट के अन्दर रहना अस्मर्थ हो गया था वो अपने संपूर्ण रुप में आ चुका था और उसे पेन्ट के अन्दर संभाल पाना मेरे लिये सम्भव नहीं था। मैं थोड़ा पिछे हटा और अपने पेन्ट को खोल कर निकाल फ़ेंका अब मेरा लण्ड़ काफ़ी आजाद मह्सूस कर रहा था,मैने देखा वो अपने आप झटके मार रहा था और कामवासना की अधीकता के कारण मेंरा पूरा शरीर गरम हो चुका था और मेंरे पैर थरथरा रहे थे। छत पर किसी के आने का कोई खतरा नही था इसलिये मै पूरी तरह से नंगा हो गया, अब मैंने अपना लंड़ अपने हाथो मे जोर से पकड़ लिया और मै फ़िर से रश्मी के नंगे जिस्म को देखने के लिये कूलर के छेद में आंख गड़ाकर बैठ़ गया।

कमरे के अंदर का दृष्य अब और भी उत्तेजक हो चुका था,मैने देखा कि रश्मी अब वापस पलंग की तरफ़ जा रही है अपने नाईट गाउन को पहनने के लिये और वो पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,इतनी देर में उसने अपनी पेन्टी भी उतार फ़ेंकी थी। उसकी पूरी तरह से अनावृत निर्वस्त्र बड़ी बड़ी भरपूर गोलाईयों वाली मांसल गांड़ चलते समय बड़े मोहक अंदाज मे हील रही थी। मै कुछ क्षण के लिये उसकी उत्तेजक गांड़ की अंतहीन दरार में खो गया।अब मेंरा हाथ धीरे धीरे अपने लंड़ पर आगे पीछे सरकने लगा और मैं रश्मी के नंगे जिस्म को देखते हुए मुठ्ठ मारने लगा। तभी अचानक उसके कमरे में फ़ोन बज उठा, फ़ोन की घंटी सुन कर उसके बढते कदम रुक गए और वो वहीं ठिठक कर खड़ी हो गई। शायद वो ये अंदाज लगाने की कोशीश कर रही थी इस वक्त किस्का फ़ोन हो सकता है। कहीं गाउन पहनने के चक्कर में फ़ोन बंद न हो जाय ये सोच कर तुरंत पलटी और उसके पलटते ही मेरे पूरे शरीर में हजारों वाट का करंट दौड़ गया, कितनी खूबसूरत नंगी थी मेंरी रश्मी भाभी। वो उसी तरह नंगी ही दौड़ते हुए t.v. की तरफ़ दौड़ी,फ़ोन वहीं रखा था उसके उपर। भाभी जब नंगी दौड़ कर फ़ोन की तरफ़ आ रही थी तो उसके दोनो वक्ष बुरी तरह से उछल रहे थे और एक दूसरे से टकरा रहे थे,ऎसा दृष्य को देख कर मेंरे मन में हाहाकार मच गया और मैं उत्तेजना के अत्यधिक आवेश में कूलर को ही अपने आगोश में लेकर उसे चुमने लगा।अंदर नंगी भाभी और बाहर उसका नंगा देवर दिवाना। दोनों ही अपने अपने कारणॊ से अधूरे और प्यासे थे। देवर तो पहले से ही पागल हो चुका था और रश्मी की बुर चोदने के लिये तड़फ़ रहा था, और रश्मी उसे अभी और थोड़ी चिंगारी और वज्रपात की जरुरत थी अपने ही देवर के साथ अवैध
संबंध बनाने के लिये।

औरत दो ही कारणों से अपनी लक्षमण रेखा को लांघती है पहला यदी पति इस लायक है तो वो उसे बचाने के लिये अपने घर की दहलीज लांघ कर यम के दरबार से भी अपने पति के प्राण वापस ले आती है और दूसरा यदि वो नालायक है और उसके मनोभावों को नहीं समझता तब वो इस दिवार को लांघ कर लाती है अपना यार और फ़िर शुरु होता है पति-पत्नी और "वो" का अंतहीन सिलसिला । रश्मी के लिये राज अभी तक दूसरे दर्जे वाला ही पति ही साबित हुआ था । उसकी शादी जरुर हुई थी और उसे एक बड़े घर की बहू होने का पूरा सम्मान भी मिला था अपने ससुराल से और समाज से लेकिन पति के जिस प्यार के लिये स्त्री यम से भी लड़ने का साहस जुटा लेती है उसका एक अंश भी राज उसे नहीं दे पाया था और न ही उसके पास इसके लिये समय था और न उसकी इतनी समझ थी। पति की इस बेरुखी से उपजे खालीपन ने रश्मी को शर्मिली से गूंगी भी बना दिया था। तुषार ने रश्मी के इस खालीपन को पकड़ लिया था और इसीलिये इस गदराइ हसीना की बुर चोदने के लिये पागल था।
contd............

sexspl1965
14-06-2009, 09:06 PM
रश्मी नंगी फ़ोन के पास आ कर खड़ी हो गई, मेंरी नजर उसकी चूत पर गई, आहहहह क्या रसीली चूत पाई थी मेंरी जान ने । पूरे जतन से रखती थी वो उसे, पूरी तरह से क्लीन शेव चूत थी उसकी । मुझे उसकी खुबसूरत चूत की दरार साफ़ दिखाई दे रही थी। उसकी चूत की दोनों फ़ांके उभार लिये हुए थी और उसके उपर का हिस्सा भी अपने उभार के के कारण दूर से ही साफ़ दिखई दे रहा था, उसे देखकर मैं अपने होठों पर जीभ घुमाने लगा और उसकी मादक चूत का स्वाद महसूस करने का प्रयास करने लगा। मेंरा बदन तो अब भट्टी की तरह तप चुका था, काम के आवेश में मैं अब तेजी से अपने लण्ड़ को हिलाने लगा। मेंरे अपने घर में ही मेंरे लण्ड़ के लिये इतना सुंदर खिलौना मौजूद था और फ़िर भी मै उससे खेल नहीं पा रहा था, मुझे अपने दुर्भाग्य पर बड़ा ही क्रोध आ रहा था।

उसने फ़ोन उठाया और बोला हेल्लो
सामने राज था

राज- हेल्लो, रश्मी मैने फ़ोन तुम्हें ये बताने के लिये किया था कि मै रविवार को घर आऊंगा और फ़िर सोमवार को शाम को वापस चला जाऊंगा ट्रेनिंग के लिये। मैने तुम्हें परेशान तो नहीं किया न, तुम सो तो नही गई थी रश्मी?

रश्मी- नही, बस सोने ही वाली थी। चेंज कर रही थी ।

राज - अच्छा अच्छा, सारी तुम्हें डिस्टर्ब किया। बाय, लेकिन कल मां को जरूर बता देना। रखता हूं गुड़ नाईट।

और फ़िर उसने बिना रश्मी की बात सुने ही फ़ोन रख दिया। वो कुछ क्षण फ़ोन को घूरते रही फ़िर उसने उसे जोर से पटक दिया और वापस पलंग की तरफ़ जाने लगी। उसकी गांड़ फ़िर से उछलने लगी अब मै भी अपने क्लाईमेक्स में पहुंच चुका था, उसने अपना गाऊन उठा लिया और पहनने लगी, मेंरा दिल किया कि मैं यही से चिल्ला कर कह दूं, जाने मन कपड़े मत पहनों तुम नंगी बहुत अच्छी लगती हो, मै तुझे सदा नंगी ही देखना चाहता हूं। लेकिन उसने अपना गाऊन पहन लिया। अब मेंरा मूड़ खराब हो गया। अगर मुझे कोई रश्मी को आशिर्वाद देने को कहता तो मै उसे एक ही आशिर्वाद देता "सदा नंगी रहो"।

गाऊन पहनने के बाद वो पलंग पर लेट गई और कोई किताब पढ़ने लगी पढ़ते समय वो अपने पैर इधर उध्रर हिला रही थी जिसके कारण उसका गाऊन घूटनॊं तक उपर उठ़ गया। उसकी चिकनी टांगो पर नजर गड़ाए मै मुठ्ठ मारने लगा और थोड़ी ही देर में मेंरे लण्ड़ ने उल्टी कर दी और पोकने लगा। मैने बड़ी राहत महसूस की। मैने अपना पेन्ट पहना और छत की सीढ़ीयों से सावधानी से निचे उतरा क्योंकि उसके मात्र दो कदमों की दूरी पर रश्मी के कमरे का दरवाजा था।

मैने देखा उसके कमरे के दरवाजे से प्रकाश की एक पतली रेखा बाहर आ रही थी। याने वो अंदर से बंद नही था। मै आहिस्ता आहिस्ता चलते हुए उसके दरवाजे के पास पहुंचा और उसके दरवाजे की दरार से अन्दर झांकने की कोशीश करने लगा। दरार से उसका पलंग दिखाई दे रहा था,चूकि दरवाजा हल्का सा खुला था इसलिये मुझे उसकी कमर तक का हिस्सा ही दिख रहा था। मैने देखा उसने अपनी दाहिना पांव सीधा रखा है और बांया मोड़ कर रखा है जिसके कारण उसका गाऊन उसकी जांघ तक चढ़ गया था और मुझे उसकी दाहिनी जांघ अंदर तक साफ़ दिखाई दे रही थी। कुछ क्षण उसे देखने के बाद मै तेजी से उसके दरवाजे से हटा और मुस्कुराते हुए अपने कमरे में चला गया।

कमरे में जाने के बाद मैने भी अपना ड्रेस बदला और लुंगी पहन ली तथा उपर केवल बनियान ही पहने रहा। भाभी के नंगे जिस्म की खुमारी अभी भी मेंरे दिमाग में थी। हांलाकि मैं झड़ चुका था लेकिन फ़िर भी काफ़ी देर तक रश्मी भाभी के नंगे जिस्म को देखने के कारण मेंरे शरीर में पैदा गर्मी ने मुझे काफ़ी शीथिल बना दिया था, और मै काफ़ी थका मह्सूस कर रहा था, इसलिये मैं बाथ्ररुम गया और अच्छी तरह से अपने हाथ-पैर और चेहरा पानी से साफ़ किया और सर को थोड़ा पानी मारा, अब मै काफ़ी ताजगी मह्सूस कर रहा था, बाहर आ कर अपना बदन पोंछते हुए मै फ़िर रश्मी के गदाराए नंगे बदन के बारे में सोचने लगा। पूरी तरह से फ़्रेश होने के बाद मै अपने पलंग मे जा कर सो गया और सोने का प्रयास करने लगा, नींद मेंरी आंखो से ओझल हो चुकी थी । बार बार भाभी का नंगा जिस्म मुझे नींद से दूर ले आता, मैने बेचैनी में अपना पहलू बदलते हुए एक मेग्जिन उठा कर पढ़्ने का प्रयास करने लगा। लेकिन मैं उसकी एक लाईन पढ़ पाने में असमर्थ था, भाभी के नंगे बदन ने मेंरे दिमाग को कुंद बना कर रख दिया था।

contd...................

sexspl1965
14-06-2009, 09:07 PM
मैं बेचैनी में कुछ पहलु बदलने के बाद पलंग से उठ खड़ा हुआ, अपने शर्ट के पास गया और उसकी जेब से सिगरेट निकाल कर और उसे सुलगा ली, अब मै कमरे मेंचहक कदमी करते हुए सिगरेट पीने लगा और भाभी के बारे में सोचने लगा। छत से अपने कमरे में आए मुझे अब दो घंटे से भी ज्यादा बीत चुके थे।

मेंरे कमरे में सिगरेट का धुंआ भरने से मुझे कमरे में घुटन होने लगी तो मैने कमरे का दरवाजा खोल दिया और अपने रुम से बाहर आ कर गैलेरी में चल कदमी करने लगा। तभी मेंरी नजर भाभी के कमरे की तरफ़ गई उसके कमरे से अभी तक लाईट बाहर आ रही थी। याने वो अभी तक खुला हुआ था। मैं सोचने लगा क्या वो अभी तक किताब पढ़ रही है? मेंरी सिगरेट भी खतम हो चुकी थी सो मैंने उसे बुझाया और उसे फ़ेंकने के लिये छत की तरफ़ ही चला गया।

भाभी के दरवाजे के पास से मैंने अपनी सिगरेट छत पर फ़ेंक दी और दरवाजे की दरार से अंदर झांककर देखा। अन्दर का नजारा काफ़ी रोमांचित करने वाला था। भाभी गहरी नींद में सोई हुई थी और किताब आधी उसके सीने पर और आधी उसके चेहरे पर पड़ी थी।उसका चेहरा दाए तरफ़ मुड़ा हुआ था, और उसका बांया हाथ पलंग के बाहर लटक रहा था और उसका बांया पांव भी लटक कर जमीन पर पड़ा था, उसका गाऊन जांघ से भी थोड़ा उपर उठ़ गया था।

मेंरा लंड़ फ़िर से खड़ा होने लगा। मैने दरवाजे को थोड़ा धक्का दिया वो चररररर की अवाज के साथ थोड़ा खुल गया,दरवाजे में अवाज होने के कारण मैं थोड़ा घबरा गया और झट से वहां हट गया। कुछ देर तक मैं वैसे ही दिवार से चिपक कर खड़ा रहा लेकिन मैने देखा दरवाजा उसी तरह से खुला पड़ा है। यानी भाभी उसी तरह से सोई पड़ी है गहरी नींद में।

अब मै फ़िर दरवाजे के सामने खड़ा हो गया और इस बार कुछ हिम्मत के साथ मै दरवाजे को धक्का मार कर पूरा खोल दिया और वहीं खड़ा रहा। भाभी उसी तरह से पड़ी रही उस पर कोई असर नही हुआ लेकिन फ़िर भी मैं निश्चिंत हो जाना चाहता था इसलिये मैने फ़िर से दरवाजे को बंद किया वो फ़िर से अवाज करते हुए बंद हो गया। लेकिन वो सोई पडी रही । ऎसा मैने चार पांच बार किया लेकिन वो तनिक भी नहीं हीली। अब मुझे यकीन हो गया की वो गहरी नीद में है।

मैं उसके कमरे के अंदर गया और धीरे से बोला भाभी , लेकिन वो उसी तरह से पड़ी रही,ऎसा मैने दो तीन बार किया लेकिन वो पूर्ववत सोई रही। अब मैने उसके लाईट और पंखे को भी तीन चार बार बंद चालू करके देखलीया लेकिन उसकी नींद मे कोई खलल नहीं हुआ और बेसुध हो कर सोती रही।

अपनी स्वप्न सुंदरी को अपने सामने इस प्रकार अर्धनग्न अवस्था में बेसुध हो कर सोते देख मैं फ़िर से कामवासना के दलदल में ड़ूब गया। मेंरा लण्ड़ बुरी तरह से खड़ा हो गया था। मैं उसे छूने के लिये बेचैन हो गया। मैंने अपने कदम पलंग की तरफ़ बढ़ाये। अब मैं उसके एकदम करीब आ कर खड़ा हो गया। अब मैने अपना मुंह निचेझुकाते हुए उसके मुंह के एक्दम करीब ले गया और धीरे से बोला भाभीऽऽऽऽऽ उठो , लेकिन वो सोई पड़ी रही।

contd.................

