View Full Version : ट्रेन का स्टाफ और मैं अकेली
Titpussy
11-10-2009, 11:37 AM
ये बात लगभग १ साल पहले की है. हमारे रिश्तेदारी में किसी की डेथ हो गई थी.मेरे पति अपने काम धंधों में व्यस्त थे इसलिए मुझे ही वहां जाना पड़ा. ट्रेन का सफरथा और मुझे अकेले ही जाना था इसलिए मेरे पति ने प्रथम श्रेणी एसी में मेरे लिएरिज़र्वेशन करवा दिया था.
रात को दस बजे की ट्रेन थी. मुझे मेरे पति स्टेशन तक छोड़ने के लिए आए और मुझेमेरे कूपे में बिठा कर टिकेट चेकर से मिलने चले गए. मेरा कूपा केवल दो सीटों वालाथा. अभी तक दूसरी सीट पर कोई भी पेसेंजेर नहीं आया था. मैंने अपने सामान सेट कियाऔर अपने पति की इंतज़ार करने लगी.
थोडी ही देर में मेरे पति वापस आ गए. उनके साथ ब्लैक कोट में एक आदमी भी आयाथा. वो टिकेट चेकर था. उसके उम्र करीब छब्बीस साल की थी, रंग गोरा और करीब पौने छहफीट लंबा हेंडसम नवयुवक लग रहा था. मेरे पति ने उससे मेरा परिचय करवाया. वो आदमीकेवल देखने में ही हेंडसम नहीं था बल्कि बातचीत करने में भी शरीफ लग रहा था.
उसने मुझसे कहा ” चिंता मत कीजिये मैडम मैं इसी कोच में हूँ कोई भी परेशानी होतो मुझे बता दीजियेगा मैं हाज़िर हो जाऊंगा. आपके साथ वाली बर्थ खाली है अगर कोईपेसेंजर आया भी तो कोई महिला ही आएगी इसलिए आप निश्चिंत हो कर सो सकती हैं.”
उसकी बातों से मुझे और मेरे साथ साथ मेरे पति को भी तसल्ली हो गई. ट्रेन चलनेवाली थे इसलिए मेरे पति ट्रेन से नीचे उतर गए. उसी समय ट्रेन चल दी. मैंने अपने पतिको खिड़की में से बाय किया और फिर अपने सीट पर आराम से बैठ गई.
दोस्तों मुझे आज अपने पति से दूर जाने में बिल्कुल अच्छा नहीं लग रहा था. इसकाकारण ये था कि मेरी माहवारी ख़तम हुए अभी एक ही दिन बीता था और जैसा कि आप सब लोगजानते हैं ऐसे दिनों में चूत की प्यास कितनी बढ़ जाती है. मैं अपने पति से जी भर करचुदवाना चाहती थी लेकिन अचानक मुझे बाहर जाना पड़ रहा था. इसी कारण से मैं मन ही मनदुखी थी.
तभी कूपे में वो हेंडसम टीटी आ गया. उसने कहा “मैडम आप गेट बंद कर लीजिये मैंकुछ देर में आता हूँ तब आपका टिकेट चेक कर लूँगा.”
उसके जाने के बाद मैंने सोचा की चलो कपड़े बदल लेती हूँ. क्योंकि रात भर का सफरथा और मुझे साड़ी में नींद नहीं आती. ये सोच कर मैंने गाउन निकालने के लिए अपनासूटकेस खोला तो सर पकड़ लिया. क्योंकि मैं जल्दबाजी में गाउन के ऊपर वाला नेट का पीसतो ले आई थी लेकिन अन्दर पहनने वाला हिस्सा घर पर ही रह गया था. जो हिस्सा मैं लाईथी वो पूरा जालीदार था जिसमें से सब कुछ दीखता था.
करीब दो मिनट बैठने के बाद मेरी अन्तर्वासना ने मुझे एक नया निर्णय लेने के लिएविवश कर दिया. मैंने सोचा कि क्यों आज इस हेंडसम नौजवान से चुदाई का मज़ा लिया जाए.ये बात दिमाग में आते ही मैंने वो जालीदार कवर निकाल लिया और ज़ल्दी से अपनी साड़ी, ब्लाउज और पेटीकोट निकाल दिए.
अब मेरे बदन पर रेड कलर की पेंटी और ब्रा थी. उसके ऊपर मैंने सफ़ेद रंग काजालीदार गाउन पहन लिया. वैसे उसको पहनने का कोई फायदा नहीं था क्योंकि उसमे से सबकुछ साफ़ नज़र आ रहा था और उससे ज्यादा मज़ेदार बात ये थी कि अन्दर पहनी हुई ब्रा औरपेंटी भी जालीदार थी. इसलिए बाहर से ही मेरे चूचुक तक नज़र आ रहे थे. ख़ुद को आईनेमें देखकर मैं ख़ुद ही गरम हो गई.
सारी तैयारी करने के बाद मैं अपनी सीट पर लेट गई और मैगज़ीन पढ़ते हुए टीटी काइंतजार करने लगी. मुझे इंतज़ार करते करते पाँच मिनट बीत गए तो मैंने सोचा कि क्यूँ नपहले खाना खाकर फ्री हो लूँ ये सोच कर मैंने अपना खाना निकाल लिया जो मैं घर से साथलाई थी.
Titpussy
11-10-2009, 11:38 AM
खाना शुरू करते हुए मैंने सोचा कि खाने के बीच मैं टीटी टिकेट चेक करने आ गयातो बीच में उठ कर टिकेट निकालना पड़ेगा ये सोच कर मैंने अपने पर्स में रखा टिकेटनिकाल लिया.
टिकेट हाथ में आते ही मेरी आँखों के सामने उस टीटी का जवान बदन घूम गया और मेरेअन्दर की सेक्सी औरत ने अपना काम करना शुरू कर दिया. मैंने पहले ही जालीदार कपड़ेपहने थे जिसमे से मेरा पूरा बदन दिखाई पड़ रहा था और फिर मैंने अपना टिकेट भी अपनेबड़े बड़े बूब्स के अन्दर ब्रा के बीच मैं डाल लिया. अब वोह टिकेट दूर से ही मेरेलेफ्ट ब्रेस्ट के निप्पल के पास दिखाई दे रहा था.
पूरी तैयारी के बाद मैं खाना खाने लगी. तभी मेरे कूपे का गेट खुला और टीटीअन्दर आ गया. अन्दर आते ही मुझे पारदर्शी कपडों में देखकर बेचारे को पसीना आ गया.वह बिल्कुल सकपका गया और इधर उधर देखने लगा. मैंने उसका होंसला बढ़ाने के लिए उसकीतरफ़ मुस्कुरा कर देखा और कहा “आईये टीटी साहब बैठिये, खाना लेंगे आप ?” मेरी बातसुनते ही वह बोला “न.न. नहीं मैडम आप लीजिये मैं तो बस आपका टिकेट टिक करने आया था.कोई बात नहीं मैं कुछ देर बाद आ जाऊंगा आप आराम से खा लीजिये.” मैंने उसे सामनेवाली सीट पर बैठने का इशारा करते हुए कहा “नहीं नहीं!! आप बैठो ना, मैं अभी आप कोटिकेट दिखाती हूँ.”
यह कह कर मैंने अपना खाने का डिब्बा नीचे रख दिया और टिकेट ढूँढने का नाटक करनेलगी. ये सब करते हुए मैं बार बार नीचे झुक रही थी ताकि वो मेरी छातियाँ जी भर केदेख ले. दोस्तों अब ये बताने की ज़रूरत तो शायद नहीं है की मेरे बड़े बड़े बूब्सकिसी को भी अपना दीवाना बना सकते हैं. मेरे फिगर से तो आप लोग परिचित हैं ही.
ये सारी हरकतें करते हुए मैं ये इंतज़ार कर रही थी की वो ख़ुद मेरे लेफ्ट बोब्बेमैं रखे हुए टिकेट को देख ले और हुआ भी ऐसा ही उसने मेरे बूब्स की और इशारा करतेहुए कहा ” मैडम लगता है आपने टिकेट अपने ब्लाउज में रख लिया है.”
मैंने अनजान बनते हुए अपने गले की तरफ़ देखा और हँसते हुए कहा ” कहाँ यार…मैंनेब्लाउज पहना ही कहाँ है ये तो ब्रा में रखा हुआ है.” बोलते बोलते मैंने अपने खानालगे हुए हाथों से उसको निकालने की नाकाम कोशिश की और इधर उधर से ऊँगली डाल कर टिकेटपकड़ने की कोशिश करते हुए उसे अपने बूब्स के दर्शन करवाती रही.
जब मेरी ऊँगली से टकरा कर टिकेट और अन्दर घुस गया तो मैंने मुस्कुराते हुए उससेकहा “सॉरी..यार अब तो आप को ही मेहनत करनी होगी.” मेरी बात सुनते ही वो उठकर मेरेपास आ गया और मेरे गाउन में हाथ डालता हुआ बोला “क्यों नहीं मैडम मैं ख़ुद निकाललूँगा!!” ये बात कहते हुए वो बड़ी अदा से मुस्कुरा उठा था. उसने डरते डरते मेरे गाउनके अन्दर हाथ डाला और टिकेट पकड़ कर बाहर खीचने की कोशिश करने लगा. लेकिन टिकेट भीमेरा पूरा साथ दे रहा था. वो टिकेट उसकी ऊँगली से टकरा कर बिल्कुल मेरे निप्पल केऊपर आ गया जिसे अब ब्रा में हाथ डाल कर ही निकाला जा सकता था.
