premguru
24-10-2009, 11:37 AM
प्रेम गुरु की कलम से
“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उसके के अनाज को खाने का हक नहीं होना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी बेटी को चोदना चाहता हूं तो क्या गलत है ?”
….. इसी कहानी से
मेरा एक ई-मित्र है तरुण. बस ऐसे ही जान पहचान हो गयी थी. वो मेरी कहानियों का बड़ा प्रशंसक था. उसे किसी लड़की को पटाने के टोटके पता करने थे. एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रहा था तो उस से चाट पर बात हुयी थी. फिर तो बातों ये सिलसला चल ही पड़ा. यह कहानी उसके साथ हुयी बातों पर आधारित है. लीजिये उसकी जबानी सुनिए :
दोस्तों मेरा नाम तरुण है. 20 साल का हूँ. कॉलेज में पढता हूँ. पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने नानिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था. मेरे मामा का छोटा सा परिवार है. मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल के हैं और मामी सविता 42 के अलावा उनकी एक बेटी है कनिका 18 साल की. मस्त क़यामत बन गयी है अब तो. अच्छे-अच्छो का पानी निकल जाता है उसे देख कर. वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाडों को देख कर नैन मट्टका करने लगी है.
एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहोर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया. पहले तो सब्जी की छोटी सी दूकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं. खालसा कॉलेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें pco, कंप्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है. साथ में जूस बार और फलों की दूकान भी है. अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है. किसी चीज की कोई कमी नहीं है. आदमी को और क्या चाहिए. रोटी कपडा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरुरत रह जाती है.
मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था. बस एक बार बचपन में मेरे चाचा ने मेरी गांड मारी थी. जब से जवान हुआ था अपने लंड को हाथ में लिए ही घूम रहा था. कभी कभार नेट पर सेक्सी कहानियां पढ़ लेता था और ब्लू फिल्म भी देख लेता था. सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था. मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था. वाह… 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी सविता एक दम जवान पट्ठी ही लगती है. लय बद्ध तरीके से हिलते मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल बूब्स तो देखने वालों पर बिजलियाँ ही गिरा देते हैं. ज्यादातर वो सलवार और कुरता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साडी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं. लेकिन दो दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था.
जून का महिना था. सभी लोग छत पर सोया करते थे. रात के कोई 2 बजे होंगे. मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं. कनिका बगल में लेटी हुयी है. मैं नीचे पेशाब करने चला गया. पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है. मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर हाईई ओह … या … उईई … की हलकी हलकी आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया. खिड़की का पर्दा थोडा सा हटा हुआ था. अन्दर का दृश्य देख कर तो मैं जड़ ही हो गया. मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे. मामा नीचे लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी. मामा का लंड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रख कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी और आह… उन्ह…. या … की आवाजें निकाल रही थी. उसके मोटे मोटे नितम्ब तो ऊपर नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फूटबाल को किक मार रहा हो. उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छाते जैसा था. वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे. कोई 8-10 मिनिट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी. पता नहीं कब से लगे थे. फिर मामी की रफ्तार तेज होती चली गयी और एक जोर की सित्कार करते हुए वो ढीली पड गयी और मामा पर ही पसर गयी. मामा ने उसे कस कर बाहों में जकड लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए.
“सविता डार्लिंग एक बात बोलूं ?”
“क्या ? ”
“तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गयी है बिलकुल मजा नहीं आता ?”
“तुम गांड भी तो मार लेते हो वो तो अभी भी टाइट है ना ?”
“ओह तुम नहीं समझी ?”
“बताओ ना ?”
“वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गांड दोनों ही बड़ी मस्त थी ? और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की ? मज़ा ही आ जाता है चोद कर"
“तो ये कहो ना कि मुझ से जी भर गया है तुम्हारा ?”
“अरे नहीं सविता रानी ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है. उसे चोदने को जी करता है ?”
“पर उसकी तो अभी नयी नयी शादी हुयी है वो भला कैसे तैयार होगी ? ”
“तुम चाहो तो सब हो सकता है ?”
“वो कैसे ?”
“तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदावा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोद कर निहाल हो जाऊं ”
“बात तो तुम ठीक कह रहे हो पर अविनाश नहीं मानेगा ?"