sexspl1965
14-06-2009, 09:09 PM
मेंरी रश्मी मेंरे एक्दम सामने पड़ी थी उसे देखकर मुझे अपने अंदर एक लावा बहता हुआ मह्सूस हुआ। मेंरी नजर उसकी छातीयों पर पड़ी उसने ब्रा नहीं पहना था लेकिन फ़िर भी उसके कसाव में कोई कमी नही आई थी,वो लटके हुए नहीं थे पूरी तरह से तने हुए थे और उसकी सांसो के साथ पूरी तरह से ताल मिलाते हुए बड़े आकर्षक अंदाज में हील रहे थे।मेंरा मन किया कि उसे मसल ड़ालूं और उसका रस चूसने लग जाऊं।लेकिन मैंने सब्र से काम लेना ठीक समझा। अब मैंने उसके लटके हुए हाथ की
कलाईयों को हौले से अपनी उंगलियों की गिरफ़्त में लिया और उसको आहिस्ता से उपर की तरफ़ उठाया। थोड़ा सा उपर उठाने के बाद उसके चेहरे की तरफ़ देखा वो उसी तरह से सोई रही। अब मैने उसके हाथ को छोड़ दिया अब वो झटके से नीचे आ गिरे, ऎसा २-३ बार करने के बाद भी जब वो नहीं हिली तो मैं समझ गया कि वो मुर्दों से शर्त लगा कर सोई है।अब मैं काफ़ी बेखौफ़ हो गया और मैंने भाभी के पंजो को धीरे से अपने हाथों पकड़ लिया और धीरे धीरे प्यार से उसको सहलाने लगा। कुछ देर तक इसी तरह करने के बाद मैने रश्मी को सहलाने का दायरा बढ़ा लिया और अब मैं धीरे धीरे उसके बांए हाथ को कंधे तक सहलाने लगा।

इस तरह उन्मुक्त और बेसुध सोती हुई रश्मी बेहद मादक लग रही थी, उसका अर्धनग्न जवान शरीर किसी भी मर्द को पागल करने के लिये काफ़ी था। अपने सामने उसे पा कर पिछले आठ माह की मेंरी दमित कामवासना जागृत होने लगी थी, मैं अत्यन्त कामुक नजरों से उसके बदन को घूर रहा था और उसके शरीर के स्पर्श का आनंद ले रहा था। इस स्त्री को इस तरह अपने सामने बेसुध पड़ा पाकर मैं तमाम रिश्तों को भूल गया और उस जवान कली के हुस्न को अपने हाथों से मसलने के लिये मैं बेचैन होने लगा।

मैने अपना हाथ अब उसके कंधे पर ही रख दिया और उसे हल्के हल्के मसलने लगा और फ़िर धीरे से मैने अपने हाथॊं की उंगलियां उसके स्तन का उभार जहां से शुरु हो रहा था वहां रख दी। आहहह कितना नर्म था उसका स्तन। अब मैं बेचैन होने लगा और धीरे धीरे मेंरा पूरा पंजा उसके बांए स्तन के उपर रख दिया।पूरा स्तन मेंरे हाथ में आते ही मेंरा लण्ड़ अपने काबू के बाहर हो गया अब वो अंदर मे बुरी तरह से झटके मारने लगा।अब मैं खिसक कर उसके पलंग से एकदम चिपक गया और उसका बांया हाथ अपने घुटनों पर रख लिया, मेंरा एक हाथ उसके बांये स्तन को धीरे धीरे मसल रहा था और अब मैंने अपने दूसरे हाथ से उसके बांए हाथ के पंजो को पकड़ लिया और उसको चूमने लगा। २-३ मीनट तक ऎसे ही मैं उसके स्तन को हौले हौले मसलते रहा और उसके हाथों को चूमते रहा फ़िर मैंने अपने दांये हाथ से उसके स्तन को मसलना छोड़ कर उसको धीरे से उसके गाऊन के बटन के उपर रखा और अपने हाथों की ऊंगलियों से ही एक छोटे से प्रयास से उसका पहला बटन खोल दिया।

पहला बटन खुलते ही मुझे उसका क्लीवेज साफ़ दिखाई देने लगा , कामवासना के अतिरेक के कारण मेंरी आंख लाल सुर्ख हो गई थी और मैं अत्यंत कामुक नजरों से उसके बदन को घूर रहा था और स्पर्श कर रहा था। मैंने अपना हाथ उसके क्लीवेज पर घुमाते हुए धीरे से अपना हाथ उसके गाऊन के अंदर ड़ाल दिया और अब मैं उसके दांए स्तन को मसलने लगा।

इंसान को जितना मिलता है उसकी भूख और बढ़ती जाती है,कभी मैं रश्मी के शरीर के स्पर्श मात्र से अभीभूत हो जाता था लेकिन आज उसके दोनों स्तनों पर हाथ फ़ेरने के बाद भी मेंरी अधीरता बढ़ती जा रही थी। मैं हौले हौले उसके दोनों स्तनों को बारी बारी मसलते रहा, अब मैंने अपना हाथ उसके गाऊन से बाहर निकाला और धीरे धीरे उसके गाऊन के बाकी बचे तीनों बटन भी खोल दिये।गाऊन के चारों बटन खोल्ने के बाद मुझे उसकी नाभी तक का शरीर साफ़ दिखने लगा। बटन खोल देने के बाद मैने उसके दोनों स्तनों के उपर से गाऊन को धीरे से हटा दिया,उसके दोनों स्तन मेंरे सामने अपने पूर्ण उभारों के साथ मेंरे सामने नग्न पडे़ थे, और मैं पूरी तरह से स्वतन्त्र था उनके साथ खेलने के लिये। अब मैंने उसके दोनों स्तनों को अपने दोनों हाथों से पकड़ लिया और हौले हौले उन्हें मसलने लगा। तभी अचानक उसके नाक से हल्की हल्की अवाज आने लगी याने वो और गहरी नींद मे चली गई।धीरे धीरे उसके नाक की अवाज बढ़ती गई और अब वो खर्राटे लेने लगी।

contd............................

rajmalhotra212
15-06-2009, 03:12 AM
chutiye..........khatam kar

sexspl1965
15-06-2009, 11:14 AM
chutiye..........khatam kar


Very<Very Thanks "rajmalhotra21 dear
for ths lovely comments chutiye

sexspl1965
15-06-2009, 01:52 PM
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UL: 791.27 mb DL: 937.71 mb Ratio: 0.84

उसके नाक से निकलने वाली खर्राटों की अवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया अब मैं तनिक और दबाव के साथ उसके स्तनों को दबाने लगा।उसके खर्रटों की ध्वनी और तेज होने लगी। उसकी इस कदर गहरी नींद ने मुझे पूर्णतया बेखौफ़ कर दिया और अब मै उसके स्तनों से खिलवाड़ करने लगा। मैनें उसके स्तनों में हल्की हल्की थपकियां मारी तो वो बड़े ही मादक तरीके से उपर नीचे होने लगे।उसके स्तन क्या थे वो तो पूरे पहाड़ की पूरी तरह से भरपूर गोलाईयां लिये और उचाई लिये उसकी पूरी छाती में फ़ैले हुए थे। उसके स्तनों को देख कर ऎसा लगता था मानों उसकी छातीयों में दो विशाल गुंबद रख दिये हो। अब मैं उसे चूमने के लिये बेताब होने लगा, मेंरी अधीरता बढ़ती जा रही थी। मैंने अपना मुंह धीरे से उसके स्तनों के करीब ले गया और अपनी नाक उस पर रगड़ने लगा , आहहहह क्या मादक
खुशबु थी उसके बदन की, रश्मी के तने हुए विशाल स्तनों की मादक खुशबू से मैं मदहोश होने लगा और मेंरी लालसा बढ़ती जा रही थी,अब मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे उसके स्तनों पर फ़िराने लगा और उसे जीभ से ही धक्के लगाने लगा। जीभ क धक्का लगते ही वो थोड़ा दब जाते और पीछे हो जाते और जैसे ही मैं अपनी जीभ अंदर करता वो पुनः तन जाते और मेंरी नाक से टकराने लगते और अपनी मादक खुशबू से मुझे मदहोश करने लगते।

कुछ देर तक इसी तरह से करने के बाद मैंने अपनी जीभ पूरी तरह बाहर निकाल ली और उसे उसके पूरे स्तन पर घुमाते हुए उसे चाटने लगा, मेंरी गदराई भाभी के उन्नत जवान स्तन के मीठे मीठे स्वाद ने मेंरे उन्माद को और भी बढ़ा दिया , इस तमाम उन्माद के दौरान भी मैं पूरी तरह से सतर्क था और अपना ध्यान भाभी के खर्राटों पर लगा कर रखा था, जब तक उसकी नाक बजेगी तब तक मेंरे हाथ उसके जिस्म से खेलते रहेंगे। बहरहाल, उसके स्तनों को चाटने के कारण उसका बांया स्तन पूरी तरह से मेंरे मुंह की लार से गीला हो चुका था और इस दौरान मैंने उसके दाए स्तन को अपने बांए हाथ पकड़ रखा था और उसे मसल रहा था।

उसकी नींद और भी गहरी होते जा रही थी और अब उसके खर्रटों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और सांस मुंह से छोड़ने के कारण उसके ऒठ भी फ़ड़क रहे थे। अब मैने उसके दूध के निप्पल को अपने मुंह मे ले लिया और उसे हौले हौले से चूसने लगा और उसके दोनों स्तनों को भी मसने लगा । लगभग पन्द्रह से बीस मीनट तक इसी तरह से उसके स्तनों से उसकी जवानी का रस चूसने के बाद मैंने उसका निप्पल छोड़ा और दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़े हुए मैंने उन दोनों स्तनों को कई बार चूमा।

अब अपना मुंह उसके चेहरे के पास ले गया और उसके बांए गाल को चूमने लगा। कुछेक "किस" उसके गालों पर देने के बाद मैने उसे चूमना छोड़ दिया और फ़िर से उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और एक भरपूर कामुक दृष्टी उसके अर्धनग्न जवान शरीर पर डाली।

रश्मी की जिन उन्नत विशाल छातियों को पिछले आठ माह से देख कर मैं उसमें भरे यौवन के रस को पीने के लिये मचल रहा था और मुठ्ठ मार रहा था उसे छुने और मसलने का कोई क्षण मैं व्यर्थ नहीं करना चाहता था। आज की ये रात मेंरे जीवन में कितनी अनमोल थी इसका बयान करने के लिये मेंरे पास शब्द नही है। रश्मी के जवान नंगे बदन को देखना और फ़िर उसे भोगना ये एक ऎसा सुख था मेंरे लिये जिसे मैं शब्दों के जाल में नहीं बांध सकता था, ये तो गूंगे का गुड़ था जिसे वो खा तो सकता था लेकिन उसका स्वाद नहीं बता सकता था।

खर्राटों की तरफ़ ध्यान रखते हुए अब मैने उसकी चूत की तरफ़ देखा, उसका गाउन मैने पेट के उपर तक उठा दिया था और अब वो लग्भग नंगी ही कही जा सकती थी। मैं अपना मुंह उसकी चूत के पास ले कर गया और अपनी नाक उसकी चूत पर रख दी और उसकी जवान चूत की मदहोश करने वाली खुशबू को सूंघने लगा। उसकी चूत की खुशबू ने मुझे लग्भग पागल बना दिया और अब मै उसकी चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा। नरम नरम क्लीनशेव जवान चूत पर मेंरा हाथ असानी से फ़िर रहा था, कुछ देर तक इसी तरह से उसकी चूत पर हाथ फ़ेरने के बाद मैंने अपनी पूरी हथेली उसकी चूत पर रख दी और अब उसकी पूरी चूत मेंरी हथेली में समा गई। और अब मैंने अपनी पहली उंगली उसकी चूत की दरार में हौले से घुसा दी और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा।थोडी देर तक इसी तरह से उसकी चूत को सहलाने के बाद मैंने अपने बांए हाथ के अंगूठे और उंगली से उसकी चूत की दोनों फ़ांको को फ़ैलाया, अब मुझे उसकी चूत का गुलाबीपन साफ़ दिखाई देने लगा। अब मैं उसकी जवान बुर का रस पीने के लिये बेचैन होने लगा और मैंने धीरे से अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया और उसकी चूत से जवानी का रस चूसने लगा।
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उसके नाक से निकलने वाली खर्राटों की अवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया अब मैं तनिक और दबाव के साथ उसके स्तनों को दबाने लगा।उसके खर्रटों की ध्वनी और तेज होने लगी। उसकी इस कदर गहरी नींद ने मुझे पूर्णतया बेखौफ़ कर दिया और अब मै उसके स्तनों से खिलवाड़ करने लगा। मैनें उसके स्तनों में हल्की हल्की थपकियां मारी तो वो बड़े ही मादक तरीके से उपर नीचे होने लगे।उसके स्तन क्या थे वो तो पूरे पहाड़ की पूरी तरह से भरपूर गोलाईयां लिये और उचाई लिये उसकी पूरी छाती में फ़ैले हुए थे। उसके स्तनों को देख कर ऎसा लगता था मानों उसकी छातीयों में दो विशाल गुंबद रख दिये हो। अब मैं उसे चूमने के लिये बेताब होने लगा, मेंरी अधीरता बढ़ती जा रही थी। मैंने अपना मुंह धीरे से उसके स्तनों के करीब ले गया और अपनी नाक उस पर रगड़ने लगा , आहहहह क्या मादक
खुशबु थी उसके बदन की, रश्मी के तने हुए विशाल स्तनों की मादक खुशबू से मैं मदहोश होने लगा और मेंरी लालसा बढ़ती जा रही थी,अब मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे उसके स्तनों पर फ़िराने लगा और उसे जीभ से ही धक्के लगाने लगा। जीभ क धक्का लगते ही वो थोड़ा दब जाते और पीछे हो जाते और जैसे ही मैं अपनी जीभ अंदर करता वो पुनः तन जाते और मेंरी नाक से टकराने लगते और अपनी मादक खुशबू से मुझे मदहोश करने लगते।

कुछ देर तक इसी तरह से करने के बाद मैंने अपनी जीभ पूरी तरह बाहर निकाल ली और उसे उसके पूरे स्तन पर घुमाते हुए उसे चाटने लगा, मेंरी गदराई भाभी के उन्नत जवान स्तन के मीठे मीठे स्वाद ने मेंरे उन्माद को और भी बढ़ा दिया , इस तमाम उन्माद के दौरान भी मैं पूरी तरह से सतर्क था और अपना ध्यान भाभी के खर्राटों पर लगा कर रखा था, जब तक उसकी नाक बजेगी तब तक मेंरे हाथ उसके जिस्म से खेलते रहेंगे। बहरहाल, उसके स्तनों को चाटने के कारण उसका बांया स्तन पूरी तरह से मेंरे मुंह की लार से गीला हो चुका था और इस दौरान मैंने उसके दाए स्तन को अपने बांए हाथ पकड़ रखा था और उसे मसल रहा था।