वो बेचारा मेरी ब्रा में हाथ डालने में डर रहा था इसलिए मैंने उसको इशारा कियाऔर बोली “हाँ.हाँ..आप ब्रा के अन्दर हाथ डाल कर निकाल लो न प्लीज़ !!” मेरी बातसुनते ही उसके होंसले बुलंद हो गए और उसने अपना पूरा हाथ मेरी ब्रा के अन्दर घुसादिया. हाथ अन्दर डालते ही उसको टिकेट तो मिल गया लेकिन साथ में वो भी मिल गया जिसकेलिए नौजवान पागल हो जाया करते हैं. मेरी एक चूची उसके हाथ में आते ही वो बदमाश होगया और उसने मेरी चूची को अपने हाथ से सहलाना और मसलना शुरू कर किया.
मैं तो यही चाहती थी इसलिए मैं उसकी तरफ़ देख कर मुस्कुराने लगी. मुझेमुस्कुराता देख कर वो खुश हो गया और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूची दबा डाली. उसके बादउसने टिकेट निकाल कर चेक किया और मेरी तरफ़ आँख मारते हुए बोला “आप खाना खालीजिये..मैं बाकी सवारियों को चेक कर के अभी आता हूँ.” मैंने भी उसको खुला निमंत्रणदेते हुए कहा “ज़ल्दी आना..!!” वो मुस्कुराता हुआ ज़ल्दी से बाहर निकल गया.
मैंने भी ज़ल्दी ज़ल्दी अपना खाना खाया और बड़ी बेसब्री से उसका इंतज़ार करनेलगी. जितनी ज़ल्दी मुझे थी उतनी ही उसे भी थी इसीलिए वो भी पाँच-सात मिनट में हीवापस आ गया. अन्दर आते ही उसने कूप अन्दर से लाक कर लिया और मेरे करीब आ कर मुझेअपनी सुडौल बाँहों में भरता हुआ बोला “आओ..मैडम..आज आपको फर्स्ट एसी का पूरा मज़ादिलवाऊंगा”. मैंने भी उसकी गर्दन में हाथ डालते हुए उसके होठों पर अपने होठ रखदिए.
अगले ही पल वो मेरे नीचे वाला होंठ चूस रहा था और मैं उसके ऊपर वाले होंठ कोचूसने लगी. इस चूमा चाटी से वासना की आग भड़क उठी थी और ना जाने कब मेरी जीभ उसकेमुंह में चली गई और वो मेरी जीभ को बड़े प्यार से चूसने लगा.
उसके हाथ भी अब हरकत करने लगे थे और उसका दायाँ हाथ मेरी बायीं चूची को दबा रहाथा. मुझे मज़ा आने लगा था और वो टी टी भी मस्त हो गया था. करीब दो-तीन मिनट कीकिस्सिंग के बाद वो अलग हुआ और लगभग गिड़गिड़ाते हुए बोला “मैडम, एक प्रॉब्लम है !”
मैंने पूछा “क्यूँ क्या हुआ ?”
“मैडम मेरे साथ मेरा एक साथी और है इसी कोच में, अगर मैं उसको ज्यादा देर दिखाईनहीं दूँगा तो वो मुझे ढूँढता हुआ यहाँ आ जाएगा.” वो बोला। “अगर आप इजाज़त दें तोक्या उसको भी बुला….”. उसके बात सुनते ही मेरी खुशी ये सोचकर दोगुनी हो गई चलो आज
Titpussy
11-10-2009, 11:40 AM
बहुत दिनों बाद वाले हैं. इसलिए मैंने तुंरत जवाब दिया ” हाँ.हाँ.. बुला लो उसको भी लेकिन ध्यान रखना किसी एक साथ दो लंड मिलने और चाहिए. जाओ जल्दीसे को पता नहीं चलना बुला लाओ.”
मेरी बात सुनते ही वो दरवाजा खोल कर बाहर चला गया और तीन-चार मिनट बाद ही वापसआ गया. उसके साथ एक आदमी और था. ये नया बन्दा करीब पैंतीस साल की उम्र का था. रंगकाला लेकिन शकल सूरत से ठीक ठाक था बस थोड़ा मोटा ज़्यादा था. मैंने मन ही मन सोचाचलो दो लंड से तो मेरी प्यास बुझ ही जायेगी भले ही दोनों में ताकत कम ही क्यों नाहो.
उन दोनों ने अन्दर आते ही कूपे को अन्दर से लाक कर लिया और दोनों मेरे पास आ करखड़े हो गए. पुराने वाले टीटी जिसका नाम मुझे अभी तक पता नहीं था उसने अपने साथी सेमुझे मिलवाया “मैडम ये है मेरा दोस्त वी राजू.”
मैंने खड़े होते हुए उससे हाथ मिलाया और पुराने वाले से बोली “ये तो ठीक है परतुमने अभी तक अपना नाम तो बताया ही नहीं.”
मेरी बात पर मुस्कुराते हुए वो बोला “मैडम मुझे दीपक कहते हैं. वैसे आप मुझेदीपू भी बुला सकती हो.” मैंने उन दोनों से कहा “दीपू!! तुम्हारा नाम तो अच्छा हैलेकिन यार तुम लोगों ने ये मैडम मैडम क्या लगा रखा है. मेरा नाम प्रतिभा है. वैसेतुम लोग मुझे किसी भी सेक्सी नाम से बुला सकते हो.”
आपस में परिचय पूरा होने के बाद हम लोग थोड़ा खुल गए थे. लेकिन वो दोनों कुछशरमा रहे थे इसलिए पहल मुझे ही करनी पड़ी और मैंने दीपू के गले में हाथ डाल कर उसकेहोंठ चूसना चालू कर दिए. दीपू भी मेरी कमर को अपने हाथों से पकड़ते हुए मुझे चिपकाकर चूमने लगा. उसका साथी राजू अभी तक खड़ा हुआ था. उस बेचारे की हिम्मत नहीं हो रहीथी कि कुछ कर सके.
मैंने ही उसको अपने करीब बुलाते हुए उसकी पैन्ट के ऊपर से उसके लंड पर हाथफेरना चालू कर दिया. कुछ देर तक हम लोग खड़े खड़े ही चूमा चाटी करने लगे. कभी दीपूमुझे चूमता तो कभी राजू मेरी गर्दन पर अपने दांत गड़ा देता. उन दोनों को उकसाने केलिए मैंने उन दोनों के लंडों की नाप तौल शुरू कर दी थी.
जैसे ही वो दोनों अपने रंग में आए तो उन्होंने मुझे उठा कर सीट पर लेटा दिया औरफिर अपना अपना काम बाँट लिया. दीपू मेरे होठों को चूसते हुए मेरी छातियों से खेलनेलगा और उधर राजू ने मेरी पेंटी निकाल कर चूत का रास्ता ढूँढ लिया.
दीपू मेरी एक एक चूची को बारी बारी से दबा और मसल रहा था साथ में मेरे मुंह मेंअपनी स्वादिष्ट जीभ भी डाल चुका था. नीचे राजू चूत के आस पास और नीचे वाले होठों कोचूसने में मगन था.
मुझे ज़न्नत का मिलना चालू हो गया था लेकिन अभी तक उन दोनों ने अपने कपड़े नहींउतारे थे इसलिए मैं अभी तक अपने असली हीरो के दर्शन नहीं कर पायी थी.
मैंने उन दोनों को रोकते हुए कहा “रुको..मेरे यारों..केवल मेरे ही कपड़े उतारोगेतो कैसे काम चलेगा तुम लोग भी तो अपने अपने हथियार निकालो.”
मेरी बात सुनकर राजू ने अपने कपड़े खोलना चालू कर दिया लेकिन दीपू मेरी चूत कादीवाना हो गया था और चूत छोड़ने के लिए राजी नहीं था. मुझे ज़बरदस्ती उसका मुंहहटाना पड़ा तो वो बोला “मेरी जान पहले तुम भी अपने सारे कपड़े निकालो!”
“क्यूँ नहीं जानू मैं भी निकालती हूँ तभी तो असली मज़ा आएगा..!” मैंने जवाबदिया और अपने बदन से गाउन और ब्रा, पेंटी निकाल कर एक तरफ़ रख दी.
इसी बीच राजू अपने कपड़े खोल चुका था. वोह अपना लण्ड हाथ में लेकर मेरे मुंह कीतरफ़ बड़ा. उसके लंड की शेप बड़ी अजीब थी. उसके लंड का रंग बिल्कुल स्याह काला था औरलम्बाई करीब छः इंच थी लेकिन मोटाई काफी ज्यादा थी करीब तीन इंच मोटा था.
मैं उसके लंड की बनावट देखते ही सोचने लगी कि ये तो मेरी गांड के लिए बिल्कुलफिट रहेगा. ये सोचते हुए मैंने उसका मोटा लंड अपने मुंह में लेने की कोशिश की लेकिनमोटाई इतनी ज्यादा थी कि मेरे मुंह में लंड घुस नहीं पा रहा था. मैंने जीभ बाहरनिकाल कर लंड चाटना शुरू कर दिया. उसके लंड का सुपाड़ा बहुत सुंदर था और लंड सेनिकलने वाला पानी भी बिल्कुल नारियल पानी के जैसा स्वादिष्ट था. मैं स्वाद ले लेकरचुसाई कर रही थी और मेरे मुंह से बहुत सेक्सी आवाजें निकल रहीं थीं. “सुड़प….सूद…सूद..चाट…स..उ..ससू..”
मुझे लंड चूसने में मज़ा आ रहा था इसी बीच में दीपू ने भी अपने कपड़े खोल दिएऔर मेरे पास आ कर मुझे चूसते हुए देखने लगा. मैंने राजू का लंड मुंह से निकाल करदीपू का लंड अपने हाथ में ले लिया. उसका लंड मेरी उम्मीद से ज्यादा लंबा था. करीबसात इंच लंबा और दो इंच मोटा बिल्कुल गोरा बहुत खूबसूरत लौड़ा था दीपू का. मैंनेज़ल्दी से ट्रेन की सीट पर अधलेटते हुए दीपू का लंड अपने मुंह में भर लिया. उधरराजू मेरी टांगों के बीच में बैठकर मेरी चूत चाटने लगा.