"क्यों ?"
"उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा ?”
“ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो उसे कनिका का लालच दे दो ना ?”
“कनिका … ? अरे नहीं.. वो अभी बच्ची है ?”
“अरे बच्ची कहाँ है पूरी 18 साल की तो हो गयी है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल 16 साल की ही थी जब हमारी शादी हुयी थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी ?”
“हाँ ये तो सच है पर ….”
“पर क्या ?”
“मुझे भी तो जवान लंड चाहिए ना ? तुम तो बस नयी नयी चूतों के पीछे पड़े रहते हो मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें ?”
“अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गांड भी तो मरवाई थी ना ?”
“पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लंड चाहिए बस कह दिया ?”
“ओह… तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती ? तुम उसके मज़े लो और मैं कनिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा ”
“पर वो मेरे सगे भाई की औलाद हैं क्या यह ठीक रहेगा ?”
“क्यों इसमें क्या बुराई है ?”
“पर वो… नहीं ... मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता ?”
“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है ? ”
“ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो. अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे ?”
और फिर मामी ने मामा का मुरझाया लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था की मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था. मैं अपना 7 इंच का लंड हाथ में लिए बाथ रूम की ओर बढ़ गया. फिर मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली है. कनिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लंड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा. मैं दौड़ कर छत पर चला आया. कनिका बेसुध हुयी सोयी थी. उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन राखी थी और अपनी एक टांग मोडे करवट लिए सोयी थी. स्कर्ट थोडी सी ऊपर उठी थी. उसकी पतली सी पेंटी में फ़सी उसकी चूत का चीरा तो साफ़ नजर आ रहा था. पेंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुयी थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हुयी थी. उसकी गोरी गोरी मोटी जांघें देख कर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लंड डाल ही दूँ. मैं उसके पास बैठ गया. और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा. वाह... क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी. मैंने धीरे से पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फिराई. वो तो पहले से ही गीली थी. आह … मेरी अंगुली भी भीग सी गयी. मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा. वाह क्या मादक महक थी. कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गयी. मैंने अंगुली को अपने मुंह में ले लिया. कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था.
मैं अपने आप को कैसे रोक पाता. मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया. वो थोडा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं. अब मैंने उसके उरोज देखे. वह क्या गोल गोल अमरुद थे. मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगा देखा था. पहले तो इनका आकार नीबू जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरुद तो जरूर बन गए हैं. गोरे गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे. मैंने एक चुम्बन उन पर भी ले लिया. मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कनिका जग गयी और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी.
“क्या कर रहे हो भाई ?” उसने उनिन्दी आँखों से मुझे घूरा.
“वो.. वो… मैं तो प्यार कर रहा था ?”
“पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या ? ”
“प्यार तो रात को ही किया जाता है ?” मैंने हिम्मत करके कह ही दिया
उस के समझ में पता नहीं आया या नही. फिर मैंने कहा “कनिका एक मजेदार खेल देखोगी ?”
“क्या ?” उसने हैरानी से मेरी और देखा
“आओ मेरे साथ ” मैंने उसका बाजू पकडा और सीढीयों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए. अन्दर का दृश्य देख कर तो कनिका की आँखें फटी की फटी ही रह गयी. अगर मैंने जल्दी से उसका मुंह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चींख ही निकल जाती. मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा. वो हैरान हुयी अन्दर देखने लगी.
मामी घोडी बनी फर्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थे. उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे. मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहे थे. उन 8 इंच का लंड मामी की गांड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो. मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे. जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते और उसके साथ ही मामी की सित्कार निकलती “हाईई और जोर से मेरे राजा और जोर से आज सारी कसर निकाल लो और जोर से मारो मेरी गांड बहुत प्यासी है ये हाईई …”
“ले मेरी रानी और जोर से ले … या …. स. वि. ता… आ... आ ……” मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर जोर से चिलाने लगे.
पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे. फिर मामा मामी से जोर से चिपक गए. मामी थोडी सी ऊपर उठी. उनके पपीते जैसे बूब्स नीचे लटके झूल रहे थे. उनकी आँखें बंद थी. और वह सित्कार किये जा रही थी. “जियो मेरे राजा मज़ा आ गया? ”
मैंने धीरे धीरे कनिका के बूब्स मसलने शुरू कर दिए. वो तो अपने मम्मी पापा की इस अनोखी रासलीला देख कर मस्त ही हो गयी थी. मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में भी दाल दिया. उफ़ … छोटे छोटे झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी. नीम गीली. मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला. वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपननी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी.
“उईई माँ ….” उसके मुंह से हौले से निकला. “ओह … भाई ये क्या कर रहे हो ?” उसने मेरी ओर देखा. उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे था. मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया.
हम दोनों ने देखा कि एक पुच्क्क की आवाज के साथ मामा का लंड फिसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गयी. अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था. हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए.
“कनिका ? ”
“हाँ… भाई ?”
कनिका के होंठ और जबान कांप रही थी. उसकी आँखों में एक नयी चमक थी. आज से पहले मैंने कभी उसकी आँखों में ऐसी चमक नहीं देखि थी. मैंने फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा. उसने भी बेतहासा मुझे चूमना शुरू कर दिया. मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स भी मसलने चालू कर दिए. जब मैंने उसकी पेंटी पर हाथ फिराया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा
“नहीं भाई… इस से आगे नहीं ?”
“क्यों क्या हुआ ? ”
“मैं रिश्ते में तुम्हारी बहन लगती हूँ भले ही ममेरी ही हूँ पर आखिर हूँ तो बहन ही ना ? और भाई और बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए ?”
“अरे तुम किस ज़माने की बात कर रही हो ? लंड और चूत का रिश्ता तो कुदरत ने बनाया है. लंड और चूत का सिर्फ एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का. ये तो केवल तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले समाज और धर्म के ठेकेदारों का बनाया हुआ ढकोसला (प्रपंच) है. असल में देखा जाए तो ये सारी कायनात ही इस प्रेम रस में डूबी है जिसे लोग चुदाई कहते हैं.” मैं एक ही सांस में कह गया.
“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उसके के अनाज को खाने का हक नहीं होना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी बेटी को चोदना चाहता हूं तो क्या गलत है ?”
….. इसी कहानी से
मेरा एक ई-मित्र है तरुण. बस ऐसे ही जान पहचान हो गयी थी. वो मेरी कहानियों का बड़ा प्रशंसक था. उसे किसी लड़की को पटाने के टोटके पता करने थे. एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रहा था तो उस से चाट पर बात हुयी थी. फिर तो बातों ये सिलसला चल ही पड़ा. यह कहानी उसके साथ हुयी बातों पर आधारित है. लीजिये उसकी जबानी सुनिए :
दोस्तों मेरा नाम तरुण है. 20 साल का हूँ. कॉलेज में पढता हूँ. पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने नानिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था. मेरे मामा का छोटा सा परिवार है. मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल के हैं और मामी सविता 42 के अलावा उनकी एक बेटी है कनिका 18 साल की. मस्त क़यामत बन गयी है अब तो. अच्छे-अच्छो का पानी निकल जाता है उसे देख कर. वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाडों को देख कर नैन मट्टका करने लगी है.
एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहोर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया. पहले तो सब्जी की छोटी सी दूकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं. खालसा कॉलेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें pco, कंप्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है. साथ में जूस बार और फलों की दूकान भी है. अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है. किसी चीज की कोई कमी नहीं है. आदमी को और क्या चाहिए. रोटी कपडा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरुरत रह जाती है.
मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था. बस एक बार बचपन में मेरे चाचा ने मेरी गांड मारी थी. जब से जवान हुआ था अपने लंड को हाथ में लिए ही घूम रहा था. कभी कभार नेट पर सेक्सी कहानियां पढ़ लेता था और ब्लू फिल्म भी देख लेता था. सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था. मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था. वाह… 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी सविता एक दम जवान पट्ठी ही लगती है. लय बद्ध तरीके से हिलते मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल बूब्स तो देखने वालों पर बिजलियाँ ही गिरा देते हैं. ज्यादातर वो सलवार और कुरता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साडी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं. लेकिन दो दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था.