उसकी नींद और भी गहरी होते जा रही थी और अब उसके खर्रटों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और सांस मुंह से छोड़ने के कारण उसके ऒठ भी फ़ड़क रहे थे। अब मैने उसके दूध के निप्पल को अपने मुंह मे ले लिया और उसे हौले हौले से चूसने लगा और उसके दोनों स्तनों को भी मसने लगा । लगभग पन्द्रह से बीस मीनट तक इसी तरह से उसके स्तनों से उसकी जवानी का रस चूसने के बाद मैंने उसका निप्पल छोड़ा और दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़े हुए मैंने उन दोनों स्तनों को कई बार चूमा।

अब अपना मुंह उसके चेहरे के पास ले गया और उसके बांए गाल को चूमने लगा। कुछेक "किस" उसके गालों पर देने के बाद मैने उसे चूमना छोड़ दिया और फ़िर से उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और एक भरपूर कामुक दृष्टी उसके अर्धनग्न जवान शरीर पर डाली।

रश्मी की जिन उन्नत विशाल छातियों को पिछले आठ माह से देख कर मैं उसमें भरे यौवन के रस को पीने के लिये मचल रहा था और मुठ्ठ मार रहा था उसे छुने और मसलने का कोई क्षण मैं व्यर्थ नहीं करना चाहता था। आज की ये रात मेंरे जीवन में कितनी अनमोल थी इसका बयान करने के लिये मेंरे पास शब्द नही है। रश्मी के जवान नंगे बदन को देखना और फ़िर उसे भोगना ये एक ऎसा सुख था मेंरे लिये जिसे मैं शब्दों के जाल में नहीं बांध सकता था, ये तो गूंगे का गुड़ था जिसे वो खा तो सकता था लेकिन उसका स्वाद नहीं बता सकता था।

खर्राटों की तरफ़ ध्यान रखते हुए अब मैने उसकी चूत की तरफ़ देखा, उसका गाउन मैने पेट के उपर तक उठा दिया था और अब वो लग्भग नंगी ही कही जा सकती थी। मैं अपना मुंह उसकी चूत के पास ले कर गया और अपनी नाक उसकी चूत पर रख दी और उसकी जवान चूत की मदहोश करने वाली खुशबू को सूंघने लगा। उसकी चूत की खुशबू ने मुझे लग्भग पागल बना दिया और अब मै उसकी चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा। नरम नरम क्लीनशेव जवान चूत पर मेंरा हाथ असानी से फ़िर रहा था, कुछ देर तक इसी तरह से उसकी चूत पर हाथ फ़ेरने के बाद मैंने अपनी पूरी हथेली उसकी चूत पर रख दी और अब उसकी पूरी चूत मेंरी हथेली में समा गई। और अब मैंने अपनी पहली उंगली उसकी चूत की दरार में हौले से घुसा दी और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा।थोडी देर तक इसी तरह से उसकी चूत को सहलाने के बाद मैंने अपने बांए हाथ के अंगूठे और उंगली से उसकी चूत की दोनों फ़ांको को फ़ैलाया, अब मुझे उसकी चूत का गुलाबीपन साफ़ दिखाई देने लगा। अब मैं उसकी जवान बुर का रस पीने के लिये बेचैन होने लगा और मैंने धीरे से अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया और उसकी चूत से जवानी का रस चूसने लगा।
उसके नाक से निकलने वाली खर्राटों की अवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया अब मैं तनिक और दबाव के साथ उसके स्तनों को दबाने लगा।उसके खर्रटों की ध्वनी और तेज होने लगी। उसकी इस कदर गहरी नींद ने मुझे पूर्णतया बेखौफ़ कर दिया और अब मै उसके स्तनों से खिलवाड़ करने लगा। मैनें उसके स्तनों में हल्की हल्की थपकियां मारी तो वो बड़े ही मादक तरीके से उपर नीचे होने लगे।उसके स्तन क्या थे वो तो पूरे पहाड़ की पूरी तरह से भरपूर गोलाईयां लिये और उचाई लिये उसकी पूरी छाती में फ़ैले हुए थे। उसके स्तनों को देख कर ऎसा लगता था मानों उसकी छातीयों में दो विशाल गुंबद रख दिये हो। अब मैं उसे चूमने के लिये बेताब होने लगा, मेंरी अधीरता बढ़ती जा रही थी। मैंने अपना मुंह धीरे से उसके स्तनों के करीब ले गया और अपनी नाक उस पर रगड़ने लगा , आहहहह क्या मादक
खुशबु थी उसके बदन की, रश्मी के तने हुए विशाल स्तनों की मादक खुशबू से मैं मदहोश होने लगा और मेंरी लालसा बढ़ती जा रही थी,अब मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे उसके स्तनों पर फ़िराने लगा और उसे जीभ से ही धक्के लगाने लगा। जीभ क धक्का लगते ही वो थोड़ा दब जाते और पीछे हो जाते और जैसे ही मैं अपनी जीभ अंदर करता वो पुनः तन जाते और मेंरी नाक से टकराने लगते और अपनी मादक खुशबू से मुझे मदहोश करने लगते।

कुछ देर तक इसी तरह से करने के बाद मैंने अपनी जीभ पूरी तरह बाहर निकाल ली और उसे उसके पूरे स्तन पर घुमाते हुए उसे चाटने लगा, मेंरी गदराई भाभी के उन्नत जवान स्तन के मीठे मीठे स्वाद ने मेंरे उन्माद को और भी बढ़ा दिया , इस तमाम उन्माद के दौरान भी मैं पूरी तरह से सतर्क था और अपना ध्यान भाभी के खर्राटों पर लगा कर रखा था, जब तक उसकी नाक बजेगी तब तक मेंरे हाथ उसके जिस्म से खेलते रहेंगे। बहरहाल, उसके स्तनों को चाटने के कारण उसका बांया स्तन पूरी तरह से मेंरे मुंह की लार से गीला हो चुका था और इस दौरान मैंने उसके दाए स्तन को अपने बांए हाथ पकड़ रखा था और उसे मसल रहा था।

उसकी नींद और भी गहरी होते जा रही थी और अब उसके खर्रटों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और सांस मुंह से छोड़ने के कारण उसके ऒठ भी फ़ड़क रहे थे। अब मैने उसके दूध के निप्पल को अपने मुंह मे ले लिया और उसे हौले हौले से चूसने लगा और उसके दोनों स्तनों को भी मसने लगा । लगभग पन्द्रह से बीस मीनट तक इसी तरह से उसके स्तनों से उसकी जवानी का रस चूसने के बाद मैंने उसका निप्पल छोड़ा और दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़े हुए मैंने उन दोनों स्तनों को कई बार चूमा।

अब अपना मुंह उसके चेहरे के पास ले गया और उसके बांए गाल को चूमने लगा। कुछेक "किस" उसके गालों पर देने के बाद मैने उसे चूमना छोड़ दिया और फ़िर से उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और एक भरपूर कामुक दृष्टी उसके अर्धनग्न जवान शरीर पर डाली।

रश्मी की जिन उन्नत विशाल छातियों को पिछले आठ माह से देख कर मैं उसमें भरे यौवन के रस को पीने के लिये मचल रहा था और मुठ्ठ मार रहा था उसे छुने और मसलने का कोई क्षण मैं व्यर्थ नहीं करना चाहता था। आज की ये रात मेंरे जीवन में कितनी अनमोल थी इसका बयान करने के लिये मेंरे पास शब्द नही है। रश्मी के जवान नंगे बदन को देखना और फ़िर उसे भोगना ये एक ऎसा सुख था मेंरे लिये जिसे मैं शब्दों के जाल में नहीं बांध सकता था, ये तो गूंगे का गुड़ था जिसे वो खा तो सकता था लेकिन उसका स्वाद नहीं बता सकता था।

खर्राटों की तरफ़ ध्यान रखते हुए अब मैने उसकी चूत की तरफ़ देखा, उसका गाउन मैने पेट के उपर तक उठा दिया था और अब वो लग्भग नंगी ही कही जा सकती थी। मैं अपना मुंह उसकी चूत के पास ले कर गया और अपनी नाक उसकी चूत पर रख दी और उसकी जवान चूत की मदहोश करने वाली खुशबू को सूंघने लगा। उसकी चूत की खुशबू ने मुझे लग्भग पागल बना दिया और अब मै उसकी चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा। नरम नरम क्लीनशेव जवान चूत पर मेंरा हाथ असानी से फ़िर रहा था, कुछ देर तक इसी तरह से उसकी चूत पर हाथ फ़ेरने के बाद मैंने अपनी पूरी हथेली उसकी चूत पर रख दी और अब उसकी पूरी चूत मेंरी हथेली में समा गई। और अब मैंने अपनी पहली उंगली उसकी चूत की दरार में हौले से घुसा दी और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा।थोडी देर तक इसी तरह से उसकी चूत को सहलाने के बाद मैंने अपने बांए हाथ के अंगूठे और उंगली से उसकी चूत की दोनों फ़ांको को फ़ैलाया, अब मुझे उसकी चूत का गुलाबीपन साफ़ दिखाई देने लगा। अब मैं उसकी जवान बुर का रस पीने के लिये बेचैन होने लगा और मैंने धीरे से अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया और उसकी चूत से जवानी का रस चूसने लगा।

contd..............

sexspl1965
15-06-2009, 01:53 PM
उसके नाक से निकलने वाली खर्राटों की अवाज ने मुझे और भी उत्तेजित कर दिया अब मैं तनिक और दबाव के साथ उसके स्तनों को दबाने लगा।उसके खर्रटों की ध्वनी और तेज होने लगी। उसकी इस कदर गहरी नींद ने मुझे पूर्णतया बेखौफ़ कर दिया और अब मै उसके स्तनों से खिलवाड़ करने लगा। मैनें उसके स्तनों में हल्की हल्की थपकियां मारी तो वो बड़े ही मादक तरीके से उपर नीचे होने लगे।उसके स्तन क्या थे वो तो पूरे पहाड़ की पूरी तरह से भरपूर गोलाईयां लिये और उचाई लिये उसकी पूरी छाती में फ़ैले हुए थे। उसके स्तनों को देख कर ऎसा लगता था मानों उसकी छातीयों में दो विशाल गुंबद रख दिये हो। अब मैं उसे चूमने के लिये बेताब होने लगा, मेंरी अधीरता बढ़ती जा रही थी। मैंने अपना मुंह धीरे से उसके स्तनों के करीब ले गया और अपनी नाक उस पर रगड़ने लगा , आहहहह क्या मादक
खुशबु थी उसके बदन की, रश्मी के तने हुए विशाल स्तनों की मादक खुशबू से मैं मदहोश होने लगा और मेंरी लालसा बढ़ती जा रही थी,अब मैने अपनी जीभ बाहर निकाली और धीरे धीरे उसके स्तनों पर फ़िराने लगा और उसे जीभ से ही धक्के लगाने लगा। जीभ क धक्का लगते ही वो थोड़ा दब जाते और पीछे हो जाते और जैसे ही मैं अपनी जीभ अंदर करता वो पुनः तन जाते और मेंरी नाक से टकराने लगते और अपनी मादक खुशबू से मुझे मदहोश करने लगते।

कुछ देर तक इसी तरह से करने के बाद मैंने अपनी जीभ पूरी तरह बाहर निकाल ली और उसे उसके पूरे स्तन पर घुमाते हुए उसे चाटने लगा, मेंरी गदराई भाभी के उन्नत जवान स्तन के मीठे मीठे स्वाद ने मेंरे उन्माद को और भी बढ़ा दिया , इस तमाम उन्माद के दौरान भी मैं पूरी तरह से सतर्क था और अपना ध्यान भाभी के खर्राटों पर लगा कर रखा था, जब तक उसकी नाक बजेगी तब तक मेंरे हाथ उसके जिस्म से खेलते रहेंगे। बहरहाल, उसके स्तनों को चाटने के कारण उसका बांया स्तन पूरी तरह से मेंरे मुंह की लार से गीला हो चुका था और इस दौरान मैंने उसके दाए स्तन को अपने बांए हाथ पकड़ रखा था और उसे मसल रहा था।

उसकी नींद और भी गहरी होते जा रही थी और अब उसके खर्रटों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी और सांस मुंह से छोड़ने के कारण उसके ऒठ भी फ़ड़क रहे थे। अब मैने उसके दूध के निप्पल को अपने मुंह मे ले लिया और उसे हौले हौले से चूसने लगा और उसके दोनों स्तनों को भी मसने लगा । लगभग पन्द्रह से बीस मीनट तक इसी तरह से उसके स्तनों से उसकी जवानी का रस चूसने के बाद मैंने उसका निप्पल छोड़ा और दोनों हाथों से उसके स्तनों को पकड़े हुए मैंने उन दोनों स्तनों को कई बार चूमा।

अब अपना मुंह उसके चेहरे के पास ले गया और उसके बांए गाल को चूमने लगा। कुछेक "किस" उसके गालों पर देने के बाद मैने उसे चूमना छोड़ दिया और फ़िर से उसके दोनों स्तनों को पकड़ लिया और एक भरपूर कामुक दृष्टी उसके अर्धनग्न जवान शरीर पर डाली।

रश्मी की जिन उन्नत विशाल छातियों को पिछले आठ माह से देख कर मैं उसमें भरे यौवन के रस को पीने के लिये मचल रहा था और मुठ्ठ मार रहा था उसे छुने और मसलने का कोई क्षण मैं व्यर्थ नहीं करना चाहता था। आज की ये रात मेंरे जीवन में कितनी अनमोल थी इसका बयान करने के लिये मेंरे पास शब्द नही है। रश्मी के जवान नंगे बदन को देखना और फ़िर उसे भोगना ये एक ऎसा सुख था मेंरे लिये जिसे मैं शब्दों के जाल में नहीं बांध सकता था, ये तो गूंगे का गुड़ था जिसे वो खा तो सकता था लेकिन उसका स्वाद नहीं बता सकता था।

खर्राटों की तरफ़ ध्यान रखते हुए अब मैने उसकी चूत की तरफ़ देखा, उसका गाउन मैने पेट के उपर तक उठा दिया था और अब वो लग्भग नंगी ही कही जा सकती थी। मैं अपना मुंह उसकी चूत के पास ले कर गया और अपनी नाक उसकी चूत पर रख दी और उसकी जवान चूत की मदहोश करने वाली खुशबू को सूंघने लगा। उसकी चूत की खुशबू ने मुझे लग्भग पागल बना दिया और अब मै उसकी चूत पर अपना हाथ घुमाने लगा। नरम नरम क्लीनशेव जवान चूत पर मेंरा हाथ असानी से फ़िर रहा था, कुछ देर तक इसी तरह से उसकी चूत पर हाथ फ़ेरने के बाद मैंने अपनी पूरी हथेली उसकी चूत पर रख दी और अब उसकी पूरी चूत मेंरी हथेली में समा गई। और अब मैंने अपनी पहली उंगली उसकी चूत की दरार में हौले से घुसा दी और धीरे धीरे उसे सहलाने लगा।थोडी देर तक इसी तरह से उसकी चूत को सहलाने के बाद मैंने अपने बांए हाथ के अंगूठे और उंगली से उसकी चूत की दोनों फ़ांको को फ़ैलाया, अब मुझे उसकी चूत का गुलाबीपन साफ़ दिखाई देने लगा। अब मैं उसकी जवान बुर का रस पीने के लिये बेचैन होने लगा और मैंने धीरे से अपना मुंह उसकी चूत में लगा दिया और उसकी चूत से जवानी का रस चूसने लगा।

contd............