उसने मेरी चूत में अपने पूरी जीभ डाल दी. अचानक जीभ अन्दर डालने से मेरीसिसकारी निकल गई. “आह..औ..आ..ह.ह..मेरे..पहलवान…मज़ा आ गया…ऐसे ही चोदो
Titpussy
11-10-2009, 11:41 AM
आ.ह..आ.अ..हह..मुझे..जीभ सी…से.मेरीदाना….रगड़ो..उधर…हाँ…ऐसे..ही…करते..रहो…शा बाश…राजू..वाह….” मैं मस्त होने लगीथी.
मैंने फ़िर एक बार दीपू का पूरा लंड अपने मुंह में भर लिया और अन्दर बाहर करतेहुए अपने मुंह की चुदाई करने लगी. राजू अपनी खुरदरी जीभ से मेरी चिकनी चूत चाट रहाथा और मैंने अपने मुंह में दीपू का लंड ले रखा था. ट्रेन अपनी फुल स्पीड पर चल रहीथी. मिली जुली आवाजें आ रहीं थीं “धडक..धडक..खटाक..ख़त..चड़प..चाप..औयो..औ..थाधक… ….” दीपू के मुंह से भी आवाजें आनेलगीं थीं.
“आह…ये…या.एस…वाह…मेरी…जान…चूस…चूसले..ले…और अन्दर…और आदर ले…भोसड़ी…की..औरजोर..से..ले..और ले..ले…वाह…” अब उसने मेरे मुंह में धक्के मारना चालू कर दिया था.मुझे लगा कि उसे मज़ा आ रहा है तो कुछ देर और चूस लेती हूँ क्यूँकि उधर मुझे भी चूतचटवाने में मज़ा आ रहा था.
लेकिन अचानक दीपू ने मेरे मुंह में धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और मेरा सर पकड़ करअपना पूरा लंड मेरे मुंह में अन्दर बाहर करते हुए ज़ोर से चिल्लाने लगा “आ…..ह…. .ह….आ…ले…कॉम…ओं…नं….मेरी…जान…ले..पीले…पूरा..पी..ले ..माँ…..चोद.चूस..चूस…पी…ले..पी..” अचानक मेरे मुंह में पिचकारी चल गई. मैं समझ गई एक तो बिना चूत कास्वाद चखे ही चल बसा. दीपू मेरे मुंह में अपना पानी डाल चुका था मैंने उसका पूरा रसपी लिया. उसके रस का स्वाद अच्छा था. मैंने उसका लंड चाट चाट कर साफ़ कर दिया. झड़नेके बाद उसने अपने लंड बाहर निकाल लिया और हंसने लगा.
उधर शायद राजू भी चूत चूस चूस कर थक गया था इसलिए वो भी उठ कर खड़ा हो गया औरमेरे मुंह के पास लंड ला कर बोला “प्लीज़ जान मेरा भी तो चूसो..” मैंने हँसते हुएउससे कहा “तुम दोनों अगर मेरे मुंह में ही उलटी करके चले जाओगे तो मैं क्याकरूंगी..” “नहीं मेरी जान, मैं तो तुम्हारी चूत में ही पानी डालूँगा चिंता मत करो.” राजू ने जवाब दिया.
मैंने राजू का लंड मुंह में लेकर चूसना शुरू कर दिया. थोडी देर तक उसका लंडचूसने के बाद उसने अपना लंड मेरे मुंह में से निकाल लिया और मुझसे बोला. “चल..मेरीरानी..अब..कुतिया..बन जा…आज तेरी चूत का बाजा बजाऊंगा.” मैंने फ़ौरन उसका आदेश मानाऔर उलटी हो कर चूत को उसकी तरफ़ कर दिया. उसने भी आसन लगा कर मेरी चूत की छेद परलंड लगाया और एक करारा धक्का दिया.” आ.इ.ई.गई….आ..आ गया…आ. गया..मेरेराजा..पूरा..अन्दर..आ..गया..” मैं चिल्लाने लगी.
हमारी चुदाई चालू हो गई थी और उधर दीपू ने ज़ल्दी ज़ल्दी अपने कपड़े पहन लिएथे. जब मैंने दीपू को कपड़े पहने हुए देखा तो चुदवाते हुए ही बोली “क्या..आ.अ.हुआ..दीपू…तुम..नहीं..आ.आ..हह..डालोगे…क् या..आ..हह…एक…ही..बार…में…ठंडा..पड़.आ.ह.. ह..गया…क्या ?”
दीपू ने मेरी बात का कोई जवाब नहीं दिया और मुझे चोद रहे राजू के कान में आ करकुछ बोला और कूपे से बाहर निकल गया. मुझे चुदाई में बहुत मज़ा आ रहा था इसलिए मैंनेउनकी बातों पर दयां नहीं दिया और ट्रेन के हिलने की गति के साथ ही हिल हिल कर लंडलेने लगी. अब राजू की धक्को की स्पीड बढ़ने लगी थी और ट्रेन के हिलने की वजह सेमुझे भी दोगुना मज़ा आ रहा था.
राजू अब बड़बड़ाने लगा “या..ले…मेरी….जान..ले… पूरा…ले…कुतिया..ले… मेरा..लंड..तेरी…चूत फाड़ डालूँगा…बहन…चोद…ले..” मुझे भी उसकी बातें सुन सुन आकरजोश आने लगा था इसलिए मैं भी बोलने लगी,”चल..और…ज़ोर..से..दे… हाँ..कर…मेरे..रजा..कर..ले… च.चल..अगर..तेरे..लंड..में..दम..है ..तो.. मेरी..गांड…में..डाल..डाल..न..गांडू…गांड..में… डाल…” मेरी बात सुन कर उसने चूत में से अपना लंड निकाललिया और मेरे गाण्ड के छेद पर लगाने लगा. मैंने भी अपनी पोज़िशन ठीक की और गांड काछेद ऊपर की तरफ़ निकाल कर झुक गई और बोली “चल.. आ.जा.ज़ल्दी….. डाल..दे… गांड…में… धीरे….धीरे.डालना…”
राजू ने गांड के छेद पर निशाना लगाया और एक ज़ोरदार धक्का लगा दिया लेकिन उसकालंड मेरी चूत के पानी से चिकना हो रहा था इसलिए फिसल गया और नीचे चला गया. उसनेदुबारा कोशिश की और इस बार पहले से भी ज़ोर से धक्का लगाया. इस बार लंड ने गांड कीपटरी पकड़ ली और मेरी गांड को चीरता हुआ अन्दर चला गया.
मेरी चीख निकल गई “आ….अ.अ.. आ..ईई. ई.ई.इ.ई. मार डाला मादरचोद… ऐसे…डालते..हैं..क्या.. फाड़ डाली..मेरी..गांड.. गांडू… मुझे एक बार थोड़ा मरवानीहै… आ..ई.ई.ई…” लेकिन उसने मुझे पीछे से पकड़ रखा था इसलिए मैं उसका लंड निकाल नहींपायी और उसने धक्के लगाने चालू कर दिए.
वाकई उसका लंड गज़ब का मोटा था मुझे बहुत दर्द हो रहा था लेकिन उसने मेरी एक भीनहीं सुनी और धक्का लगाना चालू रखा. आठ दस धक्कों के बाद मुझे भी दर्द कम हुआ औरमज़ा आने लगा. अब मैंने नीचे से हाथ डाल कर अपनी चूत को मसलना चालू कर दिया था.मेरी इच्छा हो रही थी की मेरी चूत में भी कोई चीज डाल लूँ लेकिन वो दीपू का बच्चातो खेल बीच में ही छोड़ कर चला गया था.
Titpussy
11-10-2009, 11:43 AM
तभी अचानक कूपे का दरवाजा खुला और तीन आदमी एक साथ अन्दर आ गए. ट्रेन किसी बड़ेस्टेशन पर रुकी हुई थी. अचानक उन लोगों के अन्दर आने से मैं चौंक गई और जल्दी सेअलग होकर अपने कपड़े उठा कर अपना बदन छुपाने की कोशिश करने लगी.
उन तीन लोगों के अन्दर आते ही राजू ज़ोर से चहक कर बोला “आओ बॉस !! मैं आपलोगों का ही इंतज़ार कर रहा था. उसने ज़ल्दी से कूपे का दरवाजा अन्दर से लॉक कर लियाऔर मेरी तरफ़ मुड कर बोला ” चिंता मत करो मैडम ये लोग भी अपने दोस्त हैं, अभीतुम्हारी इच्छा चूत में कुछ डलवाने की हो रही थी ना इसलिए इन लोगों को बुलवाया है.चलो शुरू करते हैं.”
मुझे इस तरह से उन लोगों का अन्दर आना अच्छा नहीं लगा. मैंने नाराज होते हुएकहा “चुप रहो तुम !! मुझे क्या तुम लोगों ने रंडी समझ रखा है. जो भी आएगा मैं उससेचुदवा लूंगी. तुम लोग अभी मेरे कूपे से बाहर चले जाओ नहीं तो मैं शोर मचादूंगी.”
मेरे इस तरह नाराज होने से वो लोग डर गए और मुझे मनाते हुए राजू ने कहा ” नहींमैडम ऐसा नहीं है अगर आप नहीं चाहोगी तो कुछ भी नहीं करेंगे.” जो लोग अभी अभी अन्दरआए थे उनमें से एक ने कहा “नहीं मैडम हमें तो दीपक ने भेजा था अगर आप को बुरा लगताहै तो हम लोग बाहर चले जाते हैं. प्लीज़ आप शोर मत मचाना हमारी नौकरी चलीजायेगी.”
इस तरह वो चारों ही मुझे मनाने में लग गए. मैंने मन ही मन सोचा कि अब इन लोगोंने मुझे नंगा तो देख ही लिया है और अभी तक अपना काम भी नहीं हुआ है. सुबह तो ट्रेनसे उतर कर चले ही जाना है फ़िर ये लोग कौन सा कभी दुबारा मिलने वाले हैं. चलो आज आजतो चुदाई का मजा ले ही लिया जाए. फ़िर पता नहीं कब इतने लंडों की बरात मिले.