जून का महिना था. सभी लोग छत पर सोया करते थे. रात के कोई 2 बजे होंगे. मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं. कनिका बगल में लेटी हुयी है. मैं नीचे पेशाब करने चला गया. पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है. मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर हाईई ओह … या … उईई … की हलकी हलकी आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया. खिड़की का पर्दा थोडा सा हटा हुआ था. अन्दर का दृश्य देख कर तो मैं जड़ ही हो गया. मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे. मामा नीचे लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी. मामा का लंड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रख कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी और आह… उन्ह…. या … की आवाजें निकाल रही थी. उसके मोटे मोटे नितम्ब तो ऊपर नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फूटबाल को किक मार रहा हो. उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छाते जैसा था. वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे. कोई 8-10 मिनिट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी. पता नहीं कब से लगे थे. फिर मामी की रफ्तार तेज होती चली गयी और एक जोर की सित्कार करते हुए वो ढीली पड गयी और मामा पर ही पसर गयी. मामा ने उसे कस कर बाहों में जकड लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए.
“सविता डार्लिंग एक बात बोलूं ?”
“क्या ? ”
“तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गयी है बिलकुल मजा नहीं आता ?”
“तुम गांड भी तो मार लेते हो वो तो अभी भी टाइट है ना ?”
“ओह तुम नहीं समझी ?”
“बताओ ना ?”
“वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गांड दोनों ही बड़ी मस्त थी ? और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की ? मज़ा ही आ जाता है चोद कर"
“तो ये कहो ना कि मुझ से जी भर गया है तुम्हारा ?”
“अरे नहीं सविता रानी ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है. उसे चोदने को जी करता है ?”
“पर उसकी तो अभी नयी नयी शादी हुयी है वो भला कैसे तैयार होगी ? ”
“तुम चाहो तो सब हो सकता है ?”
“वो कैसे ?”
“तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदावा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोद कर निहाल हो जाऊं ”
“बात तो तुम ठीक कह रहे हो पर अविनाश नहीं मानेगा ?"
"क्यों ?"
"उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा ?”
“ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो उसे कनिका का लालच दे दो ना ?”
“कनिका … ? अरे नहीं.. वो अभी बच्ची है ?”
“अरे बच्ची कहाँ है पूरी 18 साल की तो हो गयी है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल 16 साल की ही थी जब हमारी शादी हुयी थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी ?”
“हाँ ये तो सच है पर ….”
“पर क्या ?”
“मुझे भी तो जवान लंड चाहिए ना ? तुम तो बस नयी नयी चूतों के पीछे पड़े रहते हो मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें ?”
“अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गांड भी तो मरवाई थी ना ?”
“पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लंड चाहिए बस कह दिया ?”
“ओह… तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती ? तुम उसके मज़े लो और मैं कनिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा ”
“पर वो मेरे सगे भाई की औलाद हैं क्या यह ठीक रहेगा ?”
“क्यों इसमें क्या बुराई है ?”
“पर वो… नहीं ... मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता ?”
“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है ? ”
“ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो. अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे ?”
और फिर मामी ने मामा का मुरझाया लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी. मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था की मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था. मैं अपना 7 इंच का लंड हाथ में लिए बाथ रूम की ओर बढ़ गया. फिर मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली है. कनिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लंड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा. मैं दौड़ कर छत पर चला आया. कनिका बेसुध हुयी सोयी थी. उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन राखी थी और अपनी एक टांग मोडे करवट लिए सोयी थी. स्कर्ट थोडी सी ऊपर उठी थी. उसकी पतली सी पेंटी में फ़सी उसकी चूत का चीरा तो साफ़ नजर आ रहा था. पेंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुयी थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हुयी थी. उसकी गोरी गोरी मोटी जांघें देख कर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लंड डाल ही दूँ. मैं उसके पास बैठ गया. और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा. वाह... क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी. मैंने धीरे से पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फिराई. वो तो पहले से ही गीली थी. आह … मेरी अंगुली भी भीग सी गयी. मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा. वाह क्या मादक महक थी. कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गयी. मैंने अंगुली को अपने मुंह में ले लिया. कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था.