sexspl1965
15-06-2009, 01:55 PM
मैं लगभग १० मीनट तक इसी प्रकार से उसकी चूत से खेलता रहा, इस दौरान मैं रश्मी की चूत में इतना तल्लीन रहा की मैं अपनी सुध बुध भी भूल गया और मुझे इतना भी याद नहीं रहा कि मैं अपनी ही सोई हुई भाभी के जिस्म से खेल रहा हूं और उसके खर्राटों पर से भी मेंरा ध्यान हट गया था, अचानक इसका खयाल आते ही मैं चौंका और उसके खर्राटों पर ध्यान दिया, कमरे में गूंजने वाले उसके खर्राटों की अवाज बंद हो चुकी थी और कमरे में सन्नाटा छाया हुआ था, अब मैं बुरी तरह से हड़्बड़ा कर वहां से उठा और भाभी के चेहरे की तरफ़ देखा वो उसी तरह से सोई पड़ी थी, मैं हिम्मत करके उसके चेहरे के पास अपना मुंह ले जा कर देखा मुझे वो पूर्व की तरह ही गहन नींद में लगी और मुझे उसके नाक से सांसो की सीऽऽऽऽऽसीऽऽऽऽऽ आवाज सुनाई देने लगी।

अब मैंने पुनः राहत की सांस ली और धीरे अपना हाथ उसके उसके बांए स्तन पर रख दिया वो प्रतिक्रिया विहीन निष्चेट पड़ी रही। अब मैंने पुनः उसके स्तनों को धीरे धीरे मसलना चालू कए दिया,रश्मी के बदन की मादक खुशबू को सूंधने और उसके स्तनों और चूत का स्वाद चख लेने के बाद मेंरे लिये खुद पर नियंत्रण काफ़ी कठिन हो गया था। भाभी का गदराया मदमस्त नग्न शरीर मेंरे सामने पड़ा था और मैं उसे देख कर आहें भर रहा था। मुझे ऎसा लग रहा था कि अब मैं इस नग्न सोई हुई इस सुंदरी के शरीर से लिपट जाऊं और अपनी बलिष्ठ भुजाओं मे उसे कैद कर उसे अपनी बाहों मे भर लूं और अपना लंड़ उसकी चूत में ड़ाल दूं , लेकिन ऎसा करने की अभी मुझमें हिम्मत नहीं थी और मेंरा इरादा भी नहीं था।

अपनी बाएं हाथ से उसके स्तनों को बारी बारी से मसलते हुए मैने अब उसके पलंग से बाहर लटके हुए बांए हाथ को अपने हाथ में लिया और उसके मुठ्ठी को धीरे खोला और अपने फ़ौलाद की तरह कड़क हो चुके धधकते हुए लंड़ को उसके हाथों मे पकड़ा दिया और फ़िर से उसकी मुठ्ठी को बंद कर दिया। अब मेंरा लंड़ उसके बांए हाथ में था, आहहहह रोमांच का चरम क्षण था वो मेंरे लिये और अब मेंरा लंड़ अपने आप ही झटके मारने लगा था।

अब मैने अपने हाथों में उसका बांया पंजा पकड़ लिया जिसमें मेंरा लंड़ था और अब मैंने अपनी मुठ्ठी जोर से बंद कर दी इस तरह अब मेंरा लंड़ उसके नरम हाथॊं मे समा गया। उसके हाथों में मेंरा लंड़ समाते ही मैं बेकाबू हो गया और उसके स्तनों को और भी जरा जोरों से मसलने लगा और अपने दांए हाथ से उसके मेंरे लंड़ पकड़े हाथ को हिलाने लगा, इस तरह मेंरी हसीन भाभी नींद में ही मेंरा मुठ्ठ मारने लगी।

अब उसके स्तनों को मैंने उत्तेजना में बुरी तरह से पकड़ लिया और इधर अपने एक हाथ से उसके अपने लंड़ पकड़े हाथ को जोर जोर से हिलाने लगा, इस तरह करने से उसका शरीर पलंग पर उसी तरह से हिलने लगा जैसे ट्रेन में सोए इंसान का शरीर हिलता है। उसके शरीर के इस प्रकार धीरे धीरे हिलने से उसके उन्नत स्तन भी हौले हौले हिल रहे थे जिसके कारण वातावरण और भी कामुक हो रहा था।

अब उत्तेजना के वशीभूत मैं अपने दांए हाथ को उसके पूरे शरीर पर फ़ेरने लगा तथा और भी तेजी से उसके हाथों को पकड़े हुए मुठ्ठ मारने लगा।

मेंरी उत्तेजना और वासना के अंत का अब समय आ चुका था और मुझे ऎसा लगने लगा कि कीसी भी समय मैं झड़ सकता हूं , अब मैं और तेजी से उसके हाथों को हिलाने लगा और अब मेंरे लंड़ की नसे फ़ड़कने लगी और मेंरी कमर भी हीलने लगी मुझे ऎसा लगा कि मेंरा वीर्य अब लंड़ में पहुंच चुका है तो मैंने तुरंत नींद मे बेखबर रश्मी के हाथ से अपना लंड़ बाहर निकाल लिया और अपना बांया पैर पलंग पर रखा और दांया पांव निचे ही रहने दिया। इस तरह अब मैं सोई हुई रश्मी के नंगे बदन के उपर था और मैंने उसी मुद्रा में खड़े खड़े ही उसके नंगे बदन को घूरते हुए और एक हाथ से उसके स्तनों को पकड़े हुए तेजी से अपना लंड़ हिलाने लगा। मै अपना पूरा वीर्य भाभी के नंगे जिस्म पर उंड़ेलना चाहता था।

कुछ क्षणों तक इसी तरह से करने के बाद अचानक मेंरे लंड़ ने वीर्य की एक गरम पिचकारी छोड़ी जो सीधे ही नंगी रश्मी भाभी के पेट और स्तन पर गिरी और फ़िर इसी तरह मेंरे लंड़ ने एक के बाद एक पांच बार वीर्य की पिचकारी छोड़ी और वो पूरा का पूरा वीर्य मैने अपनी गदराई मदमस्त हसीना के नंगे शरीर पर उड़ेल दिया और उसका पूरा शरीर वीर्य से भर दिया। उसकी छाती पर पड़े हुए वीर्य की बूंदो को मैंने उसके पूरे स्तनों पर लगाया और कपड़ो पर पड़े हुए वीर्य को हाथ में ले कर उसके चेहरे पर धीरे से मल दिया और हाथों के बचे हुए वीर्य को उसकी चूत पर लगा दिया।

अब अपने लंड़ को दो तीन बार मैंने झटका तो उसमें बची हुई कुछेक बुंदे बाहर आ गई उसे मैंने अपने लंड़ को दबाते हुए झटका और उसकी नंगी चूत पर टपका दिया।

इस प्रकार उसके शरीर को अपने वीर्य से नहलाने के बाद मैने अपना पैर पलंग से निचे रखा और वही निचे बैठ गया और उसकी चूत पर एक "किस" किया फ़िर उसके दोनों स्तनों और चेहरे को प्यार से चूमा और उसकी निचे लटकी टांग को हौले उठाकर पलंग पर रखा और उसके हाथ को भी उसी तरह उठाकर पलंग पर रखा और उसको हौले से दांई करवट सुलाया और एक नजर उसके नंगे बदन पर ड़ालने के बाद मै दरवाजे की तरफ़ बढ़ा वहां से उसे देखा तो वो उसी तरह से सोई पड़ी है और गाउन के कमर के भी उपर होने के कारण उसकी दोनों बड़ी बड़ी गांड़ दिखाई दे रही थी।

उसे देख मैं पुनः उसके पास गया और उसकी दोनों गांड़ो को कई बार चूमा और उठकर उसके कमरे से तेजी से बाहर निकल गया।

contd.............

Hotest
15-06-2009, 07:39 PM
ander dale baigaier hi chood diyaaaaaaaaaaa

Hotest
15-06-2009, 07:40 PM
aage kaya huwaaaaaaaaaaaaaaaaa

rajmalhotra212
16-06-2009, 02:09 AM
arey bhai jaan........ek baar mein khatam kar do na yaar.....

naduman
16-06-2009, 03:19 AM
bahut mast hai yaar par jaldi puri karo na

sexspl1965
16-06-2009, 11:50 AM
ander dale baigaier hi chood diyaaaaaaaaaaa


Thanks for reply..............

aage bhi to gekho hota hai kaya?????????????

sexspl1965
16-06-2009, 11:52 AM
aage kaya huwaaaaaaaaaaaaaaaaa


Aage kaya huwa agala part padh ker dekho yaar????????????

sexspl1965
16-06-2009, 11:54 AM
arey bhai jaan........ek baar mein khatam kar do na yaar.....


Thanks dear rejmalhotra21,

mY dear friend pura maja loo naaa dere thak...........
going to post next

sexspl1965
16-06-2009, 11:56 AM
bahut mast hai yaar par jaldi puri karo na

Thanks dear...naduman...

My dear friend, sex enjoy kartey hoowe jaldi nahi masti mai loooooooooooooooo

sexspl1965
16-06-2009, 02:15 PM
तुषार वहां से निकल कर अपने कमरे में आया कमरे में नाईट लैंप पहले ही जल रहा था, वो उसकी रोशनी में ही अपने कमरे में टहलने लगाऔर सोचने लगा जो अभी अभी वो अपनी ही सगी भाभी के साथ कर के आया था, उस निर्दोष स्त्री के गहन नींद में होने का अनुचित लाभ उठाते हुए उसने अपनी हवस का जो वहशीपन उसके साथ किया था उससे उसकी कामवासना तो शांत हुई लेकिन उसके अन्तर्मन का ताप बढ़ गया और अब वो उसे कचोटने लगा और अपनी कमजोरी पर पश्चाताप करने लगा। उसका मन उसे धिकारने लगा यही सोच सोच कर वो परेशान कमरे में टहलने लगा और सोच रहा था कि "आखिर मैं खुद पर नियंत्रण क्यों नही रख पाता, मैं उसे देख कर पागल क्यों हो जाता हूं ?" , बेचारी
सीधी साधी भाभी मैं उसके भोलेपन और शर्मिलेपन का अनुचित लाभ उठा रहा हूं। मेंरे भाई ने कितने विश्वास से उसे यहां रखा है, कितने विश्वास से वो मुझे ये कहता है कि उसे अपने साथ ले कर जाया कर घुमाया कर और मेंरे मां-बाप, बहिन सब मुझ पर कितना भरोसा करते हैं, और एक मैं हूं कि मैने सबके विश्वास को धोखा दिया है, सबके साथ दगाबाजी की है, छी: धिक्कार है मुझ पर।ऎसा सोचते हुए वो जब थक गया तो पलंग पर लेट गया और सोचते हुए ही वो कुछ ही क्षणों में नींद के आगोश में समा गया।

इधर तुषार के कमरे से निकलते के लगभग डेढ़ मीनट के बाद रश्मी ने हौले से अपनी आंख खोली और अपनी अधखुली आंखों से धीरे से कमरे का जायजा लिया जब उसे पक्का यकीन हो गया कि उसका देवर तुषार उसके कमरे से जा चुका है तो वो झट से उठ कर पलंग पर बैठ गई और उसने शरीर का जायजा लिया।

उसने देखा कि उसे गहन नींद में समझ कर कामवासना में अंधे हो चुके उसके देवर तुषार ने उसके सोते हुए जिस्म के साथ हवस का जो खेल खेला था और जिस तरीके से उसके कपड़ों को अस्त व्यस्त कर दिया था उसे देख उसे लगभग नंगी ही कहा जा सकता था।केवल कपड़े नहीं उतारे थे तुषार ने के,लेकिन उसके शरीर के किसी अंग को उसने अनछुआ नहीं रखा था और उसके शरीर के सभी अंगो का उसने काफ़ी करीब से मुआयना किया था और उसके जिस्म के भूगोल को अच्छी तरह से समझ गया था,शायद राज से भी ज्यादा।

रश्मी ने अपने उपर एक नज़र ड़ाली,अपनी हालत देखते हुए उसे घोर लज्जा का अनुभव हुआ । उसके गाऊन के सभी बटन खुले हुए थे और उसके दोनों विशाल स्तन पूरी तरह अनावृत्त थे, उसका गाऊन कमर से उपर चढा हुआ था तथा उसकी दोनों मोटी चिकनी जांघे और उसके बीच दबी उसकी चूत साफ़ दिखाई दे रही थी। अपनी हालत देख कर वो सोच रही थी कि "कितनी बेरहमी से नोंच कर गया था उसका देवर उसका बदन"। अपने प्रति तुषार की हवस को काफ़ी समय से मह्सूस कर रही थी लेकिन वो इस हद तक जा सकता है ऎसा उसने सोचा भी नहीं था। जवानी के जोश में उसके कदम बहक गए हैं और उसकी अक्ल पर पत्थर पड़ गए लेकिन सुधा से शादी होते ही वो अपने रास्ते पर आ जायेगा और मेंरे प्रति उसका आकर्षण खत्म हो जायेगा ऎसा सोच कर और अपनी बहन की जिंदगी संवर जाये इस
कारण वो चुपचाप सहती रही।लेकिन अब बात काफ़ी बढ़ चुकी थी और उसे साफ़ मह्सूस हो रहा था कि उसकी हरकतें अब और बढ़ेंगी। उसकी इसी उहापोह का नतीजा था कि वो खुल्लमखुल्ला उसके जिस्म को एक घंटे तक नोच कर अपनी हवस शांत करके चलता बना और उपर से उसकी ये हिमाकत की उसने अपना पूरा का पूरा वीर्य ही उसके सोते जिस्म में ड़ाल दिया।

contd........................

sexspl1965
16-06-2009, 02:18 PM
दरअसल रश्मी तो उसी समय उठ चुकी थी जब तुषार ने उसकी चूत में मुंह लगाया था।लेकिन वासना में अंधे हो चुके मूर्ख तुषार को ये बात समझ नहीं आई कि वो भाभी के जिस अंग से खिलवाड़ कर रहा है और उसमें मुंह लगा जवानी का रस चूस रहा है वो किसी भी स्त्री के लिये ऎसा संवेदनशील अंग होता है जिसके प्रति एक स्त्री हमेंशा सजग रहती है।जो स्त्री अपने अबोध बालक की शक्तिहीन करुण पुकार मात्र से अपनी गहरी नींद का परित्याग कर उसे अपने सीने से लगा कर अपने मातृत्व और वात्सल्य के रस से उसकी भूख मिटाने के लिये हर क्षण तत्पर रहती हो उसे क्या अपनी चूत पर किसी (पराये)पुरुष के स्पर्श का आभास नहीं होगा?लेकिन मूर्खों को ये बातें कहां समझ आती है?