ये सोच कर मैंने उनको डराते हुए कहा “ठीक है मैं तुम लोगों को केवल आधा घंटे कासमय देती हूँ तुम लोग जल्दी जल्दी अपना काम करो और यहाँ से निकल जाओ और अब कोई औरइस कूपे में नहीं आना चाहिए.”
वो चारों खुश हो गए और “जी मैडम ! जी मैडम” करने लगे. राजू ने उन लोगों से कहाकि चलो अब मैडम का मूड दुबारा से बनाना पड़ेगा तुम लोग आगे आ जाओ”.
वो चारों मेरे करीब आ गए और दो लोगों ने मेरे एक एक बोबे को हाथ से दबाना शुरूकर दिया और एक जना नीचे बैठ कर मेरी चूत में जीभ डालने लगा. राजू ने अपना लंड जो अबकुछ ढीला हो गया था उसे मेरे मुंह में डाल दिया. अभी उसका लंड पूरा टाइट नहीं हुआथा इसलिए मेरे मुंह आराम से आ गया और मैं फिर से उसका लंड चूसने लगी.
थोड़ी ही देर में मेरी आग फिर भड़क गई और मैं फ़िर से उसी मूड में आ गई. मैंनेराजू का लंड तैयार करते हुए उससे कहा,”चलो राजू तुम अपना अधूरा काम पूरा करो !”
मेरी बात सुनते ही राजू हँसते हुए मेरे पीछे आ गया और बोला “क्यों नहीं मैडमअभी लो !!”
अब सब लोगों ने अपनी अपनी पोज़िशन ले ली. मै डौगी स्टाईल में झुक गई एक जन मेरेनीचे था मैंने अपनी गांड नीचे झुकाते हुए उसका लंड अपनी चूत में डाल लिया और पीछेसे राजू ने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया. मेरे मुंह के पास दो लोग अपने लंडनिकाल कर खड़े हो गए. इस पोज़िशन में आने के बाद घमासान चुदाई चालू हो गई.
अपने सभी छेदों में लंड डलवाने के बाद मैं जल्दी ही अपने चरम पर पहुँच गई औरमेरे मुंह से फिर ना जाने क्या क्या निकलने लगा. “आ..आ.ई.. आबी..अबे..हरामी… राजू…ज़ोर…से. स.ऐ.ऐ.ऐ कर फाड़ दे दे.दे. आ..ऐ.ऐ.एई.. मेरी…गा..गा..न्ड. चलोचोदो…मुझे. हराम…के..पिल्लों .. चोदो मुझे…फाड़…दो.. मेरी..चूत भी…बहुतआग..है..इसमे……” मैं ना जाने क्या क्या बोल रही थी और मेरी बातों से वो लोग और भड़करहे थे.
अचानक राजू ने मेरी गांड में से अपना लंड बाहर निकाल लिया और मेरे मुंह में लंडडाल कर खड़े आदमी से बोला “चल अब तू आ जा बे तू डाल अब गांड में मैं तो झड़ने वालाहूँ.” ये बोलता हुए राजू मेरे मुंह के पास लंड लाता हुए बोला “ले मेरी जान मेरा रसपी ले मजा आ जाएगा.” मैं भी यही चाहती थी इसलिए फ़ौरन उसका लंड अपने मुंह में लेलिया. राजू ने दो चार धक्कों में ही अपना रस मेरे मुंह में उलट दिया.
उधर जिसने मेरी चूत में अपना लंड डाल रखा था उसने भी नीचे से धक्के बढ़ा दिए औरजल्दी ही मेरी चूत में उसके वीर्य की बाढ़ आ गई. अब दो लोग बचे थे और मेरी चूत कीआग अभी भी नहीं बुझी थी लेकिन मैं डोगी स्टाइल में खड़े खड़े थक गई थी इसलिए मैं सीटपर पीठ के बल लेट गई और उन बचे हुए दो लोगों से कहा” चलो अब तुम दोनों मेरी चूत मेंबारी बारी से अपना पानी डाल कर चलते बनो.”
पहले एक ने मेरी चूत में लंड डाल कर हिलाना शुरू किया. मुझे पूरा मजा जा आ रहाथा. यूँ तो मैं अब तक चार पाँच बार झड़ चुकी थी लेकिन चूत में लंड डलवाने से होनेवाली तृप्ति अभी तक नहीं हुई थी इसलिए मैं जल्दी ही अपने चरम पर पहुँच गई और नीचेलेटे लेटे ही अपने चूतड़ उछाल उछाल कर लंड अन्दर लेने लगी. “आ..हा. हा.अ.अ.अ. आ.जा..आ.जा.और अन्दर… आ.जा.चोद.. हरामी…ज़ोर..से.. चोद…आ.ह, आ,आ,,जा,” मैं झड़ने ही वालीथी कि उससे पहले वो हरामी अपना पानी छोड़ बैठा.
Titpussy
11-10-2009, 11:44 AM
मेरी चूत उसके गरम गरम पानी से भीग गई और मेरा आनंद दो गुना हो गया था और मैंसोच रही थी की ये पाँच दस धक्के और मार दे तो मैं भी झड़ जाऊं. लेकिन वो ढीला लंडथा और उसने झड़ते ही अपना लंड बाहर निकाल लिया. मुझे उसकी इस हरकत पर बहुत गुस्साआया और मैं बोली “क्या..हुआ…मादरचोद…चोदा..नहीं..जाता..तो लंड..खड़ा..करके क्यूँ आजाते हो..चल अब तू आ जा जल्दी से चोद.”
जो आखरी बचा हुआ था वो मेरी गाली सुनकर भड़क गया और जल्दी से अपना खड़ा लंड लेकर मेरी चूत के पास आया और मेरी चूत पर लंड टिकाते हुए बोला ” ले..बहन..की..लौड़ी..अभी..तेर.चूत का भोसड़ा बनाता हूँ. अगर आज तेरी चूत नहीं फाड़ी तोमेरा नाम भी पंवार नहीं.” उसने जैसे ही अपना लंड मेरी चूत में डाला वैसे ही मैं समझगई कि ये वास्तव में खिलाड़ी है. उसका लंड काफी मोटा और कड़क था. और फ़िर उसने बहुततेज तेज पेलना शुरू कर दिया. मैं तो पहले ही झड़ने के करीब थी इसलिए उसका लंड आरामसे झेल गई और चिल्लाते हुए झड़ने लगी,” हाँ..ये..बात… शाबाश…तू..ही…मर्दर्द..है..रे..फाड़..डाल…तेरे…बाप.. का माल.है..और जोर..से..मैं..आ.. रही..हूँ..मेरे..राजा… ले..मैं..आ.अ.अ. अ.अ.एई ….आ.ई.इ.इ. अ.ऐ.इ.” और मैं झड़ गई. लेकिन उसनेमेरी चूत की चुदाई बंद नहीं की और उल्टा उसके धक्के बढ़ते चले जा रहे थे.
अब मेरी नस नस में दर्द महसूस हो रहा था लेकिन वो ज़ोर ज़ोर से मुझे चोदे जारहा था. करीब आधे घंटे बाद वो अपने चरम पर आ गया और बड़बड़ाने लगा “ले…मेरी जान..अबतैयार हो जा तेरी चूत की प्यास ऐसी बुझेगी ..कि तू भी याद करेगी..”
उसके बात सुनते ही मैंने सोचा कि ऐसे लंड का पानी तो चूत की जगह मुंह में लेनाचाहिए. ये सोच कर मैंने उससे कहा,” आ मेरे राजा तेरा पानी तो मेरे मुंह में डालमुझे पिला दे तेरा पानी..मेरे राजकुमार..”
शायद उसकी भी इच्छा ये ही थी इसलिए उसने भी मेरी बात सुनते ही चूत में से लंडनिकाल लिया और चूत के पानी से सना हुए लंड मेरे मुंह में ठूस दिया. उसने अपने पूरालंड मेरे मुंह में डाल दिया जो मुझे अपने गले तक महसूस होने लगा. मेरा दम घुट रहाथा लेकिन मैंने उसके ताकतवर लंड का आदर करते हुए उसे मुंह से नहीं निकाला और थोडीही देर में उसने अपने लंड से दही जैसा गाढ़ा वीर्य निकाला जिसका स्वाद गज़ब का था.मैं उसके रस का एक एक कतरा चाट चाट कर पी गई और मुझे लगा कि जैसे किसी डिनर पार्टीके बाद मैंने कोई मिठाई खाई हो.
तो दोस्तों ये थी मेरी ट्रेन स्टाफ से चुदाई की दास्तान. अगली बार इस से भीखतरनाक चुदाई के लिए तैयार रहें और अपने अपने चूत और लंड की मालिश करते रहें.