मैं अपने आप को कैसे रोक पाता. मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया. वो थोडा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं. अब मैंने उसके उरोज देखे. वह क्या गोल गोल अमरुद थे. मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगा देखा था. पहले तो इनका आकार नीबू जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरुद तो जरूर बन गए हैं. गोरे गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे. मैंने एक चुम्बन उन पर भी ले लिया. मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कनिका जग गयी और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी.
“क्या कर रहे हो भाई ?” उसने उनिन्दी आँखों से मुझे घूरा.
“वो.. वो… मैं तो प्यार कर रहा था ?”
“पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या ? ”
“प्यार तो रात को ही किया जाता है ?” मैंने हिम्मत करके कह ही दिया
उस के समझ में पता नहीं आया या नही. फिर मैंने कहा “कनिका एक मजेदार खेल देखोगी ?”
“क्या ?” उसने हैरानी से मेरी और देखा
“आओ मेरे साथ ” मैंने उसका बाजू पकडा और सीढीयों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए. अन्दर का दृश्य देख कर तो कनिका की आँखें फटी की फटी ही रह गयी. अगर मैंने जल्दी से उसका मुंह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चींख ही निकल जाती. मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा. वो हैरान हुयी अन्दर देखने लगी.
मामी घोडी बनी फर्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थे. उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे. मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहे थे. उन 8 इंच का लंड मामी की गांड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो. मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे. जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते और उसके साथ ही मामी की सित्कार निकलती “हाईई और जोर से मेरे राजा और जोर से आज सारी कसर निकाल लो और जोर से मारो मेरी गांड बहुत प्यासी है ये हाईई …”
“ले मेरी रानी और जोर से ले … या …. स. वि. ता… आ... आ ……” मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर जोर से चिलाने लगे.
पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे. फिर मामा मामी से जोर से चिपक गए. मामी थोडी सी ऊपर उठी. उनके पपीते जैसे बूब्स नीचे लटके झूल रहे थे. उनकी आँखें बंद थी. और वह सित्कार किये जा रही थी. “जियो मेरे राजा मज़ा आ गया? ”
मैंने धीरे धीरे कनिका के बूब्स मसलने शुरू कर दिए. वो तो अपने मम्मी पापा की इस अनोखी रासलीला देख कर मस्त ही हो गयी थी. मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में भी दाल दिया. उफ़ … छोटे छोटे झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी. नीम गीली. मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला. वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपननी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी.
“उईई माँ ….” उसके मुंह से हौले से निकला. “ओह … भाई ये क्या कर रहे हो ?” उसने मेरी ओर देखा. उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे था. मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया.
हम दोनों ने देखा कि एक पुच्क्क की आवाज के साथ मामा का लंड फिसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गयी. अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था. हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए.
“कनिका ? ”
“हाँ… भाई ?”
कनिका के होंठ और जबान कांप रही थी. उसकी आँखों में एक नयी चमक थी. आज से पहले मैंने कभी उसकी आँखों में ऐसी चमक नहीं देखि थी. मैंने फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा. उसने भी बेतहासा मुझे चूमना शुरू कर दिया. मैंने धीरे धीरे उसके बूब्स भी मसलने चालू कर दिए. जब मैंने उसकी पेंटी पर हाथ फिराया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा
“नहीं भाई… इस से आगे नहीं ?”
“क्यों क्या हुआ ? ”
“मैं रिश्ते में तुम्हारी बहन लगती हूँ भले ही ममेरी ही हूँ पर आखिर हूँ तो बहन ही ना ? और भाई और बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए ?”
“अरे तुम किस ज़माने की बात कर रही हो ? लंड और चूत का रिश्ता तो कुदरत ने बनाया है. लंड और चूत का सिर्फ एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का. ये तो केवल तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले समाज और धर्म के ठेकेदारों का बनाया हुआ ढकोसला (प्रपंच) है. असल में देखा जाए तो ये सारी कायनात ही इस प्रेम रस में डूबी है जिसे लोग चुदाई कहते हैं.” मैं एक ही सांस में कह गया.