काम अपना प्रथम प्रहार इंसान के दिमाग पर ही करता है और उसके सोचने समझने की शक्ती को खत्म कर देता है और आचार-विचार विहीन मनुष्य मूर्ख ही होता है।

जैसे ही तुषार ने रश्मी की चूत में मुंह लगाया था उसी क्षण उसकी नींद उड़ गई थी उसने मुंह उपर उठाया और देखा तो उसके होश उड़ गए। सामने उसका सगा देवर तुषार था जो बड़े ही अजीबो गरीब तरिके से अपना मुंह बना रहा था और परम संतोष के भाव के साथ उसकी चूत को चूस रहा था।

चूत का रस पीने में वो इतना मशगूल था कि उसे तनिक भी अभास नहीं हुआ कि उसकी भाभी जाग चुकी है और उसकी चोरी पकड़ी जा चुकी है।उस एक क्षण में ही रश्मी के दिमाग में कई बातें कौंध गई और वो निढ़ाल पड़ी रही। वो चाहती तो उसी क्षण उठ कर उसे चांटा मार सकती थी या शोर मचा कर घर के सदस्यों को बता सकती थी लेकिन उसने सोचा ऎसा करने में खतरा ही खतरा है।हो सकता है तुषार उल्टा उस पर ही लांछन लगा दे और घर वालों ने यदि उसकी बात को सच मान लिया तो? यदि किसी ने पुछ लिया कि वो तेरे कमरे में घुसा कैसे? तो मैं क्या जवाब दूंगी ? कैसे खुद को निर्दोष साबित करुंगी? कौन है मेरे पक्ष में ? परिस्थितियां भी तो नहीं है मेरे पक्ष में।

जब एक धोबी ने सीता जैसी देवी पर लांछन लगा दिया तो स्वयं भगवान श्रीराम ने ये जानते हुए कि सीता निर्दोष है उसे अग्नी परिक्षा का आदेश दिया ताकि युगों युगों तक लोगों को ये संदेश जाता रहे की देवी सीता पवित्र है।

मुझे बचाने वाला कौन है यहां?निर्बल पुरुष न तो अपनी रक्षा कर सकता है न अपनी संपत्ति और न अपनी स्त्री ,कदाचित ईश्वर ही दया कर उसे बचाने आ जाए कुंती की तरह तो अलग बात है लेकिन रश्मी ने सोचा मेंरा चीरहरण तो इस तुषार ने कर ही ड़ाला है।मैं क्या जवाब दूंगी घर के लोगों को कि "तू नंगी होते तक क्यों चुप पड़ी रही?"

contd.......................

sexspl1965
16-06-2009, 02:19 PM
दूसरा खतरा ये था कि कहीं बात इतनी न बिगड़ जाय कि तुषार की सुधा से शादी ही टूट जाय अगर ऎसा हुआ तो मेंरा परिवार मुझे कभी माफ़ नहीं करेगा। विशेषकर सुधा और मेंरी माँ। वो तो सीधा यही पूछेगी की बात इतनी कैसे बढ़ी की वो इतनी हिम्मत कर बैठा ? ताली एक हाथ से बजती है क्या ? कोई पुरुष किसी स्त्री को दो या तीन बार जाने अन्जाने स्पर्श का प्रयास कर सकता है बार बार नहीं। स्त्री की एक क्रोध भरी नजर ही किसी पुरुष को पस्त करने के लिये काफ़ी होती है। फ़िर यदि कोई पुरुष बार बार किसी स्त्री के साथ ऎसा करता है तो इसका मतलब साफ़ है कि इसमें उसकी भी रजामंदी है।

तीसरी परेशानी रश्मी की ये थी कि यदि इस वक्त उसने आंख खोली और दोनों की नजर मिली तो फ़िर दोनों के लिये ही जीवन भर एक दूसरे से नजर मिलाना संभव नहीं था। कम से कम रश्मी के लिये तो संभव था ही नहीं।और ऎसी अवस्था में तुषार से नजर मिलाने का साहस रश्मी में था ही नहीं। इसीलिये उसने इस शुतुरमुर्ग की तरह रेत में मुंह छुपा कर इस तूफ़ान को गुजर जाने देने में ही अपनी भलाई समझी और वो आंखे बंद किये पड़ी रही।

अब तक उसके शरीर में लगाया हुआ तुशार का वीर्य सूखने लगा था और उसकी चमड़ी खीचाने लगी थी। उसने अपने चेहरे और स्तनों पर हाथ लगाया वहां एक परत सी बन गई थी।

वो पलंग से उठी और कांच के सामने जा कर खड़ी हो गई और अपने जिस्म को निहारने लगी।उसने अपना गाऊन निचे गिरा दिया, अब वो नंगी कांच्के सामने खड़ी थी। उसने उसमे अपने बदन को देखते हुए अपना हाथ चूत में लगाया वहां लगाया हुआ तुषार का वीर्य अभी भी गीला था और उसे वहां चिपचिपा पन मह्सूस हो रहा था। वहां हाथ लगाते ही उसके हाथ में उसके हाथ में उसके देवर का वीर्य आ गया और उसका हाथ भी चिपचिपाने लगा। उसने दरवाजे की तरफ़ नजर उठाकर देखा वो अभी तक अधखुला था,वो तत्काल दरवाजे की तरफ़ दौड़ी और उसे अंदर से बंद किया।

जवानी का लूटना किसी स्त्री के लिये दौलत लूट जाने से भी बड़ी घटना होती है। रश्मी दरवाजे के पास ही नंगी खड़ी हो कर पलंग की तरफ़ देख रही थी जहां अभी कुछ ही मीनटों पहले तुषार उसकी जवानी को लूट रहा था। उसने पलंग की तरफ़ देखते हुए अपार शर्म और लज्जा का अनुभव हो रहा था उसने अपने दोनों हाथों की हथेलियों से अपने चेहरे को ढ़क लिया और फ़फ़क कर रोने लगी। उसी तरह रोते हुए वो पलंग के पास गई और वहीं जमीन पर बैठ गई और पलंग पर अपना सर रख कर फ़फ़कने लगी।

contd....................

sexspl1965
16-06-2009, 02:21 PM
कुछ देर तक इसी तरह मंथन करने और लगातार रोने के कारण वो मानसिक रुप से बुरी तरह से थक गई तो वो पलंग के पास से उठी नंगी ही सिसकते हुए बाथरुम में चली गई। वहां उसने शावर चालू किया और नहाने लगी और अपने जिस्म से तुषार के वीर्य को साफ़ किया।नहाते समय वो यही सोच रही थी कि अब वो इस खेल को बंद करेगी और अब वो तुषार को और अधिक स्पेस नहीं देगी।

चार दिनों के बाद राज तो आ ही रहा है वो उससे बात करेगी और उस पर दबाव बानायेगी कि वो उसे अपने साथ ले जाय।नहाने के बाद उसने अपना बदन पोंछा और बाहर निकल कर आल्मारी से एक दूसरा
गाऊन निकाल कर पहना और पलंग पर जा कर सो गई।

अगले दिन सुबह जब तुषार सो कर उठा तो उसे रात वाली घटना याद आने लगी और किसी फ़िल्म की तरह सारे दृष्य उसके सामने आने लगे। नींद में बेखबर अपनी भाभी के जिस्म से उसने जो हवस का खेल खेला था उससे उसका मन खिन्न हो गया, वो अपना चेहरा ही आईने मे देखने का साहस नहीं कर पा रहा था लेकिन किसी तरह वो उठा और फ़्रेश हो कर नीचे पहूंच गया। नीचे मां नहाने के बाद पूजा की तैयारी में व्यस्त थी उसे इतनी सुबह तैयार पा कर वो आश्चर्य से उससे बोली अरे बेटा इतनी सुबह तैयार हो गये कहीं जाना है क्या?जवाब में उसने कहा हां मां आज कालेज जल्दी जाना है,तुम जल्दी से चाय नाश्ता दे दो।

मां ने कहा मैं क्यों बेटा रश्मी है न किचन में वो भी आज जल्दी उठ गई है। दरअसल कल रात की घटना के कारण वो ठीक से सो नही पाई थी और सुबह जल्दी उठ गई थी।तुषार ने चौंक कर कहा भाभी इतनी जल्दी उठ गई । मां ने कुछ नहीं कहा और केवल मुस्कुरा दिया और वहीं से उसने जोर से अवाज दे कर कहा रश्मी तुषार के लिये चाय नाश्ता दे दो आज वो भी जल्दी उठ गया है उसे जल्दी कालेज जाना है।ऎसा बोल कर मां ने पेपर उसकी टेबल पर रखा और पूजा करने चली गई।

मां के जाते ही तुषार असहज मह्सूस करने लगा उसमें आज रश्मी का सामना करने का साहस नही था।वो बड़ी ग्लानी मह्सूस कर रहा था। उधर रश्मी का भी यही हाल था लेकिन क्या करे मज्बूरी थी जाना तो था ही सो उसने जल्दी से चाय नाश्ता तैयार कर मन भर के ड़ग भरते हुए उसके टेबल की तरफ़ जाने लगी। भाभी को अपनी तरफ़ आते देख वो पेपर पढने का नाटक करने लगा,उधर भाभी भी जल्दी से चाय नाश्ता उसकी टेबल पर रख कर जल्दी से किचन की तरफ़ जाने लगी,दोनों ने न एक दूसरे की तरफ़ देखा और न ही कोई बात की।

वो इतनी तेजी से किचन की तरफ़ जा रही थी कि उसकी दोनों बड़ी बड़ी गांड बुरी तरह से उछल रही थी।लेकिन जिन गांड़ो का तुषार पिछले आठ माह से दिवाना था आज उसने उसकी तरफ़ पहली बार देखा तक नहीं। उसने

अपना नाश्ता खत्म किया और कालेज चला गया।उस पूरा दिन वो घर नहीं आया रात को घर आया और थोड़ा बहुत खा कर अपने कमरे में जा कर सो गया।

दूसरे दिन भी यही हुआ वो सुबह जल्दी ही कलेज चला गया और फ़िर रात को देर से घर आया।लेकिन देर से घर आने के बावजूद उसने घर में सभी को जागते हुए पाया,घर के सारे सदस्य ड्राईंग रुम में ही बैठे थे और उसी का इंतजार कर रहे थे।

उसने देखा कि मां और पिताजी आपस में धीरे धीरे कुछ बात कर रहे है और रश्मी उनके सोफ़े के पीछे खड़ी थी। दिया भी बगल वाले सोफ़े में बैठ कर उनकी बातों को उन रही थी।सब के इस प्रकार से
बैठ कर चर्चा करने का मतलब साफ़ था कि वे किसी गंभीर मसले पर बात कर रहे थे। तुषार के माथे पर बल पड़े वो सोचने लगा कि कहीं भाभी ने तो रात वाली बात नहीं बता दी है इन लोगों को। दर असल तुषार को अपनीभाभी के पिछले दो दिनों के उसके साथ व्यवहार से उस पर शक हो रहा कि कहीं उस रात वो जग तो नहीं रही थी।ज्यों ज्यों वो उस बारे में सोचता उसका शक यकीन में बदलता जा रहा था कि उस रात भाभी पक्का जाग चुकी थी

contd...................

rajmalhotra212
18-06-2009, 12:32 AM
han bhai agle hisse ka kya hua???

daga_ak
18-06-2009, 02:27 PM
complete the story fast and once for all.

hard
19-06-2009, 04:05 PM
fuck off

Hotest
20-06-2009, 11:41 AM
Yarrrrrrr now complet it................

sexspl1965
20-06-2009, 11:57 AM
han bhai agle hisse ka kya hua???


Thanks dear rajmalhotra212 for reply
going to post next part..............

sexspl1965
20-06-2009, 11:57 AM
complete the story fast and once for all.


Thanks dear going to post next.....................

sexspl1965
20-06-2009, 11:58 AM
fuck off


Thanks dear hard............

sexspl1965
20-06-2009, 11:59 AM
Yarrrrrrr now complet it................


Read next part ...............thanks for reply

sexspl1965
20-06-2009, 12:00 PM
इतनी गंभीरता से उन लोगों को बात करते देख कर एक बार तो तुषार सहम गया और दरवाजे के पास ही खड़े हो कर सोचने लगा कहीं भाभी ने रात वाली बात आखीरकार इन लोगों को बता तो नहीं दी होगी। ऎसा विचार मन में आते ही उसके रोंगटे खड़े हो गये और उसकी गांड़ फटने लगी।

आखिर मरता क्या ना करता ? वो धीरे धीरे उनकी तरफ़ बढने लगा। पाप करना जितना आसान होता है और मजेदार होता है उतना ही कठिन उसका बोध होता है। और उसका परिणाम उतना ही भयावह। दरवाजे से मात्र दस कदम दूर चलने में तुषारको ऎसा लगा मानो वो दस बार मर कर जनम ले चुका है।

जैसे तैसे वो उनके पास जा कर खड़ा हो गया। तभी दिया की नज़र सबसे पहले उस पर पड़ी और वो बोल उठी लो आ गये जनाब,सभी ने एक साथ पिछे मुड़ कर देखा और सबकी नज़र तुषार पर टिक गई। एक क्षण के लिये कमरे में सन्नाटा छा गया। तुषार नज़रें झुकाये खड़ा था किसी अपराधी की तरह। उसक दिल धड़क रहा था।

माँ ने तनिक क्रोध भरी अवाज में कहा "क्यों रे बेशर्म, नालायक"
माँ के इतना कहते ही तुषार का मन किया की उसका पाँव पकड़ कर फ़ूट-फ़ूट रोने लगे और माफ़ी मांग ले। उसकाचेहरा देखने लायक था और उस पर हवाईयां उड़ रही थी। वो बदहवास हो उनकी तरफ़ देख रहा था। उसकी बदहवासीको "दिया" ने और बढा दिया उसने कहा " हां माँ लगाओ हम सब की तरफ़ से और राज भैया की तरफ़ से भी"।

"राज" का नाम सुनते ही वो पूरी तरह से ढ़ीला पड़ गया और समझ गया कि भाभी ने आखिर उसकी पोल खोल ही ड़ाली है , गूंगी गुड़िया के मुंह में ज़बान आ गई है और अब उसकी शामत आने वाली है। उसका मान सम्मान , रुतबा सब खतम हो गया। उसने सोचा अब क्या किया जा सकता है? आखिर उसने काम ही ऎसा किया था। वो मन ही मन खुद को कोसने लगा और सोचने लगा कि ऎसे जीने से तो मर जाना बेह्तर है। उसने तय कर लिया कि चाहे इनको जो बोलना हो सो बोल ले वो कुछ नहीं बोलेगा और आज अपने पैरों से चल कर आखिरी बार अपने कमरे में जायगा।

अपमानित हो कर जीने से तो मर जाना बेह्तर है। उसने तय कर लिया था उपर जा कर फ़ांसी लगा कर अपनी जान दे देगा। कमरे में फ़िर कुछ क्षण के लिये चुप्पी चा गई। आखिर उसके पिताजी ने चुप्पी तोड़्ते हुए कहा तुम दोनों माँ बेटी को कोई धंधा नही है ? बेकार में इसे धमका रही हो साफ़ साफ़ बतओ ना इसे । पिताजी घुड़की सुन कर दोनों मां बेटी खिलखिला कर हंस पड़ी।


contd..................