तुम्हारी चूत वाली दोस्त..
erotic
11-10-2009, 07:15 PM
post another story involving ur husband also
keep it up
techhawk
12-10-2009, 09:38 PM
superub yaar
johaintr
13-10-2009, 02:19 AM
fantasic verry nice
Titpussy
14-10-2009, 04:59 PM
मेरा नाम आशा है । मेरा छोटा भाई दसवी मैंपढ़ता है । वह गोरा चिट्टा और करीब मेरे ही बराबर लम्बा भी है । मैं इस समय १९ कीहूँ और वह १५ का । मुझे भैय्या के गुलाबी होंठ बहूत प्यारे लगते हैं । दिल करता हैकि बस चबा लूं । पापा गल्फ़ में है और माँ गवर्नमेंट जोब में । माँ जब जोब की वजह सेकहीं बाहर जाती तो घर मैं बस हम दो भाई बहन ही रह जाते थे । मेरे भाई का नाम अमितहै और वह मुझे दीदी कहता है । एक बार मान कुछ दिनों के लिये बाहर गयी थी । उनकीइलेक्शन ड्यूटी लग गयी थी । माँ को एक हफ़्ते बाद आना था । रातमैं डिनर के बाद कुछदेर टी वी देखा फ़िर अपने-अपने कमरे मैं सोने के लिये चले गये।करीब एक आध घण्टे बादप्यास लगने की वजह से मेरी नींद खुल गयी । अपनी सीधे टेबल पर बोटल देखा तो वह खालीथी । मैं उठ कर किचन मैं पानी पीने गयी तो लौटते समय देखा कि अमित के कमरे की लाइटओन थी और दरवाज़ा भी थोड़ा सा खुला था । मुझे लगा कि शायद वह लाइट ओफ़ करना भूल गया हैमैं ही बन्द कर देती हूँ । मैं चुपके से उसके कमरे में गयी लेकिन अन्दर का नजारादेखकर मैं हैरान हो गयी ।अमित एक हाथ मैं कोई किताब पकड़ कर उसे पढ़ रहा था और दूसराहाथ से अपने तने हुए लण्ड को पकड़ कर मुठ मार रहा था । मैं कभी सोच भी नहीं सकती थीकि इतना मासूम लगने वाला दसवी का यह छोकरा ऐसा भी कर सकता है । मैं दम साधे चुपचापखड़ी उसकी हरकत देखती रही, लेकिन शायद उसे मेरी उपस्थिति का आभास हो गया । उसने मेरीतरफ़ मुँह फेरा और दरवाजे पर मुझे खड़ा देखकर चौंक गया। वह बस मुझे देखता रहा और कुछभी ना बोल पाया । फिर उसने मुँह फ़ेर कर किताब तकिये के नीचे छुपा दी । मुझे भी समझना आया कि क्या करूं । मेरे दिल मैं यह ख्याल आया कि कल से यह लड़का मुझसे शर्मायेगाऔर बात करने से भी कतरायेगा । घर मैं इसके अलावा और कोई है भी नहीं जिससे मेरा मनबहलता । मुझे अपने दिन याद आये। मैं और मेरा एक कज़िन इसी उमर के थे जब से हमने मज़ालेना शुरू किया था तो इसमें कौन सी बड़ी बात थी अगर यह मुठ मार रहा था ।मैंधीरे-धीरे उसके पास गयी और उसके कंधे पर हाथ रखकर उसके पास ही बैठ गयी। वह चुपचापलेटा रहा । मैंने उसके कंधो को दबाते हुई कहा, "अरे यार अगर यही करना था तो कम सेकम दरवाज़ा तो बन्द कर लिया होता" । वह कुछ नहीं बोला, बस मुँह दूसरी तरफ़ किये लेटारहा । मैंने अपने हाथों से उसका मुँह अपनी तरफ़ किया और बोली "अभी से ये मज़ा लेनाशुरू कर दिया। कोई बात नहीं मैं जाती हूँ तो अपना मज़ा पूरा कर ले। लेकिन जरा यहकिताब तो दिखा। मैंने तकिये के नीचे से किताब निकाल ली। यह हिन्दी मैं लिखे मस्तरामकी किताब थी। मेरा कज़िन भी बहूत सी मस्तराम की किताबें लाता था और हम दोनों ही मजेलेने के लिये साथ-साथ पढ़ते थे। चुदाई के समय किताब के डायलोग बोल कर एक दूसरे काजोश बढ़ाते थे।जब मैं किताब उसे देकर बाहर जाने के लिये उठी तो वह पहली बार बोला, "दीदी सारा मज़ा तो आपने खराब कर दिया, अब क्या मज़ा करुंगा।"अरे! अगर तुमने दरवाज़ाबन्द किया होता तो मैं आती ही नहीं।"और अगर आपने देख लिया था तो चुपचाप चली जाती।अगर मैं बहस मैं जीतना चाहती तो आसानी से जीत जाती लेकिन मेरा वह कज़िन करीब ६ मंथ्ससे नहीं आया था इसलिये मैं भी किसी से मज़ा लेना चाहती ही थी। अमित मेरा छोटा भाई थाऔर बहूत ही सेक्सी लगता था इसलिये मैंने सोचा कि अगर घर में ही मज़ा मिल जाये तोबाहर जाने की क्या जरूरत? फिर अमित का लौड़ा अभी कुंवारा था। मैं कुँवारे लण्ड कामज़ा पहली बार लेती, इसलिये मैंने कहा, "चल अगर मैंने तेरा मज़ा खराब किया है तो मैंही तेरा मज़ा वापस कर देती हूँ। फिर मैं पलंग पर बैठ गयी और उसे चित लिटाया और उसकेमुर्झाये लण्ड को अपनी मुट्ठी में लिया। उसने बचने की कोशिश की पर मैंने लण्ड कोपकड़ लिया था। अब मेरे भाई को यकीन हो चुका था कि मैं उसका राज नहीं खोलूंगी, इसलियेउसने अपनी टांगे खोल दी ताकि मैं उसका लण्ड ठीक से पकड़ सकूँ। मैंने उसके लण्ड कोबहूत हिलाया-डूलाया लेकिन वह खड़ा ही नहीं हुआ। वह बड़ी मायूसी के साथ बोला "देखादीदी अब खड़ा ही नहीं हो रहा है।"अरे! क्या बात करते हो? अभी तुमने अपनी बहन का कमालकहाँ देखा है। मैं अभी अपने प्यारे भाई का लण्ड खड़ा कर दूंगी। ऐसा कह मैं भी उसकेबगल में ही लेट गयी। मैं उसका लण्ड सहलाने लगी और उससे किताब पढ़ने को कहा। "दीदीमुझे शर्म आती है। "साले अपना लण्ड बहन के हाथ में देते शर्म नहीं आयी। मैंने तानामारते हुए कहा "ला मैं पढ़ती हूँ। और मैंने उसके हाथ से किताब ले ली । मैंने एकस्टोरी निकाली जिसमे भाई बहन के डायलोग थे। और उससे कहा, "मैं लड़की वाला बोलूँगी औरतुम लड़के वाला। मैंने पहले पढ़ा, "अरे राजा मेरी चूचियों का रस तो बहूत पी लिया अबअपना बनाना शेक भी तो टेस्ट कराओ" ।"अभी लो रानी पर मैं डरता हूँ इसलियेकि मेरालण्ड बहूत बड़ा है, तुम्हारी नाजुक कसी चूत में कैसे जायेगा?और इतना पढ़कर हम दोनोंही मुस्करा दिये क्योंकि यह हालत बिलकुल उलटे थे। मैं उसकी बड़ी बहन थी और मेरी चूतबड़ी थी और उसका लण्ड छोटा था। वह शर्मा गया लेकिन थोड़ी सी पढ़ायी के बाद ही उसकेलण्ड मैं जान भर गयी और वह तन कर करीब ६ इँच का लम्बा और १५ । इँच का मोटा हो गया।मैंने उसके हाथ से किताब लेकर कहा, "अब इस किताब की कोई जरूरत नहीं । देख अब तेराखड़ा हो गया है । तो बस दिल मैं सोच ले कि तू किसी की चोद रहा है और मैं तेरी मु्ठमार देती हूँ" ।मैं अब उसके लण्ड की मु्ठ मार रही थी और वह मज़ा ले रहा था । बीच बीचमैं सिस्कारियां भी भरता था । एकाएक उसने चूतड़ उठा कर लण्ड ऊपर की ओर ठेला और बोला, "बस दीदी" और उसके लण्ड ने गाढ़ा पानी फेंक दिया जो मेरी हथेली पर गिरा । मैं उसकेलण्ड के रस को उसके लण्ड पर लगाती उसी तरह सहलाती रही और कहा, "क्यों भय्या मज़ाआया""सच दीदी बहूत मज़ा आया" । "अच्छा यह बता कि ख़्यालों मैं किसकी ले रहे थे?" "दीदी शर्म आती है । बाद मैं बताऊँगा" । इतना कह उसने तकिये मैं मुँह छुपा लिया।"अच्छा चल अब सो जा नींद अच्छी आयेगी । और आगे से जब ये करना हो तो दरवाज़ा बन्द करलिया करना" । "अब क्या करना दरवाज़ा बन्द करके दीदी तुमने तो सब देख ही लिया है"।"चल शैतान कहीं के" । मैंने उसके गाल पर हलकी सी चपत मारी और उसके होंठों को चूमा। मैं और किस करना चाहती थी पर आगे के लिये छोड़ कर वापस अपने कमरे में आ गयी । अपनीसलवार कमीज उतार कर नाइटी पहनने लगी तो देखा कि मेरी पैंटी बुरी तरह भीगी हुयी है ।अमित के लण्ड का पानी निकालते-निकालते मेरी चूत ने भी पानी छोड़ दिया था । अपना हाथपैंटी मैं डालकर अपनी चूत सहलाने लगी ऊंगलियों का स्पर्श पाकर मेरी चूत फ़िर सेसिसकने लगी और मेरा पूरा हाथ गीला हो गया । चूत की आग बुझाने का कोई रास्ता नहीं थासिवा अपनी उँगली के । मैं बेड पर लेट गयी । अमित के लण्ड के साथ खेलने से मैं बहूतएक्साइटिड थी और अपनी प्यास बुझाने के लिये अपनी बीच वाली उँगली जड़ तक चूत मैं डालदी । तकिये को सीने से कसकर भींचा और जान्घों के बीच दूसरा तकीया दबा आंखे बन्द कीऔर अमित के लण्ड को याद करके उँगली अन्दर बाहर करने लगी । इतनी मस्ती चढ़ी थी किक्या बताये, मन कर रहा था कि अभी जाकर अमित का लण्ड अपनी चूत मैं डलवा ले । उँगलीसे चूत की प्यास और बढ़ गयी इसलिये उँगली निकाल तकिये को चूत के ऊपर दबा औन्धे मुँहलेट कर धक्के लगाने लगी । बहुत देर बाद चूत ने पानी छोड़ा और मैं वैसे ही सो गयी।सुबह उठी तो पूरा बदन अनबुझी प्यास की वजह से सुलग रहा था । लाख रगड़ लो तकिये परलेकिन चूत मैं लण्ड घुसकर जो मज़ा देता है उसका कहना ही क्या । बेड पर लेटे हुए मैंसोचती रही कि अमित के कुँवारे लण्ड को कैसे अपनी चूत का रास्ता दिखाया जाये । फिरउठ कर तैयार हुयी । अमित भी स्कूल जाने को तैयार था । नाश्ते की टेबल हम दोनोंआमने-सामने थे । नजरें मिलते ही रात की याद ताजा हो गयी और हम दोनों मुस्करा दिये ।अमित मुझसे कुछ शर्मा रहा था कि कहीं मैं उसे छेड़ ना दूँ । मुझे लगा कि अगर अभी कुछबोलूँगी तो वह बिदक जायेगा इसलिये चाहते हुई भी ना बोली । चलते समय मैंने कहा, "चलोआज तुम्हे अपने स्कूटर पर स्कूल छोड़ दूँ" । वह फ़ौरन तैयार हो गया और मेरे पीछे बैठगया । वह थोड़ा सकुचाता हुआ मुझसे अलग बैठा था । वह पीछे की स्टेपनी पकड़े था । मैंनेस्पीड से स्कूटर चलाया तो उसका बैलेंस बिगड़ गया और सम्भालने के लिये उसने मेरी कमरपकड़ ली । मैं बोली, "कसकर पकड़ लो शर्मा क्यों रहे हो?""अच्छा दीदी" और उसने मुझेकसकर कमर से पकड़ लिया और मुझसे चिपक सा गया । उसका लण्ड खड़ा हो गया था और वह अपनीजान्घों के बीच मेरे चूतड़ को जकड़े था ।"क्या रात वाली बात याद आ रही है अमित""दीदीरात की तो बात ही मत करो । कहीं ऐसा ना हो कि मैं स्कूल मैं भी शुरू हो जाऊँ" । "अच्छा तो बहूत मज़ा आया रात में""हाँ दीदी इतना मज़ा जिन्दगी मैं कभी नहीं आया । काशकल की रात कभी खत्म ना होती । आपके जाने के/की बाद मेरा फ़िर खड़ा हो गया था पर आपकेहाथ मैं जो बात थी वो कहाँ । ऐसे ही सो गया" ।"तो मुझे बुला लिया होता । अब तो हमतुम दोस्त हैं । एक दूसरा के काम आ सकते हैं" ।"तो फ़िर दीदी आज राख का प्रोग्रामपक्का" ।"चल हट केवल अपने बारे मैं ही सोचता है । ये नहीं पूछता कि मेरी हालत कैसीहै? मुझे तो किसी चीज़ की जरूरत नहीं है? चल मैं आज नहीं आती तेरे पास।"अरे आप तोनाराज हो गयी दीदी । आप जैसा कहेंगी वैसा ही करुंगा । मुझे तो कुछ भी पता नहीं अबआप ही को मुझे सब सिखाना होगा" ।तब तक उसका स्कूल आ गया था । मैंने स्कूटर रोका औरवह उतरने के बाद मुझे देखने लगा लेकिन मैं उस पर नज़र डाले बगैर आगे चल दी । स्कूटरके शीशे मैं देखा कि वह मायूस सा स्कूल में जा रहा है । मैं मन ही मन बहूत खुश हुयीकि चलो अपने दिल की बात का इशारा तो उसे दे ही दिया ।शाम को मैं अपने कालेज सेजल्दी ही वापस आ गयी थी । अमित २ बजे वापस आया तो मुझे घर पर देखकर हैरान रह गया ।मुझे लेटा देखकर बोला, "दीदी आपकी तबीयत तो ठीक है?" "ठीक ही समझो, तुम बताओ कुछहोमवर्क मिला है क्या" "दीदी कल सण्डे है ही । वैसे कल रात का काफी होमवर्क बचा हुआहै" । मैंने हंसी दबाते हुए कहा, "क्यों पूरा तो करवा दिया था । वैसे भी तुमको यहसब नहीं करना चाहिये । सेहत पर असर पढ़ता है । कोई लड़की पटा लो, आजकल की लड़कियाँ भीइस काम मैं काफी इंटेरेस्टेड रहती हैं" । "दीदी आप तो ऐसे कह रही हैं जैसे लड़कियाँमेरे लिये सलवार नीचे और कमीज ऊपर किये तैयार है कि आओ पैंट खोलकर मेरी ले लो" । "नहीं ऐसी बात नहीं है । लड़की पटानी आनी चाहिये" ।फिर मैं उठ कर नाश्ता बनाने लगी ।मन मैं सोच रही थी कि कैसे इस कुँवारे लण्ड को लड़की पटा कर चोदना सिखाऊँ? लंच टेबलपर उससे पूछा, "अच्छा यह बता तेरी किसी लड़की से दोस्ती है?""हाँ दीदी सुधा से"।"कहाँ तक""बस बातें करते हैं और स्कूल मैं साथ ही बैठते हैं" ।मैंने सीधी बात करनेके लिये कहा, "कभी उसकी लेने का मन करता है?""दीदी आप कैसी बात करती हैं" । वहशर्मा गया तो मैं बोली, "इसमे शर्माने की क्या बात है । मुट्ठी तो तो रोज मारता है। ख़्यालों मैं कभी सुधा की ली है या नहीं सच बता" । "लेकिन दीदी ख़्यालों मैं लेनेसे क्या होता है" । "तो इसका मतलब है कि तो उसकी असल में लेना चाहता है" । मैंनेकहा ।"उससे ज्यादा तो और एक है जिसकी मैं लेना चाहता हूँ, जो मुझे बहूत ही अच्छीलगती है" । "जिसकी कल रात ख़्यालों मैं ली थी" उसने सर हिलाकर हाँ कर दिया पर मेरेबार-बार पूछने पर भी उसने नाम नहीं बताया । इतना जरूर कहा कि उसकी चूदाई कर लेने केबाद ही उसका नाम सबसे पहले मुझे बतायेगा । मैंने ज्यादा नहीं पूछा क्योंकि मेरी चूतफ़िर से गीली होने लगी थी । मैं चाहती थी कि इससे पहले कि मेरी चूत लण्ड के लियेबेचैन हो वह खुद मेरी चूत मैं अपना लण्ड डालने के लिये गिड़गिड़ाये। मैं चाहती थी किवह लण्ड हाथ में लेकर मेरी मिन्नत करे कि दीदी बस एक बार चोदने दो । मेरा दिमाग ठीकसे काम नहीं कर रहा था इसलिये बोली, "अच्छा चल कपड़े बदल कर आ मैं भी बदलती हूँ" ।वहअपनी यूनीफोर्म चेंज करने गया और मैंने भी प्लान के मुताबिक अपनी सलवार कमीज उतारदी । फिर ब्रा और पैंटी भी उतार दी क्योंकि पटाने के मदमस्त मौके पर ये दिक्कत करते। अपना देसी पेटीकोट और ढीला ब्लाउज़ ही ऐसे मौके पर सही रहते हैं । जब बिस्तर परलेटो तो पेटीकोट अपने/अपनी आप आसानी से घुटने तक आ जाता है और थोड़ी कोशिश से ही औरऊपर आ जाता है । जहाँ तक ढीलें ब्लाउज़ का सवाल है तो थोड़ा सा झुको तो सारा माल छलककर बाहर आ जाता है । बस यही सोच कर मैंने पेटीकोट और ब्लाउज़ पहना था ।वह सिर्फ़पायजामा और बनियान पहनकर आ गया । उसका गोरा चित्त चिकना बदन मदमस्त करने वाला लगरहा था । एकाएक मुझे एक आइडिया आया । मैं बोली, "मेरी कमर मैं थोड़ा दर्द हो रहा हैजरा बाम लगा दे" । यह बेड पर लेटने का पर्फेक्ट बहाना था और मैं बिस्तर पर पेट केबल लेट गयी । मैंने पेटीकोट थोड़ा ढीला बांधा था इस लिये लेटते ही वह नीचे खिसक गयाऔर मेरी बीच की दरार दिखाये देने लगी । लेटते ही मैंने हाथ भी ऊपर कर लिये जिससेब्लाउज़ भी ऊपर हो गया और उसे मालिश करने के लिये ज्यादा जगह मिल गयी । वह मेरे पासबैठ कर मेरी कमर पर (आयोडेक्स पैन बाम) लगाकर धीरे धीरे मालिश करने लगा । उसकास्पर्श (तच) बड़ा ही सेक्सी था और मेरे पूरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी । थोड़ी देरबाद मैंने करवट लेकर अमित की और मुँह कर लिया और उसकी जान्घ पर हाथ रखकर ठीक सेबैठने को कहा । करवट लेने से मेरी चूचियों ब्लाउज़ के ऊपर से आधी से ज्यादा बाहरनिकाल आयी थी । उसकी जान्घ पर हाथ रखे रखे ही मैंने पहले की बात आगे बढ़ाई, "तुझेपता है कि लड़की कैसे पटाया जाता है?""अरे दीदी अभी तो मैं बच्चा हूँ । यह सब आपबतायेंगी तब मालूम होगा मुझे" । आयोडेक्स लगने के दौरान मेरा ब्लाउज़ ऊपर खींच गयाथा जिसकी वजह से मेरी गोलाइयाँ नीचे से भी झांक रही थी । मैंने देखा कि वह एकटकमेरी चूचियों को घूर रहा है । उसके कहने के अन्दाज से भी मालूम हो गया कि वह इससिलसिले मैं ज्यादा बात करना चाह रहा है।"