sexspl1965
20-06-2009, 12:02 PM
अपनी मां और बहन को इस तरह से हंसते हुए देख कर तुषार की जान में जान वापस आई । उसकी मां उसके पास जा कर बोली तू तो ऎसे ड़र गया था जैसे तेरी कोई चोरी पकड़ी गई हो या तू कहीं से ड़ाका ड़ाल कर या किसी का खून कर के आया हो।

चोरी तो उसने की थी अपने ईमान की और ड़ाका ड़ाला था अपनी ही माँ समान सगी भाभी की जवानी
पर और खून किया था अपनी ही अन्तरात्मा का। लेकिन ये किसी को दिखाई नहीं दे रहा था। खुद तुषार को भी नहीं।

वैसे भी आज के जमानें में चोरी उसी को कहते हैं जो पकड़ी जाय। सो तुषार साहूकारों की तरह खड़ा हो गया। वो समझ चुका था कि बात कुछ और ही है और वो नाहक ही ड़र रहा था।

कुछ क्षण पहले फ़ांसी लगा कर मरने की बात सोचने वाला तुषार न केवल फ़िर से निर्लज्ज बन गया बल्कि पहले से ज्यादा बेखौफ़ भी । उसे पूरा यकीन हो गया कि ये गदराई हसीना कभी अपना मुंह नही खोलेगी। ऎसा विचार मन में आते ही उसने पूरे दो दिनों के बाद फ़िर से अपनी भाभी के गदाराए बदन को नीचे से उपर तक देखा और उसकी नज़र फ़िर से उसकी झिनी साड़ी के अंदर दिखने वाले उसके क्लिवेज पर पड़ने लगी। उसके लंड़ ने पेण्ट के अंदर से झटका मार रश्मी की रसीली जवानी को सलामी दे ड़ाली।

जिस तरह से दिया बुझने से पहले आखिरी बार जोर से जलता है उसी तरह तुषार की अन्तरात्मा भी उसे लगातार दो दिन तक अपराध बोध कराने के बाद आज सदा सदा के लिये चुप हो गई। तुषार काफ़ी आज़ाद मह्सूस कर रहा था।

पाप करने के लिये लोग नये नये बहाने बनाते हैं और उसे सही साबित करने के लिये अपने हिसाब से तर्क देते हैं। इंसान का मन एक वकील की तरह काम करता है। जिस तरह एक वकील अदालत में अपने तर्कों से अपने क्लाइंट के गलत काम को भी सही साबित कर देता है और उसे सजा से बचा लेता है। उसी प्रकार तुषार के अंदर बैठा उसका मन रुपी वकील भी उसे समझा रहा था कि उसने जो किया उसमें कुछ भी गलत नहीं है। आखिर रश्मी जवान है और पति उससे काफ़ी दूर है और अगले काफ़ी महिनों तक उसके यहां वापस आने की कोई गुंजाईश भी नही है, ऎसे में अपनी शरीर की जरुरतों के आगे यदि वो झुक गई और किसी और से उसका रिश्ता बन गया तो?

जिस प्रकार इंदौर की एक जैन साध्वी इंदुप्रभा अपने शरीर के ताप को न सह पाई और अपने ही दूध वाले राधेश्याम गुर्जर के साथ भाग गई थी तो कैसे पूरे देश में जैन समाज की नाक कटी थी। कहीं रश्मी ने ऎसा कोई कदम उठाया तो पूरे समाज मे तुम्हारे परिवार की नाक ही ही कट जायगी ।

contd.................

sexspl1965
20-06-2009, 12:04 PM
जिस तरह से दिया बुझने से पहले आखिरी बार जोर से जलता है उसी तरह तुषार की अन्तरात्मा भी उसे लगातार दो दिन तक अपराध बोध कराने के बाद आज सदा सदा के लिये चुप हो गई। तुषार काफ़ी आज़ाद मह्सूस कर रहा था।

पाप करने के लिये लोग नये नये बहाने बनाते हैं और उसे सही साबित करने के लिये अपने हिसाब से तर्क देते हैं। इंसान का मन एक वकील की तरह काम करता है। जिस तरह एक वकील अदालत में अपने तर्कों से अपने क्लाइंट के गलत काम को भी सही साबित कर देता है और उसे सजा से बचा लेता है। उसी प्रकार तुषार के अंदर बैठा उसका मन रुपी वकील भी उसे समझा रहा था कि उसने जो किया उसमें कुछ भी गलत नहीं है। आखिर रश्मी जवान है और पति उससे काफ़ी दूर है और अगले काफ़ी महिनों तक उसके यहां वापस आने की कोई गुंजाईश भी नही है, ऎसे में अपनी शरीर की जरुरतों के आगे यदि वो झुक गई और किसी और से उसका रिश्ता बन गया तो?

जिस प्रकार इंदौर की एक जैन साध्वी इंदुप्रभा अपने शरीर के ताप को न सह पाई और अपने ही दूध वाले राधेश्याम गुर्जर के साथ भाग गई थी तो कैसे पूरे देश में जैन समाज की नाक कटी थी। कहीं रश्मी ने ऎसा कोई कदम उठाया तो पूरे समाज मे तुम्हारे परिवार की नाक ही ही कट जायगी ।

sexspl1965
20-06-2009, 12:06 PM
सो अपने मन के तर्कों को मानते हुए तुषार ने अपने परिवार की इज्जत बचाने के लिये अपनी सगी भाभी को चोदने का फ़ैसला किया था। उसके मन ने उसे ऎसा तर्क दिया था कि उसकी आत्मग्लानी अब गायब हो चुकी थी और रश्मी भाभी को चोदना अब उसे पाप नहीं बल्की अपना धर्म लग रहा था। उसे लगने लगा था कि परिवार की इज्जत बचाने के लिये उसे अपनी भाभी को चोदने का धर्म निभाना ही पड़ेगा।

तुषार ने अपनी मां से कहा नहीं मां ऎसी कोई बात नही है दरासल मुझे बहुत भूख भी लगी और मैं बहुत थक भी गया हूं ,इसीलिये आपको ऎसा लगा। फ़िर उसने मां के हाथ पकड़ कर पूछा अब बता भी दो न मां । मां ने हंसते हुए रश्मी की तरफ़ देखा और पूछा क्यों बहू बता दूं इसे या नहीं? रश्मी ने जवाब में कुछ नहीं कहा केवल मुस्कुरा दिया। मां ने रश्मी की तरफ़ बनावटी गुस्से से देखते हुए कहा "अरि रहने दे, तू तो बोलने से रही, तेरा तो कोई खून भी कर दे तो भी तू उसे कुछ नहीं कहेगी बस खड़ी खड़ी देखती रहेगी"।

अब मां ने तुषार की तरफ़ देख कर कहा "सुन बेटा बड़ी अच्छी खबर है, तेरी सुधा के साथ बात पक्की हो गई है। और परसों राज भी आ रहा है अपने बास के साथ बस उसके दो दिन के बाद तेरी सुधा के साथ सगाई कर देंगे।"
तुषार : सगाई ! इतनी जल्दी, और फ़िर राज भैया तो सिर्फ़ एक दिन के लिये ही आ रहे हैं न?
उसके पापा ने बीच में टोकते हुए कहा " एक दिन के लिये नहीं बेटा पूरे चार दिनों के लिये आ रहे है वो दोनों।
तुषार (तनिक चौंकते हुए ) : दोनों! कौन दोनों पापा ?
पापा : अरे बेटा राज और उसका बास दोनों । वो मेंरा बहुत अच्छा दोस्त भी है और फ़िर वो मेरें बेटे का बास भी तो है। मुझे अपने बेटे की तरक्की भी तो करवानी है न। तुम सब ध्यान से सुन लो राज के बास की खातिरदारी में कोई कसर बाकी नहीं रहनी चाहिये समझे।
सब ने एक दूसरे की तरफ़ देखा और सहमती में अपना सर हिला दिया। तभी पापा खड़े हुए और कहने लगे चलो भई अब आज की सभा समाप्त करो मुझे तो बहुत नींद आ रही है, ऎसा कहते हुए वो अपने कमरे की तरफ़ चले गये। उनको जाते देख तुषार की मां भी उनके पिछे चली गई और "दिया" भी सबको गुड़ नाईट कहते हुए अपने कमरे में चली गई।

दो दिनों की लुका छिपी के बाद तुषार और रश्मी भी अब आज के महौल के बाद सामान्य हो चुके थे और दो दिनों के बाद दोनो ने एक दूसरे को देखा और मुस्कारा दिये।उसकी मुस्कुराहट में उसे सहमती और बेबसी दोनो नजर आ रही थी।

लेकिन शिकारी को उससे क्या ? वो तो अपने शिकार को बेबस देख कर और खुश होता है। तुषार का लण्ड़ फ़िर से खड़ा होने लगा था।

sexspl1965
20-06-2009, 12:07 PM
एक चतुर शेर जिस तरह से झुंड़ से अपने शिकार को पहले अलग करता है और फ़िर उसे थका कर उस पर झपट्टा मार कर उसका काम तमाम कर देता है उसी तरह तुषार ने रश्मी को अलग थलग तो कर दिया था और अब उस पर झपटने की तैयारी कर रहा था।

वो दोनों भी अब उपर अपने अपने कमरों की तरफ़ जाने लगे। रश्मी थोड़ा आगे थी और तुषार उसके पिछे। रश्मी जैसे ही सीढियों पर पांव रखती उसकी बड़ी बड़ी विशाल मांसल गांड़ बडे उत्तेजक तरिके से हिलता उसे देख कर उसके पिछे आ रहे तुषार बुरी तरह से उत्तेजित हो गया और उसका लंड़ पेंट फाड़ कर बाहर आने के लिये बेताब होने लगा।

इसी तरह अपनी भाभी की हिलती गांड़ को देखते हुए वो उपर तक पहुंच गया। जैसे ही रश्मी उसके दरवाजे के सामने से गुजरी उसने पिछे से अवाज लगाई, भाभी।

रश्मी रुक गई उसने पिछे मुड़ कर तुषार की तरफ़ देखा। तब तक वो रश्मी के पास पहुंच गया।
रश्मी के पास पहुंच कर उसने उससे बोला मैं आपको थैंक्स कहना तो भूल ही गया था। वो मुस्काराई लेकिन प्रत्यक्षत: बोली किस बात का थैंक्स?
तुषार : जी वो सगाई की बात पक्की कराने के लिये।
रश्मी: अच्छा! लेकिन इसमें थैक्स जैसी क्या बात है जब उमर होती है तो शादी तो करनी ही पड़ती है न, वरना बच्चे बिगड़ जाते हैं। ऎसा बोल कर वो नजर निची कर व्यंग से मुस्कुराने लगी।
तुषार : हां ठीक कहा आपने सब काम ठीक समय पर होना चाहिये वरना कुछ लोग बिगड़ जाते है और कुछ कुंठित हो जाते है। अब हंसने की बारी तुषार की थी। उसने रश्मी का हाथ पकड़ा और कहा आओ न भाभी अंदर बैठ कर कुछ बाते करते हैं।
रश्मी : अभी ! अरे नहीं कल बात करेंगे मुझे नींद आ रही है।
लेकिन उसकी बात को अन्सुना करते हुए उसे लगभग खिंचते हुए अपने कमरे में ले आया और बोला मुझे सुधा के बारे में बताओ।
रश्मी : क्या बताऊं मै उसके बारे में ? वो तो एक सीधी सादी घरेलु लड़्की है और क्या ?
तुषार : वो तो होगी ही आखिर आपकी बहन जो है। लेकिन मुझे और बताईये उसके बारे में जैसे उसकी पसंद नापसंद उसके शौक बगैरह । इस बात करते हुए तुषार ने रश्मी को अपने पलंग पर बैठा दिया और खुद उससे लग्भग सट कर बैठ गया। इस दौरान उसने रश्मी का हाथ थामे रखा और सदा की भांती रश्मी लाचार की तरह बैठी रही उसमें अपना छुड़ाने का साहस नहीं था।

वो उसे सुधा के बारे में बताने लगी। लेकिन तुषार का ध्यान उसकी बातों में नहीं बल्की उसके जिस्म पर था। वो तो किसी तरह रश्मी को अपने पास बैठाये रखना चाहता था। इसी तरह बाते करते हुए लग्भग २०-२५ मीनट हो गये तो अचानक वो झटके से खड़ी हो गई और उसने कहा अब चलना चाहिये काफ़ी देर हो गई है सुबह जल्दी उठना है। तुषार भी खड़ा हो गया और बोला ठीक है भाभी लेकिन एक बात मैं बार बार आपसे कहना चाहता हूं ।
रश्मी : वो क्या?
तुषार : यही की आप बहुत अच्छी हो और ऎसा कहते हुए उसने रश्मी के गाल पर एक हल्का सा चुंबन लगा दिया।
इस अप्रत्याशित बात से रश्मी थोड़ी हड़बड़ा जाती है और केवल इतना ही कह पाती है " अरे" , और फ़िर वो अपने रुम की तरफ़ तेज कदमों से चलते हुए जाने लगती है। तुषार मुस्कुरा देता है और हौले से कहता है गुड़ नाईट भाभी।
वो भी प्रत्युत्तर में गुड़ नाईट कहती है और अपने रुम में चली जाती है।

contd.......................

sexspl1965
20-06-2009, 12:09 PM
तुषार उसको अपने रुम के अंदर तक जाते देखता है । दरसल वो उसकी गांड़ो को घूर रहा था। रश्मी की गांड़ तुषार की सबसे बड़ी कमजोरी थी।

जैसे ही वो अपन्रे रुम में चली जाती है, वो तुरंत तेजी से चलते हुए छ्त पर चला जाता है और फ़िर कूलर के छेद से अंदर देखने लगता हैं। अंदर रश्मी हमेशा की तरह नंगी हो कर अपने कपड़े बदलती है जिसे देख तुषार बदहवास हो जाता है। रश्मी के कपड़े बदलने के बाद छत पर बैठने का कोई मतलब नही था सो तुषार अपने कमरे में जाता है और अपनी भाभी के नंगे जिस्म को याद करते हुए मुठ्ठ मार कर सो जाता है।

रात को सोने में देर हो जाने के कारण रश्मी सुबह जल्दी नहीं उठ पाती , जब सो कर उठने पर उसकी नजर घड़ी पर पड़्ती है तो वो हड़्बड़ा जाती है। सुबह के आठ बज चुके थे । वो एक झटके में पलंग से नीचे कूदती है जल्दी से अपना मुंह धोती है कपड़े बदल कर और थोड़ा बाल बना कर तुरंत नीचे की तरफ़ भागती है।

नीचे का नजारा उसकी आशा के अनुरुप ही था। मां रसोई में बड़्बडाते हुए काम कर रही थी और उसके ससुर और ननद नाश्ते के लिये हलाकान हो रहे थे। दरसल रश्मी की सास की काम करने की आदत छूट चुकी थी किचन में वो यदा कदा ही आती थी,और आती भी तो केवल रश्मी को ये बताने के लिये कि उसे आज क्या पकाना है। सो उसे कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि कौन सा सामान कहां रखा हुआ है और यही वजह थी को रश्मी पर झुंझला रही थी।

रश्मी को देखते ही वो फ़ट पड़ी और तनिक तेज आवाज में बोली : आ गई इतनी जल्दी अरी थोड़ा और सो लेती अभी बखत ही कितना हुआ है? सीधा खा पी कर उतरती । रश्मी जानती थी मां के गुस्से की वजह दरअसल उसे किचन में सामान नहीं मिलने क्कि वजह से वो झुंझला रही थी और बाहर उसके ससुर जी उनका मजाक उड़ा रहे थे।

रश्मी ने किचन में जाते ही मोर्चा संभाल लिया । उसने मां से कहा दर असल कल रात को बातें करते हुए काफ़ी देर हो गई थी इसी वजह से आज उठनें में काफ़ी देर हो गई मम्मीजी । मैं तो सीधे नीचे ही आ गई पहले आप लोगों को नाश्ता वगैरे बना कर दे दूं फ़िर जा कर नहा लूंगी। उसकी बात सुन मम्मी चीखते हुए कहती है क्या कहा तुमने तुम बाद में नहा कर आओगी यानी तुम अभी बिना नहाये नीचे आ गई हो? और वो भी किचन में !