अरे यार लड़की पटाने के लिये पहले ऊपर ऊपरसे हाथ फेरना पड़ता है, ये मालूम करने के लिये कि वह बूरा तो नहीं मानेगी" । "परकैसे दीदी" । उसने पूछा और अपने पैर ऊपर किये । मैंने थोड़ा खिसक कर उसके लिये जगहबनायी और कहा, "देख जब लड़की से हाथ मिलाओ तो उसको ज्यादा देर तक पकड़ कर रखो, देखोकब तक नहीं छुटाती है । और जब पीछे से उसकी आँख बन्द कर के पूछों कि मैं कौन हूँ तोअपना केला धीरे से उसके पीछे लगा दो । जब कान मैं कुछ बोलो तो अपना गाल उसके गाल पररगड़ दो । वो अगर इन सब बातों का बूरा नहीं मानती तो आगे की सोचों" ।अमित बड़े ध्यानसे सुन रहा था । वह बोला, "दीदी सुधा तो इन सब का कोई बूरा नहीं मानती जबकि मैंनेकभी ये सोच कर नहीं किया था । कभी कभी तो उसकी कमर मैं हाथ डाल देता हूँ पर वह कुछनहीं कहती" । "तब तो यार छोकरी तैयार है और अब तो उसके साथ दूसरा खेल शुरू कर" । "कौन सा दीदी" "बातों वाला । यानी कभी उसके सन्तरो की तारीफ करके देख क्या कहती है। अगर मुस्करा कर बूरा मानती है तो समझ ले कि पटाने मैं ज्यादा देर नहीं लगेगी"।"पर दीदी उसके तो बहुत छोटे-छोटे सन्तरे हैं । तारीफ के काबिल तो आपके है" । वहबोला और शर्मा कर मुँह छुपा लिया । मुझे तो इसी घड़ी का इंतजार था । मैंने उसकाचेहरा पकड़ कर अपनी और घूमते हुए कहा, "मैं तुझे लड़की पटाना सीखा रही हूँ और तो मुझीपर नजरें जमाये है" ।"नहीं दीदी सच मैं आपकी चूचियों बहूत प्यारी है । बहुत दिलकरता है" । और उसने मेरी कमर मैं एक हाथ डाल दिया । "अरे क्या करने को दिल करता हैये तो बता" । मैंने इठला कर पूछा ।"इनको सहलाने का और इनका रस पीने का" । अब उसकेहौसले बुलन्द हो चुके थे और उसे यकीन था कि अब मैं उसकी बात का बूरा नहीं मानूँगी । "तो कल रात बोलता । तेरी मुठ मारते हुए इनको तेरे मुँह मैं लगा देती । मेरा कुछ घिसतो नहीं जाता । चल आज जब तेरी मुठ मारूंगी तो उस वक्त अपनी मुराद पूरी कर लेना" ।इतना कह उसके पायजामा मैं हाथ डालकर उसका लण्ड पकड़ लिया जो पूरी तरह से तन गया था । "अरे ये तो अभी से तैयार है" ।तभी वह आगे को झुका और अपना चेहरा मेरे सीने मैं छुपालिया । मैंने उसको बांहों मैं भरकर अपने करीब लिटा लिया और कस के दबा लिया । ऐसाकरने से मेरी चूत उसके लण्ड पर दबने लगी । उसने भी मेरी गर्दन मैं हाथ डाल मुझे दबालिया । तभी मुझे लगा कि वो ब्लाउज़ के ऊपर से ही मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ को चूस रहा है। मैंने उससे कहा "अरे ये क्या कर रहा है? मेरा ब्लाउज़ खराब हो जायेगा" ।उसने झट सेमेरा ब्लाउज़ ऊपर किया और निप्पल मुँह मैं लेकर चूसना शुरू कर दिया। मैं उसकी हिम्मतकी दाद दिये बगैर नहीं रह सकी । वह मेरे साथ पूरी तरह से आजाद हो गया था । अब यहमेरे ऊपर था कि मैं उसको कितनी आजादी देती हूँ । अगर मैं उसे आगे कुछ करने देती तोइसका मतलब था कि मैं ज्यादा बेकरार हूँ चुदवाने के लिये और अगर उसे मना करती तोउसका मूड़ खराब हो जाता और शायद फ़िर वह मुझसे बात भी ना करे । इस लिये मैंने बीच कारास्ता लिया और बनावटी गुस्से से बोली, "अरे ये क्या तो तो जबरदस्ती करने लगा ।तुझे शर्म नहीं आती" ।"ओह्ह दीदी आपने तो कहा था कि मेरा ब्लाउज़ मत खराब कर । रसपीने को तो मना नहीं किया था इसलिये मैंने ब्लाउज़ को ऊपर उठा दिया" । उसकी नज़र मेरीलेफ़्ट चूचींयाँ पर ही थी जो कि ब्लाउज़ से बाहर थी । वह अपने को और नहीं रोक सका औरफ़िर से मेरी चूचींयाँ को मुँह मैं ले ली और चूसने लगा । मुझे भी मज़ा आ रहा था औरमेरी प्यास बढ़ रही थी । कुछ देर बाद मैंने जबरदस्ती उसका मुँह लेफ़्ट चूचींयाँ सेहटाया और राइट चूचींयाँ की तरफ़ लेते हुए बोली, "अरे साले ये दो होती हैं और दोनोंमैं बराबर का मज़ा होता है" ।उसने राइट मम्मे को भी ब्लाउज़ से बाहर किया और उसकानिप्पल मुँह मैं लेकर चुभलाने लगा और साथ ही एक हाथ से वह मेरी लेफ़्ट चूचींयाँ कोसहलाने लगा । कुछ देर बाद मेरा मन उसके गुलाबी होंठों को चूमने को करने लगा तोमैंने उससे कहा, "कभी किसी को किस किया है?" "नहीं दीदी पर सुना है कि इसमें बहूतमज़ा आता है" । "बिल्कुल ठीक सुना है पर किस ठीक से करना आना चाहिये" ।कैसे"उसनेपूछा और मेरी चूचींयाँ से मुँह हटा लिया । अब मेरी दोनों चूचियों ब्लाउज़ से आजादखुली हवा मैं तनी थी लेकिन मैंने उन्हे छिपाया नहीं बल्कि अपना मुँह उसकेउसकी मुँहके पास लेजा कर अपने होंठ उसके होंठ पर रख दिये फ़िर धीरे से अपने होंठ से उसके होंठखोलकर उन्हे प्यार से चूसने लगी । करीब दो मिनट तक उसके होंठ चूसती रही फ़िर बोली।"ऐसे" ।वह बहूत एक्साइटिड हो गया था । इससे पहले कि मैं उसे बोलूँ कि वह भी एक बारकिस करने की प्रक्टीस कर ले, वह खुद ही बोला, "दीदी मैं भी करूं आपको एक बार" "करले" । मैंने मुस्कराते हुए कहा ।अमित ने मेरी ही स्टाइल मैं मुझे किस किया । मेरेहोंठों को चूसते समय उसका सीना मेरे सीने पर आकर दबाव डाल रहा था जिससे मेरी मस्तीदो गुणी हो गयी थी । उसका किस खत्म करने के बाद मैंने उसे अपने ऊपर से हटाया औरबांहों मैं लेकर फ़िर से उसके होंठ चूसने लगी । इस बार मैं थोड़ा ज्यादा जोश से उसेचूस रही थी । उसने मेरी एक चूचींयाँ पकड़ ली थी और उसे कस कसकर दबा रहा था । मैंनेअपनी कमर आगे करके चूत उसके लण्ड पर दबायी । लण्ड तो एकदम तन कर आयरन रोड हो गया था। चुदवाने का एकदम सही मौका था पर मैं चाहती थी कि वह मुझसे चोदने के लिये भीखमाँगें और मैं उस पर एहसान करके उसे चोदने की इजाजत दूँ ।मैं बोली, "चल अब बहूत होगया, ला अब तेरी मुठ मार दूँ" । "दीदी एक रिक्वेस्ट करूँ" "क्या" मैंने पूछा । "लेकिन रिक्वेस्ट ऐसी होनी चाहिये कि मुझे बुरा ना लगे" ।ऐसा लग रहा था कि वह मेरीबात ही नहीं सुन रहा है बस अपनी कहे जा रहा है । वह बोला, "दीदी मैंने सुना है किअन्दर डालने मैं बहूत मज़ा आता है । डालने वाले को भी और डलवाने वालेको भी । मैं भीएक बार अन्दर डालना चाहता हूँ" ।"नहीं अमित तुम मेरे छोटे भाई हो और मैं तुम्हारीबड़ी बहन" । "दीदी मैं आपकी लूँगा नहीं बस अन्दर डालने दीजिये" । "अरे यार तो फ़िरलेने मैं क्या बचा" । "दीदी बस अन्दर डालकर देखूँगा कि कैसा लगता है, चोदूंगा नहींप्लीज़ दीदी" ।