उसने रश्मी को डांटते हुए कहा : चल निकल यहां से , निकल किचन के बाहर और जा कर नहा कर आ, तुझे पता है न तेरे पापा को यदि पता चल जायेगा तो वो आसमान सर पर उठा लेंगे। उन्होंने जानबूझ कर ये बातें जोर से कही ताकी उसके ससुर भी ये बातें सुन ले। ताकी थोडी डांट उनसे भी रश्मी को पड़ जाय लेकिन उसका दांव उल्टा पड़ गया, उन्होंने वहीं से बैठे हुए कहा : वाह देखो बेचारी रश्मी को उसे हमारी कितनी चिंता है बिना नहाये ही ही आ गई। तुम रहने दो बेटा रश्मी तुम आराम से जा कर नहाकर नीचे उतरो कोई जल्दी नहीं है। आज तो तुम्हारी मम्मी के हाथ का नाश्ता ही करेंगे।

उनकी ये बातें सुन कर पहले से जली भुनी बैठी उसकी मां और चिढ़ गई और जोर जोर से चिल्लाने लगी , और चढाओ सर पे सबको यदि मैंने किया होता तो चिल्ला चिल्ला कर सर पर आसमान उठा लिया होता और धर्म के ठेकेदार बन कर दुनिया भर ताने मार दिये होते और इसे कहते हो कोई बात नहीं। उसके पापाजी ये बातें सुन कर जोर जोर से हंसने लगे हॊ हॊ हो

और कहने लगे अरे क्या हो गया एक दिन यदि तुम बना कर खिला दोगी तो? यदि नहीं बनाना तो साफ़ साफ़ बोल दो हम बाहर जा कर कुछ खा लेंगे छोटि सी बात का बतंगड मत बनाओ।

contd................

sexspl1965
20-06-2009, 12:13 PM
अपने पति के तेवर देख कर वो तुरंत चुप हो जाती है और नाश्ता बनाने में लग जाती है और धीरे से रश्मी से कहती है अब जा न यहां से और जल्दी से तैयार हो कर आ, क्या दोपहर का खाना भी बनवायेगी क्या? रश्मी ने मुस्कुराते हुए अपनी सास को जल्दी जल्दी सब सामान कहां पडे़ है बताया और किचन से बाहर निकल गई।

वो तेजी से अपने रुम की तरफ़ जा रही थी और नाश्ते की टेबल पर बैठा तुषार उसकी बड़ी बड़ी गांड़ को हुलते देख कर आंहे भर रहा था।

अभी रश्मी को उपर गये मुश्किल से पांच मिनट ही हुए थे कि उसकी मां फ़िर बड़्बड़ाने लगी और बाहर आ कर चिल्लाकर पूछने लगी कि बेसन का डब्बा कहां रखा है रश्मी? लेकिन वो शायद अपने कमरे में जा चुकी थी इसलिये शायद वो सुन नहीं पाई

सो उसकी मां को कई जवाब नही मिला। उसने दो तीन बाहर जोर से चिल्लाया लेकिन कोई जवाब नहीं मिला तो उसने झुंझलाते हुए तुषार को कहा जा तो बेटा उपर जा कर तेरी भाभी से पूछ कर बता बेसन का डिब्बा कहां रखा है उसने ? "दिया" तो थी एक नंबर की आलसी सीढी चढना तो जैसे उसके लिये सजा से कम नहीं था सो ये काम तो तुषार को ही करना था।

अब तुषार उपर जाता है और भाभी के कमरे बाहर से उन्हें पुकारता है, भाभी। लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता वो फ़िर उसी तरह फ़िर से दो तीन बार चिल्लाता है लेकिन कोई जवाब नहीं मिलता तो उसे काफ़ी आश्चर्य होता है और वो दरवाजे को धक्का दे कर अंदर जाता है।

लेकिन वहां रश्मी तो थी ही नहीं वो फ़िर कहता है ,भाभी ! लेकिन वो वहां होती तो जवाब देती न। अब वो भाभी के कमरे के पिछले दरवाजे के परदे को हटा कर बाल्कनी में जाता है लेकिन भाभी वहां भी नहीं थी। वो सोच ही रहा था कि आखिर ये गई कहां?

तभी रश्मी कमरे में आती है और जल्दी से कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर देती है।
वो बाहर निकलना चाहता ही था कि उसे रश्मी की चूड़ीयों की आवाज सुनाई देने लगती है खन खन खन खन , अनुभवी तुषार तुरंत समझ जाता है कि उसकी भाभी अब अपने कपड़े उतार रही है और अब बाथरुम में जा कर नहायेगी। छत में कूलर के छेद से वो कई बार अपनी भाभी को कपड़े
बदलते हुए देख चुका था और इस दौरान होने वाली उसकी चूड़ियों की अवाज को अच्छी तरह से पहचानता था। तुषार के रोम रोम में रश्मी समा चुकी थी।

रश्मी का नंगा बदन उसकी आंखों के आगे घूमने लगा और नंगी रश्मी की कल्पना कर के ही उसका लंड़ बुरी तरह से खड़ा हो गया। वो चाहता तो तुरंत बाहर कर भाभी को रोक सकता था और कमरे से बाहर जा सकता था लेकिन एक ही कमरें दोनों के होने और उसके सामने ही रश्मी के कपड़े बदले जाने से तुषार की अपनी भाभी के रसीले बदन को चोदने की तमन्ना के कारण वो ऐसा नहीं कर सका ।

और आज तो हद ही हो गई देवर,भाभी दोनों एक ही कमरे में और भाभी एक्दम नंगी । तुषार के लिये तो जैसे तमाम परिस्थिति उसके हाथ में थी जिस मौके को बनाने के लिये वो योजना बना रहा था वो तो उसे इतनी जल्दी मिल गया इसकी तो उसने कल्पना भी नहीं की थी। इसीलिये उसने रुम में पड़े रहने में ही अपना फ़ायदा नजर आया।

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20-06-2009, 12:14 PM
तुषार भूल गया कि वो उपर क्यों आया था अब वो भाभी के पूरी तरह से नंगी हो कर बाथरुम में जाने का इंतजार करने लगा। दर असल रश्मी उपर आ कर सीधे छत में चली जाती है कपड़े उठाने के लिये कल की व्यस्तता की वजह से वो कपड़े उटाना भूल गई थी वो जल्दी से कपड़े उठाकर अपने कमरे में आती है और उसके कपड़े उठाने के दौरान ही तुषार उसे पूछने के लिये उसके कमरे में आता है और उसे नहीं पा कर वो उसे देखने बाल्कनी में चला जाता है।

ये सब इतनी तेजी से हुआ कि न तो रश्मी को तुषार के आने का पता चला और न ही तुषार को रश्मी के रुम से बाहर निकलने का मौका मिला।

तभी तुषार को बाथरुम के नल के चालू होने की आवाज आई वो समझ गया कि मेंरी गुलबदन रश्मी बाथरुम में चली गई है। उसने हौले से परदा हटाया और वो रुम में आ गया । अंदर दृष्य तुषार को काफ़ी उत्तेजित करने वाला था ।

कमरे में एक तरफ़ रश्मी की उतारी हुई साडी बिखरी पडी थी तो दूसरे टेबल पर रश्मी की अंड़रवियर , ब्रा , लहंगा और साड़ी पड़े थे। इसका मतलब साफ़ था कि रश्मी नहाने के बाद कपड़े बाथरुम में पहनने के बदले अपने कमरे में ही पहनती थी , याने के बाद वो नंगी ही कमरे में आती थी।

उसे किसी बात का ड़र भी नही था क्यों कि उसका अपना कमरा था और किसी के भी वहां आने का कोई खतरा नहीं था।

तुषार समझ गया कि रश्मी नहाने के बाद नंगी बाहर आयेगी, और उसने सोच लिया कि उसे अब क्या करना है?

रश्मी के स्वभाव और अब तक उसने जो कुछ किया था उसके साथ उस आचरण को देखते वो ज्यादा भयभीत नहीं था लेकिन फ़िर भी दिल में एक धुक्धुकी मची हुई थी जो कि स्वाभाविक था। लेकिन उसने सोच लिया था कि यदि इसे चोदना है तो कभी न कभी तो इसके सामने खुलना ही पड़ेगा और हिम्मत तो झुटाने ही पड़ेगी ही तो आज ही क्यों नहीं? इससे अच्छा मौका कहां मिलेगा? वो चाहता तो भी ऎसा मौका नहीं बना सकता था।

अब तुषार को फ़िर से बाथरुम के अंदर चूड़ियों की अवाज सुनाई देने लगी वो समझ गया कि रश्मी अब पूरी तरह से नंगी हो रही है। थोड़ी ही देर मे उसे पानी के खड़्खड़ाने की अवाज आने लगी याने उसने नहाना चालू कर दिया था। तभी रश्मी ने अंदर शावर चालू कर दिया और फ़ौवारे का मजा लेने लगी ।

अब तुषार हौले से अपने सर कॊ थोड़ा सा तिरछा करते हुए अंदर झांकने की कोशीश की ।

बाथरुम में पानी भरने के कारण उसके टाईल्स एक प्रकार से मिरर का काम कर रहे थे और रश्मी की नंगी छाया उसमें साफ़ दिखाई दे रही थी। अब तक तुषार काफ़ी सहज हो चुका था और उसका सारा भय समाप्त हो चुका था और वो पूरी तरह से वासना की गिरफ़्त में आ चुका था। उसने देखा रश्मी अपने शरीर पर साबुन लगा चुकी है उसका पूरा शरीर उअके झाग से भरा हुआ है, अब वो अपने चेहरे साबुन लगा रही थी और उसकी आंखे बंद थी और वो इस पूरी तरह से बेखबर थी कि तुषार उसे घूर रहा है वो शायद इस बात कि कल्पना ही नहीं कर सकती थी कि कभी ऎसा भी हो सकता है।

जैसे ही तुषार ने देखा कि वो अपने चेहरे में साबुन लगा रही है और उसकी आंखें बंद है वो तुरंत बाथरुम के दरवाजे के सामने आ गया और अपने सामने ही भाभी के नंगे बदन को घूरने लगा। पूरी तरह से साबुन लगा चुकने के बाद वो अब अपनी पीठ और कुल्हों पर साबुन लगाने लगी। तुषार का कलेजा बाहर आने लगा उसे खुद पर नियंत्रण करना संभव नहीं लग रहा था

लेकिन उसने थोड़ा और इंतजार करना ठीक समझा। अब उसने अपने पूरे शरीर पर हाथ घुमाया और हाथों को साबुन वाला कर के उसे अपनी चूत में लगा दिया और अपनी चूत में साबुन लगाने लगी।

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20-06-2009, 12:15 PM
वो धीरे धीरे अपनी चूत को सहला रही थी और अंदर तक साबुन लगा कर उसे साफ़ कर रही थी। अब तक उसकी आंखें बंद ही थी क्योंकि साबुन उसके चेहरे पर लगा हुआ था और तुषार उसी तरह बेखौफ़ रश्मी के नंगे बदन को घुरते रहा । उसने देखा अब रश्मी कुछ ज्यादा ही जोर से अपनी चूत को मसल रही थी शायद उसे ऐसा करने में मजा आ रहा था।

अब उसने अपनी उंगली को हल्का सा साबुन वाला कर के उसे अपनी चूत के अंदर डाल दिया और उसे अंदर तक साफ़ करने लगी और धीरे धीरे उसे अंदर बाहर करने लगी।

स्त्री की योनी की बनावट ही ऎसी होती है कि उसे अपनी योनी की सफ़ाई पर खास ध्यान देना होता है अन्यथा उसके संक्रमित होने का खतरा बना रहता है और उसे यूरिन इन्फ़ेक्शन का खतरा हो सकता है।लेकिन तुषार को ऐसा लगा कि रश्मी चूत की सफ़ाई के अलावा भी कुछ और कर रही है। बेचारी बिना पति के आखिर करे भी क्या? लेकिन उसका नितांत गोपनीय रहस्य भी अब तुषार के सामने उजागर हो गया।

अंदर तक उंगली ड़ालने के कारण कई बार उसके मुंह से एक हल्की सी आह निकल जाती जिसे उसके एक्दम सामने खड़े तुषार को साफ़ सुनाई दे रही थी। कभी कभी उसके मुंह से सी सी की अवाज भी निकल जाती थी। तुषार इन बातों क मतलब अच्छी तरह्से समझता था। कुछ देर तक इसी तरह से अपनी चूत की सफ़ाई करने के बाद अब वो शावर चालू करने के लिये उसकी चकरी ढूंढने लगती है । आंखे बंद किये हुए वो दिवाल के पास हाथ को इधर उधर धूमाने लगती है और कुछ ही क्षणों में वो शावर की चकरी को पकड़ कर उसे घुमाने लगती है और शावर चालू हो जाता है और उसका पानी उसके चेहरे में पड़्ने लगता है और वो अपना मुंह से साबुन साफ़ कर लेती है।

मुंह से साबुन निकलते ही रश्मी फ़िर से अपनी आंख खोल देती है और जैसे वो अपनी आंख खोलती है तुषार तत्काल वहां से हट कर थोड़ा आगे चला जाता है और बाथरुम की दिवार से सट कर बांए तरफ़ चिपक कर खड़ा हो जाता है। अब यदी रश्मी बाहर आती तो उसे तुरंत तुषार दिखाई नही देता लेकिन कपड़े के पास आते ही उनका सामना होना तय था। अब तुषार उसके बाहर आने का इंतजार करने लगा।

लग्भग दो तीन मीनट के इंतजार के बाद बाथरुम के अंदर सारी अवाजें बंद हो गई और बाल्टियों और मग्गे को किनारे रखने की अवाज आई। अब तुषार एकदम सतर्क हो गया क्योंकि उसके जीवन का वो स्वर्णिम क्षण आने वाला था जिसके उसे काफ़ी लंबे समय से इंतजार था और अगले कुछ पलों के बाद होने वाली घटनाएं उन दोनों के जीवन में बहुत बड़ा परिवर्तन लाने वाली थी।

तुषार को पता था कि या तो वो वो सब कुछ हासिल कर लेगा जो वो पाना चाहता है या फ़िर हमेशा के लज्जित या तिरकृत जीवन जीने के लिये मजबूर हो सकता था। लेकिन तुषार ने तय कर लिया था कि वो खतरा मोल लेगा चाहे नतीजा कुछ भी हो।

औरते आम तौर पर रोज सर नहीं धोती केवल हफ़्ते में एकध बार ही धोती हैं क्योंकि बाल लंबे होने के कारण उन्हें बनाने में उन्हें काफ़ी वक्त लगता है, सो जब वे अपना सर नहीं धोती तो नहाते समय अक्सर अपने सर टावेल से बांध लेती हैं ताकि बाल गीले न हो और उन्हें बनाने में उनका वक्त जाया न हो।

रश्मी के सर पर टावेल बंधा हुआ था और बाकी तमाम बदन नंगा था। वो बेखौफ़ थी क्योंकि किसी के कमरे में होने का उसे अनुमान ही नही था। और हो भी क्यों?

नग्न रश्मी बाथरुम से बाहर निकलती है और सीधे अपने कपड़ों के पास जा कर खड़ी हो जाती है।
जैसे ही वो अपने कपड़ों के पास पहुंचती है उसे अपनी आंख की कोर से बाथरुम की दिवार के पास किसी के खड़े होने का अहसास होता है। वो तुरंत उधर देखती है।

बहां नजर पड़्ते ही उसकी आंखे फ़ट जाती है और वो फ़टी फ़टी निगाहों से टक्टकी लगाकर तुषार की तरफ़ देखने लगती है। उसके पूरे बदन में एक ठंड़ी सी सिहरन पैदा होती है। और उसके पांव थरथराने लगते है। उसका चेहरा भय से पीला पड़ जाता है और मुंह खुला का खुला रह जाता है। उसे अपनी आंखों के सामने अंधकार दिखाई देने लगता है, और उसे ऐसा लगता है कि वो अभी गश खा कर गिर जायेगी। जो कुछ वो अपने सामने देख रही थी उस पर उसे सहज विश्वास नहीं हो रहा था।

ठंड़े पानी से नहा कर निकलने के बावजूद उसे पसीना आने लगता है और उसे ऐसा लगता है कि उसके दिल की धडकन अचानक बढ़ गई है ।

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20-06-2009, 12:17 PM
उस एक क्षण में ही रश्मी के चेहरे में क्रोध,भय और आश्चर्य के तमाम भाव आ गए और वो जड़वत खड़ी रह जाती है। वो एक पत्थर की मूर्ति की भांती स्थिर हो जाती है उसे ऐसा लगा मानो किसी ने उसके शरीर की सारी ताकत निचोड़ दी हो और उसका शरीर मानों निष्प्राण हो गया हो। क्रोध,भय और आश्चर्य की वजह से वो इतनी बदहवास हो जाती है कि वो ये भी कुछ क्षण के लिये भूल जाती है कि वो अपने देवर के सामने पूर्णत: नग्न खड़ी है।

कुछ क्षणों के बाद जब उसे अपनी स्थिति का भान होता कि वो तो पूरी नंगी खड़ी है और उसका देवर उसे घूर रहा है तो वो अन्यन्त लज्जा का अनुभव करती है और तुरंत हरकत में आती है और कपड़ो की तरफ़ तेजी से भागती है। इधर तुषार भी उसके नंगे शरीर को देखते हुए इतना मुग्ध हो जाता है कि उसे भी कुछ होश नहीं रहता और वो एक्टक रश्मी के नंगे बदन को घूरते रहता है। लेकिन जैसे ही रश्मी अपने कपड़ों की तरफ़ भागती है तो तुषार भी जैसे किसी सम्मोहन से जागा हो वैसे होश में आता है और रश्मी की तरफ़ दौड़ता है।

वो तेजी से भाभी और उसके कपड़ों के बीच में आ कर खड़ा हो जाता है । उसने ठान लिया था कि या तो तुझे आज मैं सदा सदा के लिये अपनी बना लुंगा और जीवन भर तेरे रसीले बदन से तेरी जवानी का रस चूसूंगा और तुझे अपनी मर्जी के मुताबिक चोदूंगा या जीवन भर के लिये बदनामी के गर्त में चला जाउंगा।

रश्मी का मन चित्कार उठता है , वो अपार लज्जा का अनुभव कर रही थी । लेकिन उसे ये भी अहसास हो रहा था कि ये आज आसानी से उसे कपड़े नहीं पहनने देगा।

रश्मी को इस तरह देख वो काफ़ी रोमांचित था और उसने ठान लिया था कि बस अब आज तुझे कपड़े तब तक नहीं पहनने दूंगा जब तक तेरी चूत में मेंरा लण्ड़ घुस नहीं जाता या तेरा थप्पड़ मेंरे गालों में नहीं पड़ जाता।

उसने बातचित शुरु करने गरज से कहना शुरु किया "भाभी दर असल मुझे मम्मी ने उपर भेजा था, उसे किचन में बेसन नहीं मिल रहा था उसने नीचे से काफ़ी अवाज लगाई लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मुझे उपर भेजा पूछने के लिये। आपको मैने काफ़ी अवाज लगाई लेकिन रुम के अन्दर से कोई अवाज नही आई तो मैं अन्दर चला आया लेकिन रुम आपको मैने यहां भी नही पाया तो मैने सोचा कि शायद आप बाल्कनी में होंगी तो मै वहां गया लेकिन आप तो वहां भी नही थी न सो जैसे ही मैं बाहर निकलने वाला था कि तुम रुम के अन्दर आ गई और आते ही अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतारने लगी।

मैने सोचा कि जब आप बाथरुम में चली जायेंगी तो मै चुपचाप बाहर चला जाउंगा लेकिन आप तो दरवाजा खुला कर नहाने लगी सो मै थोड़ी देर और रुक गया और जैसे ही मुझे मौका मिला मै बल्कनी से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने ही वाला था कि पहले "दिया" आ गई और दरवाजा खटखटाने लगी और फ़िर मम्मी आ गई। अब तुम ही बताओ रश्मी यदि उनके सामने मैं कमरे के बाहर निकलता तो वे क्या सोचती तुम्हारे और मेंरे बारे में।

उसने रश्मी ड़राने के उद्देश्य से ही जानबूझ कर मां और "दिया" वाली झूठी कहानी सुना दी। दरअसल वो अप्रत्यक्ष रुप से ये समझाने की कोशीश कर रहा था कि इस बात का पता यदि घर में किसी को भी चल जाय तो तुषार के साथ उसकी भी इज्जत चली जायेगी। और शायद रश्मी पर इस बात का असर भी पड़ा था।

रश्मी ने उसकी बातों को लग्भग अन्सुना सा करते हुए अपने सर पर बंधा टावेल खोल लिया और झट से अपने बदन पर लपेट लिया । पहाड़ की चोटीयों की तरह तने हुए उसके विशाल स्तन और उसकी बड़ी बड़ी गांड़ो को छुपाने में वो नन्हा टावेल समर्थ नहीं था बल्कि उसकी मादकता को और भी बढा रहा था लेकिन फ़िर भी नंगी होने से तो ये अच्छा ही था।

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20-06-2009, 12:19 PM
उस एक क्षण में ही रश्मी के चेहरे में क्रोध,भय और आश्चर्य के तमाम भाव आ गए और वो जड़वत खड़ी रह जाती है। वो एक पत्थर की मूर्ति की भांती स्थिर हो जाती है उसे ऐसा लगा मानो किसी ने उसके शरीर की सारी ताकत निचोड़ दी हो और उसका शरीर मानों निष्प्राण हो गया हो। क्रोध,भय और आश्चर्य की वजह से वो इतनी बदहवास हो जाती है कि वो ये भी कुछ क्षण के लिये भूल जाती है कि वो अपने देवर के सामने पूर्णत: नग्न खड़ी है।

कुछ क्षणों के बाद जब उसे अपनी स्थिति का भान होता कि वो तो पूरी नंगी खड़ी है और उसका देवर उसे घूर रहा है तो वो अन्यन्त लज्जा का अनुभव करती है और तुरंत हरकत में आती है और कपड़ो की तरफ़ तेजी से भागती है। इधर तुषार भी उसके नंगे शरीर को देखते हुए इतना मुग्ध हो जाता है कि उसे भी कुछ होश नहीं रहता और वो एक्टक रश्मी के नंगे बदन को घूरते रहता है। लेकिन जैसे ही रश्मी अपने कपड़ों की तरफ़ भागती है तो तुषार भी जैसे किसी सम्मोहन से जागा हो वैसे होश में आता है और रश्मी की तरफ़ दौड़ता है।

वो तेजी से भाभी और उसके कपड़ों के बीच में आ कर खड़ा हो जाता है । उसने ठान लिया था कि या तो तुझे आज मैं सदा सदा के लिये अपनी बना लुंगा और जीवन भर तेरे रसीले बदन से तेरी जवानी का रस चूसूंगा और तुझे अपनी मर्जी के मुताबिक चोदूंगा या जीवन भर के लिये बदनामी के गर्त में चला जाउंगा।

रश्मी का मन चित्कार उठता है , वो अपार लज्जा का अनुभव कर रही थी । लेकिन उसे ये भी अहसास हो रहा था कि ये आज आसानी से उसे कपड़े नहीं पहनने देगा।

रश्मी को इस तरह देख वो काफ़ी रोमांचित था और उसने ठान लिया था कि बस अब आज तुझे कपड़े तब तक नहीं पहनने दूंगा जब तक तेरी चूत में मेंरा लण्ड़ घुस नहीं जाता या तेरा थप्पड़ मेंरे गालों में नहीं पड़ जाता। उसने बातचित शुरु करने गरज से कहना शुरु किया "भाभी दर असल मुझे मम्मी ने उपर भेजा था, उसे किचन में बेसन नहीं मिल रहा था उसने नीचे से काफ़ी अवाज लगाई लेकिन आपने कोई जवाब नहीं दिया तो उसने मुझे उपर भेजा पूछने के लिये। आपको मैने काफ़ी अवाज लगाई लेकिन रुम के अन्दर से कोई अवाज नही आई तो मैं अन्दर चला आया लेकिन रुम आपको मैने यहां भी नही पाया तो मैने सोचा कि शायद आप बाल्कनी में होंगी तो मै वहां गया लेकिन आप तो वहां भी नही थी न सो जैसे ही मैं बाहर निकलने वाला था कि तुम रुम के अन्दर आ गई और आते ही अपने कमरे का दरवाजा बंद कर कपड़े उतारने लगी। मैने सोचा कि जब आप बाथरुम में चली जायेंगी तो मै चुपचाप बाहर चला जाउंगा लेकिन आप तो दरवाजा खुला कर नहाने लगी सो मै थोड़ी देर और रुक गया और जैसे ही मुझे मौका मिला मै बल्कनी से बाहर निकल कर दरवाजा खोलने ही वाला था कि पहले "दिया" आ गई और दरवाजा खटखटाने लगी और फ़िर मम्मी आ गई। अब तुम ही बताओ रश्मी यदि उनके सामने मैं कमरे के बाहर निकलता तो वे क्या सोचती तुम्हारे और मेंरे बारे में।

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sexspl1965
20-06-2009, 12:21 PM
उसने रश्मी ड़राने के उद्देश्य से ही जानबूझ कर मां और "दिया" वाली झूठी कहानी सुना दी। दरअसल वो अप्रत्यक्ष रुप से ये समझाने की कोशीश कर रहा था कि इस बात का पता यदि घर में किसी को भी चल जाय तो तुषार के साथ उसकी भी इज्जत चली जायेगी। और शायद रश्मी पर इस बात का असर भी पड़ा था।

रश्मी ने उसकी बातों को लग्भग अन्सुना सा करते हुए अपने सर पर बंधा टावेल खोल लिया और झट से अपने बदन पर लपेट लिया । पहाड़ की चोटीयों की तरह तने हुए उसके विशाल स्तन और उसकी बड़ी बड़ी गांड़ो को छुपाने में वो नन्हा टावेल समर्थ नहीं था बल्कि उसकी मादकता को और भी बढा रहा था लेकिन फ़िर भी नंगी होने से तो ये अच्छा ही था।

अब रश्मी ने पिछले कई महीनों से चले आ रहे तुषार के इस खेल के खिलाफ़ बोलने का साहस जुटाया और तनिक धीमी अवाज में उससे कहा "ये क्या तरिका है आपका? पिछले कई महिनों से मैं आपको नजर अंदाज करती आ रही हूं शायद इसी लिये आपको मेंरे बारे में काफ़ी गलत फ़हमी हैं। मैं आपके बड़े भाई की ब्याहता बीवी हूं कोई इस घर की रखैल नहीं कि जिसके साथ जिसे जो मर्जी आये वो करता रहे। अगर तुम्हारे अंदर जरा सी तहजीब होती, शर्म होती तो तुम मेंरे कमरे में आते ही बाहर आ सकते थे, क्या इतना इंतजार करना जरुरी था? जाहिर है तुम्हारी नीयत में खोट है। अगर मैं ये सब बातें तुम्हारे भाई को बता दूं तो क्या इज्जत रहेगी तुम्हारी उनके सामने और इस घर में?

जवान लड़्कियों को नंगा देखने का बहुत शौख है न तुम्हें, क्या इस घर में मैं ही अकेली जवान लड़की हूं ? तुम्हारी बहन भी तो खासी जवान है कभी उसके बाथरुम में भी जाकर देखा करो उसकी जवानी को। उसने आगे कहा " अब चुपचाप जिस तरह दबे पांव यहां आये थे उसी तरह दबे पांव निकल जाओ और दोबारा ऐसी गलती मत करना वर्ना तुम काफ़ी तकलिफ़ में पड जाओगे।

तुषार इस प्रकार की तमाम बातों के लिये पहले से तैयार था, अरे रश्मी की जवानी से खेलने के लिये तो वो अपने घर में भी बदनाम होने के लिये तैयार बैठा था। सो उसे रश्मी के इस तरह बड़्बड़ाने से कोई फ़र्क पड़ता नहीं दिखा। बल्कि तुषार ने एक बात साफ़ नोटिस किया की वो नारजगी जरुर दिखा रही है और भाषा भी भले ही तल्ख हो लेकिन उसकी आवाज काफ़ी धीमी है।

मतलब साफ़ था उसे भी अपनी बदनामी का ड़र था।उसने इस बात का पूरा का प्रयास किया था कि उसकी अवाज इस रुम से बाहर ना जाने पाये।

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sexspl1965
20-06-2009, 12:22 PM
अब तुशार ने बोलना चालू किया वो बिल्कुल भी भयभीत नहीं था बल्कि वो तनिक जोर से ही बोलने लगा । दर असल वो ये देखना चाहता था कि उसकी तेज अवाज जब बाहर तक जाती है तो उसका रश्मी पर क्या असर होता है? क्या वो वाकई आज बगावत