मैंने उस पर एहसान करते हुए कहा, "तुम मेरे भाई हो इसलिये मैंतुम्हारी बात को मना नहीं कर सकती पर मेरी एक सर्त है । तुमको बताना होगा कि अकसरख़्यालों मैं किसकी चोदते हो?" और मैं बेड पर पैर फैला कर चित लेट गयी और उसे घुटनेके बल अपने ऊपर बैठने को कहा । वह बैठा तो उसके पायजामा के ज़र्बन्द को खोलकरपायजामा नीचे कर दिया । उसका लण्ड तन कर खड़ा था । मैंने उसकी बांह पकड़ कर उसे अपनेऊपर कोहनी के बल लिटा लिया जिससे उसका पूरा वज़न उसके घुटने और कोहनी पर आ गया । वहअब और नहीं रूक सकता था । उसने मेरी एक चूचींयाँ को मुँह मैं भर लिया जो की ब्लाउज़से बाहर थी । मैं उसे अभी और छेड़ना चाहती थी । सुन अमित ब्लाउज़ ऊपर होने से चुभ रहाहै । ऐसा कर इसको नीचे करके मेरे सन्तरे धाप दे" । "नहीं दीदी मैं इसे खोल देताहूँ" । और उसने ब्लाउज़ के बटन खोल दिये। अब मेरी दोनों चुचियां पूरी नंगी थी । उसनेलपक कर दोनों को कब्जे मैं कर लिया । अब एक चूचींयाँ उसके मुँह मैं थी और दूसरी कोवह मसल रहा था । वह मेरी चूचियों का मज़ा लेने लगा और मैंने अपना पेटीकोट ऊपर करकेउसके लण्ड को हाथ से पकड़ कर अपनी गीली चूत पर रगड़ना शुरू कर दिया । कुछ देर बादलण्ड को चूत के मुँह पर रखकर बोली, "ले अब तेरे चाकू को अपने ख़रबूज़े पर रख दिया हैपर अन्दर आने से पहले उसका नाम बता जिसकी तो बहूत दिन से चोदना चाहता है और जिसेयाद करके मुठ मारता है" । वह मेरी चूचियों को पकड़ कर मेरे ऊपर झुक गया और अपने होंठमेरे होंठ पर रख दिये । मैं भी अपना मुँह खोलकर उसके होंठ चूसने लगी । कुछ देर बादमैंने कहा, "हाँ तो मेरे प्यारे भाई अब बता तेरे सपनों की रानी कौन है" ।"दीदी आपबुरा मत मानियेगा पर मैंने आज तक जितनी भी मुठ मारी है सिर्फ़ आपको ख़्यालों मैंरखकर" ।"हाय भय्या तो कितना बेशर्म है । अपनी बड़ी बहन के बारे मैं ऐसा सोचता था" । "ओह्ह दीदी मैं क्या करूं आप बहूत खूबसूरत और सेक्सी है । मैं तो कब से आपकीचूचियों का रस पीना चाहता था और आपकी चूत मैं लण्ड डालना चाहता था । आज दिल की आरजूपूरी हुयी" । और फ़िर उसने शर्मा कर आंखे बन्द करके धीरे से अपना लण्ड मेरी चूत मैंडाला और वादे के मुताबिक चुपचाप लेट गया ।"अरे तो मुझे इतना चाहता है । मैंने तोकभी सोचा भी नहीं था कि घर मैं ही एक लण्ड मेरे लिये तड़प रहा है । पहले बोला होतातो पहले ही तुझे मौका दे देती" । और मैंने धीरे-धीरे उसकी पीठ सहलानी शुरू कर दी ।बीच-बीच मैं उसकी गाँड भी दबा देती ।"दीदी मेरी किस्मत देखिये कितनी झान्टू है ।जिस चूत के लिये तड़प रहा था उसी चूत में लण्ड पड़ा है पर चोद नहीं सकता । पर फ़िर भीलग रहा है की स्वर्ग मैं हूँ" । वह खुल कर लण्ड चूत बोल रहा था पर मैंने बूरा नहींमाना । "अच्छा दीदी अब वादे के मुताबिक बाहर निकालता हूँ" । और वह लण्ड बाहरनिकालने को तैयार हुआ ।मैं तो सोच रही थी कि वह अब चूत मैं लण्ड का धक्का लगानाशुरू करेगा लेकिन यह तो ठीक उलटा कर रहा था । मुझे उस पर बड़ी दया आयी । साथ हीअच्छा भी लगा कि वादे का पक्का है । अब मेरा फ़र्ज़ बनता था कि मैं उसकी वफादारी काइनाम अपनी चूत चुदवाकर दूँ । इस लिये उससे बोली, "अरे यार तूने मेरी चूत की अपनेख़्यालों में इतनी पूजा की है । और तुमने अपना वादा भी निभाया इसलिये मैं अपनेप्यारे भाई का दिल नहीं तोड़ूँगी । चल अगर तो अपनी बहन को चोद्कर बहनचोद बनना हीचाहता है तो चोद ले अपनी जवान बड़ी बहन की चूत" ।मैंने जान कर इतने गन्दे वर्ड्स उसेकहे थे पर वह बूरा ना मान कर खुश होता हुआ बोला, "सच दीदी" । और फ़ौरन मेरी चूत मैंअपना लण्ड धका धक पेलने लगा कि कहीं मैं अपना इरादा ना बदल दूँ ।"तू बहुत किस्मतवाला है अमित" । मैं उसके कुँवारे लण्ड की चूदाई का मज़ा लेते हुए बोली । क्योंदीदी" "अरे यार तू अपनी जिन्दगी की पहली चूदाई अपनी ही बहन की कर रहा है । और उसीबहन की जिसकी तू जाने कबसे चोदना चाहता था" ।"हाँ दीदी मुझे तो अब भी यकीन नहीं आरहा है, लगता है सपने में चोद रहा हूँ जैसे रोज आपको चोदता था" । फिर वह मेरी एकचूचींयाँ को मुँह मैं दबा कर चूसने लगा । उसके धक्कों की रफ्तार अभी भी कम नहींहुयी थी । मैं भी काफी दिनों के बाद चुद रही थी इसलिये मैं भी चूदाई का पूरा मज़ा लेरही थी ।वह एक पल रुका फ़िर लण्ड को गहराई तक ठीक से पेलकर ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा ।वह अब झड़ने वाला था । मैं भी सातवें आसमान पर पहूँच गयी थी और नीचे से कमर उठा-उठाकर उसके धक्कों का जवाब दे रही थी । उसने मेरी चूचींयाँ छोड़ कर मेरे होंठों को मुँहमैं ले लिया जो कि मुझे हमेशा अच्छा लगता था । मुझे चूमते हुई कस कस कर दो चारधक्के दिये और और "हाय आशा मेरी जान" कहते हुए झड़कर मेरे ऊपर चिपक गया । मैंने भीनीचे से दो चार धक्के दिये और "हाय मेरे राजा कहते हुए झड़ गयी ।चुदाई के जोश ने हमदोनों को निढाल कर दिया था । हम दोनों कुछ देर तक यूँ ही एक दूसरे से चिपके रहे ।कुछ देर बाद मैंने उससे पूछा, "क्यों मज़ा आया मेरे बहनचोद भाई को अपनी बहन की चूतचोदने में" उसका लण्ड अभी भी मेरी चूत में था । उसने मुझे कसकर अपनी बांहों में जकड़कर अपने लण्ड को मेरी चूत पर कसकर दबाया और बोला, "बहुत मजा आया दीदी । यकीन नहींहोता कि मैंने अपनी बहन को चोदा है और बहनचोद बन गया हूँ" । "तो क्या मैंने तेरीमुठ मारी है" "नहीं दीदी यह बात नहीं है" । "तो क्या तुझे अब अफसोस लग रहा है अपनीबहन को चोद्कर बहनचोद बनने का" ।"नहीं दीदी ये बात भी नहीं है । मुझे तो बड़ा ही मज़ाआया बहनचोद बनने मैं । मन तो कर रह कि बस अब सिर्फ़ अपनी दीदी की जवानी का रा हीपीता रहूं । हाय दीदी बल्कि मैं तो सोच रहा हूँ कि भगवान ने मुझे सिर्फ़ एक बहनक्यों दी । अगर एक दो और होती तो सबको चोदता । दीदी मैं तो यह सोच रहा हूँ कि यहकैसे चूदाई हुयी कि पूरी तरह से चोद लिया लेकिन चूत देखी भी नहीं" ।"कोई बात नहींमज़ा तो पूरा लिया ना?" "हाँ दीदी मज़ा तो खूब आया" । "तो घबराता क्यों है? अब तोतूने अपनी बहन चोद ही ली है । अब सब कुछ तुझे दिखाऊंगी । जब तक माँ नहीं आती मैं घरपर नंगी ही रहूँगी और तुझे अपनी चूत भी चटवाऊँगी और तेरा लण्ड भी चूसूँगी । बहुतमज़ा आता है" । "सच दीदी" "हाँ । अच्छा एक बात है तो इस बात का अफसोस ना कर कि तेरेसिर्फ़ एक ही बहन है, मैं तेरे लिये और चूत का जुगाड़ कर दूंगी" ।"नहीं दीदी अपनी बहनको चोदने मैं मज़ा ही अनोखा है । बाहर क्या मज़ा आयेगा" "अच्छा चल एक काम कर तो माँको चोद ले और मादरचोद भी बन जा" । "ओह दीदी ये कैसे होगा""घबरा मत पूरा इन्तज़ाम मैंकर दूंगी । माँ अभी ३८ साल की है, तुझे मादरचोद बनने मैं भी बड़ा मज़ा आयेगा" ।"हायदीदी आप कितनी अच्छी हैं । दीदी एक बार अभी और चोदने दो इस बार पूरी नंगी करकेचोदूंगा" । "जी नहीं आप मुझे अब माफ़ करिये" । "दीदी प्लीज़ सिर्फ़ एक बार" । और लण्डको चूत पर दबा दिया ।"सिर्फ एक बार" । मैंने ज़ोर देकर पूछा । "सिर्फ एक बार दीदीपक्का वादा" ।"सिर्फ एक बार करना है तो बिलकुल नहीं" । "क्यों दीदी" अब तक उसकालण्ड मेरी चूत मैं अपना पूरा रस निचोड़ कर बाहर आ गया था । मैंने उसे झटके देते हुएकहा, "अगर एक बार बोलूँगी तब तुम अभी ही मुझे एक बार और चोद लोगे" "हाँ दीदी" ।"ठीकहै बाकी दिन क्या होगा । बस मेरी देखकर मुठ मारा करेगा क्या । और मैं क्या बाहर सेकोई लाऊंगी अपने लिये । अगर सिर्फ़ एक बार मेरी लेनी है तो बिलकुल नहीं" ।उसे कुछदेर बाद जब मेरी बात समझ मैं आयी तो उसके लण्ड में थोड़ी जान आयी और उसे मेरी चूतपड़ा रगड़ते हुए बोला, "ओह दीदी यू र ग्रेट" ।
Comments yaar......
rajababu007
20-10-2009, 01:50 AM
Gr8 story.....
sharmameshi
05-11-2009, 05:42 PM
Oh!Great! excellent coaching!
bvasu
06-11-2009, 06:39 PM
What a fancy
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